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| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="5" ayeh="76" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | قُلْ أَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ ما لا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَ لا نَفْعاً وَ اللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ «76»
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| − | (اى پيامبر! به مردم) بگو: آيا غير از خدا، چيزى را كه براى شما هيچ سود و زيانى ندارد مىپرستيد؟ در حالى كه خداوند همان شنواى داناست.
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| − | ===نکته ها===
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| − | در اين آيه، گروهى از مسيحيان به خاطر شرك و غلوّ دربارهى عيسى عليه السلام مورد توبيخ خدا قرار گرفتهاند. قُلْ أَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ ...
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- در بطلان راه شرك، به عقل و وجدان خود مراجعه كنيد. «أَ تَعْبُدُونَ»
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| − | 2- محور و ريشه پرستش، جلب منفعت و يا دفع ضرر است و غير خداوند نمىتواند ضررى را دفع و منفعتى را جلب كند. لا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَ لا نَفْعاً ...
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| − | 3- تنها خداوند، شنواى درخواستها و آگاه به سود و زيان انسانهاست، نه معبودهاى ديگر. «وَ اللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | قُلْ أَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ ما لا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَ لا نَفْعاً وَ اللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ (76)
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| − | بعد از آن در احتجاج افزوده مىفرمايد:
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| − | قُلْ أَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ: بگو اى پيغمبر نصارى را بر سبيل انكار، آيا عبادت مىكنيد غير خدا را. ما لا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَ لا نَفْعاً: آن را كه بذاته مالك نيست براى شما نه ضرر و نه نفع را، يعنى عيسى عليه السّلام تصرف آن نداشت كه به خودى خود ضررى و نفعى از بلا و عنا به شما رساند، بلكه آن به تمكين حق تعالى و اعطاى قدرت است به او، و هر گاه او بنفسه مالك چيزى نباشد كه خدا به بنده مىرساند از محنت و نعمت و صحت و نقمت، پس چگونه رتبه الوهيت داشته باشد. وَ اللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ: و ذات اقدس الهى، معبود به حق اوست، شنوا به اقوال باطله شما، دانا به عقايد فاسده شما. پس شما را بر وفق آن جزا و سزا خواهد داد.
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| − | برهان- شخص عاقل به اندك تفكر و تعقل در موجودات عالم آفاق و انفس، هر آينه دريابد كه هيچيك قابل پرستش و ستايش نباشند جز خالق و صانع آنها، و الوهيت، خاصه ذات ذو الجلال اوست. چنانچه حضرت صادق عليه السّلام به مفضّل فرمايد:
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| − | اول عبرتها و دليلها بر صانع عالم- تعالى شأنه- تهيه و نظام اين عالم و تأليف اجزاى آن است بر وجه كمال؛ زيرا كه اگر تأمل كنى در اين عالم به فكر، و تميز كنى به عقل خود، خواهى يافت اين عالم را مانند خانه بنا شده و هر چه بندگان را به آن احتياج است در آن مهيا شده، پس آسمان رفيع مانند
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج3، ص: 152
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| − | سقف اين خانه، و زمين وسيع ماند بساطى است گسترده، و ستارگان كه به حسن انتظام چيدهاند مانند چراغها بر اين طاق مقرنس «1» آويخته، و جواهر كه در جبال مخزون است مانند ذخيرهها براى انسان مهيا ساخته، و هر شيئى براى مصلحتى مقرّر، و انسان به منزله كسى است كه اين خانه را به او بخشيدهاند و آنچه را در آنست به او وا گذاشتهاند و انواع نباتات به جهت منافع او مهيا، و اقسام حيوانات بسبب نفع او آفريده. پس انتظام اين امور و اتّساق احوال، دليل واضح است بر مخلوقيت عالم به تقدير حكمت و مصلحت، و خالق همه يكى است كه اين اصناف مخلوقات را از الفت بهم داده، و بعضى را به بعضى مربوط ساخته. جلّ جلاله. «2»
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | قُلْ أَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ ما لا يَمْلِكُ لَكُمْ ضَرًّا وَ لا نَفْعاً وَ اللَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ (76)
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| − | ترجمه
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| − | بگو آيا ميپرستيد از غير خدا چيزيرا كه مالك نميباشد از براى شما زيانى و نه سودى را و خدا او است شنواى دانا.
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| − | بيان
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| − | گفتهاند اشاره است بآنكه حضرت عيسى (ع) از پيش خود كارى نميكرد هر چه مىكرد از احياء اموات و شفاء امراض بحول و قوه الهى بود حتى شفاعت و نفرين انبياء هم بدون اذن و اراده الهى مؤثر نيست ..
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | قُل أَ تَعبُدُونَ مِن دُونِ اللّهِ ما لا يَملِكُ لَكُم ضَرًّا وَ لا نَفعاً وَ اللّهُ هُوَ السَّمِيعُ العَلِيمُ (76)
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| − | بفرما باين نصاري آيا عبادت ميكنيد از غير خدا چيزي را که مالك نيست براي شما ضرر و نفعي را و خداوند ميشنود كلام شما را و ميداند افعال و كردار شما را قُل أَ تَعبُدُونَ مِن دُونِ اللّهِ اطاعت و عبادت كسي را بايد كرد که تمام احتياجات بنده را بتواند بنحو اتم اكمل موافق حكمت و مصلحت رفع كند و آن فقط قادر متعال حكيم علي الاطلاق، عالم بجميع خصوصيات باطنيه و ظاهريه، ذات مقدس پروردگار است نه غير آن ما لا يَملِكُ چيزي و كسي که مالك هيچگونه امري نيست نه از خود و نه غير خود لَكُم ضَرًّا وَ لا نَفعاً بلكه خود هم سر تا پا محتاج است وَ اللّهُ هُوَ السَّمِيعُ العَلِيمُ
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 76)
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| − | در این آیه برای تکمیل استدلال گذشته می گوید: شما می دانید که مسیح خود سر تا پا نیازهای بشری داشت و مالک سود و زیان خویش هم نبود تا چه رسد به این که مالک سود و زیان شما باشد «بگو: آیا چیزی را پرستش می کنید که نه مالک زیان شماست، و نه مالک سود شما» (قُل أَ تَعبُدُونَ مِن دُونِ اللّهِ ما لا یملِکُ لَکم ضَرًّا وَ لا نَفعاً).
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| − | و به همین دلیل بارها در دست دشمنان گرفتار شد و یا دوستانش گرفتار شدند و اگر لطف خدا شامل حال او نبود هیچ گامی نمی توانست بردارد.
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| − | و در پایان به آنها اخطار می کند که گمان نکنید خداوند سخنان ناروای شما را نمی شنود و یا از درون شما آگاه نیست «خداوند هم شنواست و هم دانا» (وَ اللّهُ هُوَ السَّمِیعُ العَلِیمُ).
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=5 |آیه=76}}===
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| − | </tabber>
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