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| سطر ۴۳: |
سطر ۴۳: |
| | معرضين: اعراض: روگردانى و بى اعتنايى. معرض: روگردان. معرضين: روگردانان.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | | معرضين: اعراض: روگردانى و بى اعتنايى. معرض: روگردان. معرضين: روگردانان.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> |
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| − | ==تفسیر آیه== | + | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="6" ayeh="4" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ ما تَأْتِيهِمْ مِنْ آيَةٍ مِنْ آياتِ رَبِّهِمْ إِلَّا كانُوا عَنْها مُعْرِضِينَ «4»
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| − | و هيچ نشانه و آيهاى از نشانههاى پروردگارشان براى آنها نمىآمد، جز آنكه (به جاى تصديق و ايمان) از آن اعراض مىكردند.
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| − | فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جاءَهُمْ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنْباءُ ما كانُوا بِهِ يَسْتَهْزِؤُنَ «5»
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| − | پس همين كهحقّ براى آنان آمد، آن را تكذيب كردند، پس به زودى خبرهاى مهم (و تلخى دربارهى كيفر) آنچه را به مسخره مىگرفتند، به سراغشان خواهد آمد.
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| − | ===نکته ها===
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| − | شايد مراد از «خبرهاى بزرگ» در آيه، خبر فتح مكّه يا شكست مشركان در جنگ بدر و امثال آن باشد. «1»
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- براى لجبازان، نوع دليل و آيه تفاوتى ندارد، آنها همه را بدون تفكر رد مىكنند. «آيَةٍ مِنْ آياتِ رَبِّهِمْ»
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| − | 2- هم بايد به مؤمنان دلگرمى داد كه راهشان حقّ است، «بِالْحَقِّ» و هم كافران را تهديد كرد كه خبرهاى تلخ برايتان خواهد آمد. «فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ»
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| − | «1». تفسير مراغى.
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| − | جلد 2 - صفحه 413
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| − | 3- استهزا، شيوهى هميشگى كفّار است. «كانُوا بِهِ يَسْتَهْزِؤُنَ»
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| − | 4- سقوط انسان سه مرحله دارد: اعراض، تكذيب و استهزا. در اين دو آيه به هر سه مورد اشاره شده است. «مُعْرِضِينَ- كَذَّبُوا يَسْتَهْزِؤُنَ»
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| − | }}
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ ما تَأْتِيهِمْ مِنْ آيَةٍ مِنْ آياتِ رَبِّهِمْ إِلاَّ كانُوا عَنْها مُعْرِضِينَ «4»
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| − | بعد از حال كفار مذكوره، در صدر آيه اخبار فرمايد:
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| − | وَ ما تَأْتِيهِمْ مِنْ آيَةٍ: و نمىآيد به آن كافران آيتى مِنْ آياتِ رَبِّهِمْ: از آيات و حجج پروردگارشان كه ادله بيّنه است بر توحيد و يا معجزات هاديه بر صدق رسول مجيد مانند شق القمر و حركت درخت و تسبيح سنگريزه در دست آن سرور يا نمىآيد آيتى از آيات قرآن بر ايشان إِلَّا كانُوا عَنْها مُعْرِضِينَ: مگر كه بودند از آيات اعراض كننده و تارك نظر و عدم التفات به آن.
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ ما تَأْتِيهِمْ مِنْ آيَةٍ مِنْ آياتِ رَبِّهِمْ إِلاَّ كانُوا عَنْها مُعْرِضِينَ «4»
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| − | ترجمه
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| − | و نمىآيد ايشانرا آيتى از آيتهاى پروردگارشان مگر آنكه باشند از آن رو گردانندگان.
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| − | تفسير
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| − | اعراض از آيات بترك نظر و تدبّر در آن و عدم التفات بشأن آن است ..
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ ما تَأتِيهِم مِن آيَةٍ مِن آياتِ رَبِّهِم إِلاّ كانُوا عَنها مُعرِضِينَ «4»
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| − | و نميآيد آنها را از هر نوع آيتي از آيات پروردگار آنها مگر آنكه از آنها اعراض و رو برگردانند.
