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| | ==معانی کلمات آیه== | | ==معانی کلمات آیه== |
| − | «مَوْلی»: سرورِ مُتصرّف.
| + | مولاكم: مولى به معنى سرپرست و مددكار است، اصل آن «ولى» به معنى نزديكى است.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="3" ayeh="150" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | «150» بَلِ اللَّهُ مَوْلاكُمْ وَ هُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ
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| − | (از آنها كه دوستدار شما نيستند پيروى نكنيد،) بلكه خداوند مولاى شماست و او بهترين ياوران است.
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| − | «1». تفسير مجمعالبيان و نورالثقلين.
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| − | جلد 1 - صفحه 625
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| − | ===نکته ها===
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| − | در آيه اول سخن از اطاعت كفّار بود، نه مولا و سرپرست گرفتن آنان، اما از اين كه در آيه دوم مىگويد: خداوند مولاى شماست، پس استفاده مىشود هر كس كفّار را اطاعت كند، در حقيقت را مولا گرفته است.
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| − | انگيزهى ارتداد و اطاعت از كفّار، كسب عزّت و قدرت است. قرآن در آيه 150 و آياتى نظير آن، اين خيال واهى را رد مىكند و مىفرمايد: «أَنَّ الْقُوَّةَ لِلَّهِ جَمِيعاً» «1» و «إِنَّ الْعِزَّةَ لِلَّهِ جَمِيعاً» «2»
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- ولايت و اطاعت، در خداوند منحصر است. «بَلِ اللَّهُ مَوْلاكُمْ»
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| − | 2- ولىّ گرفتن خداوند، سبب پيروزى شماست. «مَوْلاكُمْ وَ هُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَلِ اللَّهُ مَوْلاكُمْ وَ هُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ (150)
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| − | بَلِ اللَّهُ مَوْلاكُمْ: بلكه خداى تعالى يار و مددكار و ناصر و اولى به تصرف و صاحب اختيار شماست. پس با كفار دوستى مكنيد و از غير خدا حق تعالى استعانت و نصرت منمائيد. وَ هُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ: و خداى تعالى بهترين يارى كنندگان است. زيرا قادر و غالب مطلق، و تمامى موجودات مقهور و مغلوب اراده تامه سبحانى خواهند بود.
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| − | تنبيه: آيه شريفه را دلالاتى است:
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| − | 1- آنكه مؤمن نبايد مخالطه و مصاحبت با كفار نمايد، زيرا: الطّبع مكتسب من كلّ مصحوب: طبع انسانى دزد است، و كسب نمايد اخلاق مصاحب و همنشين خود را؛ و بالاخره معاشرت ناجنس، او را به تدريج از دين خارج
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج2، ص: 272
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| − | نمايد. و حضرت پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله و سلّم فرمود: المرء على دين خليله و قرينه «1» شخص بر دين دوست خود و همنشين خود باشد.
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| − | 2- اطاعت و پيروى كفار در مرام آنان، موجب زيانكارى در دين و دنيا و آخرت است.
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| − | 3- اعلام مؤمنين به آنكه مولاى به تمام جهات نسبت به شما مؤمنين، خداى تعالى است كه مولويت حق ثابت و دائم و لا يزال و لا يزول او است 4- ابلاغ به آنكه ذات احديّت سبحانى، بهترين نصرت كنندگان در تمام احوال و ازمان است. بنابراين شايسته نباشد كه مؤمن حقيقى اتكال و وثوق به غير خدا نمايد، بلكه بايد تمام وثوق و توجهش به ناصر و مولاى حقيقى ذات يگانه ربوبى باشد.
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَلِ اللَّهُ مَوْلاكُمْ وَ هُوَ خَيْرُ النَّاصِرِينَ (150)
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| − | ترجمه
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| − | بلكه خداوند دوست و ياور شما است و اوست بهترين يارى كنندگان.
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| − | تفسير
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| − | صاحب اختيار و دوست و ياور مؤمنين خدا است و او است نگهدار اهل ايمان از هر گونه خطرات پس بايد از او اعانت خواست و از غير او چشم پوشيد و دست توسل در برابر جز او دراز نكرد و نصرت و فتح و ظفر بدست او است و كسى در مقابل اراده او نميتواند عرض اندام كند.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بَلِ اللّهُ مَولاكُم وَ هُوَ خَيرُ النّاصِرِينَ (150)
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| − | بلكه خداوند مولي و صاحب اختيار شما است و او بهترين ياري كنندهگان است، نظر بنيرو و قدرت چهار روزه كفار نكنيد قدرت خدا فوق قدرت بشر و نيروي او بيشتر از نيروهاي بشري است، تمام كارها در تحت قدرت و اراده او است اراده كند تمام كفار با تمام قوي و نيروهاي خود معدوم صرف شوند بطرفة العين از بين ميروند لشگر خدا از قشون آنها زيادتر است تمام ملائكه لشگر او هستند بلكه:
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| − | (جمله زرّات زمين و آسمان || لشگر حقّند گاه امتحان)
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| − | بَلِ اللّهُ مَولاكُم مولي مقابل عبد است، عبد در كليه حوائج بايد مراجعه بمولاي خود كند و در كليه گرفتاريها پناه باو برد. مولي، سيّد، خالق، رازق حافظ، ناصر و داراي ساير صفات كمال و جلال و جمال او است و بس، صاحب اختيار شما و آمر و ناهي و فرمانفرماي شما او است وَ هُوَ خَيرُ النّاصِرِينَ قدري نظر در حال امم سابقه كنيد، عاد با آن قوّة و قدرت و توسعه مملكتي که خدا ميفرمايد أَ لَم تَرَ كَيفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعادٍ إِرَمَ ذاتِ العِمادِ الَّتِي لَم يُخلَق مِثلُها فِي البِلادِ فجر آيه 6- 7- 8، خداوند بيك باد آنها را بباد داد.
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| − | ثمود که ميفرمايد ثَمُودَ الَّذِينَ جابُوا الصَّخرَ بِالوادِ فجر آيه 9، بيك صيحه هلاك شدند.
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| − | فرعون فِرعَونَ ذِي الأَوتادِ فجر آيه 10، غرق دريا شدند.
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| − | باد را ديدي که با عادان چه كرد || آب را ديدي که با طوفان چه كرد
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| − | آتش را سرد و سلامت كرد بر ابراهيم عليه السّلام قُلنا يا نارُ كُونِي بَرداً وَ سَلاماً عَلي إِبراهِيمَ انبياء آيه 61.
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| − | جلد 4 - صفحه 389
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| − | قوم لوط وَ أَمطَرنا عَلَيهِم مَطَراً نمل آيه 58، سنگ بر سر آنها باريد.
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| − | قوم شعيب بصيحه و صاعقه هلاك شدند.
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| − | قوم ابرهه وَ أَرسَلَ عَلَيهِم طَيراً أَبابِيلَ فيل آيه 3.
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| − | و هكذا در بدر كبري ملائكه آمدند بياري مسلمين، الي غير ذلک.
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| − | كيست قدرت داشته باشد اينکه نحو شما را ياري كند اي واي بحال كساني که از دشمن كمك ميطلبند و از در دوست گريزانند، تمنّاي ياري از كفار دارند و همچه مولايي را توجّه ندارند.
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| − | اي يك دله صد دله دل يك دله كن || مهر دگران را ز دل خود يله كن
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| − | يك بار باخلاص بيا بر در ما || گر كام تر بر نيامد آن گه گله كن
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| − | أَمَّن يُجِيبُ المُضطَرَّ إِذا دَعاهُ نمل آيه 62.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 150)- در این آیه تأکید میکند که «خدا پشتیبان و سر پرست شماست و او بهترین یاوران است» (بَلِ اللَّهُ مَوْلاکُمْ وَ هُوَ خَیْرُ النَّاصِرِینَ).
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| − | یاوری است که هرگز مغلوب نمیشود و هیچ قدرتی با قدرت او برابری
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| − | ج1، ص338
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| − | ندارد در حالی که یاوران دیگر ممکن است گرفتار شکست و نابودی شوند.
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| − | (آیه 151)-]
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| − | در این آیه اشاره به نجات معجزه آسای مسلمانان بعد از جنگ احد میکند و میفرماید: «ما به زودی در دل کفار رعب و وحشت میافکنیم» یعنی، همانطور که در پایان جنگ احد افکندیم و نمونه آن را با چشم خود دیدید (سَنُلْقِی فِی قُلُوبِ الَّذِینَ کَفَرُوا الرُّعْبَ).
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| − | و در جمله بعد، علت افکندن رعب و ترس را در دلهای آنها چنین بیان میکند: «به این جهت که آنها چیزهایی را بدون دلیل شریک خدا قرار داده بودند» (بِما أَشْرَکُوا بِاللَّهِ ما لَمْ یُنَزِّلْ بِهِ سُلْطاناً).
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| − | در پایان آیه به سرنوشت این افراد اشاره کرده، میفرماید: این افراد به خود و اجتماع خود ستم کردهاند «و بنابراین جایگاهی جز آتش نخواهند داشت و چه بد جایگاهی است» (وَ مَأْواهُمُ النَّارُ وَ بِئْسَ مَثْوَی الظَّالِمِینَ).
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=3 |آیه=150}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |