آیه 41 سوره ذاریات: تفاوت بین نسخهها
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| − | + | *'''عقيم''': نازا: بادى كه از آوردن خير عقيم است، عقم در اصل به معنى خشكيدن مىباشد.<ref>تفسير احسن الحديث، سید علی اکبر قرشی، ج10، ص347</ref> | |
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محتویات
ترجمه های فارسی
و نیز در قوم عاد که بر هلاکشان تندباد خزان فرستادیم (عبرت خلق است).
و [نیز] در [سرگذشت قوم] عاد هنگامی که بر آنان باد هلاک کننده ای فرستادیم [عبرتی است.]
و در [ماجراى] عاد [نيز]، چون بر [سر] آنها آن باد مُهلِك را فرستاديم.
و نيز عبرتى است در قوم عاد آنگاه كه باد عقيم را بر آنها فرستاديم.
و (همچنین) در سرگذشت «عاد» (آیتی است) در آن هنگام که تندبادی بیباران بر آنها فرستادیم،
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
- عقيم: نازا: بادى كه از آوردن خير عقيم است، عقم در اصل به معنى خشكيدن مىباشد.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ فِي عادٍ إِذْ أَرْسَلْنا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ «41»
و در (سرگذشت) قوم عاد نيز آنگاه كه بر آنان باد نازا (ويرانگر) فرستاديم (عبرت و نشانههايى است).
ما تَذَرُ مِنْ شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ «42»
(اين باد) هيچ چيزى را كه بر آن مىوزيد باقى نمىگذاشت مگر آنكه آن را خرد و تباه مىكرد.
جلد 9 - صفحه 261
نکته ها
پيامبر قوم عاد، حضرت هود بود كه هرچه قومش را هشدار داد به سخنان او اعتنايى نكردند و زمينه نزول عذاب را فراهم ساختند.
بادها، گاهى زاينده و عامل رويش مىباشند «أَرْسَلْنَا الرِّياحَ لَواقِحَ» «1»، «يُرْسِلَ الرِّياحَ مُبَشِّراتٍ» «2» و گاهى نازا و وسيلهى ريزش و ويرانگرى هستند. «الرِّيحَ الْعَقِيمَ» يعنى باد ويرانگر. بادى كه عامل عذاب قوم عاد بود، به قدرى سوزنده و مسموم كننده بود كه انسان، حيوان، گياه و هر چه را در مسيرش قرار داشت، نابود مىكرد.
«رميم» به معناى پوسيدگى است و «ترميم» يعنى اصلاح پوسيدگى.
با اينكه قوم عاد بسيار نيرومند و بلند قامت بودند، ولى بادى كه از قهر الهى وزيد، آنان را مثل استخوان پوسيده خرد و شكننده كرد.
پیام ها
1- پديدههاى طبيعى همچون باد و باران و آثار مثبت و منفى آنها به دست خداست. «أَرْسَلْنا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ»
2- بلاياى طبيعى همچون خشكسالى و قحطى، مىتواند عذاب الهى باشد. ما تَذَرُ مِنْ شَيْءٍ ... جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ
3- آب و باد، لشگر خدا در برابر ظالمان است. فَنَبَذْناهُمْ فِي الْيَمِ ... الرِّيحَ الْعَقِيمَ
پانویس
- ↑ تفسير احسن الحديث، سید علی اکبر قرشی، ج10، ص347
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




