آیه 120 سوره نساء: تفاوت بین نسخهها
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شیطان به آنها وعدهها (ی دروغین) میدهد؛ و به آرزوها، سرگرم میسازد؛ در حالی که جز فریب و نیرنگ، به آنها وعده نمیدهد. | شیطان به آنها وعدهها (ی دروغین) میدهد؛ و به آرزوها، سرگرم میسازد؛ در حالی که جز فریب و نیرنگ، به آنها وعده نمیدهد. | ||
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==معانی کلمات آیه== | ==معانی کلمات آیه== | ||
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| + | ممكن است آن، در آيه به معنى فاعل و فريبنده باشد.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> | ||
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محتویات
ترجمه های فارسی
(شیطان) آنان را بسیار وعده دهد و آرزومند و امیدوار کند، ولی آنان را چیزی به جز غرور و فریب وعده نمیدهد.
شیطان به آنان وعده [دروغ] می دهد، و در آرزوها[ی سرابوار] می اندازد، و جز وعده فریبنده به آنان نمی دهد.
[آرى،] شيطان به آنان وعده مىدهد، و ايشان را در آرزوها مىافكند، و جز فريب به آنان وعده نمىدهد.
به آنها وعده مىدهد و به آرزوشان مىافكند و شيطان آنان را جز به فريب وعده ندهد.
شیطان به آنها وعدهها (ی دروغین) میدهد؛ و به آرزوها، سرگرم میسازد؛ در حالی که جز فریب و نیرنگ، به آنها وعده نمیدهد.
ترجمه های انگلیسی(English translations)
معانی کلمات آیه
غرور: غرّ و غرور: فريب دادن و تطميع. ممكن است آن، در آيه به معنى فاعل و فريبنده باشد.[۱]
تفسیر آیه
تفسیر نور (محسن قرائتی)
يَعِدُهُمْ وَ يُمَنِّيهِمْ وَ ما يَعِدُهُمُ الشَّيْطانُ إِلَّا غُرُوراً «120»
(شيطان) به آنان وعده مىدهد و ايشان را در آرزو مىافكند و شيطان جز فريب، وعدهاى به آنان نمىدهد.
أُولئِكَ مَأْواهُمْ جَهَنَّمُ وَ لا يَجِدُونَ عَنْها مَحِيصاً «121»
آنانند كه جايگاهشان دوزخ است و از آن راه گريزى نيابند.
نکته ها
«محيص» از «حيص» به معناى عدول و صرف نظر كردن است.
وقتى آيهى 135 آلعمران در مورد بخشايش گناهان از سوى خداوند نازل شد ابليس با فريادى يارانش را جمع كرد و گفت: با توبهى انسان، همهى زحمات ما ناكام مىشود. هر يك سخنى گفتند. يكى از شياطين گفت: هر گاه كسى تصميم به توبه گرفت، او را گرفتار آرزوها و وعدهها مىكنم تا توبه را به تأخير اندازد. ابليس راضى شد. «1»
هم خدا و هم شيطان وعده دادهاند، ولى وعدهى الهى راست «وَ لَنْ يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ» «2» و وعدههاى شيطان جز دروغ و فريب چيز ديگرى نيست. «وَ ما يَعِدُهُمُ الشَّيْطانُ إِلَّا غُرُوراً»
نشانهى وعدههاى شيطان، دعوت به تنگ نظرى و فساد است. در آيهى ديگر مىخوانيم: «الشَّيْطانُ يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ وَ يَأْمُرُكُمْ بِالْفَحْشاءِ» «3»
«1». تفسير صافى.
«2». حج، 47.
«3» بقره 268.
جلد 2 - صفحه 168
پیام ها
1- دلبستگى به آرزوها، افتادن در دام فريب شيطان است. «يَعِدُهُمْ وَ يُمَنِّيهِمْ»
2- آنان كه به ديگران- حتّى به كودكان- وعدهى دروغ مىدهند، كارى شيطانى مىكنند. «وَ ما يَعِدُهُمُ ...»
3- دوزخ، براى گروهى جايگاه ابدى و خلود است. «مَأْواهُمْ جَهَنَّمُ وَ ...»
4- تهديد به كيفر، يكى از شيوههاى جلوگيرى از فساد است. «مَأْواهُمْ جَهَنَّمُ»
5- از همهى ناگوارىهاى دنيا مىتوان گريخت، ولى از عذاب آخرت هرگز! «لا يَجِدُونَ عَنْها مَحِيصاً»
6- در آخرت، برگشت امكان ندارد، پس تا از دنيا نرفتهايم از بدىها برگرديم. «لا يَجِدُونَ ...»
پانویس
- ↑ تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی
منابع
- تفسیر نور، محسن قرائتی، تهران:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم
- اطیب البیان فی تفسیر القرآن، سید عبدالحسین طیب، تهران:انتشارات اسلام، 1378 ش، چاپ دوم
- تفسیر اثنی عشری، حسین حسینی شاه عبدالعظیمی، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول
- تفسیر روان جاوید، محمد ثقفی تهرانی، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم
- برگزیده تفسیر نمونه، ناصر مکارم شیرازی و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش
- تفسیر راهنما، علی اکبر هاشمی رفسنجانی، قم:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش، چاپ پنجم




