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| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="4" ayeh="122" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهارُ خالِدِينَ فِيها أَبَداً وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا وَ مَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا «122»
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| − | و كسانى كه ايمان آورده و كارهاى شايسته كردهاند، به زودى آنان را در باغهايى كه از زير (درختان) آنها جوىها روان است وارد مىكنيم. هميشه در آن جاودانند. وعدهى الهى حقّ است. و چه كسى در سخن از خداوند، راستگوتر است؟
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- ايمان از عمل جدا نيست. «آمَنُوا وَ عَمِلُوا»
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| − | 2- اگر همهى اعمال صالح بود، كارساز خواهد گشت. كلمه «الصَّالِحاتِ» با الف و لام نشانه همه كارهاى نيك است.
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| − | 3- تشويق در كنار تهديد، از شيوههاى تربيتى قرآن است. (آيهى قبل تهديد بود،
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| − | جلد 2 - صفحه 169
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| − | اينجا تشويق است). مَأْواهُمْ جَهَنَّمُ ... سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ
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| − | 4- لذّتهاى دنيا، نگرانى از دست دادن دارد، امّا نعمتهاى بهشت، جاودانه است. «خالِدِينَ فِيها»
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| − | 5- با مقايسهى وعدههاى دروغ شيطان و وعدههاى راست خدا، به وعدهى الهى دل ببنديم. «وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهارُ خالِدِينَ فِيها أَبَداً وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا وَ مَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلاً (122)
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ: بدرستى كه آن كسانى كه ايمان آوردند به اصول خمسه توحيد و عدل و نبوت و امامت و معاد، و بجا آوردند اعمال شايسته مشروعه، سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهارُ: زود باشد كه داخل فرمائيم ايشان را به بوستانهائى كه مىرود و جارى مىشود در زير درختان آن جويها، خالِدِينَ فِيها أَبَداً: در حالتى كه مخلّد و دائمند در آن جنات هميشه، يعنى خلودى بر سبيل تأييد، كه هرگز سمت انقطاع نپذيرد، بلكه باقى است به بقاء الهى و دوام سرمدى غير متناهى. وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا: وعده فرمود خداى تعالى، وعده راستى. يا حق است وعده الهى، وعده حقى كه خلافى در حقيقت و درستى آن نيست و ثابت و متحقق باشد. وَ مَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلًا: و كيست راستگوتر از خدا در كلام، يعنى هيچكس از او راستگوتر نيست. فايده اين توكيدات، معارضه مواعيد
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج2، ص: 585
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| − | كاذبه شيطانيه است مر قرناى خود را به صدق وعده الهى، مر اولياى خود را. و يا مبالغه در توكيد وعد، به جهت ترغيب عباد در تحصيل آن.
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| − | تنبيه: آيه شريفه دليل است بر آنكه اعمال صالحه، شرط لازمه ايمان است؛ و مجرد ايمان، موجب دخول بهشت نمىشود، زيرا مقارن ساخته ايمان را به عمل صالح. پس ايندو لازم و ملزوم هم مىباشد كه هر يك بدون ديگرى، منتج سعادت اخرويه و موجب نعيم ابديه نخواهد شد.
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| − | قال رسول اللّه صلّى اللّه عليه و آله و سلّم: الايمان معرفة بالقلب و اقرار باللّسان و عمل بالاركان. «1» فرمود رسول اكرم صلّى اللّه عليه و آله و سلّم: ايمان، معرفت به قلب و اقرار به زبان و عمل به اركان است.
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| − | ايضا فرمود: الايمان اقرار و عمل و الاسلام اقرار بلا عمل. «2» ايمان عبارت است از اقرار و عمل، و اسلام اقرار است بدون عمل صالح.
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| − | فى الجامع الاخبار، روى عبد اللّه بن عبّاس عن النّبىّ صلّى اللّه عليه و آله و سلّم قال: الا انّ مثل هذا الدّين كمثل شجرة ثابتة، الايمان اصلها و الزّكوة فرعها و الصّلوة مائها و القيام عروقها و حسن الخلق ورقها و الاخاء فى الدّين لقاحها و الحياء لحائها و الكفّ عن محارم اللّه ثمرتها فكما لا تكمل الشّجرة الّا بثمرة طيّبة كذلك لا يكمل الأيمان الّا بالكفّ عن محارم اللّه. «3» يعنى: آگاه باشيد بدرستى كه مثل اين دين، مانند درختى است ثابت، ايمان اصل آن، و زكات فرع آن، و نماز آب آن، و قيام به اوامر عروق آن، و حسن خلق برگ آن، و اخوت در دين بارآور آن، و حياء پوست آن، و كف از محرمات الهى ثمره آن. پس همچنان كه درخت كامل نمىشود مگر به ميوه طيبه، همچنين كامل نشود ايمان مگر به حفظ از محرمات الهى.
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| − | «1» بحار الانوار، جلد 69، صفحه 64، حديث 11.
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| − | «2» اصول كافى، جلد 2، كتاب الايمان و الكفر، صفحه 24، حديث 2 (روايت از امام باقر يا امام صادق عليهما السّلام)
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| − | «3» سفينة البحار، جلد 1، صفحه 688 (با اختلاف)
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج2، ص: 586
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ سَنُدْخِلُهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهَا الْأَنْهارُ خالِدِينَ فِيها أَبَداً وَعْدَ اللَّهِ حَقًّا وَ مَنْ أَصْدَقُ مِنَ اللَّهِ قِيلاً (122)
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| − | ترجمه
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| − | و آنانكه گرويدند و بجا آوردند كارهاى شايسته را زود باشد داخل نمائيم ايشانرا در بهشتهائيكه جارى ميباشد از كنارشان نهرها جاودانيان در آن هميشه وعده داده است خدا وعده حق و كيست راستگوتر از خدا در گفتار..
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| − | تفسير
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| − | قبلا مكرّر بيان شده است و ذيل آيه مفيد تاكيد بليغ است در صدق مواعيد الهى در مقابل مواعيد شيطان كه موجب خذلان است.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصّالِحاتِ سَنُدخِلُهُم جَنّاتٍ تَجرِي مِن تَحتِهَا الأَنهارُ خالِدِينَ فِيها أَبَداً وَعدَ اللّهِ حَقًّا وَ مَن أَصدَقُ مِنَ اللّهِ قِيلاً (122)
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| − | و كساني که ايمان آوردند و بصالحات عمل نمودند زود باشد که آنها را داخل
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| − | جلد 6 - صفحه 215
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| − | كنيم بهشتهايي که از پاي قصرها و زير درختان آنها جويهايي جاري باشد و اينها هميشه در آن بهشتها هستند ببودن ابدي وعده الهي حق است و كيست راستگوتر از خداوند.
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| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا ايمان تحقق پيدا نميكند مگر باعتقاد بجميع عقائد حقه مطابق مذهب شيعه اثني عشريه بدون انكار ضروريات دين و مذهب و بدون گذاردن بدعتي در دين و بدون ارتكاب اعمالي که باعث سلب ايمان ميشود، و در ايمان چهار امر معتبر است:
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| − | 1- يقين که اگر شك، شبهه، مظنه در يكي از اجزاء ايمان وارد شود ايمان زائل ميشود.
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| − | 2- اعتقاد يعني پا بر جا و دلبستگي و در بند بودن.
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| − | 3- قرار بجميع شراشر وجود قلبا و لسانا که مصداق وَ جَحَدُوا بِها وَ استَيقَنَتها أَنفُسُهُم نمل آيه 4، نباشد. 4- تسليم.
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| − | وَ عَمِلُوا الصّالِحاتِ مسلما مراد جميع صالحات نيست زيرا ممكن نيست كسي بتواند همه آنها را بجا آورد و نيز مسلما مراد اينکه نيست که جميع اعمالش صالح باشد زيرا حتي انبياء ترك اولي از آنها صادر شده و اينکه معني خصيصه محمّد و آل او صلّي اللّه عليه و آله و سلّم است بلكه مراد اينست که واجبات شرع را عمل كند و از محرمات اجتناب كند يا موفق بتوبه شود يا مورد مغفرت و شفاعت گردد يعني با ايمان و بدون گناه از دنيا رود.
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| − | سَنُدخِلُهُم جَنّاتٍ جمع جنة است و گذشت که هشت جنة داريم و بعيد نيست بگوئيم مراد باغات بسياريست که هر بهشتي در او هست الي ما شاء اللّه.
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| − | تَجرِي مِن تَحتِهَا الأَنهارُ مكرر توضيح داده شده خالِدِينَ فِيها أَبَداً كلمه ابدا تأكيد در خلود است و الا نفس خلود دلالتش بر تأبيد تمام است.
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| − | جلد 6 - صفحه 216
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| − | وَعدَ اللّهِ حَقًّا يعني بوعده عمل ميفرمايد زيرا خلف وعد قبيح است و از او محال است نه مثل وعدههاي شيطان که گفت وَعَدتُكُم فَأَخلَفتُكُم ابراهيم آيه 22 وَ مَن أَصدَقُ مِنَ اللّهِ قِيلًا و در جاي ديگر ميفرمايد وَ مَن أَصدَقُ مِنَ اللّهِ حَدِيثاً گذشت در همين سوره 87، و اينکه موضوع جزو عقائد است و مبناي تمام اصول دين است احتياج به بيان و دليل ندارد.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 122)
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| − | در آیات گذشته چنین خواندیم: کسانی که شیطان را ولیّ خود انتخاب کنند، در زیان آشکاری هستند، شیطان به آنها وعده دروغین می دهد و با آرزوها سرگرم می سازد، و وعده شیطان جز فریب و مکر نیست، در برابر آنها در این آیه سر انجام کار افراد با ایمان را بیان کرده، می فرماید: «و آنها که ایمان آوردند و عمل صالح انجام دادند به زودی در باغهایی از بهشت وارد می شوند که نهرها از زیر درختان آن می گذرد»
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| − | (وَ الَّذِینَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصّالِحاتِ سَنُدخِلُهُم جَنّاتٍ تَجرِی مِن تَحتِهَا الأَنهارُ). این نعمت همانند نعمتهای این دنیا زود گذر و ناپایدار نیست، بلکه «مؤمنان برای همیشه در آن خواهند ماند»
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| − | (خالِدِینَ فِیها أَبَداً). این وعده همانند وعده های دروغین شیطان نیست، بلکه «وعدهای است حقیقی و از ناحیه خدا» (وَعدَ اللّهِ حَقًّا). بدیهی است «هیچ کس نمی تواند صادقتر از خدا وعده ها و سخنانش باشد» (وَ مَن أَصدَقُ مِنَ اللّهِ قِیلًا). زیرا تخلّف از وعده، یا به خاطر ناتوانی است، یا جهل و نیاز، که تمام اینها از ساحت مقدّس او دور است.
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=4 |آیه=122}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |