آیه 115 سوره صافات: تفاوت بین نسخهها
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نسخهٔ کنونی تا ۲۱ ژوئن ۲۰۲۶، ساعت ۱۶:۴۲
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محتویات
ترجمه های فارسی
و هر دو را با قومشان از بلای بزرگ (فرعونیان) نجات دادیم.
و آن دو نفر و قومشان را از اندوه بزرگ نجات بخشیدیم،
و آن دو و قومشان را از اندوه بزرگ رهانيديم.
آن دو و مردمشان را از رنجى بزرگ نجات بخشيديم.
و آن دو و قومشان را از اندوه بزرگ نجات دادیم!
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
- كرب: اندوه شديد. بعضى مطلق حزن مسلّط بر قلب گفتهاند، مراد از آن در آيه ظاهرا شكنجه فرعونيان است.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ لَقَدْ مَنَنَّا عَلى مُوسى وَ هارُونَ «114» وَ نَجَّيْناهُما وَ قَوْمَهُما مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ «115» وَ نَصَرْناهُمْ فَكانُوا هُمُ الْغالِبِينَ «116»
و به راستى ما بر موسى و هارون منّت نهاديم. و آن دو و قومشان را از اندوه بزرگ نجات داديم. و آنان را يارى كرديم، پس غالب آمدند (و پيروز شدند).
وَ آتَيْناهُمَا الْكِتابَ الْمُسْتَبِينَ «117» وَ هَدَيْناهُمَا الصِّراطَ الْمُسْتَقِيمَ «118» وَ تَرَكْنا عَلَيْهِما فِي الْآخِرِينَ «119»
و به آن دو كتاب روشنگر داديم. و آن دو را به راه راست هدايت كرديم.
و براى آن دو در ميان آيندگان (نام نيك) باقى گذاشتيم.
پیام ها
1- ياد الطاف الهى به پيامبران پيشين، سبب آرامش و دلگرمى و دلدارى پيامبر اسلام و مسلمانان در شرايط سخت مكّه است. «وَ لَقَدْ مَنَنَّا»
2- برطرف شدن فشارهاى روحى از بزرگترين نعمتهاى الهى است. مَنَنَّا ... نَجَّيْناهُما ... مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
3- مردان خدا زمانى از نگرانى راحت مىشوند كه قومشان نيز راحت باشند. «وَ نَجَّيْناهُما وَ قَوْمَهُما مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ»
4- كسى كه مورد لطف و نصرت خداوند قرار گيرد، قطعاً پيروز خواهد شد. «نَصَرْناهُمْ فَكانُوا هُمُ الْغالِبِينَ»
جلد 8 - صفحه 55
5- اول نجات از طاغوت، سپس دعوت به كتاب و راه خدا. نَجَّيْناهُما ... آتَيْناهُمَا الْكِتابَ الْمُسْتَبِينَ وَ هَدَيْناهُمَا
6- پيامها و مضامين تورات و ديگر كتب آسمانى، بسيار روشن و قابل فهم همگان است. «الْكِتابَ الْمُسْتَبِينَ»
7- سخنان و نوشتههاى مربوط به تبليغ دين، بايد روشن و روشنگر باشد. «الْكِتابَ الْمُسْتَبِينَ»
8- حتّى انبيا به راهنمايى خداوند نيازمندند. «هَدَيْناهُمَا الصِّراطَ الْمُسْتَقِيمَ»
9- نام نيك، يكى از پاداشهاى الهى در دنياست. «تَرَكْنا عَلَيْهِما فِي الْآخِرِينَ» در اين سوره از حضرت نوح در آيه 78 و از ابراهيم عليه السلام در آيه 107 و از موسى و هارون عليهما السلام در آيه 119 با بقاى نام نيك، تجليل شده است.
پانویس
- ↑ تفسير احسن الحديث، سید علی اکبر قرشی، ج9، ص171
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




