آیه 192 سوره بقره: تفاوت بین نسخهها
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محتویات
ترجمه های فارسی
پس اگر دست (از شرک و ستم) بدارند (از آنها درگذرید که) خدا آمرزنده و مهربان است.
اگر از فتنه گری وجنگ بازایستند، یقیناً خدا بسیار آمرزنده و مهربان است.
و اگر بازايستادند، البته خدا آمرزنده مهربان است.
و اگر باز ايستادند، خدا آمرزنده و مهربان است.
و اگر خودداری کردند، خداوند آمرزنده و مهربان است.
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
انتهوا: انتهاء به معنى دست برداشتن از چيزى است و آن در واقع قبول نهى است.
الحرام: محترم، بقره/ 144. حرمات: محترمها.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
«192» فَإِنِ انْتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ
و اگر دست كشيدند، همانا خداوند آمرزنده و مهربان است.
نکته ها
در اينكه مشركان بايد از چه چيز دست بردارند تا بخشيده شوند، دو احتمال وجود دارد:
الف: از جنگ و فتنه. به دليل آيات قبل كه سخن از جنگ بود.
ب: از كفر. به دليل دريافت مغفرت الهى كه مخصوص مؤمنان است.
جلد 1 - صفحه 303
پیام ها
1- مسلمانان بايد آتشبس واقعى دشمنان را بپذيرند. «فَإِنِ انْتَهَوْا»
2- اسلام، راه بازگشت را حتّى براى كفّار باز گذارده است. «فَإِنِ انْتَهَوْا ...»
3- اگر كفّار دست از فتنه و جنگ برداشته و ايمان آوردند، آنان را به كارهاى قبل ملامت نكنيد. «فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ»
4- انسان بايد خود زمينهى دريافت رحمت الهى را بوجود آورد. «فَإِنِ انْتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ»
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




