آیه 53 سوره حجر: تفاوت بین نسخهها
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| − | «الغلام: الطار الشارب» غلم و اغتلام به معنى هيجان شهوت است | + | غلام: جوان. جوانى كه موى شاربش روئيده است. |
| − | جوان را از آن غلام | + | «الغلام: الطار الشارب». غلم و اغتلام به معنى هيجان شهوت است. |
| + | جوان را از آن غلام گفته اند كه در حال طلب [[نکاح|نكاح]] است. (قاموس قرآن- غلم).<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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| − | * [[تفسیر نور]]، [[محسن قرائتی]]، [[تهران]]:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم | + | |
| − | * [[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم | + | *[[تفسیر نور]]، [[محسن قرائتی]]، [[تهران]]:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم |
| − | * [[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول | + | *[[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم |
| − | * [[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم | + | *[[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول |
| − | * [[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش | + | *[[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم |
| − | * [[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | + | *[[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش |
| + | *[[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | ||
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محتویات
ترجمه های فارسی
فرشتگان گفتند: هیچ مترس که ما آمدهایم تو را به پسری دانا بشارت دهیم.
گفتند: نترس که ما تو را به پسری دانا مژده می دهیم.
گفتند: «مترس، كه ما تو را به پسرى دانا مژده مىدهيم.»
گفتند: مترس، ما تو را به پسرى دانا بشارت مىدهيم.
گفتند: «نترس، ما تو را به پسری دانا بشارت میدهیم!»
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
«لا توجل»: نترس.
غلام: جوان. جوانى كه موى شاربش روئيده است. «الغلام: الطار الشارب». غلم و اغتلام به معنى هيجان شهوت است. جوان را از آن غلام گفته اند كه در حال طلب نكاح است. (قاموس قرآن- غلم).[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ نَبِّئْهُمْ عَنْ ضَيْفِ إِبْراهِيمَ «51»
و آنان را از (داستان) مهمانان ابراهيم خبر ده.
إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقالُوا سَلاماً قالَ إِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ «52»
آنگاه كه بر او وارد شده و سلام كردند، ابراهيم گفت: همانا ما از شما بيمناكيم.
قالُوا لا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلامٍ عَلِيمٍ «53»
گفتند: مترس كه ما تو را به فرزند پسرى دانا مژده مىدهيم.
قالَ أَ بَشَّرْتُمُونِي عَلى أَنْ مَسَّنِيَ الْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ «54»
ابراهيم گفت: آيا با اينكه پيرى به من رسيده، مرا چنين بشارتى مىدهيد؟ پس به چه چيز (عجيبى) بشارت مىدهيد.
قالُوا بَشَّرْناكَ بِالْحَقِّ فَلا تَكُنْ مِنَ الْقانِطِينَ «55»
(مهمانان) گفتند: ما تو را به حقيقت بشارت داديم، پس از نااميدان مباش!
قالَ وَ مَنْ يَقْنَطُ مِنْ رَحْمَةِ رَبِّهِ إِلَّا الضَّالُّونَ «56»
(ابراهيم) گفت: جز گمراهان چه كسى از رحمت پروردگارش مأيوس مىشود.
جلد 4 - صفحه 466
نکته ها
يكى از نمونههاى رحمت و غضب الهى، داستان ميهمانان حضرت ابراهيم عليه السلام است كه فرشتگان از يكسو بشارت فرزند به او دادند، و از سوى ديگر خبر هلاكت قوم لوط را.
«ضَيْفِ» هم به يك مهمان گفته مىشود و هم به چند مهمان.
خداوند يك بار به حضرت ابراهيم از كنيزش (هاجر) پسرى به نام اسماعيل داد و اين بشارت در مورد همسرش ساره است كه خداوند به او اسحاق داد. دربارهى اسماعيل فرمود: «بِغُلامٍ حَلِيمٍ» «1» و دربارهى اسحاق «بِغُلامٍ عَلِيمٍ» فرموده است.
پیام ها
1- از حوادث تلخ وشيرين تاريخ، درس بگيريم. «نَبِّئْهُمْ» (بهترين تاريخها زندگى انبيا و بهترين تاريخگويان نيز آن بزرگواران هستند)
2- گاهى ملائكه با اراده الهى، به صورت انسان درمىآيند و با او در تماس مىباشند. «ضَيْفِ إِبْراهِيمَ»
3- سلام كردن، يك ادب الهى در طول تاريخ بوده است. «فَقالُوا سَلاماً»
4- علم و شناخت انبيا، محدود و مشروط به اذن خداوند است. «إِنَّا مِنْكُمْ وَجِلُونَ» (حضرت ابراهيم در ابتدا آنها را نشناخت و ترسيد)
5- خبرهاى تلخ را همراه با خبرهاى شيرين بيان كنيم. «بشرنا» (به فرمودهى امام باقر عليه السلام شيرينى خبر فرزند براى جبران تلخى خبر هلاكت قوم لوط بود) «2»
6- تعجب از قدرت خداوند منافاتى با توحيد ندارد. «فَبِمَ تُبَشِّرُونَ» (در اينجا تعجب حضرت ابراهيم عليه السلام بيان شده و در سورهى هود تعجب همسرش ساره آمده است «أَ أَلِدُ وَ أَنَا عَجُوزٌ وَ هذا بَعْلِي شَيْخاً» «3»
7- انبيا به ادب الهى تربيت مىشوند. «فَلا تَكُنْ مِنَ الْقانِطِينَ»
8- عصمت انبيا، منافاتى با هشدارهاى الهى ندارد. «فَلا تَكُنْ مِنَ الْقانِطِينَ»
«1». صافات، 101.
«2». تفسير صافى.
«3». هود، 72.
جلد 4 - صفحه 467
9- همه جا نهى خدا، نشانه انجام شدن عملى خلاف نيست، گاهى نهىها براى پيشگيرى است. «فَلا تَكُنْ مِنَ الْقانِطِينَ»
10- يأس و نااميدى را با ياد رحمت و ربوبيّت خداوند درمان كنيم. «رَحْمَةِ رَبِّهِ»
11- كسانى كه به علم و قدرت و رحمت خداوند اطمينان دارند، هرگز مايوس نمىشوند. مَنْ يَقْنَطُ ... إِلَّا الضَّالُّونَ «1»
«1». يكى از مصاديق ضالين و گمراهان كه در نماز از آنها اعلام برائت مى كنيم افراد مايوس و ناءميد مى باشند.
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




