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| سطر ۱۵: |
سطر ۱۵: |
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| | انصاریان= | | انصاریان= |
| − | و بر فرازتان هفت آسماناستوار بنا نهادیم، | + | و بر فرازتان هفت آسمان استوار بنا نهادیم، |
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| | فولادوند= | | فولادوند= |
| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="78" ayeh="12" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)=== | |
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ بَنَيْنا فَوْقَكُمْ سَبْعاً شِداداً «12» وَ جَعَلْنا سِراجاً وَهَّاجاً «13» وَ أَنْزَلْنا مِنَ الْمُعْصِراتِ ماءً ثَجَّاجاً «14» لِنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَ نَباتاً «15» وَ جَنَّاتٍ أَلْفافاً «16»
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| − | و بر فراز شما هفت (آسمان) استوار بنا كرديم. و (خورشيد را) چراغى فروزان قرار داديم. و از ابرهاى متراكم و فشرده، آبى فراوان فرو فرستاديم. تا بوسيله آن دانه و گياه و باغهاى پر درخت بيرون آوريم.
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| − | ===نکته ها===
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| − | «معصرات» از «عصر» به معناى فشردن، يا صفت ابرهاى بارانزاست كه گويا چنان خود را مىفشرند كه باران ببارند و يا صفت بادهايى كه ابرها را متراكم و فشرده مىسازد تا از آنها باران ببارد. «1»
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- خداوند اداره هستى را بر اساس يك نظام مشخص (نظام سببيّت و علّت و معلول) قرار داده است. (نور و حرارت خورشيد همراه با ابر و باران، عامل توليد دانه و گياه مىشود.) سِراجاً وَهَّاجاً ... ماءً ثَجَّاجاً لِنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَ نَباتاً
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| − | 2- قرآن، شعر نيست، امّا از آهنگ و موسيقى خاصّى برخوردار است. «وَهَّاجاً، ثَجَّاجاً، نَباتاً»
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| − | 3- اسباب و وسايل طبيعى، نبايد ما را از خداوند غافل كند. لِنُخْرِجَ بِهِ ...
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| − | «1». تفسير الميزان.
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| − | جلد 10 - صفحه 362
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| − | 4- خداوندى كه زمين مرده را با نزول باران به صورت بوستانى پر درخت در مىآورد، از زنده كردن مردگان عاجز نيست. لِنُخْرِجَ بِهِ ... جَنَّاتٍ أَلْفافاً
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ بَنَيْنا فَوْقَكُمْ سَبْعاً شِداداً «12»
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| − | وَ بَنَيْنا فَوْقَكُمْ: و بنا كرديم بالاى شما، سبعا شدادا: هفت آسمان محكم و استوار كه در آن فرجه و شكافى كه نشانه خلل و زلل باشد، نيست و به مرور و دهور در آن قصور و فطور پيدا نمىشود.
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| − | نعمت هشتم:
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمنِ الرَّحِيمِ
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| − | عَمَّ يَتَساءَلُونَ «1» عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ «2» الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ «3» كَلاَّ سَيَعْلَمُونَ «4»
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| − | ثُمَّ كَلاَّ سَيَعْلَمُونَ «5» أَ لَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهاداً «6» وَ الْجِبالَ أَوْتاداً «7» وَ خَلَقْناكُمْ أَزْواجاً «8» وَ جَعَلْنا نَوْمَكُمْ سُباتاً «9»
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| − | وَ جَعَلْنَا اللَّيْلَ لِباساً «10» وَ جَعَلْنَا النَّهارَ مَعاشاً «11» وَ بَنَيْنا فَوْقَكُمْ سَبْعاً شِداداً «12» وَ جَعَلْنا سِراجاً وَهَّاجاً «13» وَ أَنْزَلْنا مِنَ الْمُعْصِراتِ ماءً ثَجَّاجاً «14»
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| − | لِنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَ نَباتاً «15» وَ جَنَّاتٍ أَلْفافاً «16»
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| − | ترجمه
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| − | از چه سؤال ميكنند از يكديگر
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| − | از خبر بزرگى
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| − | كه آنان در آن اختلاف دارند
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| − | نه چنين است زود است كه بدانند
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| − | پس نه چنين است زود است كه بدانند
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| − | آيا قرار نداديم زمين را فرشى گسترده
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| − | و كوهها را ميخها
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| − | و آفريديم شما را جفتها مرد و زن
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| − | و قرار داديم خوابتان را آسايش
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| − | و قرار داديم شب را پوشش
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| − | و قرار داديم روز را وقت معيشت
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| − | و بنا كرديم بالاى سر شما هفت طبقه محكم
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| − | و قرار داديم چراغى درخشان
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| − | و فرو فرستاديم از ابرهاى متراكم بفشار بر يكديگر آب ريزان پى در پى را
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| − | تا بيرون آوريم بآن حبوبات و گياه را
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| − | و بوستانهائى كه بهم پيچيده باشد درختان آنها.
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| − | تفسير
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| − | گفتهاند بعد از بعثت حضرت ختمى مرتبت و اخبار او از توحيد خدا و حشر مردم در روز جزا و تلاوت آيات قرآن كفّار مكه از يكديگر بر سبيل تعجّب و انكار سؤال مينمودند كه اين چه سخنانى است محمّد ميگويد لذا خداوند براى اهميّت دادن بقضيّه و آنچه از آن سؤال مينمودند ميفرمايد از چه امر اين مردم از يكديگر سؤال ميكنند و بيان ميفرمايد از خبر بزرگى كه در آن اختلاف دارند و عمّ در اصل عن ما بوده نون قلب بميم و در ميم ادغام شده و الف براى اتّصال ما بحرف جرّ حذف شده و گفتهاند عمده نظر آنها باخبار پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله و سلّم از اوضاع
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| − | جلد 5 صفحه 331
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| − | قيامت بوده ولى در روايات ائمه اطهار نبأ عظيم بولايت امير المؤمنين عليه السّلام و وجود مبارك آنحضرت تفسير شده و آنكه نبأ و آيتى بزرگتر از او نيست و آنكه پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله و سلّم بآن تصريح نموده و ظاهرا نبأ عظيم شامل است تمام معارف حقّه را از توحيد و عدل و نبوّت و امامت و معاد روز قيامت و آنچه را مورد اختلاف است در بين مردم و در روايات بيان مصداق شده كه اختصاص بمعاد داده نشود و اختلاف در مقام امير المؤمنين عليه السّلام بيشتر از ساير معارف حقّه شده لذا با آنحضرت انسب است و بعدا خداوند منع فرموده سؤال از يكديگر را و به اشاره وعده مجازات بر آن داده چون فرموده نه چنين است كه تصوّر نمودهاند بعد از اين ميدانند كه حق است آنچه پيغمبر صلّى اللّه عليه و آله و سلّم از آن خبر داده و باز تأكيد فرموده اينمعنى را براى مبالغه و بكلمه ثمّ اشاره فرموده به اشدّيّت وعيد دوّم از اوّل و محتمل است اوّل اشاره ببعد از مرگ باشد و دوم اشاره بقيامت و بيان فرموده آيات توحيد و قدرت كامله خود را باين تقريب كه آيا قرار نداديم زمين را بساط گسترده مهيّا براى سكونت و آرامش و تصرّفات شما و نگردانيديم كوهها را ميخهاى محكم زمين تا متزلزل و متمايل به اطراف نگردد و آفريديم شما را جفتها مرد و زن تا با يكديگر مأنوس شويد و نسل شما در زمين باقى بماند و قرار داديم خواب شما را قاطع حس و حركت براى آسايش و استراحت و قرار داديم شب را براى شما مانند پوششى كه مستور دارد شما را از انظار يكديگر اگر بخواهيد از هم مخفى شويد و قمّى ره نقل فرموده كه قرار ميدهد شب را لباس براى روز و قرار داديم روز را وقت معيشت يعنى طلب معاش حلال براى شما و قرار داديم در بالاى سر شما هفت سقف محكم معظم مبرم را كه بمرور ايّام كهنه و خراب نگردد و قرار داديم خورشيد را چراغى پر نور و درخشان و با حرارت كه منافع آن بيشمار است و نازل نموديم از ابرهاى متراكم بفشار بر يكديگر باران شديد پى در پى را تا بيرون آوريم بسبب آن حبوباتى را كه ارزاق مردم است و روئيدنيهائى را كه خوراك حيوانات است و باغهائى را كه درختان سبز و خرّم آن سر در گريبان يكديگر كرده و بهم پيچيده شدهاند اينها همه براى آنستكه شما بوظائف خود عمل نمائيد و مستحق مقام
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| − | جلد 5 صفحه 332
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| − | برترى شويد.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | وَ بَنَينا فَوقَكُم سَبعاً شِداداً «12»
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| − | و بنا كرديم ما بالاي سر شما هفت طبقه آسماني که در بسياري از آيات ذكر سماوات سبع شده و شرح كردهايم و خلاصه اينكه: آنچه حكماء قديم گفتند که اينها فلزي هستند که سطح محدب هر يك مماس با سطح مقعر فوق است و تمام مماس با كرسي که فلك ثوابت گفتند و او مماس با عرش که فلك غير مكوكب و فلك اطلس نام نهادند و او تمام آنها را دور كره زمين ميچرخاند و تمام شمس و قمر و سيارات و ثوابت مثل ميخ در آنها كوبيده شده فسادش امروز ظاهر شده و آيات قرآني و اخبار آل اطهار بر ردش و بطلانش قائم بلكه اينها يك فضاء وسيعي است بترتيب فوق يكديگر و تمام اينکه ثوابت و سيارات در اينکه فضا سير مخصوصي دارند و تشكيل شب و
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| − | جلد 17 - صفحه 354
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| − | روز براي حركت زمين دور خود بحركت وضعي و تشكيل سال و ماه براي حركت انتقالي او است دور كره شمس و تمام اينکه كواكب در طبقه اول هستند بدليل قوله تعالي:
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| − | إِنّا زَيَّنَّا السَّماءَ الدُّنيا بِزِينَةٍ الكَواكِبِ و الصافات آيه 6، وَ زَيَّنَّا السَّماءَ الدُّنيا بِمَصابِيحَ فصلت آيه 12. و درين طبقات مخلوقاتي مثل ملائكه و بيت المعمور و سدره المنتهي و جنة المأوي و غير اينها که خود ميداند و بس، و شداد بمعني استحكام که هر كدام خردلي تخلف نميكنند و زياده و نقصان ندارند.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 12)- پس از زمین به «آسمان» پرداخته، میفرماید: «و بر فراز شما هفت (آسمان) محکم بنا کردیم» (و بنینا فوقکم سبعا شدادا).
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| − | عدد «هفت» در اینجا ممکن است عدد تکثیر و اشاره به کرات متعدد آسمان، و مجموعههای منظومهها و کهکشانها و عوالم متعدد جهان هستی باشد، که دارای خلقتی محکم و ساختمانی عظیم و قوی هستند و یا عدد تعداد. به این ترتیب که آنچه ما از ستارگان میبینیم همه به حکم آیه 6 سوره صافّات: «ما آسمان پایین را با ستارگان زینت بخشیدیم» متعلق به آسمان اول است و ماورای آن شش عالم و آسمان دیگر وجود دارد که از دسترس علم بشر بیرون است.
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=78 |آیه=12}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |