|
|
| (۱ نسخهٔ میانی ویرایش شده توسط ۱ کاربر نشان داده نشده) |
| سطر ۴۱: |
سطر ۴۱: |
| | </tabber> | | </tabber> |
| | ==معانی کلمات آیه== | | ==معانی کلمات آیه== |
| − | «الصَّالِحَاتِ»: گفتار و کردار پسندیده و شایسته. «أَصْحَابُ الْجَنَّةِ»: بهشتیان.
| + | صالحات: صالح به معنى شايسته و صالحات جمع آنست.<ref>تفسیر احسن الحدیث، سید علی اکبر قرشی</ref> |
| | | | |
| | == تفسیر آیه == | | == تفسیر آیه == |
| − | <tabber> | + | <tafsir sura="2" ayeh="82" /> |
| − | تفسیر نور=
| |
| | | | |
| − | ===تفسیر نور (محسن قرائتی)===
| |
| | | | |
| − | {{ نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | «82» وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ أُولئِكَ أَصْحابُ الْجَنَّةِ هُمْ فِيها خالِدُونَ
| |
| | | | |
| − | و كسانى كه ايمان آورده و كارهاى شايسته انجام دادهاند، آنان اهل بهشتند و در آن جاودانه خواهند ماند.
| |
| − |
| |
| − | ===پیام ها===
| |
| − |
| |
| − | 1- در كنار تهديد، بشارت لازم است. آيه قبل كيفر گنهكار را مطرح كرد، اين آيه پاداش نيكوكار را. «الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا ... أَصْحابُ الْجَنَّةِ»
| |
| − |
| |
| − | 2- ايمان، از عمل جدا نيست. «آمَنُوا وَ عَمِلُوا ...»
| |
| − |
| |
| − | 3- ملاك بهشت، ايمان و عمل است، نه خيال و آرزو. «الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا ... أَصْحابُ الْجَنَّةِ»
| |
| − |
| |
| − | 4- انجام يك عمل صالح كفايت نمىكند، بلكه داشتن خوى نيكوكارى و انجام هرگونه كار صالحى لازم است. «عَمِلُوا الصَّالِحاتِ»، «الصالحات» جمع و همراه با (الفولام) آمده است، لذا همهى كارهاى نيك را در برمىگيرد.
| |
| − | }}
| |
| − |
| |
| − | |-|
| |
| − | اثنی عشری=
| |
| − |
| |
| − | ===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===
| |
| − |
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ أُولئِكَ أَصْحابُ الْجَنَّةِ هُمْ فِيها خالِدُونَ (82)
| |
| − |
| |
| − | «1» بحار الانوار، جلد 73 صفحه 334، حديث هفدهم.
| |
| − |
| |
| − | تفسير اثنا عشرى، ج1، ص: 187
| |
| − |
| |
| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا: و آن كسانى كه ايمان آوردند، به راستى و درستى، به يگانگى خدا و پيغمبر و آنچه از جانب خدا آورده، از معتقدات حقّه ايمانيه، با ثابت بودن در آن تا آخر عمر، وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ: و بجاى آورند كارهاى شايسته و پسنديده الهيه را، أُولئِكَ أَصْحابُ الْجَنَّةِ: آن گروه متّصف به صفات ايمان و اعمال صالح، ملازمان بهشتند. هُمْ فِيها خالِدُونَ: ايشان در بهشت و نعيم آن دائم و باقى و هميشگى باشند.
| |
| − |
| |
| − | تنبيه: ترتّب عمل صالح بر ايمان، دلالت دارد بر آنكه ايمان مركب و عمل صالح جزء ايمان باشد، و محقق است كه مركب حاصل نگردد مگر به تمامى اجزايش. پس ايمان بدون عمل صالح فايده نخواهد داشت، و احاديث در اين قسمت بسيار است. از جمله در امالى طوسى (رضوان اللّه عليه) از حضرت باقر عليه السلام مروى است كه فرمود: عرض شد به حضرت امير المؤمنين عليه السلام كسى كه شهادت دهد به وحدانيت الهى و رسالت حضرت رسالت پناهى، مؤمن باشد؟ فرمود: پس كجاست واجبات خدا «1».