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| − | آيه عبارت از دليل واضح و برهان قاطع و حجة باهره و نشانه و علامت است که دلالت دارد بر وجود صانع و وجوب وجود و توحيد و صفات كماليه باري تعالي از علم، قدرت، حيات، حكمت، كبريايي، عظمت و سائر كمالات و بر صدق انبياء و نبوت آنها و بر عدل باري تعالي و ساير معتقدات حقه، و اينکه آيات انواع مختلفه است: يك نوع نفس خلقت ممكنات از سري تا ثريّا که هر ذرّه دليل بر وجود صانع او است. و يك نوع ريزهكاريها که در هر يك بكار برده که دليل بر علم و قدرت و حكمت باري است. و يك نوع تغييرات و تبدلات که در عالم كون و فساد مشاهده ميشود از شب و روز و ضعف و قوّة و برودة و حرارت و طلوع و غروب و رعد و برق و ابر و باران و عزّت و ذلّت و غني و فقر و صحت و مرض و حيات و موت و غير اينها که در مخلوقات مشاهده ميشود که دلالت دارد بر وجود مدبّر
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| − | مدبّربكه بگل نكهت و بگل جان داد || بهر که هر چه سزاوار حكمتست آن داد
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| − | جلد 7 - صفحه 11
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| − | و يك نوع معجزات که بدست انبياء و اوصياء صادر ميشود که دلالت بر صدق دعوي آنها دارد، و يك نوع عنايات و تفضلات و قضاء حوائج و دفع بليات و حفظ از آفات و استجابت دعوات است.
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| − | چنانش سر لطف با هر تن است || که هر بنده گويد خداي من است
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| − | وَ ما تَأتِيهِم مِن آيَةٍ مفسرين گفتند که من زائده است و مكرر گفته شده که كلمه زائده در قرآن نيست و من تبعيضيه است و اشاره بانواع است يعني من ايّ نوع من الانواع چنانچه مِن آياتِ رَبِّهِم اشاره بافراد هر نوع است و آن هم تبعيضيه است.
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| − | إِلّا كانُوا عَنها ضمير راجع بآية است يعني از آن آية و دليل و برهان و حجة معرضين اعراض ميكنند و انكار مينمايند، بعضي از آنها را مستند بطبيعت ميكنند و بعضي را باقدام و عمليات خود ميدانند و بعضي را باسباب نسبت ميدهند و بعضي را شانس و خوشبختي ميدانند و بعضي را بسحر و جادو و شعبده رمي ميكنند و بالجمله:
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| − | گليم بخت كسي را که بافتند سياه || بآب زمزم و كوثر سفيد نتوان كرد
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| − | فَما يَزِيدُهُم إِلّا طُغياناً كَبِيراً اسراء آيه 62 وَ ما يَزِيدُهُم إِلّا نُفُوراً سوره اسراء آيه 43.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 4)
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| − | گفتیم در سوره انعام روی سخن بیشتر با مشرکان است، و قرآن به انواع وسائل برای بیداری و آگاهی آنها متوسل می شود، در این آیه به روح لجاجت و بی اعتنایی و تکبر مشرکان در برابر حق و نشانه های خدا اشاره کرده، می گوید: «آنها چنان لجوج و بی اعتنا هستند که هر نشانهای از نشانه های پروردگار را می بینند، فورا از آن روی بر میگردانند» (وَ ما تَأتِیهِم مِن آیةٍ مِن آیاتِ رَبِّهِم إِلّا کانُوا عَنها مُعرِضِینَ).
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| − | این روحیه منحصر به دوران جاهلیت و مشرکان عرب نبوده، الان هم بسیاری را می بینیم که در یک عمر شصت ساله حتی، زحمت یک ساعت تحقیق و جستجو در باره خدا و مذهب به خود نمی دهند، سهل است اگر کتاب و نوشتهای در این زمینه به دست آنها بیفتد به آن نگاه نمی کنند، و اگر کسی با آنها در این باره سخن گوید، گوش فرا نمی دهند، اینها جاهلان لجوج و بی خبری هستند که ممکن است گاهی در کسوت دانشمند ظاهر شوند؟
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=6 |آیه=4}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |