آیه 109 سوره اعراف: تفاوت بین نسخهها
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| + | ساحر:جادوگر. جمع آن ، سحره است.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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نسخهٔ کنونی تا ۲۱ ژوئن ۲۰۲۶، ساعت ۱۲:۰۸
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محتویات
ترجمه های فارسی
مهتران قوم فرعون گفتند که این شخص ساحری سخت ماهر و داناست.
اشراف و سران قوم فرعون گفتند: قطعاً این جادوگری [زبردست و] داناست.
سران قوم فرعون گفتند: «بىشك، اين [مرد] ساحرى داناست.»
مهتران قوم فرعون گفتند: اين جادوگرى است دانا.
اطرافیان فرعون گفتند: «بیشک، این ساحری ماهر و دانا است!
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
سحر: جادو. راغب گويد: سحر به چند معنى گفته مى شود. اول: حيله ها و تخيلات بى حقيقت است. رجوع شود به (بقره/ 102) ساحر:جادوگر. جمع آن ، سحره است.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ نَزَعَ يَدَهُ فَإِذا هِيَ بَيْضاءُ لِلنَّاظِرِينَ «108»
و (موسى) دست خود را (از گريبانش) بيرون آورد، پس ناگهان آن (دست) براى بينندگان سفيد و درخشان مىنمود.
قالَ الْمَلَأُ مِنْ قَوْمِ فِرْعَوْنَ إِنَّ هذا لَساحِرٌ عَلِيمٌ «109»
اشراف واطرافيان قوم فرعون گفتند: همانا موسى ساحرى بسيار ماهر وداناست.
پیام ها
1- پيامبران در كنار انذار (اژدها شدن عصا كه نوعى ترس و وحشت داشت)، بشارت و دست نورانى نشان مىدهند. «بَيْضاءُ» (در برابر متكبّر، ابتدا بايد غرور او را درهم شكست، آنگاه دست نوازش را نيز نشان داد.)
2- سفيد گشتن دست موسى، معجزهى ديگر آن حضرت و امرى غير منتظره و قابل رؤيت براى همگان بود. «فَإِذا هِيَ بَيْضاءُ لِلنَّاظِرِينَ»
3- اطرافيان طاغوتها، در جنايات آنان سهيماند. «قالَ الْمَلَأُ مِنْ قَوْمِ فِرْعَوْنَ»
4- اطرافيان، ضمن اقرار به عظمت كار حضرت موسى، بازهم تلاش مىكردند نظام فرعونى را حفظ كنند. «إِنَّ هذا لَساحِرٌ مُبِينٌ»
5- افراد مستكبرِ لجوج، در مواجهه با دليل و منطق و احتمال شكست، دست بهتوجيه زده و سرسختتر مىشوند. «إِنَّ هذا لَساحِرٌ عَلِيمٌ» ( «انّ» وحرف «لام» و جملهى اسميّه، نشانهى تأكيد است)
جلد 3 - صفحه 135
6- مخالفان سعى مىكنند با تهمت، چهرهى انبيا را خراب كنند. «لَساحِرٌ عَلِيمٌ»
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




