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| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="78" ayeh="17" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كانَ مِيقاتاً «17» يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْواجاً «18» وَ فُتِحَتِ السَّماءُ فَكانَتْ أَبْواباً «19» وَ سُيِّرَتِ الْجِبالُ فَكانَتْ سَراباً «20»
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| − | همانا روز جدايى، وعدهگاه (ما با شما) است. روزى كه در صور دميده شود و گروه گروه مىآييد. و آسمان گشوده شود و به صورت درهايى باز درآيد. و كوهها روان شوند و چون سراب گردند.
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| − | ===نکته ها===
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| − | قيامت از جهتى «يوم الجمع» است كه همه در آن اجتماع مىكنند و از جهتى «يَوْمَ الْفَصْلِ» ناميده شده، زيرا خوبان از بدان و حق از باطل جدا و به اختلافات فيصله داده مىشود.
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| − | در روايات مىخوانيم كه در قيامت مردم به گروههاى مختلفى تقسيم مىشوند و هر گروه به شكلى؛ سخن چين در قيافه ميمون، حرامخوار در شكل خوك، رباخوار در قالب وارونه، قاضى ظالم به صورت كور، خودپسند كر و لال، عالم بى عمل در حال جويدن زبان، همسايه آزار بىدست و پا، سعايت كننده آويخته بر آتش، هوسباز بدبو، و فخر فروشان به لباس با لباس دوزخى محشور مىشوند. «1»
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| − | حركت كوهها مقدّمه به هم خوردن آنها و خرد شدن و ذره ذره شدن سنگها و در نهايت، روان شدن به گونهاى است كه از دور سراب به نظر آيند. «وَ سُيِّرَتِ الْجِبالُ فَكانَتْ سَراباً»
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- دنيا، مقدّمه قيامت است و اين همه نعمت عبث و بيهوده نيست. «إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كانَ مِيقاتاً»
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| − | «1». تفسير نورالثقلين.
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| − | جلد 10 - صفحه 363
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| − | 2- زمان قيامت از قبل نزد خداوند معلوم است. «كانَ مِيقاتاً»
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| − | 3- قيامت نيز نظامى دارد «يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ»
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| − | 4- در قيامت، نظام آسمان و زمين دگرگون مىشود. فُتِحَتِ السَّماءُ ... سُيِّرَتِ الْجِبالُ
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| − | 5- انسان با مرگ، رها و فراموش نمىشود. «يَوْمَ الْفَصْلِ كانَ مِيقاتاً»
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| − | 6- به پيوندها و روابط دنيوى دلخوش نباشيد كه روزى همه چيز گسسته مىشود. «يَوْمَ الْفَصْلِ»
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| − | 7- ارتباط زمين و آسمان و اهل آنها، در قيامت توسعه مىيابد. «فُتِحَتِ السَّماءُ»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كانَ مِيقاتاً «17»
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| − | إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ: بدرستى كه روز حكمگزارى كه روز رستخيز است، كان ميقاتا: هست در حكم خدا وقتى مقرر براى محاسبه خلايق و مجازات ايشان.
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كانَ مِيقاتاً «17» يَوْمَ يُنْفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْواجاً «18» وَ فُتِحَتِ السَّماءُ فَكانَتْ أَبْواباً «19» وَ سُيِّرَتِ الْجِبالُ فَكانَتْ سَراباً «20» إِنَّ جَهَنَّمَ كانَتْ مِرْصاداً «21»
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| − | لِلطَّاغِينَ مَآباً «22» لابِثِينَ فِيها أَحْقاباً «23» لا يَذُوقُونَ فِيها بَرْداً وَ لا شَراباً «24» إِلاَّ حَمِيماً وَ غَسَّاقاً «25» جَزاءً وِفاقاً «26»
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| − | إِنَّهُمْ كانُوا لا يَرْجُونَ حِساباً «27» وَ كَذَّبُوا بِآياتِنا كِذَّاباً «28» وَ كُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْناهُ كِتاباً «29» فَذُوقُوا فَلَنْ نَزِيدَكُمْ إِلاَّ عَذاباً (30)
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| − | ترجمه
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| − | همانا روز جدائى ميباشد وعده گاه
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| − | روزى كه دميده ميشود در صور پس ميآئيد دسته دسته
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| − | و گشوده شود آسمان پس بوده باشد درها
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| − | و روان كرده شوند كوهها پس گردند مانند سراب
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| − | همانا جهنّم ميباشد كمينگاه
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| − | براى سركشان جاى بازگشت
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| − | درنگ كنندگانند در آن روزگارهائى
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| − | نميچشند در آن خنكى و نه مشروبى
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| − | مگر آب جوشان و چرك جراحتها
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| − | كيفرى موافق كردارشان
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| − | همانا آنها احتمال نميدهند حسابى را
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| − | و تكذيب كردند آيات ما را تكذيب كردنى
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| − | و همه چيز را ضبط نموديم آنرا بنوشتن
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| − | پس بچشيد پس نمىافزائيم هرگز بر شما مگر عذاب را.
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| − | تفسير
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| − | خداوند متعال بعد از ذكر آيات قدرت و نعمت بىمنتهاى خود ميفرمايد همانا روز قيامت كه روز جدا شدن حق از باطل است حق است و نبايد در آن اختلاف شود چون قدرت خدا بيش از اينها است و كسيكه مردمى را خلق و وسائل آسايش آنانرا مهيّا نموده دو مرتبه هم ميتواند بنمايد و آنروز ميقات و وقت مقرّر الهى است براى حساب و جزاى بندگان كه دنيا در آنروز بآخر ميرسد و بزندگانى مردم در اينعالم خاتمه داده ميشود و آنروزى است كه اسرافيل در دفعه دوم ميدمد در صور پس شما مردم زنده و فوج فوج و دسته دسته در پيشگاه الهى حاضر ميگرديد در مجمع از پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله و سلّم نقل نموده كه در جواب سؤال از اين آيه فرمود كه ده دسته از امّت من از مسلمانان جدا شوند بعضى بصورت بوزينگان باشند و آنها نمّا مانند و بعضى بصورت خوكان و آنها حرام خوارانند و پارهاى نگونسار بمحشر كشيده ميشوند و آنان ربا خوارانند و جمعى كور تردّد مينمايند و آنها جور كنندگانند و فرقهاى لال و كرند و آنها كسانى هستند كه
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| − | جلد 5 صفحه 333
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| − | عجب به اعمال خود مينمودند و جماعتى ميجوند زبان بيرون افتاده خودشان را و ريم و چرك از دهانشان سرازير است و موجب نفرت اهل محشر ميشوند و آنها دانشمندان و حكم كنندگانى هستند كه اقوالشان با اعمالشان مخالف است و بعضى دست و پا بريده باشند و آنان كسانى هستند كه همسايه آزارى مينمايند و پارهاى بدار آتشين آويخته شدهاند و آنها كسانى هستند كه نزد پادشاهان از مردم سعايت مينمايند و بعضى از مردار بدبوترند و آنها شهوترانان و كسانى هستند كه حقوق الهيّه را ادا نمينمايند و پارهاى با جبّههاى چسبنده بر بدن از قطران وارد شوند و آنها اهل تكبّر و بزرگ منشى ميباشند و آسمان شكافته ميگردد و راههائى براى نزول ملائكه در آن باز ميشود و قمّى ره نقل فرموده كه درهاى بهشت باز ميگردد و كوهها از جاى خودشان كنده و پراكنده ميگردند و مانند سراب كه از دور در بيابان بنظر مىآيد كه آب است بنظر ميآيند كه كوهند ولى نيستند و جهنّم كمينگاهى است براى اهل معصيت كه مأمورين آن مترصد گرفتن آنانند واحدى از آنها را بحال خودشان واگذار نمينمايند و آن مرجع و مأوى و جايگاه اخير اهل طغيان و تجاوز از حدود الهى است و درنگ كنندگانند در آن روزگارهاى دراز و سالهاى متمادى كه هر روز آن بقدر هزار سال دنيا است چون احقاب جمع حقب است كه بمعناى روزگار و سال و سالها است و اخبار در تعيين آن در يك سال و هشتاد سال و شصت و اند سال و در آنكه مراد دوام يا انقطاع باشد مختلف شده است و ظاهرا اين آيه بهيچ يك دلالت ندارد ولى آيات آتيه مؤيّد دوام است و نمىچشند و نيابند در جهنّم چيز خنكى را اگر چه هواى لطيف باشد كه موجب تخفيف حرارت آنها گردد و قمّى ره فرموده مراد از برد خواب است و نمىچشند مشروبى از مشروبات را مگر آب جوشان و ريم و چرك جارى از بدن جهنّميان و تفسير آن در سوره ص گذشت اين جزا موافق و مطابق با عقائد و اعمال آنها است و زيادتر از ميزان استحقاق آنها نيست چون آنان در دنيا معتقد بحساب و جزا نبودند و احتمال چنين روزى را نميدادند و تكذيب نمودند آيات قرآنيّه و آيات الهيّه را كه انبيا و اوليا باشند تكذيب نمودنى آشكار و اين بزرگترين گناهان است كه
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| − | جلد 5 صفحه 334
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| − | مغفور نخواهد شد و موجب خلود در آتش است و ما هر چيز و هر گناه و مقدار جزاء آنرا در لوح محفوظ ثبت و ضبط نمودهايم و بكفّار ميگوئيم پس بچشيد عذاب جهنّم را و بدانيد كه هرگز نخواهيم افزود از براى شما چيزى مگر عذابى بر عذاب شما.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | إِنَّ يَومَ الفَصلِ كانَ مِيقاتاً «17»
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| − | محققا روز فصل هست وعدهگاه. گذشت معني فصل که بمعني جدايي است مقابل وصل كافر و مؤمن، مطيع و عاصي، ظالم و مظلوم، حق و باطل از هم جدا ميشوند چنانچه ميفرمايد: وَ امتازُوا اليَومَ أَيُّهَا المُجرِمُونَ يس آيه 59، و بمعني فصل قضا است که هر که محكوم بحكم الهي است.
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| − | إِنَّ يَومَ الفَصلِ روز قيامت در محكمه عدل الهي.
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| − | كانَ مِيقاتاً جايگاه شما و وعدهگاه که خداوند وعده داده که تمام جمع ميشوند در آنجا: قُل إِنَّ الأَوَّلِينَ وَ الآخِرِينَ لَمَجمُوعُونَ إِلي مِيقاتِ يَومٍ مَعلُومٍ واقعه آيه 48.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 17)- سر انجام روز موعود فرا میرسد در آیات قبل اشاراتی به دلایل مختلف معاد آمده بود، در این آیه به عنوان یک نتیجهگیری، میفرماید: «روز جدائی (روز رستاخیز) میعاد همگان است» (ان یوم الفصل کان میقاتا).
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| − | تعبیر به «یوم الفصل» تعبیر بسیار پرمعنائی است که بیانگر جدائیها در آن روز عظیم است:
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| − | جدائی حق از باطل.
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| − | جدائی صفوف مؤمنان صالح از مجرمان بدکار.
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| − | جدائی پدر و مادر از فرزند، و برادر از برادر.
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=78 |آیه=17}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |