آیه 25 سوره اعراف: تفاوت بین نسخهها
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نسخهٔ کنونی تا ۲۱ ژوئن ۲۰۲۶، ساعت ۱۲:۰۶
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محتویات
ترجمه های فارسی
خدا گفت: در این زمین زندگانی کنید و در آن بمیرید و هم از آن باز برانگیخته گردید.
پروردگار فرمود: در آن زندگی می کنید، و در آن می میرید، و از آن بیرون می آیید.
فرمود: «در آن زندگى مىكنيد و در آن مىميريد و از آن برانگيخته خواهيد شد.»
گفت: در آنجا زندگى خواهيد كرد و در آنجا خواهيد مرد و از آن بيرون آورده شويد.
فرمود: «در آن [= زمین] زنده میشوید؛ و در آن میمیرید؛ و (در رستاخیز) از آن خارج خواهید شد.»
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
در «فِیهَا» و «مِنْهَا» مرجع ضمیرِ (ها) أَرْض است.
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
قالَ اهْبِطُوا بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ وَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ وَ مَتاعٌ إِلى حِينٍ «24»
(خداوند) فرمود: فرود آييد، بعضى از شما دشمن بعض ديگريد و تا مدّتى (معيّن) براى شما در زمين جايگاه و وسيلهى بهرهگيرى خواهد بود.
قالَ فِيها تَحْيَوْنَ وَ فِيها تَمُوتُونَ وَ مِنْها تُخْرَجُونَ «25»
(او) فرمود: در اين زمين زندگى مىكنيد و در آن مىميريد و از آن (براى محاسبهى روز قيامت،) بيرون آورده مىشويد.
جلد 3 - صفحه 42
نکته ها
مخاطبان جملهى «اهْبِطُوا»، يا آدم و حوّا و ابليس هستند و يا آدم و حوّا و ذريّه آنها. البتّه در يك جا ابليس به تنهايى مورد خطاب قرار گرفته است، «فَاهْبِطْ مِنْها» «1» و در جاى ديگر آدم و حوّا، «قالَ اهْبِطا مِنْها جَمِيعاً» «2» كه اگر جايگاه هبوط آنها يكى باشد، ممكن است «اهْبِطُوا» جمع بين آنها باشد.
مراد از «هبوط»، آمدن به زمين است، زيرا به دنبال آن مىفرمايد: «وَ لَكُمْ فِي الْأَرْضِ مُسْتَقَرٌّ»
گرچه خداوند توبهى آدم و حوّا را پذيرفت، «فَتابَ عَلَيْهِ» «3»، ولى اثر وضعى گناه باقى است. اثر وضعى آن ترك اولى و نافرمانى آدم و حوّا، خروج از آن جايگاه بهشتى و هبوط به زمين بود. «اهْبِطُوا»
پیام ها
1- از آثار وضعى خلاف و گناه نمىتوان گريخت. «قالَ اهْبِطُوا»
2- گاهى عملكرد والدين، در هبوط و سقوط نسل آنان هم اثر مىگذارد. قالَ اهْبِطُوا ...
3- بهشت آدم و حوّا، مكانى غير از زمين وبالاتر وبرتر از آن بود. «اهْبِطُوا»
4- دنيا جايگاه تنازع و تزاحم و تضادّ است و انسانها به خاطر تزاحم منافع و غرائز، با هم درگير مىشوند. «بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ»
5- زندگى دنيوى و بهرهورى از آن ابدى نيست. «إِلى حِينٍ»
6- انسان، پس از مرگ دوباره زنده خواهد شد. «مِنْها تُخْرَجُونَ» آدم از اين ناراحت و غمگين بود كه پنداشت ديگر به بهشت و زندگى جاويد نخواهد رسيد، خداوند فرمود: «پس از زندگى دنيا مىتواند به بهشت جاويد برسد».
7- مدّت ونهايت زندگى دنيوى براى بشر معلوم نيست. («حِينٍ» نكره آمده است)
«1». اعراف، 13.
«2». طه، 123.
«3». بقره، 37.
تفسير نور(10جلدى)، ج3، ص: 43
پانویس
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




