آیه 14 سوره مریم: تفاوت بین نسخهها
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| − | لذا به خوبى وسيع برّ (به كسر باء) و به بسيار نيكوكار برّ (به فتح باء) | + | لذا به خوبى وسيع برّ (به كسر باء) و به بسيار نيكوكار برّ (به فتح باء) گفته اند ([[قاموس قرآن قرشی (کتاب)|قاموس قرآن]]). |
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| + | جبارا: اين كلمه در [[خدا]] به معنى مصلح و در انسان به معنى ستمگر است، | ||
چون معناى اوّلى جبر، اصلاح شىء به نوعى از قهر است، | چون معناى اوّلى جبر، اصلاح شىء به نوعى از قهر است، | ||
در انسان معناى قهر و تحميل اخذ شده و در خدا معناى اصلاح. | در انسان معناى قهر و تحميل اخذ شده و در خدا معناى اصلاح. | ||
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| + | عصيا: عصيان: نافرمانى. «عصى عصيانا: خرج عن الصاعة». عصى (بر وزن شريف): نافرمان.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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| − | * [[تفسیر نور]]، [[محسن قرائتی]]، [[تهران]]:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم | + | |
| − | * [[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم | + | *[[تفسیر نور]]، [[محسن قرائتی]]، [[تهران]]:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم |
| − | * [[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول | + | *[[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم |
| − | * [[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم | + | *[[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول |
| − | * [[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش | + | *[[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم |
| − | * [[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | + | *[[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش |
| + | *[[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | ||
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محتویات
ترجمه های فارسی
و هم در حق پدر و مادر خود بسیار نیکوکار بود و هرگز به احدی ستم نکرد و معصیت خدا را مرتکب نگردید.
و به پدر و مادرش نیکوکار بود و سرکش و نافرمان نبود.
و با پدر و مادر خود نيكرفتار بود و زورگويى نافرمان نبود.
به پدر و مادر نيكى مىكرد و جبار و گردنكش نبود.
او نسبت به پدر و مادرش نیکوکار بود؛ و جبّار (و متکّبر) و عصیانگر نبود!
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
برا: برّ: نيكوكار. برّ در اصل به معنى خشكى است، خشكى توأم با وسعت است. لذا به خوبى وسيع برّ (به كسر باء) و به بسيار نيكوكار برّ (به فتح باء) گفته اند (قاموس قرآن).
جبارا: اين كلمه در خدا به معنى مصلح و در انسان به معنى ستمگر است، چون معناى اوّلى جبر، اصلاح شىء به نوعى از قهر است، در انسان معناى قهر و تحميل اخذ شده و در خدا معناى اصلاح.
عصيا: عصيان: نافرمانى. «عصى عصيانا: خرج عن الصاعة». عصى (بر وزن شريف): نافرمان.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
وَ بَرًّا بِوالِدَيْهِ وَ لَمْ يَكُنْ جَبَّاراً عَصِيًّا «14»
و نسبت به پدر ومادرش نيكوكار بود و (نسبت به مردم، زورگويى) سركش و نافرمان نبود.
وَ سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَ يَوْمَ يَمُوتُ وَ يَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا «15»
و سلامى (شايسته) بر او باد روزى كه متولّد شد و روزى كه مىميرد و روزى كه زنده برانگيخته مىشود.
نکته ها
خداوند در اين آيات، اوصاف گوناگونى را درباره حضرت يحيى برشمرده است: او در پيشگاه خداوند پرهيزكار بود، «تَقِيًّا» نسبت به والدين نيكوكار بود، «بَرًّا» و در برابر مردم، سركش
جلد 5 - صفحه 252
و عصيانگر نبود. «1» «لَمْ يَكُنْ جَبَّاراً عَصِيًّا»
مراد از سلامت هنگام مرگ، سلامت عقيده و با ايمان مردن است.
پیام ها
1- مقام و منصب، ما را از ياد والدين غافل نكند، پيامبر هم بايد نسبت به والدين نيكى كند. «وَ بَرًّا بِوالِدَيْهِ»
2- نيكى به پدر ومادر، نمودار تقواى الهى است. «كانَ تَقِيًّا وَ بَرًّا بِوالِدَيْهِ»
3- آن نيكى به والدين مورد ستايش است كه در آن هيچ گونه نافرمانى و سلطهجويى نباشد. «بَرًّا بِوالِدَيْهِ وَ لَمْ يَكُنْ جَبَّاراً عَصِيًّا»
4- ترك نيكى به والدين، نشانهى عصيان و سركشى است. «وَ لَمْ يَكُنْ جَبَّاراً عَصِيًّا»
5- سلام و درود فرستادن بر اولياى خدا مخصوص زمان حيات آنان نيست. سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَ يَوْمَ يَمُوتُ وَ يَوْمَ ...
6- سلام كردن، نشانهى كوچكى نيست، زيرا خداى بزرگ هم سلام مىكند. «سَلامٌ عَلَيْهِ»، «سَلامٌ عَلى إِبْراهِيمَ» «2» و «سَلامٌ عَلى مُوسى وَ هارُونَ» «3»
7- يحيى تمام فراز و نشيبها را با سلامتِ دين و ايمان به خدا سير كرد. سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَ يَوْمَ يَمُوتُ وَ ...
8- گراميداشتِ روز تولّد و يادبود روز وفاتِ اولياى خدا، امرى قرآنى است. سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَ يَوْمَ يَمُوتُ وَ ...
9- خواندن زيارتنامه كه سلام بر اولياى خدا در طول زندگى آنهاست، امرى قرآنى است. سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَ يَوْمَ يَمُوتُ وَ ...
10- كليد سالم زندگى كردن و سالم مردن و سلامتى در قيامت، تقوا، نيكى به والدين و پرهيز از گناه و طغيان است. كانَ تَقِيًّا وَ بَرًّا بِوالِدَيْهِ وَ لَمْ يَكُنْ جَبَّاراً عَصِيًّا وَ سَلامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ ...
«1». تفسير الميزان.
«2». صافّات، 109.
«3». صافّات، 120.
تفسير نور(10جلدى)، ج5، ص: 253
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




