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| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="15" ayeh="23" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ إِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَ نُمِيتُ وَ نَحْنُ الْوارِثُونَ «23»
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| − | والبتّه اين مائيم كه زنده مىكنيم ومىميرانيم ومائيم كه (بعد از مرگ همه، باقى مانده و) وارث مىشويم.
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| − | وَ لَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنْكُمْ وَ لَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ «24»
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| − | و بدون شك ما به پيشينيان از شما علم داريم وبه آيندگان نيز آگاهيم.
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| − | وَ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ «25»
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| − | وهمانا پروردگار تو است كه همه آنان را محشور خواهد كرد، زيرا كه او حكيم وعليم است.
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| − | ===نکته ها===
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| − | مفسران براى «الْمُسْتَقْدِمِينَ» و «الْمُسْتَأْخِرِينَ» مصاديقى ذكر كردهاند، از جمله:
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| − | 1. گذشتگان و باقيماندگان.
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| − | 2. سبقت گيرندگان و عاشقان جبهه و غير آنان.
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| − | 3. كسانى كه در صف اول نماز جماعت حاضر مىشوند و كسانى كه در صف آخر حضور
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| − | جلد 4 - صفحه 454
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| − | مىيابند تا به زنان حاضر در جماعت نگاه بد كنند كه آيه مىفرمايد ما مىدانيم.
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| − | در مقابل بعضى از خوبى به جائى رسيده بودند كه منزلشان را در معرض فروش قرار داده بودند تا در عوض در نزديك مسجد منزل تهيه كنند و به صف اول برسند كه آيه مىفرمايد ما اين افراد را نيز مىشناسيم.
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- مرگ و حيات تنها بدست اوست. همه رفتنى هستند، پس سزاوار است با عمل خود ارث خوبى براى وارث حقيقى بجاى گذاريم. «نَحْنُ الْوارِثُونَ»
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| − | 2- زمان، در علم خداوند اثرى ندارد. علم او به گذشته و حال و آينده يكسان است. عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ ... عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ
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| − | 3- برپايى رستاخيز، كيفر وپاداش دادن از شئون ربوبيّت الهى است. «رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ»
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| − | 4- دليل رستاخيز، حكمت خداوند است. (اگر ذرات خاك، غذا و غذا، نطفه و نطفه، انسان شود و با مرگ، دوباره به خاك تبديل شود وحساب وكتابى در كار نباشد، اين كار حكيمانه نيست.) «إِنَّهُ حَكِيمٌ»
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| − | 5- در قيامت قديم وجديد با هم محشور مىشوند. «يَحْشُرُهُمْ» وخداوند بر عملكرد همه وآثار ونيّات هر فرد، آگاهى كامل دارد. «حَكِيمٌ عَلِيمٌ»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ إِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَ نُمِيتُ وَ نَحْنُ الْوارِثُونَ «23»
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| − | «1» جلد 2، صفحه 239.
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| − | «2» منهج الصادقين، جلد 5، صفحه 158، نقل از تأويلات نموده است.
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| − | جلد 7 - صفحه 97
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| − | وَ إِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَ نُمِيتُ: و بدرستى كه ما زنده مىگردانيم اجساد قابله را به ايجاد حيات، و مىميرانيم اجسام حيّه را به ازاله حيات از آن، در بحر الحقايق گفته «1»: احياى قلوب اوليا كنيم به انوار لمعات جمال، و اماتت نفوس ايشان نمائيم به سطوات جلال. وَ نَحْنُ الْوارِثُونَ: و ما وارثانيم، يعنى باقى بعد از افناى خلايق، چه ميراث چيزى را گويند كه بعد از مردن كسى به ديگرى رسد، پس همه در معرض فنااند، و حق سبحانه و تعالى موصوف است به بقا.
