|
|
| سطر ۴۶: |
سطر ۴۶: |
| | | | |
| | عمى: نابينا.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | | عمى: نابينا.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> |
| − | ==تفسیر آیه== | + | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="6" ayeh="104" /> |
| − | تفسیر نور=
| |
| | | | |
| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
| |
| | | | |
| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | قَدْ جاءَكُمْ بَصائِرُ مِنْ رَبِّكُمْ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ وَ مَنْ عَمِيَ فَعَلَيْها وَ ما أَنَا عَلَيْكُمْ بِحَفِيظٍ «104»
| |
| | | | |
| − | همانا از سوى پروردگارتان، مايههاى بينش و بصيرت، (كتب آسمانى و دلائل روشن) براى شما آمده است. پس هر كه بصيرت يافت، به سود خود اوست و هر كس كورى گزيد، به زيان خويش عمل كرده است و من نگهبان و ضامن (ايمان شما به اجبار) نيستم.
| |
| − |
| |
| − | ===نکته ها===
| |
| − |
| |
| − | از آيهى 95 تا اينجا در معرّفى خدا و انتقاد از شرك بود، اين آيه به منزلهى نتيجه و خلاصهى آيات گذشته است.
| |
| − |
| |
| − | جلد 2 - صفحه 524
| |
| − |
| |
| − | مشابه اين آيه در قرآن زياد است كه نتيجهى ايمان وكفر، خوبى وبدى، يا بصيرت وكوردلىِ انسان را متوجّه خود او مىداند. همچون:
| |
| − |
| |
| − | * «لَها ما كَسَبَتْ وَ عَلَيْها مَا اكْتَسَبَتْ» «1»
| |
| − |
| |
| − | * «مَنْ عَمِلَ صالِحاً فَلِنَفْسِهِ وَ مَنْ أَساءَ فَعَلَيْها» «2»
| |
| − |
| |
| − | * «إِنْ أَحْسَنْتُمْ أَحْسَنْتُمْ لِأَنْفُسِكُمْ وَ إِنْ أَسَأْتُمْ فَلَها» «3»
| |
| − |
| |
| − | ===پیام ها===
| |
| − |
| |
| − | 1- با نزول قرآن، راه عذرى بر هيچ كس باقى نمانده است. «قَدْ جاءَكُمْ بَصائِرُ»
| |
| − |
| |
| − | 2- مردم در انتخاب راه، آزادند. فَمَنْ أَبْصَرَ ... وَ مَنْ عَمِيَ
| |
| − |
| |
| − | 3- آگاه كردن مردم، از شئون ربوبيّت الهى است. «بَصائِرُ مِنْ رَبِّكُمْ»
| |
| − |
| |
| − | 4- سود ايمان و زيان كفر مردم، به خودشان برمىگردد نه خدا. فَلِنَفْسِهِ ... فَعَلَيْها
| |
| − |
| |
| − | 5- كيفر گروهى از مردم، نشانهى باطل بودن تعاليم انبيا نيست، بلكه نشانهى كوردلى خود آنان است. «وَ مَنْ عَمِيَ»
| |
| − |
| |
| − | 6- وظيفهى پيامبر، ابلاغ است نه اجبار. «ما أَنَا عَلَيْكُمْ بِحَفِيظٍ»
| |
| − | -----
| |
| − | «1». بقره، 286.
| |
| − |
| |
| − | «2». فصّلت، 46.
| |
| − |
| |
| − | «3». اسراء، 7.}}
| |
| − |
| |
| − | |-|
| |
| − | اثنی عشری=
| |
| − |
| |
| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
| |
| − |
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | قَدْ جاءَكُمْ بَصائِرُ مِنْ رَبِّكُمْ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ وَ مَنْ عَمِيَ فَعَلَيْها وَ ما أَنَا عَلَيْكُمْ بِحَفِيظٍ (104)
| |
| − |
| |
| − | بعد از ذكر آيات داله بر وحدانيت و كمال قدرت و علم، بيان رفع اعتذار فرمايد:
| |
| − |
| |
| − | قَدْ جاءَكُمْ بَصائِرُ مِنْ رَبِّكُمْ: بگو اى پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله به تحقيق آمد به شما بينات و دلائل ظاهره از جانب پروردگار شما و وضوح آن بر وجهى است كه گوئيا آن را مىتوان ديد فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ: پس هر كه ببيند حق را و تصديق آن نمايد بوسيله بصائر و تفكر در آن، پس نفع ايمان و تصديق مر او را باشد و فايده ثواب آن راجع به او شود وَ مَنْ عَمِيَ فَعَلَيْها: و هر كه كور شد قلب او از تدبر در حجج ظاهره و بدان سبب گمراه گرديد، پس ضرر و وبال آن بر او خواهد بود. و بگو اى پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله وَ ما أَنَا عَلَيْكُمْ بِحَفِيظٍ: و نيستم من بر شما نگهبان كه محافظت اعمال شما كنم و بر آن شما را جزا دهم، چه بر من فقط همين تبليغ است و حق تعالى حافظ اعمال شما و شما را مجازات خواهد داد. نزول «2» اين آيه قبل از امر قتال بود. و چون حضرت پيغمبر صلى اللّه عليه و آله به آن مأمور شد حفيظ شد بر آنها و ايشان را به اعمال و افعال قبيحه جزا داد كه آن قتل و اسيرى ايشان بود.
