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| سطر ۴۴: |
سطر ۴۴: |
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| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="3" ayeh="138" /> |
| − | تفسیر نور=
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| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
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| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
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| − | «138» هذا بَيانٌ لِلنَّاسِ وَ هُدىً وَ مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِينَ
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| − | اين (قرآن) براى همهى مردم بيانى روشنگر، ولى براى متّقين (وسيلهى) هدايت و پندآموزى است.
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| − | ===نکته ها===
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| − | كلمهى «هذا» يا اشاره به آيات 130 تا 137 است و يا اشاره به سنّتها و عبرتهاى تاريخ است كه در آيهى قبل آمده بود.
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| − | ===پیام ها===
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| − | 1- قرآن، قابل فهم براى همهى مردم، در هر عصرى است. «بَيانٌ لِلنَّاسِ»
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| − | 2- قرآن، براى همهى مردم، در همه زمانها و مكانهاست. «لِلنَّاسِ»
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| − | 3- با آنكه قرآن براى عموم مردم است، ولى تنها افراد پرهيزگار و متّقى پند پذير هستند. «مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِينَ»
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| − | 4- روحيّهى افراد در استفاده و بهرهمندى از آيات الهى مؤثّر است. «لِلْمُتَّقِينَ»
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| − | اثنی عشری=
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| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | هذا بَيانٌ لِلنَّاسِ وَ هُدىً وَ مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِينَ (138)
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| − | هذا بَيانٌ لِلنَّاسِ: آنچه گذشته از وقايع امم سابقه و نظر در عواقب امور آنان، دليلى است روشن، و بيانى است متقن براى مردمان. يا آنچه مذكور شد از بيان حال متقيان و مآل تائبان، بيانى است روشن براى همه مردمان. يا اين قرآن مجيد بيانى است آشكارا در سعادت و شقاوت و نجات و هلاكت براى عموم مردمان در هر عصر و زمان. وَ هُدىً: و راهنماست به طريق رشد و صلاح، وَ مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِينَ: و پندى است مشتمل به رغبت و رهبت براى پرهيزكاران، گرچه قرآن لطف است براى غير متقيان، لكن چون متقيان، به سمع قبول متعظ و مهتدى شوند نه غير آنها، لذا به ايشان مخصص گردانيد.
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| − | در كتاب كافى- كلينى رضوان اللّه عليه روايت نموده از حضرت صادق عليه السّلام: قال انّ هذا القرآن فيه منار الهدى و مصابيح الدّجى فليجل جال بصره و يفتح للضّياء نظره فانّ التّفكّر حياة قلب البصير كما يمشى المستنير فى الظّلمات بالنّور «1». فرمود: به تحقيق اين قرآن، در او است نشانههاى هدايت و چراغهاى تاريكيهاى ضلالت، پس بايد به حركت آورد قدر داننده و بزرگ شمارنده قرآن، ديدههاى خود را، و بازگرداند براى روشنائى حقايق، نظر و فكر خود را.
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| − | پس بدرستى كه تفكر، حيات قلب بينا است، چنانچه راه رود طالب نور در ظلمات به نور. (فرمايش تشبيه معقول به محسوس باشد، براى فهم مطلب).
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| − | «1» اصول كافى، جلد 2، كتاب فضل القرآن، باب اوّل، صفحه 600، حديث 5
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| − | تفسير اثنا عشرى، ج2، ص: 256
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| − | روان جاوید=
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| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | هذا بَيانٌ لِلنَّاسِ وَ هُدىً وَ مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِينَ (138)
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| − | ترجمه
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| − | اين بيان است از براى مردم و هدايت و وعظ است از براى پرهيز كاران..
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| − | تفسير
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| − | قرآن بيان و واضح كننده تمام حقائق است از براى مردم و هر كس بقدر فهم و استعداد خود از اين خرمن خوشه و ازين خوان توشه برميدارد و هدايت و موعظه و پند است از براى خصوص پرهيزكاران زيرا كه غير آنها قابليت استضائه از نور قرآن را ندارند اگر بخواهند در قرآن هم تدبر و تفكر كنند بجهات ديگر ميپردازند تا از غرضى كه قرآن براى آنغرض نازل شده كه هدايت و وعظ است منتفع نشوند و مستغرق در ماده و طبيعت گردند.
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| − | اطیب البیان=
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| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | هذا بَيانٌ لِلنّاسِ وَ هُديً وَ مَوعِظَةٌ لِلمُتَّقِينَ (138)
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| − | اينکه بيان و اظهار است از براي بشر و هدايت كننده و اندرز براي اهل تقوي هذا بعضي گفتند اشاره بقرآن است و بعضي گفتند اشاره بآيه قبل است که قَد خَلَت مِن قَبلِكُم الاية باشد.
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| − | و تحقيق كلام اينست که اگر اينکه آيه مستقله باشد و مربوط بآيات قبل نيست ممكن است راجع بقرآن باشد لكن خلاف ظاهر آيه است سيّما كلمه هذا که اشاره بقريب است و ذكري از قرآن نشده بلكه ظاهر اينکه است که اشاره بآيات قبل باشد از آيه شريفه يا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا تا آيه قَد خَلَت نه خصوص آيه قبل، و اللّه العالم.
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| − | بَيانٌ لِلنّاسِ نظر به اينكه احكام اسلام بر سر تا سر دنيا تا دامنه قيامت است بيان بر جميع افراد بشر است لكن كساني که بهرهبرداري ميكنند و از اينکه بيانات هدايت ميشوند که مفاد أَطِيعُوا اللّهَ وَ أَطِيعُوا الرَّسُولَ و سارِعُوا و الَّذِينَ يُنفِقُونَ تا وَ اللّهُ يُحِبُّ المُحسِنِينَ است، و پند و اندرز ميگيرند که مفاد لا تَأكُلُوا الرِّبَوا و مفاد وَ الَّذِينَ إِذا فَعَلُوا فاحِشَةً است خصوص اهل تقوي هستند لذا ميفرمايد هدي که هدايت ميشوند و بدستورات الهي عمل ميكنند و بسعادت نائل ميشوند از اتيان بواجبات و مستحبات و تكميل عقائد و تحصيل اخلاق حميده.
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| − | و موعظة و پند ميگيرند بترك محرمات و ازاله اخلاق رذيله و دوري از عقائد فاسده و مذاهب باطله.
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| − | للمتقين اختصاص باهل تقوي دارد و غير آنها بهرهبرداري نميكنند.
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| − | برگزیده تفسیر نمونه=
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| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
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| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
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| − | (آیه 138)- در این آیه میگوید: «آنچه در آیات فوق گفته شد بیانیه روشنی است برای همه انسانها و وسیله هدایت و اندرزی است برای همه پرهیزکاران» (هذا بَیانٌ لِلنَّاسِ وَ هُدیً وَ مَوْعِظَةٌ لِلْمُتَّقِینَ).
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| − | یعنی در عین این که این بیانات جنبه همگانی و مردمی دارد تنها پرهیزکاران و افراد با هدف از آن الهام میگیرند و هدایت میشوند.
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| − | سایر تفاسیر=
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| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
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| − | ==تفسیر های فارسی==
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| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==تفسیر های عربی==
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| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=3 |آیه=138}}===
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| − | </tabber>
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| | ==پانویس== | | ==پانویس== |