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	<title>دانشنامه‌ی اسلامی - مشارکت‌های کاربر [fa]</title>
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		<title>فهرست سوره های قرآن</title>
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		<updated>2016-10-14T05:51:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|  align=&amp;quot;center&amp;quot; style=&amp;quot;border: 0px  ; float:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;margin-right:auto;margin-left:auto&amp;quot; &lt;br /&gt;
! شماره &lt;br /&gt;
! معرفی سوره&lt;br /&gt;
! متن و ترجمه&lt;br /&gt;
! تعداد آیات&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|1&lt;br /&gt;
|[[سوره حمد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فاتحه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|7 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2&lt;br /&gt;
|[[سوره بقره]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بقره/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|286 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3&lt;br /&gt;
|[[سوره آل عمران]]&lt;br /&gt;
|[[سوره آل عمران/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|200 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4&lt;br /&gt;
|[[سوره نساء]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نساء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|176 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5&lt;br /&gt;
|[[سوره مائده]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مائده/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|120 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|165 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|206 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|75 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9&lt;br /&gt;
|[[سوره توبه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره توبه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|129 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره یونس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره یونس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|109 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره هود]]&lt;br /&gt;
|[[سوره هود/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|123 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره یوسف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره یوسف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره رعد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره رعد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|43 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره ابراهیم]]&lt;br /&gt;
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|52 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره حجر]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره مریم]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره فرقان/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره شعراء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره نمل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره قصص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قصص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|88 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره عنکبوت/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره روم]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره یس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|83 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره صافات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره صافات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره ص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره زمر]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره فصلت]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره شوری/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره زخرف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره جاثیه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره جاثیه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|37 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره احقاف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره احقاف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|35 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره محمد]]&lt;br /&gt;
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|38 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره فتح]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره حجرات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره ق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|45 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره ذاریات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ذاریات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|60 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره طور]]&lt;br /&gt;
|[[سوره طور/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره نجم/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|62 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره قمر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قمر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|55 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|55&lt;br /&gt;
|[[سوره الرحمن]]&lt;br /&gt;
|[[سوره الرحمن/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|78 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره واقعه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره واقعه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|96 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|57&lt;br /&gt;
|[[سوره حدید]]&lt;br /&gt;
|[[سوره حدید/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|29 آیه&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|&lt;br /&gt;
{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;margin-right:auto;margin-left:auto&amp;quot; &lt;br /&gt;
! شماره &lt;br /&gt;
! معرفی سوره&lt;br /&gt;
! متن و ترجمه&lt;br /&gt;
! تعداد آیات&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|58&lt;br /&gt;
|[[سوره مجادله]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مجادله/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|59&lt;br /&gt;
|[[سوره حشر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره حشر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|24 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|60&lt;br /&gt;
|[[سوره ممتحنه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ممتحنه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|13 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|61&lt;br /&gt;
|[[سوره صف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره صف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|14 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|62&lt;br /&gt;
|[[سوره جمعه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره جمعه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|63&lt;br /&gt;
|[[سوره منافقون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره منافقون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|64&lt;br /&gt;
|[[سوره تغابن]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تغابن/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|18 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|65&lt;br /&gt;
|[[سوره طلاق]]&lt;br /&gt;
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|12 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره تحریم]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|19 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره غاشیه]]&lt;br /&gt;
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|26 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|89&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|30 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|90&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|91&lt;br /&gt;
|[[سوره الشمس|سوره شمس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شمس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|15 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|92&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|21 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|93&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|94&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|95&lt;br /&gt;
|[[سوره التین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|96&lt;br /&gt;
|[[سوره علق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره علق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|97&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|98&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|99&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|100&lt;br /&gt;
|[[سوره العادیات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عادیات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|101&lt;br /&gt;
|[[سوره القارعة]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قارعه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|102&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|103&lt;br /&gt;
|[[سوره العصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|104&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|9 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|105&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|106&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|107&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|7 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|108&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|109&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|110&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|111&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|112&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|113&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|114&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترجمه های قرآن==&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39332&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن  (علي اصغر حلبي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39333&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمد خواجوي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39334&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (شاه ولي الله دهلوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39336&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدعلي رضايي اصفهاني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39337&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXlxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (رضا سراج)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39338&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ابوالحسن شعراني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39339&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (طاهره صفارزاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39340&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw-IKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علي اكبر طاهري قزويني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39341&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين فارسي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39342&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدمهدي فولادوند )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39343&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (احمد كاويانپور)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39344&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين مجتبوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39345&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علی مشكيني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39346&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عباس مصباح زاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39347&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQwxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدكاظم معزي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39348&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ناصر مكارم شيرازي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39349&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عبدالمجيد صادق نوبري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39350&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjyP4H_Y7nO5WuIKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود ياسري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39321&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (كاظم ارفع )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39322&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود اشرفي تبريزي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39335&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (دهم  هجري)]'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==قرآن در دانشنامه اسلامی==&lt;br /&gt;