| |
| − |
| |
| − | و در فرمايش ديگر فرمود: اگر ايمان كلام و قول تنها بودى، هر آينه روزه و نماز و حلال و حرام نازل نشدى «2» (الخ).
| |
| − |
| |
| − | «1» اصول كافى، كتاب الايمان و الكفر، جلد 2 صفحه 33 حديث دوّم.
| |
| − |
| |
| − | «2» اصول كافى، كتاب الايمان و الكفر، جلد 2 صفحه 33 حديث دوّم.
| |
| − |
| |
| − | تفسير اثنا عشرى، ج1، ص: 188
| |
| − |
| |
| − |
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | روان جاوید=
| |
| − | ===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ أُولئِكَ أَصْحابُ الْجَنَّةِ هُمْ فِيها خالِدُونَ (82)
| |
| − |
| |
| − | ترجمه
| |
| − |
| |
| − | و آنانكه ايمان آوردند و بجا آوردند كارهاى شايسته را آنان اهل بهشتند ايشان در آن جاويدانيانند..
| |
| − |
| |
| − | تفسير
| |
| − |
| |
| − | ايمان بآنچه بايد اعتقاد نمود از اصول دين و مذهب و اعمال صالحه از فعل واجبات و كف نفس از محرمات موجب خلود در بهشت است چون حذف متعلق و جمع محلّى بالف و لام مفيد عموم است و در منهج الصادقين است كه خلود اگرچه بحسب وضع بمعنى مكث طويل است ولى اينجا مراد دوام و ثبات ميباشد باجماع امّت و بنظر حقير اين بيان خالى از وجه است زيرا خلود در لغت هم بمعنى دوام و جاويدان و هميشگى ترجمه شده است و در عرف هم به همين معنى استعمال ميشود و اينكه بهشت را خلد ناميدهاند براى آنستكه دائم و جاويدان است بنابراين شبهه در دلالت اين آيه و آيه سابق بر خلود باقى نميماند و نيز دلالت دارد اين دو آيه جمعا بر آنكه مؤمن مخلّد در آتش نيست زيرا كه شرط خلود در نار بموجب آيه قبل آنستكه گناه احاطه بشخص كرده باشد و هيچ ثواب نداشته باشد و شرط خلود در بهشت هم آنستكه ايمان و اعمال صالحه داشته باشد پس اگر فرض شود كسى ايمان داشته باشد و اعمال صالحه نداشته باشد بايد نه در جهنم مخلد باشد و نه در بهشت و لازمهاش آنستكه چندى در جهنم باشد و بعد به بهشت برود زيرا عكسش كه ابتداء به بهشت برود و بعد بجهنم خلاف اجماع است و منافى با اعتبار و غلبه رحمت بر غضب و خلود چنانچه با منقطع الاخر بودن منافى است با منقطع الاول بودن هم وفق ندارد.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | اطیب البیان=
| |
| − | ===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | بَلي مَن كَسَبَ سَيِّئَةً وَ أَحاطَت بِهِ خَطِيئَتُهُ فَأُولئِكَ أَصحابُ النّارِ هُم فِيها خالِدُونَ (81) وَ الَّذِينَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصّالِحاتِ أُولئِكَ أَصحابُ الجَنَّةِ هُم فِيها خالِدُونَ (82)
| |
| − |
| |
| − | (بلي كساني که بدي كسب كنند و گناهشان آنان را فرو گيرد پس اينان ياران آتش و در آن جاويدانند، و كساني که ايمان آورند و اعمال شايسته انجام دهند اينان ياران بهشت و در آن جاويدانند) كلمه بلي براي جواب قول آنهاست که گفتند لَن تَمَسَّنَا النّارُ و فرق بين بلي و نعم اينست که بلي جواب نفي يا استفهامي واقع ميشود که بر سبيل جحد و انكار باشد و معني آن ابطال نفي است مانند زَعَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَن لَن يُبعَثُوا قُل بَلي وَ رَبِّي«1» و أَ لَستُ بِرَبِّكُم قالُوا بَلي«2» که در آيه اول مفاد آن:
| |
| − |
| |
| − | بلي يبعثون و در دوم بلي انت ربنا است.
| |
| − |
| |
| − | و نعم براي تصديق مقول قول است اعم از اينكه خبر باشد يا استفهام مثبت باشد يا منفي باشد مانند فَهَل وَجَدتُم ما وَعَدَ رَبُّكُم حَقًّا قالُوا نَعَم«3» و بلي در آيه مورد نظر براي ابطال نفي جمله لن تمسنا النار است يعني اينکه گفتار شما باطل است و حقيقت اينست که هر كس بدي كسب كند و گناه باو احاطه نمايد اهل دوزخ و در آن جاودان است.
| |
| − |
| |
| − | و بعضي گفتند مراد از سيئة شرك است و بعضي گفتند گناه كبيره است و بعضي گفتند اصرار بر گناه است و گفتند مراد از احاطه خطيئة كثرت معصيت است، و حق در مقام اينست که مراد از احاطه خطيئة اينکه است که معصيت بحدي
| |
| − |
| |
| − | 1- سوره تغابن آيه 7
| |
| − |
| |
| − | 2- سوره الاعراف آيه 171
| |
| − |
| |
| − | 3- سوره اعراف آيه 24
| |
| − |
| |
| − | جلد 2 - صفحه 77
| |
| − |
| |
| − | بر قلب احاطه و استيلاء پيدا كند که نور ايمان را از دل ببرد زيرا هر که كسب سيئه كند و از آن توبه ننموده و اصرار كند بر قلب او سياهي پيدا شود و هر چه بيشتر اصرار كند آن سياهي بيشتر شود تا بحدي که گناه تمام قلب او را سياه نمايد و در اينکه حالت است که همه دل او را فرا گرفته و ديگر نور رستگاري در جبين او نيست و البته چنين كسي در عذاب دوزخ جاودان است ولي اگر گناه تمام قلب او را فرا نگرفته باشد و نور ايمان و لو بمقدار اندكي در دل او باشد مخلّد در عذاب نخواهد بود، پس ممكن است مراد از سيئه مطلق معصيت و گناه باشد و مراد از خطيئه حالتي باشد که بعد از كسب سيئه بر قلب عارض ميشود و اگر بعد از كسب سيئه توبه كند آن حالت محو ميشود و اگر اصرار نمايد همي زياد ميشود تا بحدي که بمرتبه احاطه بر قلب برسد و اما تفسير ساير جملات اينکه دو آيه در ذيل آيات مشابه آنها سبق ذكر يافت«1».
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − | برگزیده تفسیر نمونه=
| |
| − |
| |
| − | ===برگزیده تفسیر نمونه===
| |
| − | {{نمایش فشرده تفسیر|
| |
| − | اشاره
| |
| − |
| |
| − | (آیه 82)- و اما در مورد مؤمنان پرهیزگار، نیز یک قانون کلی و همگانی وجود دارد. چنانکه قرآن میگوید: «کسانی که ایمان آوردهاند و عمل صالح انجام دادهاند آنها اصحاب بهشتند و جاودانه در آن خواهند بود» (وَ الَّذِینَ آمَنُوا وَ عَمِلُوا الصَّالِحاتِ أُولئِکَ أَصْحابُ الْجَنَّةِ هُمْ فِیها خالِدُونَ).
| |
| − |
| |
| − | نژاد پرستی یهود
| |
| − |
| |
| − | - از این آیات استفاده میشود که روح تبعیض نژادی یهود که امروز نیز در دنیا سر چشمه بدبختیهای فراوان شده، از آن زمان در یهود بوده است، و امتیازات موهومی برای نژاد بنی اسرائیل قائل بودهاند، و متأسفانه بعد از گذشتن هزاران سال هنوز هم آن روحیه بر آنها حاکم است، و در واقع منشأ پیدایش کشور غاصب اسرائیل نیز همین روح نژاد پرستی است.
| |
| − | }}
| |
| − | |-|
| |
| − |
| |
| − | سایر تفاسیر=
| |
| − | سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های فارسی==
| |
| − | ==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر خسروی|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر عاملی|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر جامع|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − |
| |
| − | ==تفسیر های عربی==
| |
| − | ==={{تفسیر المیزان|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الصافی|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | ==={{تفسیر الکاشف|سوره=2 |آیه=82}}===
| |
| − | </tabber>
| |
| | | | |
| | ==پانویس== | | ==پانویس== |