آیه 31 سوره انبیاء: تفاوت بین نسخهها
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رواسى: رسو: ثبوت و رسوخ. «رسا الشيء يرسو: ثبت». راسيه: ثابت. جمع آن راسيات و رواسى است. | رواسى: رسو: ثبوت و رسوخ. «رسا الشيء يرسو: ثبت». راسيه: ثابت. جمع آن راسيات و رواسى است. | ||
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تميد: ميد: اضطراب چيز بزرگ مثل اضطراب زمين. | تميد: ميد: اضطراب چيز بزرگ مثل اضطراب زمين. | ||
| − | طبرسى مطلق اضطراب گفته است و گويد: «الميد: الميل يمينا و شمالا و هو الاضطراب» | + | [[شیخ طبرسی|طبرسى]] مطلق اضطراب گفته است و گويد: «الميد: الميل يمينا و شمالا و هو الاضطراب». |
أَنْ تَمِيدَ بِكُمْ: مبادا شما را بالا و پائين ببرد. | أَنْ تَمِيدَ بِكُمْ: مبادا شما را بالا و پائين ببرد. | ||
| − | فجاجا: فج: راه وسيع. راغب گويد: فج شكافى است ميان دو كوه و در راه وسيع به كار رود، | + | |
| − | جمع آن فجاج است. به معنى راهها | + | فجاجا: فج: راه وسيع. [[راغب اصفهانی|راغب]] گويد: فج شكافى است ميان دو كوه و در راه وسيع به كار رود، |
| + | جمع آن فجاج است. به معنى راهها.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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| − | * [[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول | + | *[[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم |
| − | * [[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم | + | *[[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول |
| − | * [[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش | + | *[[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم |
| − | * [[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | + | *[[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش |
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محتویات
ترجمه های فارسی
و در روی زمین کوههای استوار قرار دادیم تا خلق را از اضطراب زمین حفظ کند، و نیز راهها در کوه و جادههای پهناور در زمین برای هدایت و راهیابی مردم مقرر فرمودیم.
و در زمین کوه های استوار پدید آوردیم تا زمین آنان را نلرزاند، و در آن راه هایی فراخ و گشاده قرار دادیم تا [به سوی اهداف خود] راه یابند.
و در زمين كوههايى استوار نهاديم تا مبادا [زمين] آنان [=مردم] را بجنباند، و در آن راههايى فراخ پديد آورديم، باشد كه راه يابند.
و بر زمين كوهها بيافريديم تا نلرزاندشان. و در آن راههاى فراخ ساختيم، باشد كه راه خويش بيابند.
و در زمین، کوههای ثابت و پابرجایی قرار دادیم، مبادا آنها را بلرزاند! و در آن، درّهها و راههایی قرار دادیم تا هدایت شوند!
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
رواسى: رسو: ثبوت و رسوخ. «رسا الشيء يرسو: ثبت». راسيه: ثابت. جمع آن راسيات و رواسى است.
تميد: ميد: اضطراب چيز بزرگ مثل اضطراب زمين. طبرسى مطلق اضطراب گفته است و گويد: «الميد: الميل يمينا و شمالا و هو الاضطراب». أَنْ تَمِيدَ بِكُمْ: مبادا شما را بالا و پائين ببرد.
فجاجا: فج: راه وسيع. راغب گويد: فج شكافى است ميان دو كوه و در راه وسيع به كار رود، جمع آن فجاج است. به معنى راهها.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ جَعَلْنا فِي الْأَرْضِ رَواسِيَ أَنْ تَمِيدَ بِهِمْ وَ جَعَلْنا فِيها فِجاجاً سُبُلًا لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ «31»
و در زمين، كوههاى ثابت و استوار قرار داديم تا (مبادا زمين) آنها (مردم) را بلرزاند و در لابلاى كوهها، (درهها و) راههاى فراخ پديد آورديم، شايد كه آنها راه يابند.
جلد 5 - صفحه 445
نکته ها
كلمهى «رَواسِيَ» جمع «راسيه» به معناى ثابت است و مقصود از آن در اين آيه، كوههاى پابرجا است. كلمهى «تَمِيدَ» از «ميد» به معناى اضطراب چيزهاى بزرگ است. كلمه «فجاج» نيز به راههاى پهن ميان دو كوه گفته مىشود، همانگونه كه راههاى باريك و تنگ بين كوهها «شعب» نام دارد. «1»
براى كوهها، فوائد بسيارى ذكر شده است، از جمله: نگهدارى برف و ذخيرهى آب براى تابستانها، جلوگيرى از تندبادهاى ناشى از جابجايى هوا، فراهم آوردن محيط مناسب براىپرورش گياهان و جانوران، بهرهدهى انواع سنگها براى بناى ساختمان، و ...
چگونه مىتوان باور كرد كه خداوند حكيم براى جلوگيرى از تزلزل زمين، كوهها را قرار داده است، امّا براى پيشگيرى از لغزش انسانها در برابر حوادث، اوليا و پيشوايان صبور و قوى قرار نداده باشد؟!
پیام ها
1- آفرينش كوهها تصادفى نيست، بلكه بر اساس تدبير الهى است. «جَعَلْنا»
2- كوهها مايهى آرامش زميناند. زمين بدون وجود كوه، به خاطر گازهاى درونى و موادّ مذابّ، در معرض لرزشهاى شديد قرار دارد. «رَواسِيَ أَنْ تَمِيدَ بِهِمْ»
3- در لابلاى موانع بزرگ نيز راههاى نجات وجود دارد. «جَعَلْنا فِيها فِجاجاً»
4- راههاى ميان كوهها، هم وسيله دستيابى به مناطق ديگر و هم عامل هدايت به حكمت الهى است. «لَعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ»
«1». قاموس.
تفسير نور(10جلدى)، ج5، ص: 446
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




