آیه 30 سوره زخرف: تفاوت بین نسخهها
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==معانی کلمات آیه== | ==معانی کلمات آیه== | ||
| − | «الْحَقُّ»: قرآن | + | «الْحَقُّ»: قرآن. |
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محتویات
ترجمه های فارسی
و چون حق به سوی آنها آمد گفتند: این (قرآن) سحر است و ما به (وحی بودن) آن ایمان نداریم.
و هنگامی که حق به سویشان آمد، گفتند: این جادوست و ما به آن کافریم،
و چون حقيقت به سويشان آمد، گفتند: «اين افسونى است و ما منكر آنيم.»
چون حق بر آنها آشكار شد گفتند: اين جادوست و ما بدان ايمان نمىآوريم.
هنگامی که حق به سراغشان آمد؛ گفتند: «این سحر است، و ما نسبت به آن کافریم»!
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
«الْحَقُّ»: قرآن.
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
بَلْ مَتَّعْتُ هؤُلاءِ وَ آباءَهُمْ حَتَّى جاءَهُمُ الْحَقُّ وَ رَسُولٌ مُبِينٌ «29»
(من نه تنها مشركان را هلاك نكردم) بلكه آنان و پدرانشان را كامياب كردم تا آن كه حقّ (قرآن) و پيامبرى آشكار به سراغشان آمد.
وَ لَمَّا جاءَهُمُ الْحَقُّ قالُوا هذا سِحْرٌ وَ إِنَّا بِهِ كافِرُونَ «30»
جلد 8 - صفحه 449
و چون حقّ به سراغشان آمد، گفتند: اين سحر است و ما به آن كفر مىورزيم.
وَ قالُوا لَوْ لا نُزِّلَ هذَا الْقُرْآنُ عَلى رَجُلٍ مِنَ الْقَرْيَتَيْنِ عَظِيمٍ «31»
و گفتند: چرا اين قرآن بر مردى بزرگ (از نظر جاه و مال) از دو قريه (مكّه و طائف) نازل نشده است.
نکته ها
بعضى كفّار توقّع نابجا داشتند و مىگفتند: چون فلانى ثروتمند است پس وحى بايد به او نازل مىشد، در حالى كه برترى مادى دليل برترى معنوى نيست.
مكّه و طائف دو شهر مهم اعراب حجاز در عصر بعثت بود.
پیام ها
1- سنّت خداوند كامياب كردن مؤمن و كافر و مهلت دادن به همهى مردم است. «مَتَّعْتُ هؤُلاءِ وَ آباءَهُمْ»
2- براى اتمام حجّت هم كتاب لازم است و هم رهبر. «جاءَهُمُ الْحَقُّ وَ رَسُولٌ مُبِينٌ»
3- قرآن داراى، سخن سراسر حقّ و حقيقت است. «جاءَهُمُ الْحَقُّ»
4- تبليغ دين و رسالت بايد روشن و رسا باشد. «رَسُولٌ مُبِينٌ»
5- تأثير قرآن بر جان و دل كفّار به حدّى بود كه آن را سحر و جادو مىخواندند. «هذا سِحْرٌ»
6- انسان ذاتاً توجيهگر است. كفّار تهمت سحر مىزدند تا كفر خود را توجيه كنند. «هذا سِحْرٌ وَ إِنَّا بِهِ كافِرُونَ»
7- بهانهگيران هر لحظه حرفى مىزنند، يك بار مىگويند: قرآن سحر است و يك بار مىگويند: چرا قرآن به فلانى نازل نشد. هذا سِحْرٌ ... لَوْ لا نُزِّلَ
8- بزرگى، نزد عدّهاى از مردم داشتن مال و عنوان است. رَجُلٍ ... عَظِيمٍ
تفسير نور(10جلدى)، ج8، ص: 450
پانویس
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




