|
|
| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
| | | | |
| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="3" ayeh="126" /> |
| − | تفسیر نور=
| |
| | | | |
| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
| |
| | | | |
| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | «126» وَ ما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرى لَكُمْ وَ لِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُمْ بِهِ وَ مَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ
| |
| | | | |
| − | و خداوند اين (نزول فرشتگان) را جز مژده و بشارتى براى شما قرار نداد، تا دلهاى شما بدان آرام گيرد و (بدانيد كه) هيچ پيروزيى نيست مگر از جانب خداوند عزيز و حكيم.
| |
| − |
| |
| − | «1». صحيفه سجّاديه، دعاى سوّم.
| |
| − |
| |
| − | جلد 1 - صفحه 602
| |
| − |
| |
| − | ===پیام ها===
| |
| − |
| |
| − | 1- آرامش خاطر و اميد از نيازهاى رزمندگان در جبهه است. «بُشْرى لَكُمْ وَ لِتَطْمَئِنَّ»
| |
| − |
| |
| − | 2- تمام مقدّمات مادّى، علمى، روانى و انسانى، بدون ارادهى خداوند كارى از پيش نمىبرند. «وَ مَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ»
| |
| − |
| |
| − | 3- قدرت خداوند همراه با حكمت اوست. لذا ممكن است به دلايل خاصّى مسلمانان نيز شكست بخورند. «الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ»
| |
| − | }}
| |
| − |
| |
| − | |-|
| |
| − | اثنی عشری=
| |
| − |
| |
| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
| |
| − |
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | وَ ما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلاَّ بُشْرى لَكُمْ وَ لِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُمْ بِهِ وَ مَا النَّصْرُ إِلاَّ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ (126)
| |
| − |
| |
| − | وَ ما جَعَلَهُ اللَّهُ: و قرار نداد خداى تعالى نزول ملائكه را، إِلَّا بُشْرى لَكُمْ:
| |
| − |
| |
| − | مگر مژده و بشارتى براى شما به فتح و نصرت، وَ لِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُمْ بِهِ: و به جهت آنكه مطمئن فرمايد قلبهاى شما را به آن امداد، و ترس دشمنان را از خاطر شما بيرون برد. وَ مَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ: و نيست نصرتى و يارى مگر از جانب خدا، الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ: غالب است بر همه امور، و مغلوب نشود در حكم و فرمان خود. حكيم است در امور، يعنى نصرت و خذلان او، از روى حكمت و مصلحت باشد.
| |
| − |
| |
| − | تنبيه: در آيه شريفه اشاراتى است: 1- آنكه نصرت و غلبه از جانب قادر متعال است، نه به كثرت لشكر و اعداد اسباب و مهيّا بودن سلاح. 2- نصرت الهى مؤمنان را، محتاج به امداد ملائكه نبود، بلكه نزول ملائكه جهت بشارت مؤمنان و ثبات قلوب آنان بود، زيرا نظر عامه اغلب متوجه به اسباب مىباشد.
| |
| − |
| |
| − | تفسير اثنا عشرى، ج2، ص: 235
| |
| − |
| |
| − | 3- مؤمن حقيقى بايد يقين داشته باشد به نصرت الهى و اتكال و اطمينان به توجهات سبحانى، بنابراين باكى براى او نيست از ابتلائات؛ و لذا سرور مؤمنين حضرت امير المؤمنين عليه السّلام فرمايد: باك ندارم از آنكه من بر مرگ واقع شوم يا مرگ بر من وارد آيد. «1»
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | روان جاوید=
| |
| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | وَ ما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلاَّ بُشْرى لَكُمْ وَ لِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُكُمْ بِهِ وَ مَا النَّصْرُ إِلاَّ مِنْ عِنْدِ اللَّهِ الْعَزِيزِ الْحَكِيمِ (126)
| |
| − |
| |
| − | ترجمه
| |
| − |
| |
| − | و قرار نداد آن را خدا مگر بشارت و براى آنكه مطمئن شود دلهاى شما بآن و نيست نصرت مگر از نزد خداوند ارجمند درست كردار..
| |
| − |
| |
| − | تفسير
| |
| − |
| |
| − | اين امداد ملائكه نبود مگر براى بشارت مسلمين بفتح براى تسكين خاطر آنها از ترس و الا فتح و ظفر بعده وعده نيست بلكه منوط باراده الهى است كه توانا و غالب است و مغلوب نميشود و بر طبق حكمت و مصلحت هر جمعى را كه خواسته باشد ظفر ميدهد و هر قومى را اراده فرموده باشد مخذول و منكوب مى- فرمايد گويا ميخواهد بفرمايد حاجت بامداد ملائكه نبود لكن چون چشم مردم به اسباب ظاهرى است و از اسباب غيبيه نوعا غافلند براى خوشنودى آنها و دلگرمى و باك نداشتن از تخلف متخلفين از جهاد اين كمك فرستاده شد.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | اطیب البیان=
| |
| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | وَ ما جَعَلَهُ اللّهُ إِلاّ بُشري لَكُم وَ لِتَطمَئِنَّ قُلُوبُكُم بِهِ وَ مَا النَّصرُ إِلاّ مِن عِندِ اللّهِ العَزِيزِ الحَكِيمِ (126)
| |
| − |
| |
| − | و خداوند قرار نداد اينکه نزول ملائكه و مدد آنها را مگر براي بشارت شما مؤمنين و اينكه قلوب شما مطمئن شود باين جعل الهي و نصرتي نيست مگر از جانب خداوند عزيز حكيم.
| |
| − |
| |
| − | جلد 4 - صفحه 343
| |
| − |
| |
| − | اينکه آيه شريفه دلالت دارد بر اينكه خداوند قادر متعال موافق حكمت و مصلحت در مواقع خود شما را ميتواند نصرت كند و نزول ملائكه و امداد آنها شما را لزوم ندارد و احتياجي بآنها نداريد چنانچه در مواقع بسياري خداوند نصرت فرموده بدون انزال ملك و علّت انزال از جهت ضعف ايمان مسلمين بوده که بحس مشاهده كنند.
| |
| − |
| |
| − | و بشارت بفتح و فيروزي آنها و اطمينان قلب آنها که بالعيان و بالحسّ يك تأثير خاصّي دارد که از دليل و برهان علمي پيدا نميشود حتي مثل حضرت ابراهيم عليه السّلام با اينكه ايمان كامل باحياء موتي داشت مع ذلک تقاضا كرد که بالعيان مشاهده كند و عرض كرد رَبِّ أَرِنِي كَيفَ تُحيِ المَوتي قالَ أَ وَ لَم تُؤمِن قالَ بَلي وَ لكِن لِيَطمَئِنَّ قَلبِي بقره آيه 260.
| |
| − |
| |
| − | بلي پايه ايمان پيغمبر صلّي اللّه عليه و آله و سلّم و ائمه طاهرين بجايي رسيده که بمعاينه چيزي بر او افزوده نخواهد شد منسوب بامير المؤمنين عليه السّلام است که فرمود
| |
| − |
| |
| − | (لو كشف الغطاء ما ازددت يقينا)
| |
| − |
| |
| − | و منسوب بپيغمبر صلّي اللّه عليه و آله و سلّم است که فرمود اگر ايمان جنّ و انس را در يك كفه ميزان گذارند ايمان علي عليه السّلام بر آنها افزوده خواهد شد.
| |
| − |
| |
| − | وَ ما جَعَلَهُ اللّهُ جعل بمعني قرار داد است و مراد مقرر فرمودن نزول ملائكه است براي نصرت مؤمنين.
| |
| − |
| |
| − | إِلّا بُشري لَكُم که اينکه جعل نبود مگر براي دو چيز يكي بشارت پيغمبر صلّي اللّه عليه و آله و سلّم بشما که ملائكه آمدند و ميآيند براي امداد شما.
| |
| − |
| |
| − | و ديگر وَ لِتَطمَئِنَّ قُلُوبُكُم که بآرام دل و اطمينان تمام حمله كنيد بدشمنان دين و آنها را نابود كنيد فتح و ظفر نصيب شما است.
| |
| − |
| |
| − | وَ مَا النَّصرُ إِلّا مِن عِندِ اللّهِ و مع ذلک بدانيد که تا نصرت الهي نباشد اگر جنّ و انس و ملك مجتمع شوند قدرت بر انجام كوچكترين عملي ندارند.
| |
| − |
| |
| − | جلد 4 - صفحه 344
| |
| − |
| |
| − | العَزِيزِ الحَكِيمِ خداوند متعال هم قادر است که هر چه اراده كند همان ميشود إِنَّما أَمرُهُ إِذا أَرادَ شَيئاً أَن يَقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ يس آيه 82، و هم دانا و حكيم است که تمام كارهاي او از روي حكمت و مصلحت و بجا و بموقع است شما بايد از تحت فرمان او بيرون نرويد و در كليه امور باو توكل نمائيد.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | برگزیده تفسیر نمونه=
| |
| − |
| |
| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | ]
| |
| − |
| |
| − | (آیه 126)- «اما توجه داشته باشید که آمدن فرشتگان به یاری شما، تنها برای تشویق و بشارت و اطمینان خاطر و تقویت روحیه شماست، و گر نه پیروزی تنها از ناحیه خداوندی است که بر همه چیز قادر و در همه کار حکیم است» هم راه پیروزی را میداند و هم قدرت بر اجرای آن دارد (وَ ما جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْری لَکُمْ وَ لِتَطْمَئِنَّ قُلُوبُکُمْ بِهِ وَ مَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِنْدِ اللَّهِ الْعَزِیزِ الْحَکِیمِ).
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − |
| |
| − | سایر تفاسیر=
| |
| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های فارسی==
| |
| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های عربی==
| |
| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=3 |آیه=126}}===
| |
| − | </tabber>
| |
| | | | |
| | ==پانویس== | | ==پانویس== |