| |
| − |
| |
| − | تبصره- آيه شريفه «فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ وَ مَنْ عَمِيَ فَعَلَيْها» دليل است بر آنكه
| |
| − |
| |
| − | «1» نهج البلاغه، خطبه 177 (با اندكى تفاوت)
| |
| − |
| |
| − | «2» مجمع البيان ج 2 ص 346.
| |
| − |
| |
| − | تفسير اثنا عشرى، ج3، ص: 348
| |
| − |
| |
| − | بندگان مختارند در افعال خود به وجوهى: 1- بصيرت در بيّنات الهى كه موجب هدايت و كورى در آيات كه سبب ضلالت است، منوط به اختيار خود شخص مىباشد. 2- چون قوه فعل و ترك در شخص مساوى است، اختيار ثابت شود.
| |
| − |
| |
| − | 3- اگر جبر باشد، ثواب و عقاب در اعمال لغو خواهد بود.
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | روان جاوید=
| |
| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | قَدْ جاءَكُمْ بَصائِرُ مِنْ رَبِّكُمْ فَمَنْ أَبْصَرَ فَلِنَفْسِهِ وَ مَنْ عَمِيَ فَعَلَيْها وَ ما أَنَا عَلَيْكُمْ بِحَفِيظٍ (104)
| |
| − |
| |
| − | ترجمه
| |
| − |
| |
| − | بتحقيق آمد شما را موجبات بينائى از پروردگارتان پس كسيكه بينا شد پس بر نفع خود او است و كسيكه كور ماند پس بر ضرر او است و نيستم من بر شما نگهبان.
| |
| − |
| |
| − | تفسير
| |
| − |
| |
| − | پس از اقامه حجج وافيه و براهين كافيه بر توحيد و تنزيه ساحت الوهيّت پيغمبر اكرم صلى اللّه عليه و آله و سلم مأمور شد بآنكه مردم را متنبّه فرمايد كه حجّت بر شما تمام شد و موجبات بصيرت و بينائى از خداوند بشما واصل گرديد چون بصائر جمع بصيرت است كه آن بينائى قلب است و اطلاقش بر دليل و برهان براى آنستكه سبب بصيرت است پس كسيكه نور ايمان در قلب او جاى گير شد و پى بحق و حقيقت برد نفعش عائد خودش شده و ميشود و كسيكه كور باطن بود و از دريافت حق محروم شد و بضلالت و گمراهى باقيماند و بال و ضررش و اصل بخودش شده و ميشود و من كه پيغمبر شمايم حافظ و نگهبان شما نيستم وظيفه من ابلاغ و انذار بود كه ادا نمودم ديگر اختيار با خدا است كه شما را حفظ كند از شرّ عقائد و اعمالتان يا مجازات فرمايد بر طبق استحقاقتان در دنيا و آخرت.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | اطیب البیان=
| |
| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | 3
| |
| − |
| |
| − | قَد جاءَكُم بَصائِرُ مِن رَبِّكُم فَمَن أَبصَرَ فَلِنَفسِهِ وَ مَن عَمِيَ فَعَلَيها وَ ما أَنَا عَلَيكُم بِحَفِيظٍ (104)
| |
| − |
| |
| − | بتحقيق آمد براي شما اسباب بينايي و آگاهي و تنبّه از جانب پروردگار شما پس هر كس بينا و آگاه و متنبّه شد نفعش عائد خود او ميشود و هر كس كوركورانه از آنها گذشت دودش در چشم خودش ميرود و ضررش بخودش برميگردد و نيستم من موظف و مكلف بحفظ شما.
| |
| − |
| |
| − | جلد 7 - صفحه 160
| |
| − |
| |
| − | قَد جاءَكُم بَصائِرُ مِن رَبِّكُم در باب اصول دين گفتهايم ادلّه قطعيه براي اثبات آنها هشت قسم است هر كدام بجاي خود: 1- عقل مستقلّ براي اثبات صانع و توحيد و صفات آن و مسئله نبوت عامه و امامت عامه.
| |
| − |
| |
| − | 2- عقل غير مستقل که محتاج بضميمه خارجيه است مثل نبوت خاصه که باقامه معجزه يا اخبار معصوم ثابت ميشود.
| |
| − |
| |
| − | 3- نصّ قرآن مثل معاد جسماني. 4- نصّ خبر متواتر مثل امامة خاصه 5- ضرورت دين اسلام. 6- ضرورت مذهب. 7- نص خبر محفوف بقرائن قطعيه 8- اجماع قطعي.
| |
| − |
| |
| − | و مراد از بصائر اموريست که باعث تنبّه و بينايي باشد مثل همين آيات که ببيانات واضحه و ادلّه محكمه اثبات وجود صانع و توحيد او را ميكند غاية الامر تأثير آن در قلوب مشروط بقابليت محل که در مقام تحصيل معرفت باشد و خالي از عناد و عصبيت باشد که مفاد فَمَن أَبصَرَ است که روشنايي قلب و بينايي دل است البته تأثير ميكند و هدايت ميشود و رستگار ميگردد که مفاد فلنفسه است و نتائج دنيوي و اخروي نصيب او ميشود وَ مَن عَمِيَ چشم قلبش كور يا بواسطه كثرت معاصي يا توغّل در شهوات يا متابعت هواهاي نفساني يا عناد و عصبيت قلب از قابليت تأثير افتاده و كوركورانه بر اينکه ادله و آيات ميگذرد و حمل بر كذب و افتراء و امور ديگر ميكند که در حقّش صادق ميآيد صُمٌّ بُكمٌ عُميٌ فَهُم لا يَرجِعُونَ بقره آيه 17 فَهُم لا يَعقِلُونَ بقره آيه 166.
| |
| − |
| |
| − | فعليها ضرر و خسارت و عذاب ابدي و بليّات دنيوي متوجه بخود او است وَ ما أَنَا عَلَيكُم بِحَفِيظٍ من قدرت ندارم بر اجبار بايمان و بر دفع بليات و عقوبات لِيَهلِكَ مَن هَلَكَ عَن بَيِّنَةٍ وَ يَحيي مَن حَيَّ عَن بَيِّنَةٍ انفال آيه 44، و توهّم اينكه اينکه جمله نسخ شد بآيه جهاد توهّم فاسديست زيرا تكليف جهاد براي دفع
| |
| − |
| |
| − | جلد 7 - صفحه 161
| |
| − |
| |
| − | دشمن است از حريم اسلام مثل قطع عضو فاسد است از سرايت بسائر اعضاء نه براي اجبار بايمان و سلب اختيار است.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | برگزیده تفسیر نمونه=
| |
| − |
| |
| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | (آیه 104)
| |
| − |
| |
| − | '''وظیفه تو اجبار کردن نیست'''
| |
| − |
| |
| − | از این به بعد قرآن یک نوع خلاصه و نتیجه گیری از آیات گذشته می کند، نخست می گوید: «دلایل و نشانه های روشن در زمینه توحید و خداشناسی و نفی هرگونه شرک که مایه بصیرت و بینایی است برای شما آمد» (قَد جاءَکم بَصائِرُ مِن رَبِّکم).
| |
| − |
| |
| − | سپس برای این که روشن سازد این دلایل به قدر کافی حقیقت را آشکار می سازد و جنبه منطقی دارد، می گوید: «آنهایی که به وسیله این دلایل چهره حقیقت را بنگرند به سود خود گام برداشته اند، و آنها که همچون نابینایان از مشاهده آن خود را محروم سازند به زیان خود عمل کرده اند» (فَمَن أَبصَرَ فَلِنَفسِهِ وَ مَن عَمِیَ فَعَلَیها).
| |
| − |
| |
| − | و در پایان آیه از زبان پیغمبر صلّی اللّه علیه و آله می گوید: «من نگاهبان و حافظ شما نیستم» (وَ ما أَنَا عَلَیکم بِحَفِیظٍ).
| |
| − |
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − |
| |
| − | سایر تفاسیر=
| |
| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های فارسی==
| |
| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های عربی==
| |
| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=6 |آیه=104}}===
| |
| − | </tabber>
| |
| | | | |
| | ==پانویس== | | ==پانویس== |