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| | ==معانی کلمات آیه== | | ==معانی کلمات آیه== |
| − | «الْعَاصِفَاتِ»: جمع عاصِفَة، درهم پیچنده و نابود کننده (نگا: تفسیر کبیر). تندباد. «عَصْفاً»: نابود کردن. تند وزیدن. سرعت گرفتن. مفعول مطلق است.
| + | *'''عاصفات''': عصف: شدّت. رِيحٌ عاصِفٌ باد تند و شديد، منظور از عاصفات بادهايى است كه تند و به شدّت مىوزند. «عصف الريح عصفا:اشتدّ» ناشرات: نشر: پراكنده شدن و پراكنده كردن. لازم و متعدى هر دو آمده است، مراد از ناشرات ظاهرا بادهايى است كه پراكنده مىكنند يا پراكنده مىشوند.<ref>تفسير احسن الحديث، سید علی اکبر قرشی، ج12، ص7</ref> |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="77" ayeh="2" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ الْمُرْسَلاتِ عُرْفاً «1» فَالْعاصِفاتِ عَصْفاً «2» وَ النَّاشِراتِ نَشْراً «3» فَالْفارِقاتِ فَرْقاً «4» فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً «5» عُذْراً أَوْ نُذْراً «6» إِنَّما تُوعَدُونَ لَواقِعٌ «7»
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| − | به فرستادههاى پى در پى سوگند. پس به طوفانهاى سهمگين (سوگند).
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| − | به نشردهندگانى (كه حق را به نيكويى) نشر مىدهند سوگند. پس آنان كه به طور كامل (بين حق و باطل) فرق مىگذارند. پس به القا كنندگان ذكر (و وحى به پيامبران). براى (رفع) عذر يا هشدار و انذار. همانا آنچه وعده داده مىشويد، واقع شدنى است.
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| − | ===نکته ها===
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| − | كلمه «عرف» به معناى پى در پى است و به يال اسب كه موهاى رديف دارد، عُرْف گويند.
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| − | اين واژه به معناى نيك و پسنديده نيز آمده و كلمهى «معروف» از آن است.
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| − | براى امورى كه در پنج آيه اول اين سوره به آنها سوگند ياد شده، يعنى «الْمُرْسَلاتِ، فَالْعاصِفاتِ، النَّاشِراتِ، فَالْفارِقاتِ و فَالْمُلْقِياتِ»، سه تفسير بيان شده است:
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| − | الف: برخى از مفسران عقيده دارند مراد از آنها انواع بادها و طوفانها است؛ «1»
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| − | ب: برخى عقيده دارند كه مراد از آنها انواع فرشتگان است؛ «2»
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| − | «1». تفسير كبير فخررازى.
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| − | «2». تفسيرالميزان.
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| − | جلد 10 - صفحه 342
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| − | ج: برخى عقيده دارند كه آيات اول و دوم مربوط به باد و طوفان و آيات سوم تا پنجم مربوط به فرشتگان است و اين تفكيك به خاطر نوع حرف عطف است، زيرا حرف «واو» در اول آيه نشانه جدايى و حرف «فاء» در اول آيه نشانه اتصال است.
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| − | «العاصفات» جمع «عاصف» به معناى باد شكننده و سخت است، چنانكه در آيه 12 سوره يونس مىخوانيم: «رِيحٌ عاصِفٌ» و كلمه «عصف» به معناى تندباد است، مانند: «كَعَصْفٍ مَأْكُولٍ» «1»، «وَ الْحَبُّ ذُو الْعَصْفِ» «2»
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| − | اگر مراد از «عاصفات» را فرشتگان بدانيم، معناى آيه چنين است كه فرشتگان، فرمان الهى را با شدّت و سرعت انجام مىدهند. نظير آياتى كه مىفرمايد: «يَفْعَلُونَ ما يُؤْمَرُونَ» «3»* و يا «هُمْ بِأَمْرِهِ يَعْمَلُونَ» «4».
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| − | در كنار هم آمدن سوگند به بادها و فرشتگان، شايد به خاطر شباهت ميان باد و فرشته باشد، از اين نظر كه هر دو لطيف و سريعاند و در آفرينش و تدبير امور نقش دارند.
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| − | كلمه «ملقيات» به صورت جمع آمده است، شايد به خاطر آن كه گاهى فرشتگان ديگرى همراه فرشته وحى يعنى جبرئيل نازل مىشوند و شايد به خاطر آن باشد كه گاهى فرشته و گاهى افراد و امور ديگر وسيله تذكر انسان شده و مسايلى را به انسان القا مىكنند.
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| − | خداوند متعال بايد حجّت را بر مردم تمام كند و جلوى بهانهها و عذرتراشىها را بگيرد.
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| − | «عُذْراً». در آيه 134 سوره طه نيز مىخوانيم: اگر قبل از آمدن انبيا مردم را هلاك كنيم، عذر خواهند آورد و مىگويند: چراپيش از اين پيامبرى نفرستاد تا ما از او پيروى كنيم و گرفتار نشويم.
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| − | در صفات سه گانه ناشرات، فارقات و ملقيات يك سير طبيعى وجود دارد. يعنى ابتدا بايد فرشتگانى معارف را گسترش دهند: «النَّاشِراتِ»، سپس در سايه آن، حق و باطل و حلال و
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| − | «1». فيل، 5.
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| − | «2». الرّحمن، 12.
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| − | «3». نحل، 50.
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| − | «4». انبياء، 27.
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| − | جلد 10 - صفحه 343
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| − | حرام از هم جدا شوند: «الفارقات» و به دنبال آن، ذكر القا شود. «فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً» «1»
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- آنچه از جانب خداوند فرستاده مىشود، مقدّس و قابل سوگند خوردن است.
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| − | «وَ الْمُرْسَلاتِ»
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| − | 2- الطاف خداوند، دائمى و مستمر است. «2» «وَ الْمُرْسَلاتِ عُرْفاً»
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| − | 3- آنچه از جانب خداوند نازل مىشود، خير است. «3» «وَ الْمُرْسَلاتِ عُرْفاً»
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| − | 4- در نظام آفرينش، حتّى وزش باد به طور تصادفى نيست، بلكه آفريدگار جهان، آن را مىفرستد. «الْمُرْسَلاتِ»
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| − | 5- مأموريّتهاى مهم، بايد به سرعت انجام شود. «عَصْفاً»
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| − | 6- در جهانبينى الهى، نرمى و سختى هر كدام به جاى خود ارزشمند است.
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| − | عُرْفاً ... عَصْفاً
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| − | 7- توسعه و گسترش به معناى ناديده گرفتن اصول و چارچوب نيست.
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| − | «وَ النَّاشِراتِ نَشْراً فَالْفارِقاتِ فَرْقاً»
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| − | 8- در نظام هستى كارها تقسيم شده و هر كارى به فرد يا گروهى سپرده شده و اين رمز مديريّت موفق است. «الْمُرْسَلاتِ، النَّاشِراتِ، الفارقات»
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| − | 9- در نظام الهى، تكوين و تشريع در كنار يكديگرند. وَ الْمُرْسَلاتِ ... فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً
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| − | 10- در مأموريّتهاى ارشادى بايد مطلب به مخاطبان تفهيم شود. «فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً»
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| − | 11- هرگونه ذكر، الهام، علم و خطور حق از سوى خداوند است. «فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً»
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| − | 12- خداوند با تفاوتهايى كه ميان حق و باطل قرار داده، هم اتمام حجّت كرده است: «عُذْراً» و هم هشدار مىدهد. «نُذْراً»
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| − | 13- در مأموريّتهاى ارشادى، بايد راه بهانهجويى مسدود شود. «عُذْراً أَوْ نُذْراً»
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| − | 14- براى امور مهم همچون وقوع قيامت، سوگندهاى متعدّد مفيد و راهگشا است. «وَ الْمُرْسَلاتِ، فَالْعاصِفاتِ، وَ النَّاشِراتِ، فَالْفارِقاتِ، فَالْمُلْقِياتِ، إِنَّما تُوعَدُونَ لَواقِعٌ»
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| − | «1». تفسيرالميزان.
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| − | «2». اين معنا در صورتى استفاده مىشود كه كلمه «عُرف» را به معناى پى در پى بدانيم.
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| − | «3». در صورتى كه كلمه «عُرف» را به معناى خير و نيكى بدانيم، نظير آيه «وأمر بالعرف».
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| − | جلد 10 - صفحه 344
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| − | 15- انسان در مورد قيامت، دائماً نياز به تذكّر و يادآورى دارد. فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً ... إِنَّما تُوعَدُونَ لَواقِعٌ
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | فَالْعاصِفاتِ عَصْفاً «2»
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| − | فَالْعاصِفاتِ عَصْفاً: 1- پس سوگند به ملائكهاى كه سخت روندهاند سخت رفتنى در امتثال اوامر الهى. 2- به آيات قرآنى كه محو كننده و زايل سازنده احكامند، يعنى ناسخ شرايع و اديان متقدمهاند. 3- سوگند به بادهاى جهنده به سختى به جهت تعذيب كفار و استيصال ايشان. 4- سوگند به نفوس كامله كه برنده و نيست سازنده ما سواى حق را.
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
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| − | وَ الْمُرْسَلاتِ عُرْفاً «1» فَالْعاصِفاتِ عَصْفاً «2» وَ النَّاشِراتِ نَشْراً «3» فَالْفارِقاتِ فَرْقاً «4»
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| − | فَالْمُلْقِياتِ ذِكْراً «5» عُذْراً أَوْ نُذْراً «6» إِنَّما تُوعَدُونَ لَواقِعٌ «7» فَإِذَا النُّجُومُ طُمِسَتْ «8» وَ إِذَا السَّماءُ فُرِجَتْ «9»
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| − | وَ إِذَا الْجِبالُ نُسِفَتْ «10» وَ إِذَا الرُّسُلُ أُقِّتَتْ «11» لِأَيِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ «12» لِيَوْمِ الْفَصْلِ «13» وَ ما أَدْراكَ ما يَوْمُ الْفَصْلِ «14»
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| − | وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِلْمُكَذِّبِينَ «15»
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| − | ترجمه
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| − | سوگند بفرشتگان فرستاده شده براى امور خير
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| − | پس سير كنندگانند در فرمان مانند باد تند سير كردنى
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| − | و سوگند به فرشتگان منتشر سازنده علوم و معارف منتشر ساختنى
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| − | پس جدا كنندگان حق از باطلند جدا كردنى
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| − | پس القاء كنندگانند موجبات تذكّر مردم را
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| − | براى معذور داشتن آنان و ترساندنشان
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| − | همانا آنچه وعده داده ميشويد البته واقع شونده است
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| − | پس وقتى كه ستارهها بىنور شوند
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| − | و وقتى كه آسمان شكافته گردد
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| − | و وقتى كه كوهها پراكنده شوند
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| − | و وقتى كه پيغمبران وقتشان تعيين شود
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| − | ميدانيد براى چه روزى در اين امور تأخير شده
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| − | براى روز جدا كردن
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| − | و چه ميدانى كه چه روزى است روز جدا كردن
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| − | واى در چنين روز بر تكذيب كنندگان.
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| − | تفسير
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| − | خداوند متعال قسم ياد فرموده بفرشتگانى كه فرستاده شدند براى نيكى و نكوئى و آنچه معروف و پسنديده است از فرمان الهى و بنابر اين عرفا مفعول له است و اينمعنى از امير المؤمنين عليه السّلام نقل شده و بعضى عرفا را بمعناى پى در پى گرفتهاند و بنابر اين حال است پس مانند بادهاى تند در انجام او امر حق شتاب مينمايند و نيز بفرشتگانى كه نشر و شيوع ميدهند علوم و معارف حقّه الهيّه را در عالم بخوبى پس جدا كنندگانند ميان حق و باطل بطور واضح پس
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| − | جلد 5 صفحه 325
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| − | القاء و وحى مينمايند به پيغمبران خدا موجبات تذكّر و هدايت خلق را براى آنكه معذور باشند كسانيكه عمل نمودند بآنچه واصل شده بآنان از احكام در ترك آنچه بايشان نرسيده و بترسند كسانيكه عمل ننمودند از عقاب الهى و بنابر اين عذرا او نذرا دو مصدر و مفعول له ميباشند و كلمه او براى تقسيم است و در واقع قسم بدو دسته از فرشتگان ياد شده يكدسته وسائط خير و سعادت بشر و دسته ديگر امناء وحى و ابلاغ بانبياء عظام و بقيه فقرات اوصاف آن دو دستهاند كه خداوند ذكر فرموده ولى بر حسب ظاهر مفسّرين هر پنج جمله و آيه را بقسم تفسير نمودهاند و بنابر اين فرقى بين واو وفاء نيست و در معناى جملهها هم اختلافاتى شده كه حاجت بذكر آنها نيست چون آنچه ذكر شد اقرب و اظهر است و فائده اين جملهها و قسم تأكيد مطالب آتيه و تعظيم ملائكه و بيان ترتيب نزول خيرات و حكمت بعثت انبياء است و آنچه قسم براى آن ياد شده آنستكه وعده انبيا كه بمردم ميدهند از حشر و نشر و حساب و جزا واقع شونده و حق است و فرموده پس آن در وقتى است كه ستارهها بىنور شوند چنانچه قمّى ره نقل نموده و از امام باقر عليه السّلام بآن تصريح شده و در وقتى است كه آسمان شكافته گردد براى نزول ملائكه و در وقتى است كه كوهها از جا كنده و پراكنده گردد و در وقتى است كه پيغمبران مبعوث شوند در اوقات مختلفه چنانچه قمّى ره نقل نموده و در مجمع نسبت بامام صادق عليه السّلام داده و ظاهرا مراد تعيين وقت شهادت ايشان بر امّتهاشان بسعادت و شقاوت است و اقتت در اصل وقتت بوده و او براى ثقالت ضمّه قلب بهمزه شده يعنى تعيين وقت شود براى ايشان و بواو نيز قرائت شده است و بعد از اين علائم و آيات قيامت خداوند از روى تعجب ميفرمايد اى مردم ميدانيد براى چه روزى در اين آيات و شهادت انبيا بر اممشان تأخير روى داده و اجل و مدّت قرار داده شده براى رسيدن آن و جواب فرموده براى روز فصل خصومت حقّ در ميان خلق و براى عظمت امر و سختى آنروز فرموده و چه ميدانى تو اى انسان چه روزى است روز فصل خصومت نمودن خداوند در ميان بندگان و جدائى افكندن بين حقّ و باطل و محقّ و مبطل و اى در آنروز بحال تكذيب كنندگان انبيا و اوليا در دنيا خبر ايشان را از قيامت
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| − | جلد 5 صفحه 326
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| − | و غيرها و كلمه ويل تهديد بعذاب و سختى و گرفتارى آنروز است كه در اينسوره براى تأكيد مكرّر ميشود.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بِسمِ اللّهِ الرَّحمنِ الرَّحِيمِ
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| − | وَ المُرسَلاتِ عُرفاً «1» فَالعاصِفاتِ عَصفاً «2» وَ النّاشِراتِ نَشراً «3» فَالفارِقاتِ فَرقاً «4»
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| − | فَالمُلقِياتِ ذِكراً «5»
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| − | پنج قسم است که خداوند قسم ياد ميكند بر اثبات يوم القيامة و آنچه وعده داده شد.
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| − | وَ المُرسَلاتِ عُرفاً سه تفسير كردهاند:
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| − | يك: مراد باران و امطار است که در پي يكديگر ريزش ميكند مثل كاكل اسب که در گردن اسب است که خداوند ارسال فرموده و عرف همان گيسوان و يال اسب است يعني باران شبيه آن است.
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| − | دو: مراد ملائكه هستند که بر انبياء فرستاده شدهاند براي احكام و دستورات از اوامر و نواهي، و مراد عرفا تمام مطابق حكمت و مصلحت است و معارف الهيه است.
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| − | سه: مراد پيغمبران هستند که فرستادگان الهي هستند براي تبليغ امت بمعارف الهيه از عقائد حقه و صفات حميده و افعال حسنه و فرائض و نواهي و مواعظ كافيه شافيه.
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| − | اقول: آنچه از جانب حق بر بندگان نازل ميشود از بركات و تفضلات و نعم الهيه
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| − | جلد 17 - صفحه 336
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| − | دينيه و دنيويه و اخرويه از ملائكه و انبياء و رحمت و مغفرت و نعمت مرسلات الهيه است، و المرسلات جمع محلي بلام افاده عموم دارد و مكرر گفتهايم که تفسيرات بيان مصاديق است و منافي با عموم نيست. اينکه اول قسم است پس از آن:
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| − | فَالعاصِفاتِ عَصفاً لذا تعبير بفا كرده قسم بعد از قسم، و عصف را گفتند: باد شديد که وزيدن ميكند و هوا را تلطيف ميكند و ميكروبات را برطرف ميكند و اشجار و نباتات و رياحين را خرم ميكند.
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| − | اقول: عصف در قرآن مجيد اطلاقاتي دارد مثل: وَ الحَبُّ ذُو العَصفِ وَ الرَّيحانُ الرحمن آيه 12 بمعني برگهاي حبوبات و رياحين، و مثل: فَجَعَلَهُم كَعَصفٍ مَأكُولٍ فيل آيه 5 بمعني گوشت جويده يا برگ ريخته شده مأكول حيوانات، و مثل: جاءَتها رِيحٌ عاصِفٌ يونس آيه 12 باد تند، و مثل: فِي يَومٍ عاصِفٍ ابراهيم آيه 18 خاكستري که بتوسط باد پراكنده در هوا ميشود. و در اينجا شدت شديدي است که تمام را در هم ميكوبد.
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| − | وَ النّاشِراتِ نَشراً برانگيختن که تمام جن و انس حتي حيوانات در قيامت زنده ميشوند و لذا يكي از اسامي قيامت يوم النشور است، و چند تفسير شده يكي:
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| − | بادهايي که ابرها را پراكنده ميكنند و مواد مائيه آنها ريزش ميكند باران ميبارد، ديگر ملائكه که نشر كتب ميكنند مثل صحف انبياء و كتب آسماني، ديگر باران که نشر نباتات و گياهان ميكند و از زمين ميروياند چنانچه ميفرمايد: وَ اللّهُ الَّذِي أَرسَلَ الرِّياحَ فَتُثِيرُ سَحاباً فَسُقناهُ إِلي بَلَدٍ مَيِّتٍ فَأَحيَينا بِهِ الأَرضَ بَعدَ مَوتِها كَذلِكَ النُّشُورُ فاطر آيه 9.
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| − | فَالفارِقاتِ فَرقاً اموري که فرق ميگذارد بين حق و باطل هدايت و ضلالت واجب و حرام ايمان و كفر علم و جهل سعادت و شقاوت حسن و قبح خير و شر و امثال اينها مثل آيات شريفه قرآن و احكام نازله بر انبياء و ملائكه نازله بر رسل و بين نجات و هلاكت و نعمت و بلا بهشت و جهنم و نفع و ضرر و امثال اينها.
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| − | فَالمُلقِياتِ ذِكراً القاء انداختن شيء است نزد غير، و القاء ذكر ملائكه
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| − | جلد 17 - صفحه 337
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| − | بر انبياء و انبياء بر امم و علماء بر جهّال، و ذكر قرآن مجيد است و بيان احكام و دستورات الهي براي ذكر بندگان و اتمام حجت و تنبيه غفله و آگاهي امت و هدايت و ارشاد و مواعظ و انذار از مخالفت چه امور اعتقاديه از توحيد و نبوت و معاد که اصول دين است و عدل و امامت که از اصول مذهب است، و از اخلاق و صفات حميده و ملكات حسنه و ازاله صفات قبيحه و ملكات رذيله، و از اعمال حسنه و فرائض الهيه و اطاعت اوامر الهيه و ازاله صفات معاصي و مخالفت نواهي الهيه تمام ملقيات ذكر است، و قسم ياد كردن الهي به أيمان مذكوره بر اينکه است که تمام دلالت دارد بر قدرت و عظمت خداوند متعال.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 2)- «و آنها که همچون تندباد حرکت میکنند» (فالعاصفات عصفا).
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=77 |آیه=2}}===
| |
| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=77 |آیه=2}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=77 |آیه=2}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=77 |آیه=2}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |