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| سطر ۴۳: |
سطر ۴۳: |
| | بديع: بدع: ايجاد ابتكارى و بى سابقه. بديع: پديد آورنده بدون سابقه.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | | بديع: بدع: ايجاد ابتكارى و بى سابقه. بديع: پديد آورنده بدون سابقه.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> |
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| − | ==تفسیر آیه== | + | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="6" ayeh="101" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الْأَرْضِ أَنَّى يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَ لَمْ تَكُنْ لَهُ صاحِبَةٌ وَ خَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَ هُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ «101»
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| − | (او) پديد آورندهى آسمانها و زمين است، چگونه براى او فرزندى باشد، در حالى كه براى او همسرى نبوده است و او هر چيز را آفريده و به هر چيز داناست.
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| − | ذلِكُمُ اللَّهُ رَبُّكُمْ لا إِلهَ إِلَّا هُوَ خالِقُ كُلِّ شَيْءٍ فَاعْبُدُوهُ وَ هُوَ عَلى كُلِّ شَيْءٍ وَكِيلٌ «102»
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| − | آن است خداوند، پروردگار شما، معبودى جز او نيست، آفريدگار هر چيز است، پس او را بپرستيد و او نگهبان و مدبّر همه چيز است.
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| − | ===نکته ها===
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| − | كلمهى «بَدِيعُ» به معناى آفريدن ابتكارى است (نه تقليدى).
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| − | آنكه آسمانها و زمين را بدون تقليد و نقشهى قبلى آفريد، چه نيازى به فرزند و همسر دارد؟ او با يك اراده، آنچه را بخواهد خلق مىكند.
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- آفريدگار جهان، توانمند است ونيازى به همسر وفرزند ندارد. «بَدِيعُ السَّماواتِ»
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| − | 2- خدايى را كه قرآن معرفى مىكند، با خدايى كه ديگران عقيده دارند مقايسه كنيد. «ذلِكُمُ اللَّهُ»
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| − | 3- در عقيدهى اسلامى، آفريدگار و پروردگار يكى است. رَبُّكُمْ ... خالِقُ كُلِّ شَيْءٍ (امّا مشركان، خالق را اللَّه مىدانند، ولى عقيده به چندين ربّ دارند).
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| − | 4- خالقيّت مطلقهى خدا، دليل توحيد است. «لا إِلهَ إِلَّا هُوَ خالِقُ كُلِّ شَيْءٍ»
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| − | 5- هم آفرينش به دست خداست، هم بقا و ثبات هر چيز به ارادهى اوست. «خالِقُ- وَكِيلٌ»
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| − | جلد 2 - صفحه 522
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| − | 6- ربوبيّت وخالقيّت خدا، فلسفهى پرستش است. رَبُّكُمْ ... خالِقُ كُلِّ شَيْءٍ فَاعْبُدُوهُ
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| − | }}
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الْأَرْضِ أَنَّى يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَ لَمْ تَكُنْ لَهُ صاحِبَةٌ وَ خَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَ هُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ (101)
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الْأَرْضِ: او است ايجاد كننده و پديد آورنده آسمانها و زمينها. از ابتدا بىماده و مده و مثالى و بدون اعانت غير و شريك و نظير، و مثل ندارد، بلكه ذات فرد و يكه و يكتا است. فرق ابداع و اختراع آن است كه ابداع
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج3، ص: 344
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| − | فعلى است مسبوق به مثل نباشد. و اختراع فعلى است كه مفقود بسبب باشد.
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| − | تقديم ابداع بر اختراع به جهت افاده كمال قدرت الهى است، و ذاتى كه مبدع اشياء باشد، احتياج به شريك و ولد ندارد أَنَّى يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ: از كجا بوده و چگونه باشد مر ذات الهى را فرزندى وَ لَمْ تَكُنْ لَهُ صاحِبَةٌ: و حال آنكه نيست مر او را زنى كه فرزند از او پديد آيد، و چگونه او را صاحبه باشد در صورتى كه در تزويج، كفو و همسر و جنسيت شرط است و او را كفو و مجانستى با ماسوى نيست. بعلاوه موجب نقص و احتياج و عيب، و ذات ذو الجلال از اينها منزه است. وَ خَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ: و ايجاد فرموده همه چيزها را، و خالق را مثلى و نظير و مانندى نيست به مخلوق. وَ هُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ: و حق سبحانه به همه چيزها داناست و غير و احاطه علميه به موجودات ندارد.
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| − | تنبيه- آيه شريفه دال است بر نفى ولد و صاحبه از ذات سبحانه به وجوهى:
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| − | 1- اتخاذ ولد يا براى حاجت يا به عبث باشد، و اين دو بر حق تعالى روا نبود.
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| − | 2- ولد از جنس والد پس از جهتى مشارك و از جهتى مغاير باشد، و مشاركت و مغايرت از لوازم حدوث، و آن نسبت به ذات متمنع است. 3- ولد جزء منفعل از وارد، موجب انفعال باشد «تعالى اللّه عن ذلك علوّا كبيرا».
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الْأَرْضِ أَنَّى يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَ لَمْ تَكُنْ لَهُ صاحِبَةٌ وَ خَلَقَ كُلَّ شَيْءٍ وَ هُوَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ (101)
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| − | ترجمه
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| − | نوپديد آورنده آسمانها و زمين است كجا باشد مر او را ولد با آنكه نبوده است مر او را زنى و آفريد همه چيز را و او بهمه چيزى دانا است.
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| − | تفسير
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| − | خداوند ايجاد فرمود آسمانها و زمين را بعلم خود بدوا نه از چيزى و نه از روى نقشه كه سابقه داشته باشد چنانچه در مجمع از امام باقر (ع) نقل نموده است و چگونه ممكن است كسيكه زن نداشته باشد اولاد پيدا كند چون كسانيكه اثبات ولد براى او نمودند اثبات زن ننمودند و كسيكه تمام موجودات را خلق نموده و عالم بهمه آنها است مستغنى از همه چيز است ..
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الأَرضِ أَنّي يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ وَ لَم تَكُن لَهُ صاحِبَةٌ وَ خَلَقَ كُلَّ شَيءٍ وَ هُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَلِيمٌ (101)
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| − | ابداع كننده آسمانها و زمين است چگونه و از كجا باشد براي او ولد و حال آنكه نيست براي او زوجه و زني و خلق فرمود هر چيزي را و او است بهر چيزي دانا.
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| − | بَدِيعُ السَّماواتِ وَ الأَرضِ بديع بمعني ايجاد چيزيست بدون نقشه و بدون سابقه نظير اختراع يعني ايجاد بدون اسباب و معدات و ممكن است در بشر بسا ابداع صنعتي كند که سابقه نداشته باشد مثل طيّاره يا تلفن و امثال اينها اگر چه اينها هم بدون نقشه نيست ولي اختراع که بدون اسباب و معدات باشد جز خدا احدي قدرت ندارد و سماوات اينکه كرات جويّه و منظومههاي شمسيه و سيّارهها و كواكب علويه و فضاء وسيعي که اينها در آن سير منظّم دارند و ارض اينکه كره زمين که مركب از كره آب و خاك و هوا و نار است و ساير عناصر و ذكر السموات و الارض از باب اينست که محسوس انسان است و الّا عجائب قدرت غير متناهيست از عالم مجردات و خلقت ملائكه و لوح و قلم و عرش و كرسي و بهشت و جهنم و ما وراء طبيعت و خلقت جن و جواهرات و اعراض و غيرها الي ما شاء اللّه.
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| − | أَنّي يَكُونُ لَهُ وَلَدٌ با اينكه توليد و تناسل احتياج باموري دارد اولا بايد ماده جسماني باشد که از او خارج شود و ثانيا قوه و استعدادي در او باشد که بمقام فعليت برسد و ثالثا جفتي لازم دارد که از طرف فاعل در محل قابل قرار گيرد لذا ميفرمايد وَ لَم تَكُن لَهُ صاحِبَةٌ زيرا ولد انتسابش بپدر منوط باينست بلكه جميع موجودات امكانيه نسبتش بخداوند علي السواء است از ثري تا ثريا از ذرّه تا درّه، از فرش تا عرش، از ماديات تا مجردات كلا و طرا تمام مصنوع و مخلوق او است و او خالق و صانع آنها است لذا ميفرمايد وَ خَلَقَ كُلَّ شَيءٍ
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| − | جلد 7 - صفحه 156
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| − | و خلقت او مثل توليد و تناسل طبيعي عادم الشعور نيست زيرا پدر فقط رفتن نزد مادر باختيار او است که يكي از اسباب و معدات است ولي ايجاد نطفه در صلب او و استخراج از اعضاء او و استقرار در رحم و تبدلات و تغيرات و خلع و لبس نطفه بعلقه و مضغه و لحم و عظم و صورت و اعضاء و افاضه روح و تنميه و تغذيه و غير اينها تمام بدون اختيار و بدون علم است و خداوند عالم تمام مخلوقات و اشياء را از روي علم و قدرت ايجاد ميفرمايد.
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| − | وَ هُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَلِيمٌ و مراد از شيء ما يشيء وجوده است و بعبارت ديگر ماهيت که لباس وجود پوشيده باشد و وجودش غير ماهيت او است و اينکه خاص ممكنات است که گفتند (الممكن زوج تركيبي) و اطلاق شيء بر خداوند غلط است زيرا صرف وجود و محض وجود و بحث وجود است (الحق ماهيته انيّته اذ مقتضي العروض معلوليته) و اينكه گفتند (شيء لا كالاشياء) نوع عنايت است يعني وجوديست نه مثل ساير موجودات.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 101)
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| − | در این آیه به پاسخ این عقاید خرافی پرداخته نخست می گوید:
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| − | «خداوند کسی است که آسمانها و زمین را ابداع و ایجاد کرد» (بَدِیعُ السَّماواتِ وَ الأَرضِ).
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| − | «بدیع» به معنی وجود آورنده چیزی بدون سابقه است یعنی، خداوند آسمان و زمین را بدون هیچ ماده و یا طرح و نقشه قبلی ایجاد کرده است.
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| − | به علاوه «چگونه ممکن است او فرزندی داشته باشد در حالی که همسری ندارد» (أَنّی یکونُ لَهُ وَلَدٌ وَ لَم تَکن لَهُ صاحِبَةٌ).
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| − | اصولا چه نیازی به همسر دارد، وانگهی چه کسی ممکن است همسر او باشد با این که همه مخلوق او هستند.
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| − | بار دیگر مقام خالقیت او را نسبت به همه چیز و همه کس و احاطه علمی او را نسبت به تمام آنها تأکید کرده، می گوید: «همه چیز را آفرید و او به هر چیزی داناست» (وَ خَلَقَ کلَّ شَیءٍ وَ هُوَ بِکلِّ شَیءٍ عَلِیمٌ).
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=6 |آیه=101}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |