آیه 15 سوره اعراف: تفاوت بین نسخهها
مهدی موسوی (بحث | مشارکتها) |
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«منظرين»: مهلت داده شدگان.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | «منظرين»: مهلت داده شدگان.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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نسخهٔ کنونی تا ۲۱ ژوئن ۲۰۲۶، ساعت ۱۲:۲۵
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محتویات
ترجمه های فارسی
خدا فرمود: البته مهلت خواهی داشت.
خدا فرمود: البته تو از مهلت یافتگانی.
فرمود: «تو از مهلتيافتگانى.»
گفت: تو از مهلتيافتگانى.
فرمود: «تو از مهلت داده شدگانی!»
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
«منظرين»: مهلت داده شدگان.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
قالَ أَنْظِرْنِي إِلى يَوْمِ يُبْعَثُونَ «14»
(ابليس، به جاى توبه و عذرخواهى) گفت: تا روزى كه مردم برانگيخته مىشوند، مرا مهلت بده!
قالَ إِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِينَ «15»
جلد 3 - صفحه 30
نکته ها
خواستهى ابليس، مهلت تا روز قيامت بود و اين آيه مشخّص نمىكند كه تا چه زمانى به او مهلت داده شد؛ امّا از آيه 38 سورهى حجر و آيات 80 و 81 سورهى «ص» استفاده مىشود كه تنها براى مدّتى طولانى به او مهلت داده شد، نه تا روز قيامت: «إِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِينَ. إِلى يَوْمِ الْوَقْتِ الْمَعْلُومِ» برخى مىگويند: شيطان تا وقتى كه خدا صلاح بداند، زنده است. «1»
سؤال: چرا خداوند به ابليس مهلت داد؟
پاسخ: مهلت دادن به بدكاران، از سنّتهاى الهى و در مسير آزمايش و امتحان انسان است، علاوه بر آنكه بايد اسباب خير و شر فراهم باشد و انسان با اختيار، راهى را انتخاب كند. زيرا ابليس انسان را مجبور به انحراف نمىكند و تنها وسوسه مىكند، چنانكه در آيهى 22 سورهى ابراهيم آمده است. «وَ ما كانَ لِي عَلَيْكُمْ مِنْ سُلْطانٍ إِلَّا أَنْ دَعَوْتُكُمْ فَاسْتَجَبْتُمْ لِي»
گفت أنظرنى الى يوم الجزاء
كاشكى گفتى كه تب يا ربّنا
پیام ها
1- ابليس هم از خواستهى خود مأيوس نبود. «قالَ أَنْظِرْنِي»
2- شيطان نيز مىداند كه عمر، به اراده و به خواست خداست. «قالَ أَنْظِرْنِي»
3- هر عمر طولانى ارزشمند نيست، شيطان هم عمر طولانى دارد. «أَنْظِرْنِي إِلى يَوْمِ يُبْعَثُونَ»
4- ابليس، هم آفريدگار را مىشناخت، «خَلَقْتَنِي» هم معاد را قبول داشت. «يَوْمِ يُبْعَثُونَ»
5- گاهى خواستهى كافران هم پذيرفته مىشود. «قالَ إِنَّكَ مِنَ الْمُنْظَرِينَ»
«1». تفسير عيّاشى.
تفسير نور(10جلدى)، ج3، ص: 31
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