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| − | تبصره: حق سبحانه در اين آيه شريفه به چهار تأكيد اخبار فرمايد: به اينكه احيا و اماته تمامى موجودات در تحت اراده و قدرت او است و هيچكس را در آن اختيارى نيست، و چون در آيات سابقه ذكر نعم را فرمود، به اين آيه آگاه نمود به اينكه خلق نفرموده اين نعم را براى بقا، بلكه به جهت آنكه طريقى باشد به نعم باقيه آخرت، و همه فانى، و وارث آنها ذات باقى حق جلّ جلاله است.
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ إِنْ مِنْ شَيْءٍ إِلاَّ عِنْدَنا خَزائِنُهُ وَ ما نُنَزِّلُهُ إِلاَّ بِقَدَرٍ مَعْلُومٍ «21» وَ أَرْسَلْنَا الرِّياحَ لَواقِحَ فَأَنْزَلْنا مِنَ السَّماءِ ماءً فَأَسْقَيْناكُمُوهُ وَ ما أَنْتُمْ لَهُ بِخازِنِينَ «22» وَ إِنَّا لَنَحْنُ نُحْيِي وَ نُمِيتُ وَ نَحْنُ الْوارِثُونَ «23» وَ لَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَقْدِمِينَ مِنْكُمْ وَ لَقَدْ عَلِمْنَا الْمُسْتَأْخِرِينَ «24» وَ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ إِنَّهُ حَكِيمٌ عَلِيمٌ «25»
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| − | ترجمه
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| − | و نيست هيچ چيز مگر آنكه نزد ما است خزانههايش و نازل نميكنيم آنرا
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| − | جلد 3 صفحه 249
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| − | مگر بمقدارى معين
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| − | و فرستاديم بادها را بارور كنندگان پس نازل نموديم از آسمان آبرا پس سيراب نموديم شما را از آن و نيستيد شما مر آنرا خزانه داران
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| − | و همانا ما هر آينه زنده ميكنيم و ميميرانيم و مائيم وارثان
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| − | و بتحقيق دانستيم پيش رفتگان از شما را و بتحقيق دانستيم پس ماندگان را
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| − | و همانا پروردگار تو او محشور ميكند ايشانرا همانا او درست كار دانا است.
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| − | تفسير
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| − | هر موجوديكه از مكمن غيب پاى در عرصه شهود گذارده و خلعت هستى در بر نموده رشحهاى از رشحات اصل وجود و سر چشمه جود و آب حيات است كه از مقام عالى نازل و محدود بحدود و تعيّنات و تشخصات شده است پس اجناس و انواع و اصناف موجودات خزائن و معادن و منابع آنها در نزد خداوند بوده و هست و خواهد بود و در هر زمان بر حسب حكمت و مصلحت بعرصه ظهور و بروز خواهد رسيد و مفسّرين براى ضيق مجال و تقريب اذهان بمثال، خزائن را جمعى بقدرت و قمّى ره بآب تفسير نموده و فرمودهاند نازل و متعلّق ميشود قدرت الهى بر مقدورات و فرود ميآيد آب از آسمان پس ميرويد گياه براى هر حيوان ولى مطلب بر اهل علم مخفى نيست و همانستكه اجمالا بيان شد از امام سجّاد عليه السّلام روايت شده كه در عرش تمثال جميع خلق خدا از صحرا و دريا هست و اين تأويل آيه ان من شىء الّا عندنا خزائنه است كه اشاره بتحقيق مرقوم است و مراد از انزال بقدر معلوم اعطاء بقدر قابليّت و استعداد و اقتضاء حكمت و عدالت است مقدّريكه بگل نكهت و بگل جانداد بهر كه هر چه سزا ديد حكمتش آنداد از جاه و جلال و جمال و كمال و مال و منال و كسيرا حقّ چون و چرا نيست چون در دستگاه حكيم على الاطلاق جاى چون و چرا نيست و خداوند فرستاد بادها را كه بارور و آبستن كنندگانند ابرها را بباران و درختان را بميوهها پس نازل فرمود از آسمان باران رحمت خود را و سيراب نمود بندگان و حيوانات و نباتاترا از آن و مردم قدرت ندارند بر جمع و تفريق آن بر طبق حكمت و مصلحت خلاصه آنكه بندگان عاجزند از خزانهدارى آب كه از اجسام است چه رسد بآنكه خزانه دار عالم ارواح و عقول و اشباح و نفوس باشند عيّاشى ره از امير المؤمنين عليه السّلام روايت نموده كه بباد بد نگوئيد كه آن مبشّر و منذر است و بارور كننده درختان است و از خداوند بخواهيد خير آنرا و باو پناه ببريد از شرّش
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| − | جلد 3 صفحه 250
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| − | و خداوند زنده ميكند و روح ميدهد بتمام موجودات و ميميراند آنها را بمقتضاى حكمت و مصلحت و ميگيرد از آنها دارائى و آنچه را بوديعت نزد آنها نهاده است مانند وارث و مالك و متصرّف ميشود در زمين وقتى كه موجودى جز او وجود نداشته باشد در آن كه تصور مالكيّت براى او شود و خداوند دانا است باحوال و اعيان گذشتگان و آيندگان از خلق و اين امّت و در روايت عيّاشى ره از امام باقر عليه السّلام در اين آيه اختصاص باهل ايمان آنها داده شده و بعضى اختصاص بمتقدّمين و متأخرين در جهاد و بعضى در خيرات و بعضى در صف جماعت دادهاند و ظاهرا مرادشان نزول است نه بيان مراد و كلام امام، امام كلمات است و خداوند محشور ميفرمايد تمام خلائق را از اولين و آخرين در يكروز براى حساب و مجازات اعمال چون حكيم است مردم را بعبث خلق نفرموده و عليم است چيزى از اعمال آنها بر او مخفى نيست و از صفحه علم او محو نخواهد شد ..
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ إِنّا لَنَحنُ نُحيِي وَ نُمِيتُ وَ نَحنُ الوارِثُونَ «23»
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| − | و محققا ما خود ما زنده ميكنيم و ميميرانيم و مائيم وارثون (وَ إِنّا لَنَحنُ) با سه تأكيد ان و لام و تكرار نحن و نا (نُحيِي وَ نُمِيتُ) ده فعل است که از افعال مختصه بخداوند است خلق و رزق احياء و اماته عزت و ذلت غني و فقر صحت و مرض و افعال الهي دو نحو است يكي بدون اسباب و وسايط تعبير بمتكلم وحده ميكند مثل الوهيت و ربوبيت أَنَّما إِلهُكُم إِلهٌ واحِدٌ كهف ايه 110 إِلهُكُم إِلهٌ واحِدٌ نحل آيه 23 و چون احياء هر ذي حياتي و إماته آن بتوسط اسباب است و وسايط مثل ملائكه تعبير بمتكلم مع الغير فرموده وَ نَحنُ الوارِثُونَ يعني جميع موجودات سماوي و ارضي فاني ميشوند فقط ذات مقدس او باقي ميماند كُلُّ شَيءٍ هالِكٌ إِلّا وَجهَهُ
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 23)- سپس به دنبال بحثهای توحیدی به معاد و مقدمات آن اشاره کرده، میگوید: «و مائیم که زنده میکنیم و (مائیم که) میمیرانیم» (وَ إِنَّا لَنَحْنُ نُحْیِی وَ نُمِیتُ).
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| − | «و وارث (همه روی زمین و تمام این جهان) مائیم» (وَ نَحْنُ الْوارِثُونَ).
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| − | اشاره به مسأله حیات و مرگ که در واقع مهمترین و قطعیترین مسائل است هم میتواند مقدمه برای بحث معاد باشد و هم تکمیلی برای بحث توحید.
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| − | از سوی دیگر وجود مرگ و زندگی خود دلیل بر این است که موجودات این عالم از خود چیزی ندارند و هر چه دارند از ناحیه دیگری است، و سر انجام وارث همه آنها خداست!
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=15 |آیه=23}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |