آیه 66 سوره حجر: تفاوت بین نسخهها
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| + | قضينا: قضاء فيصله دادن به امر، قولى باشد يا فعلى، از خدا باشد يا از بشر و نيز به معنى صنع، حتم و بيان آيد. | ||
| + | آن در آيه، به معنى اعلام و خبر دادن است. قَضَيْنا إِلَيْهِ: به او اعلام كردم و خبر داديم.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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| − | * [[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول | + | *[[اطیب البیان فی تفسیر القرآن]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم |
| − | * [[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم | + | *[[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول |
| − | * [[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش | + | *[[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم |
| − | * [[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | + | *[[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش |
| + | *[[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم | ||
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محتویات
ترجمه های فارسی
و بر او این فرمان را وحی کردیم که قومت تا آخرین افراد، صبحگاه هلاک میشوند.
ما [کیفیت] این حادثه [بزرگ] را به او وحی کردیم که هنگامی که مجرمان وارد صبح شوند، بنیادشان برکنده خواهد شد.
و او را از اين امر آگاه كرديم كه ريشه آن گروه صبحگاهان بريده خواهد شد.
و براى او حادثه را حكايت كرديم كه چون صبح فرارسد ريشه آنها بركنده شود.
و ما به لوط این موضوع را وحی فرستادیم که صبحگاهان، همه آنها ریشهکن خواهند شد.
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
«دابر»: آخر و ريشه.
قضينا: قضاء فيصله دادن به امر، قولى باشد يا فعلى، از خدا باشد يا از بشر و نيز به معنى صنع، حتم و بيان آيد. آن در آيه، به معنى اعلام و خبر دادن است. قَضَيْنا إِلَيْهِ: به او اعلام كردم و خبر داديم.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
قالُوا بَلْ جِئْناكَ بِما كانُوا فِيهِ يَمْتَرُونَ «63»
(فرشتگان) گفتند: در واقع ما آنچه را (از نزول عذاب كه) دربارهاش ترديد داشتند، براى تو آوردهايم
وَ أَتَيْناكَ بِالْحَقِّ وَ إِنَّا لَصادِقُونَ «64»
و ما به حقّ نزد تو آمدهايم و قطعاً ما راستگويانيم.
فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ وَ اتَّبِعْ أَدْبارَهُمْ وَ لا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ وَ امْضُوا حَيْثُ تُؤْمَرُونَ «65»
پس خاندانت را پاسى از شب (گذشته) حركت بده و خودت از پشت سرشان برو و هيچيك از شما (به پشت سرش) توجّه نكند به آنجا كه مأمور شدهايد برويد.
وَ قَضَيْنا إِلَيْهِ ذلِكَ الْأَمْرَ أَنَّ دابِرَ هؤُلاءِ مَقْطُوعٌ مُصْبِحِينَ «66»
وبه لوط اين امر حتمى را رسانديم كه ريشه و بن اين گروهِ (تبهكار)، صبحگاهان قطع شده است.
نکته ها
قرآن بارها مطرح كرده كه كفّار، تعجيل قهر و عذاب الهى را از انبيا درخواست مىكردند و
جلد 4 - صفحه 470
مىگفتند: «فَأْتِنا بِما تَعِدُنا إِنْ كُنْتَ مِنَ الصَّادِقِينَ» «1» و تمام هشدارها را شوخى گرفته و در مورد قهر خداوند چه در دنيا و چه در آخرت ترديد داشتند، خداوند در اين آيات بيان مىكند كه قهر مورد ترديد كفّار قطعاً خواهد آمد.
«قطع» جمع «قطعه» به قسمت عمدهى شب كه گذشته باشد، گفته مىشود.
پیام ها
1- هشدارها وتهديدهاى الهى را شوخى نگيريد. «جِئْناكَ»
2- كيفرهاى الهى بر اساس عدل و حقّ و استحقاق مجرمان است. «بِالْحَقِّ»
3- از غفلت كفّار براى نجات مؤمنان استفاده كنيد. «فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ»
4- حركت انبيا، زير نظر وفرمان خداوند است. «تُؤْمَرُونَ»
5- در حوادث مهم لطف خدا لحظه به لحظه امداد مىكند. (هجرت در چه زمانى: «بِقِطْعٍ مِنَ اللَّيْلِ» با چه افرادى: «بِأَهْلِكَ» با چه روشى: «لا يَلْتَفِتْ مِنْكُمْ أَحَدٌ» وبه چه مقصدى: «حَيْثُ تُؤْمَرُونَ»
6- خداوند انبيا را قبل از هلاكت كفّار آگاه مىكند. «وَ قَضَيْنا إِلَيْهِ»
7- خداوند قادر است در لحظهاى نسل و گروهى را نابود سازد. «دابِرَ»
«1». اعراف، 70.
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