{{قرآن}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:فهرست ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:قرآن]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73289</id>
		<title>فهرست سوره های قرآن</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73289"/>
		<updated>2016-10-14T05:49:43Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|  align=&amp;quot;center&amp;quot; style=&amp;quot;border: 0px  ; float:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;margin-right:auto;margin-left:auto&amp;quot; &lt;br /&gt;
! شماره &lt;br /&gt;
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|[[سوره بقره/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|286 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره آل عمران]]&lt;br /&gt;
|[[سوره آل عمران/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره نساء]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نساء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|176 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره مائده]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مائده/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|120 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|165 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|206 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|75 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9&lt;br /&gt;
|[[سوره توبه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره توبه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|129 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره یونس]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره انبیاء]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انبیاء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|112 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|22&lt;br /&gt;
|[[سوره حج]]&lt;br /&gt;
|[[سوره حج/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|78 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|23&lt;br /&gt;
|[[سوره مومنون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مومنون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|118 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|24&lt;br /&gt;
|[[سوره نور]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نور/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|64 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|25&lt;br /&gt;
|[[سوره فرقان]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فرقان/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|77 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26&lt;br /&gt;
|[[سوره شعراء]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شعراء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|227 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|27&lt;br /&gt;
|[[سوره نمل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نمل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|93 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|28&lt;br /&gt;
|[[سوره قصص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قصص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|88 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|29&lt;br /&gt;
|[[سوره عنکبوت]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عنکبوت/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|69 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|30&lt;br /&gt;
|[[سوره روم]]&lt;br /&gt;
|[[سوره روم/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|60 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|31&lt;br /&gt;
|[[سوره لقمان]]&lt;br /&gt;
|[[سوره لقمان/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|34 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|32&lt;br /&gt;
|[[سوره سجده]]&lt;br /&gt;
|[[سوره سجده/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|30 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|33&lt;br /&gt;
|[[سوره احزاب]]&lt;br /&gt;
|[[سوره احزاب/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|73 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|34&lt;br /&gt;
|[[سوره سبا]]&lt;br /&gt;
|[[سوره سباء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|54 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|35&lt;br /&gt;
|[[سوره فاطر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فاطر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|45 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|36&lt;br /&gt;
|[[سوره یس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره یس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|83 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|37&lt;br /&gt;
|[[سوره صافات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره صافات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|182 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|38&lt;br /&gt;
|[[سوره ص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|88 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|39&lt;br /&gt;
|[[سوره زمر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زمر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|75 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|40&lt;br /&gt;
|[[سوره غافر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره غافر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|85 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره فصلت]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فصلت/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|54 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|42&lt;br /&gt;
|[[سوره شورى|سوره شوری]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شوری/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|53 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|43&lt;br /&gt;
|[[سوره زخرف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زخرف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|89 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|59 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|45&lt;br /&gt;
|[[سوره جاثیه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره جاثیه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|37 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|46&lt;br /&gt;
|[[سوره احقاف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره احقاف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|35 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|47&lt;br /&gt;
|[[سوره محمد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره محمد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|38 آیه&lt;br /&gt;
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|[[سوره نازعات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نازعات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|42 آیه&lt;br /&gt;
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|29 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|82&lt;br /&gt;
|[[سوره انفطار]]&lt;br /&gt;
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|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|36 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|84&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|25 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|85&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|22 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|86&lt;br /&gt;
|[[سوره الطارق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره طارق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|17 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|87&lt;br /&gt;
|[[سوره الأعلى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعلی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|88&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|26 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|89&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|30 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|90&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|91&lt;br /&gt;
|[[سوره الشمس|سوره شمس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شمس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|15 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|92&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|21 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|93&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|94&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|95&lt;br /&gt;
|[[سوره التین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|96&lt;br /&gt;
|[[سوره علق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره علق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|97&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|98&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|99&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|100&lt;br /&gt;
|[[سوره العادیات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عادیات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|102&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|103&lt;br /&gt;
|[[سوره العصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|104&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره فیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|106&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره ماعون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره کوثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|109&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره نصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|111&lt;br /&gt;
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|[[سوره مسد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره ناس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترجمه های قرآن==&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39332&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن  (علي اصغر حلبي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39333&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمد خواجوي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39334&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (شاه ولي الله دهلوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39336&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدعلي رضايي اصفهاني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39337&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXlxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (رضا سراج)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39338&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ابوالحسن شعراني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39339&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (طاهره صفارزاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39340&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw-IKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علي اكبر طاهري قزويني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39341&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين فارسي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39342&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدمهدي فولادوند )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39343&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (احمد كاويانپور)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39344&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين مجتبوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39345&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علی مشكيني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39346&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عباس مصباح زاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39347&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQwxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدكاظم معزي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39348&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ناصر مكارم شيرازي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39349&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عبدالمجيد صادق نوبري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39350&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjyP4H_Y7nO5WuIKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود ياسري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39321&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (كاظم ارفع )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39322&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود اشرفي تبريزي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39335&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (دهم  هجري)]'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==قرآن در دانشنامه اسلامی==&lt;br /&gt;
{{قرآن}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:فهرست ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:قرآن]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73288</id>
		<title>فهرست سوره های قرآن</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73288"/>
		<updated>2016-10-14T05:47:41Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: حذف ال از الزلزال&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|  align=&amp;quot;center&amp;quot; style=&amp;quot;border: 0px  ; float:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;margin-right:auto;margin-left:auto&amp;quot; &lt;br /&gt;
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|38 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|48&lt;br /&gt;
|[[سوره فتح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فتح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|29 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|49&lt;br /&gt;
|[[سوره حجرات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره حجرات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|18 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|50&lt;br /&gt;
|[[سوره ق]]&lt;br /&gt;
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|45 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|51&lt;br /&gt;
|[[سوره ذاریات]]&lt;br /&gt;
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|60 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره التغابن]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تغابن/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|[[سوره ملک]]&lt;br /&gt;
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|52 آیه&lt;br /&gt;
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|52 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|70&lt;br /&gt;
|[[سوره معارج]]&lt;br /&gt;
|[[سوره معارج/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|44 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|71&lt;br /&gt;
|[[سوره نوح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نوح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|28 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|72&lt;br /&gt;
|[[سوره جن]]&lt;br /&gt;
|[[سوره جن/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|28 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|73&lt;br /&gt;
|[[سوره مزمل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مزمل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|74&lt;br /&gt;
|[[سوره مدثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مدثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|56 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|75&lt;br /&gt;
|[[سوره قیامة]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قیامه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|40 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|76&lt;br /&gt;
|[[سوره انسان]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انسان/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|31 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|77&lt;br /&gt;
|[[سوره مرسلات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مرسلات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|50 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|78&lt;br /&gt;
|[[سوره نبا]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نبأ/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|40 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|79&lt;br /&gt;
|[[سوره نازعات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نازعات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|46 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|80&lt;br /&gt;
|[[سوره عبس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عبس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|42 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|81&lt;br /&gt;
|[[سوره تکویر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکویر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|29 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|82&lt;br /&gt;
|[[سوره انفطار]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انفطار/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|83&lt;br /&gt;
|[[سوره مطففین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مطففین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|36 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|84&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|25 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|85&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|22 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|86&lt;br /&gt;
|[[سوره الطارق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره طارق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|17 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|87&lt;br /&gt;
|[[سوره الأعلى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعلی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|88&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|26 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|89&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|30 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|90&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|91&lt;br /&gt;
|[[سوره الشمس|سوره شمس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شمس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|15 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|92&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|21 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|93&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|94&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|95&lt;br /&gt;
|[[سوره التین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|96&lt;br /&gt;
|[[سوره علق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره علق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|97&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|98&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|99&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|100&lt;br /&gt;
|[[سوره العادیات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عادیات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|101&lt;br /&gt;
|[[سوره القارعة]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قارعه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|102&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|103&lt;br /&gt;
|[[سوره العصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|104&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|9 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|105&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|106&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|107&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|7 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|108&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|109&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|110&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|111&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|112&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|113&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|114&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترجمه های قرآن==&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39332&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن  (علي اصغر حلبي)]'''&lt;br /&gt;
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* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39345&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علی مشكيني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39346&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عباس مصباح زاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39347&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQwxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدكاظم معزي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39348&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ناصر مكارم شيرازي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39349&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عبدالمجيد صادق نوبري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39350&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjyP4H_Y7nO5WuIKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود ياسري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39321&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (كاظم ارفع )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39322&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود اشرفي تبريزي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39335&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (دهم  هجري)]'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==قرآن در دانشنامه اسلامی==&lt;br /&gt;
{{قرآن}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:فهرست ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:قرآن]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73287</id>
		<title>فهرست سوره های قرآن</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%81%D9%87%D8%B1%D8%B3%D8%AA_%D8%B3%D9%88%D8%B1%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;diff=73287"/>
		<updated>2016-10-14T05:44:10Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: اشکال ی شوری- ال اضافه در نام برخی سوره ها&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|  align=&amp;quot;center&amp;quot; style=&amp;quot;border: 0px  ; float:center&amp;quot; &lt;br /&gt;
| &lt;br /&gt;
{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot; style=&amp;quot;margin-right:auto;margin-left:auto&amp;quot; &lt;br /&gt;
! شماره &lt;br /&gt;
! معرفی سوره&lt;br /&gt;
! متن و ترجمه&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
|1&lt;br /&gt;
|[[سوره حمد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فاتحه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|7 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2&lt;br /&gt;
|[[سوره بقره]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بقره/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|286 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3&lt;br /&gt;
|[[سوره آل عمران]]&lt;br /&gt;
|[[سوره آل عمران/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|200 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4&lt;br /&gt;
|[[سوره نساء]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نساء/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|176 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5&lt;br /&gt;
|[[سوره مائده]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مائده/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|120 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انعام/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|165 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعراف/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|206 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انفال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|75 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره توبه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره توبه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|129 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره یونس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره یونس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
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|-&lt;br /&gt;
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|[[سوره جن]]&lt;br /&gt;
|[[سوره جن/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|28 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|73&lt;br /&gt;
|[[سوره مزمل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مزمل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|74&lt;br /&gt;
|[[سوره مدثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مدثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|56 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|75&lt;br /&gt;
|[[سوره قیامة]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قیامه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|40 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|76&lt;br /&gt;
|[[سوره انسان]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انسان/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|31 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|77&lt;br /&gt;
|[[سوره مرسلات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مرسلات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|50 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|78&lt;br /&gt;
|[[سوره نبا]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نبأ/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|40 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|79&lt;br /&gt;
|[[سوره نازعات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نازعات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|46 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|80&lt;br /&gt;
|[[سوره عبس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عبس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|42 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|81&lt;br /&gt;
|[[سوره تکویر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکویر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|29 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|82&lt;br /&gt;
|[[سوره انفطار]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انفطار/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|83&lt;br /&gt;
|[[سوره مطففین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مطففین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|36 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|84&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشقاق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|25 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|85&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بروج/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|22 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|86&lt;br /&gt;
|[[سوره الطارق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره طارق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|17 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|87&lt;br /&gt;
|[[سوره الأعلى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اعلی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|88&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره غاشیه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|26 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|89&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فجر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|30 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|90&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بلد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|20 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|91&lt;br /&gt;
|[[سوره الشمس|سوره شمس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره شمس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|15 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|92&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره لیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|21 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|93&lt;br /&gt;
|[[سوره الضحی|سوره ضحى]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ضحی/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|94&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح]]&lt;br /&gt;
|[[سوره انشراح/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|95&lt;br /&gt;
|[[سوره التین]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تین/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|96&lt;br /&gt;
|[[سوره علق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره علق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|19 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|97&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قدر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|98&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره بینه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|99&lt;br /&gt;
|[[سوره الزلزال]]&lt;br /&gt;
|[[سوره زلزال/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|100&lt;br /&gt;
|[[سوره العادیات]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عادیات/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|101&lt;br /&gt;
|[[سوره القارعة]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قارعه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|11 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|102&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره تکاثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|8 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|103&lt;br /&gt;
|[[سوره العصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره عصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|104&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه]]&lt;br /&gt;
|[[سوره همزه/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|9 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|105&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فیل/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|106&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش]]&lt;br /&gt;
|[[سوره قریش/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|107&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ماعون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|7 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|108&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کوثر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|109&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون]]&lt;br /&gt;
|[[سوره کافرون/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|110&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر]]&lt;br /&gt;
|[[سوره نصر/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|3 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|111&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد]]&lt;br /&gt;
|[[سوره مسد/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|112&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص]]&lt;br /&gt;
|[[سوره اخلاص/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|4 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|113&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق]]&lt;br /&gt;
|[[سوره فلق/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|5 آیه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|114&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس]]&lt;br /&gt;
|[[سوره ناس/متن و ترجمه|متن و ترجمه]]&lt;br /&gt;
|6 آیه&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترجمه های قرآن==&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39332&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن  (علي اصغر حلبي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39333&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمد خواجوي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39334&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (شاه ولي الله دهلوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39336&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدعلي رضايي اصفهاني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39337&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXlxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (رضا سراج)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39338&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ابوالحسن شعراني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39339&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (طاهره صفارزاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39340&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw-IKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علي اكبر طاهري قزويني)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39341&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين فارسي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39342&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدمهدي فولادوند )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39343&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw5fFwMqchiyF&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (احمد كاويانپور)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39344&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw1eCUDs7cddU&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (جلال الدين مجتبوي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39345&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (علی مشكيني )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39346&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw6PX_36xWcpL&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عباس مصباح زاده )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39347&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQwxVFAC9vuIy5&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمدكاظم معزي )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39348&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw_-U2zNCOskn&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (ناصر مكارم شيرازي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39349&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjzvX96cwsXQw8IbL2RYtR02&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (عبدالمجيد صادق نوبري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39350&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjyP4H_Y7nO5WuIKUi9Sgtxl&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود ياسري)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39321&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB7KjQHSVk19R&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (كاظم ارفع )]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39322&amp;amp;scope=u9n2KJC5EjxgT2ajOPxZB2cpSd3HXxU9&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (محمود اشرفي تبريزي)]'''&lt;br /&gt;
* '''[http://lib.ahlolbait.ir/parvan/resource.do?action=resource&amp;amp;id=39335&amp;amp;scope=u9n2KJC5Ejy3StWvOrgXl2TLH-oPAS2_&amp;amp;flowLastAction=view&amp;amp;from=search&amp;amp;query=%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86&amp;amp;field=title&amp;amp;collectionPID=17&amp;amp;lang=&amp;amp;count=100&amp;amp;execute=true ترجمه قرآن (دهم  هجري)]'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==قرآن در دانشنامه اسلامی==&lt;br /&gt;
{{قرآن}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:فهرست ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:قرآن]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%DA%AF%D8%A7%D9%87_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86_%D9%88_%D8%AD%D8%AF%DB%8C%D8%AB&amp;diff=65410</id>
		<title>دانشگاه قرآن و حدیث</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%DA%AF%D8%A7%D9%87_%D9%82%D8%B1%D8%A2%D9%86_%D9%88_%D8%AD%D8%AF%DB%8C%D8%AB&amp;diff=65410"/>
		<updated>2016-07-02T01:45:03Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ویرایش جزیی افزودن شعبه مشهد و افزودن نمایش روی نقشه&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;دانشگاه قرآن و حدیث یکی از مؤسسات آموزش عالی غیردولتی ـ غیرانتفاعی آموزش عالی در [[جمهوری اسلامی ایران]] است. این دانشگاه که وابسته به موسسه علمی فرهنگی [[دارالحدیث]] می باشد. فعالیت خود را در سال ۱۳۷۸ در کنار [[حضرت عبدالعظیم حسنی]] با عنوان [[دانشکده علوم حدیث]] آغاز کرد و به شیوه‌های حضوری و الکترونیکی دانشجو می‌پذیرفت تا این که در سال ۱۳۹۱ با مرکزیت قم به دانشگاه ارتقا یافت. در حال حاضر [[دانشگاه قرآن و حدیث]] در [[تهران]]، [[ﻗﻢ]]، [[اصفهان]] و [[مشهد]] دارای ﺷﻌﺒﻪ اﺳﺖ و به همراه &amp;quot;[[پژوهشگاه قرآن و حدیث]]&amp;quot; به ریاست آیةالله ری شهری (ریاست دارالحدیث) اداره می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اهداف==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اهداف دانشکده در اساسنامه این چنین آمده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با توجه به نقش اساسی [[احادیث]] پیشوایان معصوم در شناخت معارف اصیل اسلامی و دستورالعمل‌های نجات‌بخش و سعادت‌آفرین این دین آسمانی، دانشکدهٔ علوم حدیث با رعایت اصل آموزش علوم حدیث، اهداف بلندی را پیگیری می‌کند که از آن جمله، می‌توان به این موارد اشاره نمود:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* تربیت و تأمین دبیران و مربیان متخصص در علوم [[حدیث]] و معارف دینی به منظور رفع نیاز مراکز آموزشی&lt;br /&gt;
* تربیت و تأمین محققان و کارشناسان مطالعات و تحقیقات اسلامی در شاخه‌های مربوط به علم حدیث&lt;br /&gt;
* تربیت مبلغان اسلامی برای داخل و خارج از کشور و تأمین نیازمندی‌های رایزنی‌ها و خانه‌های فرهنگی جمهوری اسلامی ایران&lt;br /&gt;
* جذب داوطلبان مطالعات و تحقیقات علوم حدیث از کشورهای خارجی و پاسخگویی به نیازهای مراکز اسلامی خارج از کشور&lt;br /&gt;
* فراهم آوردن امکانات برای ارتقای سطح علمی ـ فرهنگی کارشناسان سازمان‌های دولتی و نهادهای اسلامی در زمینهٔ مسائل مختلف اسلامی&lt;br /&gt;
* شناخت استعدادها و فراهم آوردن امکانات برای ادامهٔ تحصیل افراد مستعد در دوره‌های بالاتر برای تربیت محدث، مبلغ، محقق و اسلام‌شناس&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== رشته‌ها و سر فصل ها == &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===مقطع کارشناسی===&lt;br /&gt;
شورای گسترش آموزش عالی تعداد واحدهای درسی مقطع کارشناسی علوم حدیث را ۱۳۵ واحد به شرح زیر تصویب نموده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* دروس عمومی: (۱۱) واحد شامل فارسی، زبان خارجی&lt;br /&gt;
* دروس پایه: (۷۴) واحد شامل اخلاق، تاریخ تشیع، علوم بلاغی&lt;br /&gt;
* دروس تخصصی: (۵۳) واحد شامل اصطلاحات حدیثی، مبانی فهم حدیث و...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''رشته ها:'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
۱ـ [[علوم حدیث]] ۲ـ [[رشته علوم و معارف قرآن|علوم و معارف قرآن]] ۳ـ [[فقه]] و [[حقوق اسلامی|حقوق]] اسلامی ۴ـ [[علم کلام|کلام اسلامی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== مقطع کارشناسی ارشد===&lt;br /&gt;
دانشکدهٔ علوم حدیث در راستای تداوم روند رشد علمی و فرهنگی خود، همزمان با دانش‌آموختگی اولین دورهٔ کارشناسی با تشکیل کمیته‌های تخصصی برنامه و سرفصل‌های دروس گرایش‌های رشتهٔ علوم حدیث در مقطع کارشناسی ارشد را تدوین و در سال ۱۳۸۲ به تصویب شورای گسترش آموزش عالی رساند و در همان سال نیز مجوز اجرای دوره‌ی کارشناسی ارشد را دریافت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بر اساس آیین‌نامه‌های آموزشی مصوب و مورد تأیید وزارت علوم، تحقیقات و فناوری، تحصیل در مقطع کارشناسی ارشد ناپیوسته رشته‌ی علوم حدیث، برابر با چهار نیم سال تحصیلی است. دروس این مقطع در ۲۸ واحد درسی و ۴ واحد پایان‌نامه تنظیم شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''رشته ها:'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
۱ـ علوم حدیث گرایش تفسیر اثری ۲ـ علوم حدیث گرایش نهج البلاغه ۳ـ علوم حدیث گرایش کلام و عقاید ۴ـ علوم حدیث گرایش اخلاق ۵ـ فقه و مبانی حقوق اسلامی ۶ـ علوم قرآن و حدیث ۷ـ ارتباطات گرایش حج و زیارت&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مقطع دکتری==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''رشته ها:'''&lt;br /&gt;
۱ـ مدرسی معارف اسلامی گرایش قرآن و متون اسلامی ۲ـ مدرسی معارف اسلامی گرایش اخلاق اسلامی ۳ـ علوم قرآن و حدیث&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دانشگاه قرآن و حدیث (قم) ==&lt;br /&gt;
ساختمان اصلی دانشگاه در قم از سال ۱۳۸۴ فعالیت خود را همزمان با افتتاح ساختمان جدید مؤسسه علمی _ فرهنگی [[دارالحدیث]] آغاز کرد. ‌از ویژگیهای ‌این دانشگاه همجواری آن با «حوزه ی علمیه ی قم»، «پژوهشکده علوم و معارف حدیثی» و نیز «کتابخانه تخصصی حدیث» به عنوان بزرگترین کتابخانه تخصصی حدیث در ‌ایران است. ‌این ویژگی ها از یک سو امکان استفاده از اساتید فاضل در عرصه حدیث را بر‌ای آن فراهم آورده و از سوی دیگر دسترسی به منابع مورد نیاز را در پژوهش و تدوین رساله‌ها و پایان نامه ها بر‌ای دانشجویان آن تسهیل نموده است. دانشگاه قرآن و حدیث مجهز به تالار پژوهش بر‌ای استفاده از نرم افزارهای اسلامی و عمومی، د‌ایرة المعارف‌ها، کتب مرجع و نیز پایگاههای اطلاع رسانی در شبکه ‌اینترنت به منظور غنی سازی محتو‌ای پایان نامه ها و تحقیقات دانشجویی است. ‌این دانشگاه تنها از طلاب علوم دینی و از طریق آزمون اختصاصی که زیر نظر سازمان سنجش کشور برگزار می شود ، دانشجو می پذیرد و دانشجویان ‌این مرکز در دو مقطع کارشناسی ارشد و دکتری تحصیل می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پردیس تهران==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ساختمان پردیس تهران جایی است که دانشگاه قرآن و حدیث با عنوان دانشکده علوم حدیث کار خود را از آنجا آغاز نمود. این ساختمان با زیربنای بیست هزار مترمربع در جوار حرم حضرت عبدالعظیم علیه السلام در شهر ری احداث گردیده و فضاهای آموزشی، پژوهشی، اداری و رفاهی مورد نیاز در آن پیش‌بینی شده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
# برخورداری از فضای مناسب آموزشی&lt;br /&gt;
# امکانات کمک آموزشی از قبیل رایانه و آموزشگاه (لابراتوار) زبان&lt;br /&gt;
# کتابخانه‌ی تخصصی علوم حدیث، علوم قرآن و تاریخ با ظرفیت ۲۵۰ هزار جلد کتاب&lt;br /&gt;
# مرکز اطلاع‌رسانی و اینترنت&lt;br /&gt;
# مرکز نجوم و ستاره‌شناسی (شامل رصدخانه و آسمان نما)&lt;br /&gt;
# تالار همایش با ظرفیت پانصد نفر&lt;br /&gt;
# مجموعه‌ی ورزشی شامل استخر، سونا و سالن بدن‌سازی&lt;br /&gt;
# تالار مطالعه‌ی جداگانه برای خواهران و برادران&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مرکز آموزش الکترونیکی==&lt;br /&gt;
دانشگاه قرآن و حدیث، در کنار موفقیت‌های درخشانی که در بخش آموزش حضوری بدست آورده، این توفیق را داشته است که به عنوان یکی از مراکز پیشتاز دانشگاهی در زمینه‌ی آموزش الکترونیکی، دروس خود را از طریق شبکه‌ی اینترنت در اختیار عموم علاقه‌مندان قرار دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در این دانشکده‌ی مجازی که اولین نمونه در نوع خود است، دروس این رشته به صورت چند رسانه‌ای و تعاملی ارائه می‌گردد. شیوه‌ی آموزشی و امکانات جانبی این دانشکده‌ی اینترنتی به گونه‌ای طراحی شده که بازده و کیفیت آموزشی در حد مطلوبی حفظ شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در حال حاضر در مقطع کارشناسی دو رشته علوم حدیث و علوم و معارف قرآن و در مقطع کارشناسی ارشد چهار رشته-گرایش علوم حدیث با گرایش های نهج البلاغه - تفسیر اثری - کلام و عقاید اسلامی و رشته علوم قرآن وحدیث در این مرکز وجود دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==معاونت های دانشگاه==&lt;br /&gt;
دانشگاه قرآن و حدیث دارای چهار معاونت است که مستقیماً زیر نظر رئیس دانشگاه فعالیت می‌نمایند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
# معاونت آموزشی و تحصیلات تکمیلی که دارای چهار بخش مدیریت امور آموزشی، مدیریت تحصیلات تکمیلی، دفتر نظارت و ارزش‌یابی و دفتر سنجش و گزینش دانشجو است.&lt;br /&gt;
# معاونت پژوهشی که دارای دو بخش مدیریت پژوهشی و همایش‌های علمی و همچنین مدیریت کتابخانه و اطلاع‌رسانی است.&lt;br /&gt;
# معاونت فرهنگی و دانشجویی که دارای دو بخش مدیریت امور دانشجویی و نیز مدیریت فرهنگی و فوق برنامه است.&lt;br /&gt;
# معاونت اداری و مالی که دارای سه بخش مدیریت اداری و تشکیلات، مدیریت خدمات و پشتیبانی و مدیریت مالی و بودجه است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریاست دانشگاه==&lt;br /&gt;
ریاست این دانشگاه از بدو تأسیس بر عهده‌ی حجت‌الاسلام محمدی ری‌شهری بوده که توسط هیئت امنای دانشگاه انتخاب گردیده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== اساتید ==&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[مهدی مهریزی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[هادی صادقی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[رضا برنجکار]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[محمد تقی سبحانی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام سید هادی [[سیدوکیلی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[علی راد]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[احمد غلامعلی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[عباس پسندیده]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[سید محمد کاظم طباطبایی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[کاظم قاضی زاده]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[عبد الهادی مسعودی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام دکتر [[رسول رضوی]]&lt;br /&gt;
*  دکتر [[علی افضلی]]&lt;br /&gt;
*  استاد[[سید علیرضا حسینی شیرازی]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[دکتر محمدعلی مهدوی راد]]&lt;br /&gt;
* حجة الاسلام [[دکتر ناصر رفیعی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نشانی دانشگاه قرآن و حدیث==&lt;br /&gt;
'''نشانی دانشگاه در قم:''' میدان 72 تن ، بزرگراه امام علی (ع) «کمربندی قم – کاشان» ، کیلومتر 6 ، مؤسسه علمی _ فرهنگی دارالحدیث&lt;br /&gt;
[http://map.parsijoo.ir/?lat=34.638142395263394&amp;amp;lon=50.92002435400428&amp;amp;q=&amp;amp;z=17  نمایش نشانی روی نقشه]&lt;br /&gt;
نشانی پردیس تهران: شهرری، ضلع جنوبی حرم حضرت عبدالعظیم حسنی (ع).&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تلفن : &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
025-371760&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
021-51290&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== پایگاه های دانشگاه قرآن و حدیث ==&lt;br /&gt;
*سایت دانشگاه قرآن و حدیث:http://www.qhu.ac.ir &lt;br /&gt;
*نشانی قبلی سایت دانشگاه:http://www.hadith.ac.ir &lt;br /&gt;
*وبگاه مرکز الکترونیکی دانشگاه قرآن و حدیث:http://www.vu.qhu.ac.ir&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
* [[مرکز اسناد انقلاب اسلامی]]، [[فرهنگنامه نهادهای انقلاب اسلامی]]، مدخل &amp;quot;دانشکده‌ی علوم حدیث&amp;quot; از سید محمدمهدی بهشتی‌نژاد، در دسترس در [http://daneshnameh.irdc.ir/?p=1757 پایگاه دانشنامه های انقلاب اسلامی و تاریخ ایران]، بازیابی: 18 مهرماه 1392.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [http://quran.aqlibrary.ir/index.php?option=com_content&amp;amp;view=article&amp;amp;id=911:1390-08-22-19-13-14&amp;amp;catid=19:1390-03-30-18-25-57&amp;amp;Itemid=77 دانشکده علوم حدیث (قم)، پایگاه کتایخانه تخصصی علوم قران و حدیث]، بازیابی: 11 آبان 1392&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [http://www.farsnews.com/printable.php?nn=13920328000547 معاون آموزشی و تحصیلات تکمیلی دانشگاه قرآن و حدیث خبر داد: ﺑﺮﮔﺰاری ﻧﺨﺴﺘﯿﻦ دوره ﭘﺬﯾﺮش داﻧﺸﺠﻮ در رﺷﺘه ﻋﻠﻮم ﻗﺮآن و ﺣﺪﯾﺚ]، بازیابی :11 آبان 1392&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [http://www.qhu.ac.ir دانشگاه قرآن و حدیث] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:دارالحدیث]]&lt;br /&gt;
[[رده:دانشگاه های جمهوری اسلامی ایران]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A7%DA%A9%D8%A8%D8%B1_%D9%87%D8%A7%D8%B4%D9%85%DB%8C_%D8%B1%D9%81%D8%B3%D9%86%D8%AC%D8%A7%D9%86%DB%8C&amp;diff=63923</id>
		<title>اکبر هاشمی رفسنجانی</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A7%DA%A9%D8%A8%D8%B1_%D9%87%D8%A7%D8%B4%D9%85%DB%8C_%D8%B1%D9%81%D8%B3%D9%86%D8%AC%D8%A7%D9%86%DB%8C&amp;diff=63923"/>
		<updated>2016-06-07T19:41:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: افزودن رده&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{الگو:منبع الکترونیکی معتبر|ماخذ=پایگاه}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اکبر هاشمی رفسنجانی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی رفسنجانی در سال سوم شهریور ۱۳۱۳ (برابر با ۴ آگوست ۱۹۳۴) در روستای بهرمان شهرستان رفسنجان و در خانواده‌ای نسبتاً ثروتمند به دنیا آمد. او یکی از ۹ فرزند میرزاعلی هاشمی بهرمانی و ماه‌بی‌بی صفریان است. پدرش با تحصیلات حوزوی از باغ‌داران و تاجران پسته بهرمان از توابع بخش نوق رفسنجان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در سن ۵ سالگی تحصیل را از مکتبخانه ای در نوق آغاز نمود. در سن ۱۴ سالگی به [[قم]] رفت و به تحصیل علوم دینی پرداخت. اساتید وی در [[حوزه علمیه]] قم آیات عظام سید حسین طباطبایی بروجردی، امام خمینی، سید محمد محقق داماد، محمدرضا گلپایگانی، سید محمدکاظم شریعتمداری، عبدالکریم حائری یزدی، شهاب‌الدین نجفی مرعشی، محمدحسین طباطبائی و حسین‌علی منتظری بوده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در آنجا تحت اثر تعلیمات امام خمینی به سیاست روی آورد و به مخالفت با حکومت محمدرضا شاه پهلوی و انقلاب سفید او پرداخت. با تبعید امام، نقش هاشمی در مبارزه با شاه و نمایندگی امام در داخل کشور پررنگ‌تر شد. با وجود نگرش ضدغربی انقلابیون، او سفرهای زیادی از ژاپن در شرق تا ۲۰ ایالت از ایالات متحده در غرب نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در سال ۱۳۳۷ با عفت مرعشی که دختری از خانواده روحانی و از نوادگان سید محمدکاظم طباطبایی یزدی است، ازدواج نمود. ثمره این ازدواج ۵ فرزند به ترتیب به نامهای فاطمه، محسن، فائزه، مهدی و یاسر است. دو دختر او با دو پسر حسن لاهوتی اشکوری، امام جمعه سابق رشت و از دوستان او در زندان، (که یکی پزشک و دیگری دندان‌پزشک است) ازدواج کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از بین دختران او تنها فائزه هاشمی وارد سیاست شد و یک بار نماینده مجلس شورای اسلامی شد. فاطمه هاشمی نیز تا سال ۱۳۸۸ در بنیاد امور بیماری‌های خاص فعالیت داشت و محسن هاشمی رئیس سابق مترو تهران بوده ‌است. مهدی هاشمی نیز مسئولیت‌هایی مانند ریاست سازمان بهینه سازی مصرف سوخت و ریاست مرکز تحقیقات دانشگاه آزاد اسلامی را بر عهده داشته‌ است.&lt;br /&gt;
[[تفسیر راهنما]] از آثار ایشان است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://rafsanjani.ir/view.php?id=12088 سایت شخصی ایشان]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوران مبارزه پیش از انقلاب==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی رفسنجانی یکی از چهره‌های تاثیرگذار در روند انقلاب ایران و همچنین دوران پس از آن تا امروز است. آشنایی و دوستی او با امام خمینی از اواخر دهه سی شمسی آغاز شد. ولی فعالیت سیاسی خود را از سال ۱۳۴۰ آغاز کرد. او در دوران قبل از انقلاب، بسیار به امام نزدیک بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی پیش از انقلاب، یکی از مخالفان برنامه‌های نوگرایانه شاه (انقلاب سفید) شناخته می‌شد. با تبعید امام، رفسنجانی در ایران ماند و مخالفت‌هایش با این برنامه‌ها افزایش یافت. این مخالفت‌ها سرانجام به دستگیری و زندانی شدن او منجر شد. در مجموع و از سال ۱۳۳۷ تا سال ۱۳۵۷ هاشمی رفسنجانی ۷ بار و مجموعا ۴ سال و ۵ ماه به جرم فعالیت مخفیانه علیه حکومت پهلوی به زندان افتاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگرچه در بعد فردی عمده فعالیت مبارزاتی وی پیش از انقلاب را سخنرانی‌های مختلف و کارهای انتشاراتی تشکیل می‌دادند ولی امام در دوران تبعید، نقش مدیر مالی مبارزات انقلاب و نیز ارتباط با سایر گروه‌های انقلابی را نیز بر عهده وی گذاشته بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از جمله گروه‌هایی که پیوندهای عمیقی با هاشمی داشتند، حزب مؤتلفه اسلامی بود که مسئول ترور حسنعلی منصور شناخته می‌شد. همین ارتباطات یکی دیگر از دلایل دستگیری‌های او بود. در زندان او فرصت یافت تا با سایر گروه‌های مخالف شاه آشنا شود. هاشمی در آغاز دهه پنجاه، به گروه مارکسیست اسلامی مجاهدین خلق ایران پیوست ولی خیلی زود آنان را ترک کرد و به فعالیت اقتصادی بساز و بفروشی آپارتمان در تهران روی آورد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پس از انقلاب==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از پیروزی انقلاب او یکی از اعضای شورای انقلاب اسلامی شد. او از بدو تشکیل این شورا، یکی از قدرتمندترین چهره‌های آن بود همچنین او مدتی سرپرستی وزارت کشور را بر عهده گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او یکی از ۲۸ عضو اولیه و موسس جامعه روحانیت مبارز (یک تشکل راستگرای سنتی) و همچنین یکی از اعضای موسس حزب جمهوری اسلامی در سال اول پس از انقلاب بود. سال‌ها بعد، باز او بود که درخواست انحلال این حزب را به امام داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با تسخیر لانه جاسوسی به ‌وسیله دانشجویان پیرو خط امام در سال ۱۳۵۸، هاشمی رفسنجانی از آن به‌ عنوان یکی از بزرگترین اقدامات سازنده در تاریخ کشور یاد کرد. با این ‌حال او در دهمین سالگرد پیروزی انقلاب در یک مصاحبه گفت که با توجه به تجارب این سال‌ها گروگان‌گیری اشتباه بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نخستین قانون انتخابات پس از انقلاب با مشارکت او تدوین شد و پس از برگزاری اولین انتخابات مجلس به مجلس راه یافت و با آغاز کار مجلس در ۷ خرداد ۱۳۵۹ اولین رئیس مجلس شورای اسلامی ایران شد. در بهار سال ۱۳۶۰ در عزل ابوالحسن بنی‌صدر از فرماندهی کل قوا و سپس تصویب طرح عدم کفایت سیاسی او نقشی تعیین کننده داشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در تابستان ۱۳۶۰ او بود که اعتراض مجلس را به رد یکی از مصوباتش توسط شورای نگهبان به اطلاع امام رساند و توانست برای اولین‌ بار، راهکار قانونی‌ای برای اجرایی شدن قوانینی که توسط شورای نگهبان خلاف شرع دانسته شده بود، ایجاد کند. راهکاری که بعدها به تشکیل مجمع تشخیص مصلحت نظام به ریاست خودش منجر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی در دوره جنگ، علاوه بر ریاست مجلس یکی از ائمه جمعه موقت تهران (تا سی سال بعد)، نماینده امامدر شورای عالی دفاع (بعد از شهادت مصطفی چمران در سال ۱۳۶۰) و جانشین فرمانده کل قوا در ماه‌های پایانی جنگ ایران و [[عراق]] بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریاست جمهوری==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی در انتخابات سال 1368، به ریاست جمهوری رسید. 4 سال بعد در سال 1372، هاشمی توانست بار دیگر به ریاست جمهوری برسد. وی در این دوره به لقب «سردار سازندگی» دست یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوران اصلاحات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با نزدیک شدن به پایان دور دوم ریاست جمهوری، کمسیون فرهنگ و ارشاد مجلس شورای اسلامی تلاش کرد تا اصلاحیه‌ای را به تصویب برساند که بر اساس آن، هاشمی بتواند برای سومین بار پیاپی در انتخابات ریاست جمهوری شرکت کند. این اقدام بی‌درنگ مورد اعتراض قرار گرفت. هاشمی نیز تصمیم گرفت ابتکار عمل را از دست ندهد و همگام با اصلاح‌طلبان مسیر اصلاحات را انتخاب کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او ابتدا برای مدت چند ماه تلاش کرد تا میرحسین موسوی را ترغیب به شرکت در انتخابات کند. ولی پس از این که او نامزدی در انتخابات را نپذیرفت، هاشمی از نامزدی سید محمد خاتمی (که پس از خروج از کابینه در سال ۱۳۷۰ همواره مشاور او بود) حمایت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او دو سال پس از اتمام دوران ریاست جمهور خود و در سال ۱۳۷۸ در انتخابات مجلس ششم برای بدست آوردن نمایندگی تهران شرکت کرد. در این انتخابات او به سختی توانست آخرین نفر پذیرفته شده باشد. علیرغم این پیروزی، هاشمی رفسنجانی قبل از تحلیف به عنوان نماینده از این پست استعفا داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوره پس از اصلاحات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی بار دیگر در انتخابات ریاست جمهوری سال ۱۳۸۴ شرکت کرد. با وجود آنکه او در مرحله اول انتخابات آرایی بیش از محمود احمدی‌نژاد کسب کرده ‌بود ولی در مرحله دوم نتوانست بیش از ۳۶ درصد از آرا را کسب کند. در واقع رای‌دهندگان ترجیح دادند از میان دو فردی که یکی را می‌شناختند و دیگری را نمی‌شناختند، ناشناخته را انتخاب کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پیروزی او در انتخابات مجلس خبرگان رهبری در سال ۱۳۸۶، فرصتی برای جبران شکست‌های پیشین او را فراهم آورد. هاشمی در تهران آرای بیشتری نسبت به سایر نامزدها کسب کرده‌ بود و نماینده اول پایتخت محسوب می‌شد و توانست ریاست خبرگان را کسب کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از انتخابات سال 88، در واکنش به برخی اغتشاشات در تهران، هاشمی سکوت غیرمعمول خود را شکست. او در خطبه‌های نماز جمعه تهران (۲۶ تیر ۱۳۸۸) شورای نگهبان را به از دست دادن فرصت متهم کرد. نتایج انتخابات را از دید مردم مشکوک و تردیدآمیز خواند و از نظام خواست تا با آزادکردن زندانیان سیاسی، اعتماد را به مردم بازگرداند. در فتنه 88 نزدیکان هاشمی به ویژه فائزه هاشمی و مهدی هاشمی دستگیر شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با اعلام کاندیداتوری مهدوی کنی برای ریاست خبرگان در سال ۱۳۸۹، هاشمی از کاندیداتوری برای این سمت نیز استعفا داد و ریاست مجلس خبرگان را به مهدوی کنی واگذار کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
* [http://www.jamnews.ir/detail/News/151069 سایت جام نیوز]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده: شخصیت ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:شخصیت های سیاسی]]&lt;br /&gt;
[[رده:علمای معاصر]]&lt;br /&gt;
[[رده:مفسرین قرآن]]&lt;br /&gt;
[[رده:دولتمردان]]&lt;br /&gt;
[[رده:خطیبان]]&lt;br /&gt;
[[رده:مجتهدین]]&lt;br /&gt;
[[رده:مبارزان علیه پهلوی]]&lt;br /&gt;
[[رده:ائمه جمعه]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%DA%A9%D8%AA%D8%B1_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D9%82%D8%B1%DB%8C%D8%A8&amp;diff=63922</id>
		<title>دکتر محمد قریب</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%DA%A9%D8%AA%D8%B1_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D9%82%D8%B1%DB%8C%D8%A8&amp;diff=63922"/>
		<updated>2016-06-07T19:36:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* زندگینامه */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;دکتر محمد قریب «پدر علم پزشکی کودکان ایران» (۱۲۸۸ در تهران – ۱۳۵۳) از اولین پزشکان متخصص طب اطفال ایران و بنیانگذار طب نوین اطفال در [[ایران]] و از بنیانگذاران بیمارستان مرکز طبی کودکان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== زندگینامه ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر محمد قریب در سال ۱۲۸۸ در [[تهران]] متولد شد. پدرش مرحوم علی اصغر خان قریب و از مردم روستای [[گرکان]] از توابع [[تفرش]] بود. تحصیلات ابتدایی را در [[دبستان سیروس]] و متوسطه را در [[دارالفنون]] تهران (دارالمعلمین) گذراند . او در سال ۱۳۰۶ شمسی در زمره اولین گروه دانشجویان ایرانی بود که برای ادامه تحصیل در رشته پزشکی به [[فرانسه]] رفتند. وی در پایان سال اول در شهر رن فرانسه موفق به دریافت جایزه لابراتور تشریح دانشکده پزشکی شد. وی در سال ۱۳۱۴ نخستین ایرانی بود که توانست در کنکور انترنی بیمارستان پاریس موفق شود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب ، به پاس خدمات چشمگیر علمی ، به دریافت نشان دانش از دانشگاه تهران و نشان درجهٔ اول فرهنگ از [[وزارت آموزش و پرورش]] و نشان عالی لژون‌ دونور از دولت فراسه نائل گشت.&lt;br /&gt;
=== جوانی ===&lt;br /&gt;
وی در سال ۱۳۱۵ با دوشیزه زهرا قریب دختر مرحوم [[استاد عبدالعظیم قریب]] ازدواج کرد . و در سال ۱۳۱۷ به ایران بازگشت. پس از طی نمودن دوره سربازی در سال ۱۳۱۹ به عنوان دانشیار طب اطفال در دانشگاه به فعالیت علمی مشغول گردید. وی ابتدا در [[بیمارستان رازی]] به اداره بخش اطفال مشغول شد و بعد از آن به [[بیمارستان هزار تختخوابی]] رفت و در آنجا بخش اطفال را دایر کرد. او در سال ۱۳۱۹ کتاب بیماریهای کودکان را به چاپ رساند و در سال ۱۳۳۵ با همکاری دکتر حسن اهری آن را با اصلاحات جدید تجدید چاپ نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر قریب در سال ۱۳۲۱ موفق به دریافت نشان عالی دولت فرانسه شد و در سال ۱۳۵۰ به عضویت هیئت مدیره انجمن بین المللی بیماریهای کودکان در آمد. همچنین در آخرین سالهای عمر وی موفق به دریافت نشان درجه اول فرهنگ از وزارت آموزش و پرورش شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در طول سالهای فعالیت علمی خود در کنگره‌های مختلف بین المللی در کشورهای مختلف از جمله فرانسه، [[آمریکا]]، [[کانادا]]، [[ژاپن]]، [[ترکیه]] و [[اتریش]] شد و عضویت چندین مجمع علمی بین المللی را برعهده داشت. وی اولین تعویض خون را در ایران انجام داد و از بنیانگذاران انتقال خون در ایران بود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب همواره به یافته های جدید طب جهان احاطه داشت و این گونه مطالب را به دانشجویان خود ارایه کرده، آنان را برای پیگیری پیشرفت های علمی در جهان تشویق می کرد. برای مثال تا قبل از او، کسی در ایران با &amp;quot;آنتی بیوتیک&amp;quot; آشنا نبود، اما ایشان برای اولین بار اعلام کرد که داروهای جدید برای از بین بردن میکروب ها شناخته شده است که ارزش آن بسیار بیشتر از داروهای قبلی می باشد. اما بیش از توجه به روش های نوین، بر آموزش خانواده ها و برخورد عاطفی و اخلاقی با بیماران تاکید می کرد. دستگیری از مستمندان و دردمندان و رسیدگی به نابسامانی های زندگی بیماران، از دیگر ویژگی های بارز استاد قریب بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ساعت های مطالعه وی، بسیار بیشتر از شاگردانش بود و صبح ها در کمال سخاوت، جدیدترین نتایج مطالعات خود را در اختیار دانشجویان قرار می داد. به تربیت مناسب دانشجویان علاقه خاصی داشت و در هنگام درمان کودکان بیمار، دانشجویان خود را نیز در آنجا حاضر می کرد و درباره بیماری از آن ها سوالاتی می پرسید. اگر جواب دانشجویی مناسب نبود، با متلک های استاد رو به رو می شد و همین مسئله سبب می شد تا دانشجویان برای فرار از  سخنان قریب، دقت بیشتری نشان دهند. ویزیت روزانه دکتر قریب برای رزیدنت ها و دانشجویان، تجربه آموزشی بی نظیری بود که اغلب، عده زیادی داوطلب شرکت در آن بودند. وی صبح ها زودتر از دیگران به بیمارستان می رسید و پس از شنیدن گزارش های صبحگاهی دانشجویان، به اتفاق آنان به بالین بیمار می رفت و با بحث و بررسی دقیق، دانشجویان را در تشخیص صحیح راهنمایی می کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که در کلاس درس از  اقدامات رژیم شاه  انتقاد  می‌کرد و پس از واقعه 28 مرداد 32 نیز بدنبال امضای یک بیانیه به همراه ده تن دیگر از اعضاء هیئت علمی دانشگاه مانند مهندس بازرگان، دکتر سحابی و دکتر نعمت‌الهی به دستور شاه از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت او در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی شد.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://chmc.tums.ac.ir/index.php/sdfghujkryuio سایت مرز طبی کودکان]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== مهم ترین اقدام‌ها ===&lt;br /&gt;
از مهمترین اقدامات او بنیانگذاری و تأسیس اولین بیمارستان تخصصی کودکان یعنی بیمارستان مرکز طبی کودکان به همراه دکتر حسن اهری بود که ایشان این اقدام را در زمان بازنشستگی خود انجام دادند مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که بارها در کلاس درس به اقدامات رژیم پهلوی انتقاد نموده و پس از واقعه ۲۸ مرداد ۱۳۳۲ نیز پس از امضای یک بیانیه به همراه ۱۰ تن دیگر از اعضای هیئت علمی دانشگاه مانند [[مهندس بازرگان]]، دکتر سحابی و دکتر نعمت الهی به دستور [[محمدرضا شاه]] از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت ایشان در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی گردید.&lt;br /&gt;
=== درگذشت ===&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در سال ۱۳۵۱ به هماچوری (دفع خون از دستگاه ادراری) مبتلا شد که بعدها تشخیص سرطان مثانه داده شد و اقدامات درمانی انجام شده درایران و آمریکا تأثیر چندانی بر بیماری ایشان نداشته و سرانجام در روز سه شنبه اول بهمن ماه ۱۳۵۳ در [[بیمارستان مرکز طبی کودکان]] محل خدمت خود درگذشت و طبق وصیت وی، در [[قبرستان شیخان قم]] به خاک سپرده شد. در مراسم تدفین دکتر محمد قریب [[آیت الله مرعشی]] نماز ایشان را اقامه فرمودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
روزگار قریب نام مجموعه تلویزیونی است که کیانوش عیاری درباره زندگی دکتر محمد قریب ساخته‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شخصیت ها]]&lt;br /&gt;
[[رده: پزشکان بزرگ مسلمان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D9%81%D8%B3%DB%8C%D8%B1_%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%86%D9%85%D8%A7_(%DA%A9%D8%AA%D8%A7%D8%A8)&amp;diff=63883</id>
		<title>تفسیر راهنما (کتاب)</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D9%81%D8%B3%DB%8C%D8%B1_%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%86%D9%85%D8%A7_(%DA%A9%D8%AA%D8%A7%D8%A8)&amp;diff=63883"/>
		<updated>2016-06-06T20:17:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: افزودن منبع ویکی شیعه&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تفسیر راهنما از آثار حجةالاسلام [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]] است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== بخش از مقدمه تفسیر  ==&lt;br /&gt;
«در سال 1354 پس از بازگشت از سفری که به منظور اهداف مبارزاتی صورت گرفته بود، توسط عناصر [[ساواک]] بازداشت شدم. در همان مراحل نخستین بازجویی با توجه به شرایط آن روز و مدارک موجود در پرونده معلوم بود که دوران زندانی‌ام طولانی خواهد بود. بدین جهت عزم خود را برای تهیه تحقیقی تحت عنوان کلید [[قرآن]] جزم کردم. علی‌رغم کوفتگی‌ها و جراحات ناشی از شکنجه که توان جسمی مرا به تحلیل برده بود، روحیه‌ام پایداری و نشاط لازم را برای آغاز این کار دارا بود. از مأموران ساواک مستقر در کمیته مشترک خواستم تا قرآنی در اختیارم بگذارند. ولی آنان امتناع کردند. چون می‌دانستند قرآن برای ما در سلول‌های انفرادی انیس خوبی است و رنج دردها، مشکلات و تنهایی را جبران می‌کند. با وجود این، در اختیار نداشتن قرآن نمی‌توانست مانعی برای تصمیم من در آغاز راه مبارزه محسوب شود. از حافظه‌ام یاری جستم. زیرا آن روزها هنوز بیشتر آیات قرآن را با لفظ و ترتیب در حافظه داشتم. توفیق الهی مدد کرد و به نتایج خوبی رسیدم. با اینکه وسیله یادداشت نداشتم، ولی صفحات ذهنم انبوهی از مطالب ومضامین قرآن را درخود ثبت کردو نظم داد.»&amp;lt;ref&amp;gt;[http://rafsanjani.ir/view.php?id=12088 مرکز اسناد و مدارک صاحب اثر]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''تفسیر راهنما''' کتابی در تفسیر [[قرآن کریم]] اثر  [[اکبر هاشمی رفسنجانی]] که نگارش آن پیش از [[انقلاب اسلامی ایران]] آغاز شده و بعدها توسط محققان و قرآن پژوهان [[مرکز فرهنگ و معارف قرآن]] [[دفتر تبلیغات اسلامی قم]] و زیر نظر نویسنده ادامه یافته است. از ویژگی‌های این تفسیر، بهره‌مندی از کلید واژه‌های موضوعی قرآن و برداشت‌های احتمالی در [[تفسیر]] به صورت طبقه بندی و تفکیک شده است. این تفسیر در سال ۱۳۷۲ کتاب سال [[جمهوری اسلامی ایران]] شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نویسنده==&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی در سال ۱۳۱۳ شمسى در روستاى بهرمان از توابع شهرستان [[رفسنجان]] به دنیا آمد. بعد از تحصیلات مقدماتی، در سال ۱۳۲۷ به [[قم]] مهاجرت کرد در [[حوزه علمیه قم]] در درس آیات عظام [[بروجردی]]، [[امام خمینی]]، [[سید محمد محقق داماد]]، [[سید محمدرضا گلپایگانی|محمدرضا گلپایگانی]]، [[سید کاظم شریعتمداری]]، [[مرتضی حائری یزدی|مرتضی حایری یزدی]]، [[مرعشی نجفی|نجفی مرعشی]]، [[علامه طباطبائی]]، زاهدی و [[منتظری]] شرکت کرد. وی از سال ۱۳۳۷ تا دوران [[انقلاب اسلامی ایران]] در مبارزات حضور داشت و هفت بار دستگیر و زندانی شد. بعد از انقلاب سمت‌های متعددی داشته است از جمله: عضو [[حزب جمهوری]]، سرپرست وزارت کشور، ریاست [[مجلس شورای اسلامی]]، [[امام جمعه]] موقت تهران، جانشین فرماندهی کل قوا، ریاست‌ جمهوری، ریاست شورای عالی انقلاب فرهنگی، ریاست شورای عالی امنیت ملی، ریاست مجلس خبرگان رهبری. وی هم اکنون ریاست مجمع تشخیص مصلحت نظام را به عهده دارد. تفسیر راهنما یکی از ۹ عنوان کتاب هاشمی است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.khobreganrahbari.com/modules.php?name=Content&amp;amp;pa=showpage&amp;amp;pid=69 پایگاه اطلاع رسانی مجلس خبرگان رهبری.]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==هدف از تفسیر راهنما==&lt;br /&gt;
هدف از نوشتن تفسیر راهنما، این است كه تمامی موضوعات قرآنی ـ‌در حدّ‌توان‌ـ استخراج و به نظم خاصی در‌آید. سپس تمامی آنها نمایه گذاری، كد گذاری و فهرست‌بندی شود، تا معجمی موضوعی از مطالب قرآنی تهیه و در نتیجه كمبودها و نواقص معجم‌های لفظی جبران گردد. زیرا معجم لفظی نمی‌تواند الفاظی نظیر: انسان، بشر، ناس و بنی‌آدم را در یك جا جمع كند با این كه این الفاظ اگر مترادف هم نباشند، دارای اشتراکهای زیادی هستند. امّا اگر معجم معنایی و محتوایی خوبی فراهم شود توان چنین كاری را دارد و یكی از اهداف عمده تفسیر راهنما نیز همین است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==آغاز==&lt;br /&gt;
نویسنده درباره آغاز نگارش تفسیر خود می‌‌نویسد:&lt;br /&gt;
:::«در آن زندان با ناگواری‌هایش به خاطر انس، الفت و پیوندی که با [[قرآن]] پیدا کرده بودم و شور و نشاطی که در خود احساس می‌کردم، روزی چند بار مضمون «این الملوک و ابناء الملوک» را بر قلب یا زبان می‌گذراندم. در مراحل نخستین، کتاب تفسیر در اختیار نداشتم، ولی پس از مدتی به تفسیر [[مجمع البیان]] و بعد از [[سوره انفال]] به تفسیر [[المیزان]] نیز دست یافتم. بعد از نماز صبح بلافاصله مشغول می‌شدم و تا نزدیک ظهر فقط به این کار می‌پرداختم. فقط برای صرف صبحانه و ورزش مختصر صبحگاهی و انجام نیازهای ضروری از کارم منفک می‌شدم، به جز روزهایی که مسئول کار زندان بودم و نظافت و ظرفشویی و سایر کارها وقتم را می‌گرفت. برای استفاده بیشتر از وقت و امکانات محدود زندان و تسهیل انتقال فیش‌ها به خارج، فیش‌ها، کوتاه، مختصر و اشاره‌ای و متراکم تهیه می‌شد و کار بدین منوال پیش می‌رفت. سرانجام دوران محکومیتم از ۶ سال به سه سال کم شد و من تصمیم به خارج ساختن فیش‌ها گرفتم. کم کم ملاقات‌ها بر خلاف معمول، که از پشت شیشه با تلفن بود، حضوری انجام می‌گرفت و من در هر ملاقاتی با نگرانی و اضطراب یک یا چند دفتر را از زیر عبا به دست همسرم در زیر چادر می‌دادم و او با شجاعت مخصوص خود خطر را می‌پذیرفت و از زندان بیرون می‌برد. حدود ده روز از سه سال محکومیتم مشمول عفو شد و پیش از پیروزی انقلاب آزاد شدم. مراحل بعدی تحقیق و تدوین این تفسیر در مراکز مختلفی بررسی و پیگیری شد و در نهایت به وسیله مرکز فرهنگ و معارف قرآن وابسته به دفتر تبلیغات اسلامی تکمیل شد.»&amp;lt;ref&amp;gt; تفسیر راهنما، ج ۱، مقدمه، ص۹- ۱۶.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==روش تفسیر==&lt;br /&gt;
*'''توجه به روایات''': این تفسیر در زمره تفسیرهای روایی نیست ولی روایاتی را که به بیان ظاهر آیات پرداخته اند و ابهامی از آن را زایل ساخته‌اند در پایان آیه مربوطه آورده و متن عربی و ترجمه فارسی آنها را پس از برداشت‌های هر آیه ضمیمه کرده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''اعتماد به ظاهر آیات''': در سرتاسر این تفسیر حجیت‌داشتن ظواهر قرآن مشهود است. گرچه رعایت سبک ترتیبی - تطبیقی که تفسیر راهنما را از دیگر تفاسیر ممتاز ساخته است، به نویسندگان آن اجازه نداده است که بین آیات ناسخ و منسوخ و حتی عام و خاص به قضاوت نشسته و نتیجه آن را به صورت دیدگاه قرآن در آن موضوع ارائه دهند. امید است این مهم به صورتی دیگر تامین شود و به بانک اطلاعات مرکز فرهنگ و معارف غنا بخشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ارتباط آیات''': محققان از ارتباط جمله‌ها و بندهای هر آیه با یکدیگر و از سیاق آیاتی که در مجموعه‌ای مرتبط قرار گرفته‌اند، نکته‌های خوبی استخراج کرده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ساختار ادبی''': در سراسر تفسیر، نویسندگان آن به ساختار ادبی آیه نظر داشته و توجه به لغت‌ها و ترکیب‌های آیه مایه پیدایش برداشت‌های جدیدی شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''شأن نزول‌ها''': شان نزول‌هایی که محققان این تفسیر آن را معتبر شناخته‌اند به برداشت‌ها کمک کرده است و آنها را افزایش داده یا قیدی به آن افزوده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''مفهوم‌گیری''': از شیوه‌های دیگری که در این تفسیر مایه دست‌یابی به بسیاری از برداشت‌ها شده «مفهوم‌گیری » از آیات است. البته برداشت‌هایی که لازمه مفاد آیه می‌باشد گرچه به تأمل نیازمند باشد، حتی المقدور از قلم دور نمانده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''نقل قول‌ها''': قرآن هرگاه سخنی را از دیگری نقل می‌کند، این نکته بدیهی می‌نماید که درباره اثبات یا نفی آن نظر دارد و آن را به منظور آموختن نکته‌ای مثبت یا منفی نقل کرده است. نویسندگان تفسیر راهنما این مبنا را باور داشته و براساس آن برداشت‌های مفیدی ثبت کرده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''آراء مفسران''': تفسیر راهنما را نمی‌توان کتابی که جامع نظرها و آرا باشد، معرفی کرد. گروه‌های تفسیری خود را به مطالعه دقیق ده تفسیر از جمله [[المیزان]] و [[مجمع البیان]] ملزم ساخته بودند. ولی هرگز به صرف وجود یک قول، آن را به برداشتی هر چند احتمالی تبدیل نکرده‌اند، بلکه تنها به نکاتی عنایت ورزیده‌اند که پس از مطالعه تفاسیر، خود نیز آن را پسندیده یا محتمل دیده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''کتاب‌های لغت''': مراجعه به کتاب لغت برای مفسر اجتناب ناپذیر است. او هر چند عرب‌زبان باشد، باید لغت را در استعمال عصر ظهور [[اسلام]] در نظر گیرد و از آیه همان معنایی را بفهمد که عرب‌های [[مکه]] و [[مدینه]] در آن زمان می‌فهمیدند. در آیین‌نامه‌هایی که نویسندگان تفسیر راهنما خود را به آن ملزم ساخته‌اند، نام کتاب‌هایی خاص به عنوان منابع اصلی لغت آمده است که عبارتند از: [[المفردات (کتاب)|مفردات راغب]]، [[لسان العرب (کتاب)|لسان العرب]]، [[القاموس المحیط (کتاب)|القاموس المحیط]]، [[المصباح المنیر (کتاب)|المصباح المنیر]]، [[معجم مقاییس اللغه (کتاب)|معجم مقاییس اللغه]]، [[تاج العروس (کتاب)|تاج العروس]]، النهایة، الصحاح. بدیهی است سخن اهل لغت را تنها در صورتی پذیرفته‌اند که به آنها اطمینان داده است؛ زیرا هر مفسر و یا مترجم قرآن می‌داند که صرف وجود معنایی در کتاب‌های لغت دلیل صحت و یا اراده آن از کلام نیست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''توضیحات''': اگر گفته شود برای دانشجویان و طلاب مفیدترین بخش‌های تفسیر راهنما همان توضیحاتی است که ذیل برداشت‌ها آمده است، سخنی گزاف نیست، زیرا برخی نکات آیه تنها با توجه به آن چه در توضیحات آمده است ذهن مخاطب را به خود جلب می‌کند و برای کسی که بخواهد بدون مراجعه به آن، برداشت‌ها را مطالعه کند سؤال‌های زیادی بی‌جواب خواهد ماند. علاوه این که گاه در توضیحات، احتمالات گوناگونی در مصداق‌های آیه بیان می‌شود که چون در متن برداشت‌ها نیامده است، از راه فهرست‌های آخر آیه و نیز آخر کتاب به آن دست نمی‌یابند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''برداشت‌های احتمالی''': تفاسیر گوناگونی که تاکنون بر قرآن نوشته شده است، گاه نکته‌هایی را بیان کرده‌اند که نه می‌توان آن را به راحتی پذیرفت و نه می‌توان به آن بی‌اعتنا ماند. نویسندگان تفسیر راهنما از طرفی ثبت این نکته‌ها را برای تهیه فهرستی جامع از مطالب قرآن ضروری دیده‌اند و از طرفی دیگر نخواسته‌اند صحت آن نکته‌ها را به مخاطب القا کرده باشند. انتخاب علامت ستاره که نه نور خورشید دارد و نه تاریک است برای این برداشت‌ها آنها را از مطالب دیگر آیه ممتاز ساخته است تا کسانی که مایلند احتمالات نه چندان قوی را نیز دیده باشند به خواسته خود برسند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ترجمه آیات''': انگیزه اصلی هاشمی رفسنجانی، تهیه فهرستی جامع از مطالب قرآن بود و برای این هدف نیازی به ترجمه احساس نمی‌شد تا زمانی که تفسیر به چاپ رسید و محققان با مراجعه به آن دریافتند که برای فهم آیه وجود ترجمه‌ای که با برداشت‌ها مطابقت کامل داشته باشد ضروری است. ترجمه‌ای که هم‌اکنون از مجلد هشتم به بعد ذیل آیات قرار گرفته است از ترجمه‌های دیگر دو امتیاز قابل توجه دارد: نخست این که تا حد امکان با فهم نویسندگان تفسیر راهنما هم‌آهنگ شده است و دیگر این که سعی شده است از خطاهایی که گاه در ترجمه‌های دیگر مشاهده شده، محفوظ بماند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''نمایه‌ها''': اصلی‌ترین هدف تفسیر راهنما را نمایه‌های آن تأمین می‌کند این نمایه‌ها که نشان می‌دهد در هر آیه چند مطلب و چه مطلبی وجود دارد، ذیل هر آیه و به ترتیب عناوین اصلی و فرعی و تنظیم الفبایی آمده است و در آخر هر مجلد مطالب سوره های موجود در آن به تفصیل فهرست نگاری شده است.&amp;lt;ref&amp;gt;یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقدها==&lt;br /&gt;
*'''تنگناها''': استخراج تمام مطالب قرآن و فهرست‌کردن آن -که هدف نهایی تفسیر راهنما است در بخشی از معارف قرآنی قالبی می‌طلبد که با طرح موجود در تفسیر راهنما سازگار نیست، زیرا:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:::::الف) در لابه‌لای معارف قرآنی مطالب بسیاری است که پس از ملاحظه چند آیه مختلف درباره یک موضوع استفاده می‌شود; مثلا: وجود [[لیلة القدر]] در [[ماه رمضان]] از جمع آیه «انا انزلناه فی لیلة القدر» و «شهر رمضان الذی انزل فیه القرآن » به دست می‌آید. ولی این معرفت قرآنی و نظایر آن در قالب موجود تفسیر راهنما قابل ارائه نیست. ملاحظه عام و خاص و مطلق و مقید و آیاتی که گفته می‌شود برخی ناسخ دیگری‌اند نیز از تنگناهایی است که سبک تفسیر راهنما اجازه پرداختن به آن را نداده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:::::ب) تکیه بر تک تک مطالب کلی یا جزئی که از آیه استفاده می‌شود و تفکیک آن ها برای توجه دادن کسانی که نمایه‌ها و عنوان‌ها را فهرست می‌کنند لازم است، ولی این تفکیک مطالب گاه به گونه‌ای درآمده است که خواننده گمان می‌کند مطالب تکرار شده است و گاه عبارت‌ها جذابیت لازم را ندارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''افق‌های آینده''': بازنگری تفسیر راهنما به شکلی وسیع و جامع از اهداف تهیه‌کنندگان تفسیر است. هم‌اکنون جمعی به بازبینی تفسیر راهنما و حذف زواید و تکمیل نواقص آن پرداخته‌اند تا در چاپ‌های بعدی این مجموعه بزرگ را در مجلداتی کمتر و با کیفیتی مطلوب‌تر ارائه دهند تا تهیه و مراجعه به آن برای همه قرآن پژوهان میسر شود و در تمام مجلدات، ترجمه آیات ضمیمه شده و روایات تفسیری یکسان گردد.&amp;lt;ref&amp;gt;یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''نقدها''':نقدهایی نیز بر این تفسیر شده است که از جمله آنها مقاله [http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها] می‌باشد. نویسنده در این مقاله پس از معرفی و بیان ابتکارات این تفسیر، نقدهایی نیز بر این تفسیر دارد. در قسمتی از این مقاله نویسنده اشاره می‌کند که بعضی اشکالات این تفسیر مربوط به برداشت‌ها و برخی مربوط به نمایه‌ها است. بخش دیگری از اشکالات نیز در فهرست نهایی پیدا می‌شود که ذیل یک عنوان آیه‌هایی جمع می‌شود که برخی به طور مطابقی بر آن عنوان دلالت دارد، برخی به طور ضمنی و التزامی و برخی از نوع اشاره و امثال آن است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
{{پانویس2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
*منبع اصلی:‌ یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&lt;br /&gt;
*هاشمی رفسنجانی، اکبر، تفسیر راهنما،ج۱، قم بوستان کتاب،۱۳۶۱.&lt;br /&gt;
*[http://www.khobreganrahbari.com/modules.php?name=Content&amp;amp;pa=showpage&amp;amp;pid=69 پایگاه اطلاع رسانی مجلس خبرگان رهبری].&lt;br /&gt;
*[http://fa.wikishia.net/view/%D8%AA%D9%81%D8%B3%DB%8C%D8%B1_%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%86%D9%85%D8%A7_%28%DA%A9%D8%AA%D8%A7%D8%A8%29 ویکی شیعه]&lt;br /&gt;
[[رده:کتاب‌های تفسیری شیعه قرن15(قمری)]]&lt;br /&gt;
[[رده:تفسیرهای قرآن (فارسی)]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D9%81%D8%B3%DB%8C%D8%B1_%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%86%D9%85%D8%A7_(%DA%A9%D8%AA%D8%A7%D8%A8)&amp;diff=63882</id>
		<title>تفسیر راهنما (کتاب)</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D9%81%D8%B3%DB%8C%D8%B1_%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%86%D9%85%D8%A7_(%DA%A9%D8%AA%D8%A7%D8%A8)&amp;diff=63882"/>
		<updated>2016-06-06T20:15:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: صفحه جدید&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تفسیر راهنما از آثار حجةالاسلام [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]] است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== بخش از مقدمه تفسیر  ==&lt;br /&gt;
«در سال 1354 پس از بازگشت از سفری که به منظور اهداف مبارزاتی صورت گرفته بود، توسط عناصر [[ساواک]] بازداشت شدم. در همان مراحل نخستین بازجویی با توجه به شرایط آن روز و مدارک موجود در پرونده معلوم بود که دوران زندانی‌ام طولانی خواهد بود. بدین جهت عزم خود را برای تهیه تحقیقی تحت عنوان کلید [[قرآن]] جزم کردم. علی‌رغم کوفتگی‌ها و جراحات ناشی از شکنجه که توان جسمی مرا به تحلیل برده بود، روحیه‌ام پایداری و نشاط لازم را برای آغاز این کار دارا بود. از مأموران ساواک مستقر در کمیته مشترک خواستم تا قرآنی در اختیارم بگذارند. ولی آنان امتناع کردند. چون می‌دانستند قرآن برای ما در سلول‌های انفرادی انیس خوبی است و رنج دردها، مشکلات و تنهایی را جبران می‌کند. با وجود این، در اختیار نداشتن قرآن نمی‌توانست مانعی برای تصمیم من در آغاز راه مبارزه محسوب شود. از حافظه‌ام یاری جستم. زیرا آن روزها هنوز بیشتر آیات قرآن را با لفظ و ترتیب در حافظه داشتم. توفیق الهی مدد کرد و به نتایج خوبی رسیدم. با اینکه وسیله یادداشت نداشتم، ولی صفحات ذهنم انبوهی از مطالب ومضامین قرآن را درخود ثبت کردو نظم داد.»&amp;lt;ref&amp;gt;[http://rafsanjani.ir/view.php?id=12088 مرکز اسناد و مدارک صاحب اثر]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''تفسیر راهنما''' کتابی در تفسیر [[قرآن کریم]] اثر  [[اکبر هاشمی رفسنجانی]] که نگارش آن پیش از [[انقلاب اسلامی ایران]] آغاز شده و بعدها توسط محققان و قرآن پژوهان [[مرکز فرهنگ و معارف قرآن]] [[دفتر تبلیغات اسلامی قم]] و زیر نظر نویسنده ادامه یافته است. از ویژگی‌های این تفسیر، بهره‌مندی از کلید واژه‌های موضوعی قرآن و برداشت‌های احتمالی در [[تفسیر]] به صورت طبقه بندی و تفکیک شده است. این تفسیر در سال ۱۳۷۲ کتاب سال [[جمهوری اسلامی ایران]] شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نویسنده==&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی در سال ۱۳۱۳ شمسى در روستاى بهرمان از توابع شهرستان [[رفسنجان]] به دنیا آمد. بعد از تحصیلات مقدماتی، در سال ۱۳۲۷ به [[قم]] مهاجرت کرد در [[حوزه علمیه قم]] در درس آیات عظام [[بروجردی]]، [[امام خمینی]]، [[سید محمد محقق داماد]]، [[سید محمدرضا گلپایگانی|محمدرضا گلپایگانی]]، [[سید کاظم شریعتمداری]]، [[مرتضی حائری یزدی|مرتضی حایری یزدی]]، [[مرعشی نجفی|نجفی مرعشی]]، [[علامه طباطبائی]]، زاهدی و [[منتظری]] شرکت کرد. وی از سال ۱۳۳۷ تا دوران [[انقلاب اسلامی ایران]] در مبارزات حضور داشت و هفت بار دستگیر و زندانی شد. بعد از انقلاب سمت‌های متعددی داشته است از جمله: عضو [[حزب جمهوری]]، سرپرست وزارت کشور، ریاست [[مجلس شورای اسلامی]]، [[امام جمعه]] موقت تهران، جانشین فرماندهی کل قوا، ریاست‌ جمهوری، ریاست شورای عالی انقلاب فرهنگی، ریاست شورای عالی امنیت ملی، ریاست مجلس خبرگان رهبری. وی هم اکنون ریاست مجمع تشخیص مصلحت نظام را به عهده دارد. تفسیر راهنما یکی از ۹ عنوان کتاب هاشمی است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.khobreganrahbari.com/modules.php?name=Content&amp;amp;pa=showpage&amp;amp;pid=69 پایگاه اطلاع رسانی مجلس خبرگان رهبری.]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==هدف از تفسیر راهنما==&lt;br /&gt;
هدف از نوشتن تفسیر راهنما، این است كه تمامی موضوعات قرآنی ـ‌در حدّ‌توان‌ـ استخراج و به نظم خاصی در‌آید. سپس تمامی آنها نمایه گذاری، كد گذاری و فهرست‌بندی شود، تا معجمی موضوعی از مطالب قرآنی تهیه و در نتیجه كمبودها و نواقص معجم‌های لفظی جبران گردد. زیرا معجم لفظی نمی‌تواند الفاظی نظیر: انسان، بشر، ناس و بنی‌آدم را در یك جا جمع كند با این كه این الفاظ اگر مترادف هم نباشند، دارای اشتراکهای زیادی هستند. امّا اگر معجم معنایی و محتوایی خوبی فراهم شود توان چنین كاری را دارد و یكی از اهداف عمده تفسیر راهنما نیز همین است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==آغاز==&lt;br /&gt;
نویسنده درباره آغاز نگارش تفسیر خود می‌‌نویسد:&lt;br /&gt;
:::«در آن زندان با ناگواری‌هایش به خاطر انس، الفت و پیوندی که با [[قرآن]] پیدا کرده بودم و شور و نشاطی که در خود احساس می‌کردم، روزی چند بار مضمون «این الملوک و ابناء الملوک» را بر قلب یا زبان می‌گذراندم. در مراحل نخستین، کتاب تفسیر در اختیار نداشتم، ولی پس از مدتی به تفسیر [[مجمع البیان]] و بعد از [[سوره انفال]] به تفسیر [[المیزان]] نیز دست یافتم. بعد از نماز صبح بلافاصله مشغول می‌شدم و تا نزدیک ظهر فقط به این کار می‌پرداختم. فقط برای صرف صبحانه و ورزش مختصر صبحگاهی و انجام نیازهای ضروری از کارم منفک می‌شدم، به جز روزهایی که مسئول کار زندان بودم و نظافت و ظرفشویی و سایر کارها وقتم را می‌گرفت. برای استفاده بیشتر از وقت و امکانات محدود زندان و تسهیل انتقال فیش‌ها به خارج، فیش‌ها، کوتاه، مختصر و اشاره‌ای و متراکم تهیه می‌شد و کار بدین منوال پیش می‌رفت. سرانجام دوران محکومیتم از ۶ سال به سه سال کم شد و من تصمیم به خارج ساختن فیش‌ها گرفتم. کم کم ملاقات‌ها بر خلاف معمول، که از پشت شیشه با تلفن بود، حضوری انجام می‌گرفت و من در هر ملاقاتی با نگرانی و اضطراب یک یا چند دفتر را از زیر عبا به دست همسرم در زیر چادر می‌دادم و او با شجاعت مخصوص خود خطر را می‌پذیرفت و از زندان بیرون می‌برد. حدود ده روز از سه سال محکومیتم مشمول عفو شد و پیش از پیروزی انقلاب آزاد شدم. مراحل بعدی تحقیق و تدوین این تفسیر در مراکز مختلفی بررسی و پیگیری شد و در نهایت به وسیله مرکز فرهنگ و معارف قرآن وابسته به دفتر تبلیغات اسلامی تکمیل شد.»&amp;lt;ref&amp;gt; تفسیر راهنما، ج ۱، مقدمه، ص۹- ۱۶.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==روش تفسیر==&lt;br /&gt;
*'''توجه به روایات''': این تفسیر در زمره تفسیرهای روایی نیست ولی روایاتی را که به بیان ظاهر آیات پرداخته اند و ابهامی از آن را زایل ساخته‌اند در پایان آیه مربوطه آورده و متن عربی و ترجمه فارسی آنها را پس از برداشت‌های هر آیه ضمیمه کرده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''اعتماد به ظاهر آیات''': در سرتاسر این تفسیر حجیت‌داشتن ظواهر قرآن مشهود است. گرچه رعایت سبک ترتیبی - تطبیقی که تفسیر راهنما را از دیگر تفاسیر ممتاز ساخته است، به نویسندگان آن اجازه نداده است که بین آیات ناسخ و منسوخ و حتی عام و خاص به قضاوت نشسته و نتیجه آن را به صورت دیدگاه قرآن در آن موضوع ارائه دهند. امید است این مهم به صورتی دیگر تامین شود و به بانک اطلاعات مرکز فرهنگ و معارف غنا بخشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ارتباط آیات''': محققان از ارتباط جمله‌ها و بندهای هر آیه با یکدیگر و از سیاق آیاتی که در مجموعه‌ای مرتبط قرار گرفته‌اند، نکته‌های خوبی استخراج کرده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ساختار ادبی''': در سراسر تفسیر، نویسندگان آن به ساختار ادبی آیه نظر داشته و توجه به لغت‌ها و ترکیب‌های آیه مایه پیدایش برداشت‌های جدیدی شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''شأن نزول‌ها''': شان نزول‌هایی که محققان این تفسیر آن را معتبر شناخته‌اند به برداشت‌ها کمک کرده است و آنها را افزایش داده یا قیدی به آن افزوده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''مفهوم‌گیری''': از شیوه‌های دیگری که در این تفسیر مایه دست‌یابی به بسیاری از برداشت‌ها شده «مفهوم‌گیری » از آیات است. البته برداشت‌هایی که لازمه مفاد آیه می‌باشد گرچه به تأمل نیازمند باشد، حتی المقدور از قلم دور نمانده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''نقل قول‌ها''': قرآن هرگاه سخنی را از دیگری نقل می‌کند، این نکته بدیهی می‌نماید که درباره اثبات یا نفی آن نظر دارد و آن را به منظور آموختن نکته‌ای مثبت یا منفی نقل کرده است. نویسندگان تفسیر راهنما این مبنا را باور داشته و براساس آن برداشت‌های مفیدی ثبت کرده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''آراء مفسران''': تفسیر راهنما را نمی‌توان کتابی که جامع نظرها و آرا باشد، معرفی کرد. گروه‌های تفسیری خود را به مطالعه دقیق ده تفسیر از جمله [[المیزان]] و [[مجمع البیان]] ملزم ساخته بودند. ولی هرگز به صرف وجود یک قول، آن را به برداشتی هر چند احتمالی تبدیل نکرده‌اند، بلکه تنها به نکاتی عنایت ورزیده‌اند که پس از مطالعه تفاسیر، خود نیز آن را پسندیده یا محتمل دیده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''کتاب‌های لغت''': مراجعه به کتاب لغت برای مفسر اجتناب ناپذیر است. او هر چند عرب‌زبان باشد، باید لغت را در استعمال عصر ظهور [[اسلام]] در نظر گیرد و از آیه همان معنایی را بفهمد که عرب‌های [[مکه]] و [[مدینه]] در آن زمان می‌فهمیدند. در آیین‌نامه‌هایی که نویسندگان تفسیر راهنما خود را به آن ملزم ساخته‌اند، نام کتاب‌هایی خاص به عنوان منابع اصلی لغت آمده است که عبارتند از: [[المفردات (کتاب)|مفردات راغب]]، [[لسان العرب (کتاب)|لسان العرب]]، [[القاموس المحیط (کتاب)|القاموس المحیط]]، [[المصباح المنیر (کتاب)|المصباح المنیر]]، [[معجم مقاییس اللغه (کتاب)|معجم مقاییس اللغه]]، [[تاج العروس (کتاب)|تاج العروس]]، النهایة، الصحاح. بدیهی است سخن اهل لغت را تنها در صورتی پذیرفته‌اند که به آنها اطمینان داده است؛ زیرا هر مفسر و یا مترجم قرآن می‌داند که صرف وجود معنایی در کتاب‌های لغت دلیل صحت و یا اراده آن از کلام نیست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''توضیحات''': اگر گفته شود برای دانشجویان و طلاب مفیدترین بخش‌های تفسیر راهنما همان توضیحاتی است که ذیل برداشت‌ها آمده است، سخنی گزاف نیست، زیرا برخی نکات آیه تنها با توجه به آن چه در توضیحات آمده است ذهن مخاطب را به خود جلب می‌کند و برای کسی که بخواهد بدون مراجعه به آن، برداشت‌ها را مطالعه کند سؤال‌های زیادی بی‌جواب خواهد ماند. علاوه این که گاه در توضیحات، احتمالات گوناگونی در مصداق‌های آیه بیان می‌شود که چون در متن برداشت‌ها نیامده است، از راه فهرست‌های آخر آیه و نیز آخر کتاب به آن دست نمی‌یابند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''برداشت‌های احتمالی''': تفاسیر گوناگونی که تاکنون بر قرآن نوشته شده است، گاه نکته‌هایی را بیان کرده‌اند که نه می‌توان آن را به راحتی پذیرفت و نه می‌توان به آن بی‌اعتنا ماند. نویسندگان تفسیر راهنما از طرفی ثبت این نکته‌ها را برای تهیه فهرستی جامع از مطالب قرآن ضروری دیده‌اند و از طرفی دیگر نخواسته‌اند صحت آن نکته‌ها را به مخاطب القا کرده باشند. انتخاب علامت ستاره که نه نور خورشید دارد و نه تاریک است برای این برداشت‌ها آنها را از مطالب دیگر آیه ممتاز ساخته است تا کسانی که مایلند احتمالات نه چندان قوی را نیز دیده باشند به خواسته خود برسند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''ترجمه آیات''': انگیزه اصلی هاشمی رفسنجانی، تهیه فهرستی جامع از مطالب قرآن بود و برای این هدف نیازی به ترجمه احساس نمی‌شد تا زمانی که تفسیر به چاپ رسید و محققان با مراجعه به آن دریافتند که برای فهم آیه وجود ترجمه‌ای که با برداشت‌ها مطابقت کامل داشته باشد ضروری است. ترجمه‌ای که هم‌اکنون از مجلد هشتم به بعد ذیل آیات قرار گرفته است از ترجمه‌های دیگر دو امتیاز قابل توجه دارد: نخست این که تا حد امکان با فهم نویسندگان تفسیر راهنما هم‌آهنگ شده است و دیگر این که سعی شده است از خطاهایی که گاه در ترجمه‌های دیگر مشاهده شده، محفوظ بماند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''نمایه‌ها''': اصلی‌ترین هدف تفسیر راهنما را نمایه‌های آن تأمین می‌کند این نمایه‌ها که نشان می‌دهد در هر آیه چند مطلب و چه مطلبی وجود دارد، ذیل هر آیه و به ترتیب عناوین اصلی و فرعی و تنظیم الفبایی آمده است و در آخر هر مجلد مطالب سوره های موجود در آن به تفصیل فهرست نگاری شده است.&amp;lt;ref&amp;gt;یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقدها==&lt;br /&gt;
*'''تنگناها''': استخراج تمام مطالب قرآن و فهرست‌کردن آن -که هدف نهایی تفسیر راهنما است در بخشی از معارف قرآنی قالبی می‌طلبد که با طرح موجود در تفسیر راهنما سازگار نیست، زیرا:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:::::الف) در لابه‌لای معارف قرآنی مطالب بسیاری است که پس از ملاحظه چند آیه مختلف درباره یک موضوع استفاده می‌شود; مثلا: وجود [[لیلة القدر]] در [[ماه رمضان]] از جمع آیه «انا انزلناه فی لیلة القدر» و «شهر رمضان الذی انزل فیه القرآن » به دست می‌آید. ولی این معرفت قرآنی و نظایر آن در قالب موجود تفسیر راهنما قابل ارائه نیست. ملاحظه عام و خاص و مطلق و مقید و آیاتی که گفته می‌شود برخی ناسخ دیگری‌اند نیز از تنگناهایی است که سبک تفسیر راهنما اجازه پرداختن به آن را نداده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:::::ب) تکیه بر تک تک مطالب کلی یا جزئی که از آیه استفاده می‌شود و تفکیک آن ها برای توجه دادن کسانی که نمایه‌ها و عنوان‌ها را فهرست می‌کنند لازم است، ولی این تفکیک مطالب گاه به گونه‌ای درآمده است که خواننده گمان می‌کند مطالب تکرار شده است و گاه عبارت‌ها جذابیت لازم را ندارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''افق‌های آینده''': بازنگری تفسیر راهنما به شکلی وسیع و جامع از اهداف تهیه‌کنندگان تفسیر است. هم‌اکنون جمعی به بازبینی تفسیر راهنما و حذف زواید و تکمیل نواقص آن پرداخته‌اند تا در چاپ‌های بعدی این مجموعه بزرگ را در مجلداتی کمتر و با کیفیتی مطلوب‌تر ارائه دهند تا تهیه و مراجعه به آن برای همه قرآن پژوهان میسر شود و در تمام مجلدات، ترجمه آیات ضمیمه شده و روایات تفسیری یکسان گردد.&amp;lt;ref&amp;gt;یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*'''نقدها''':نقدهایی نیز بر این تفسیر شده است که از جمله آنها مقاله [http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها] می‌باشد. نویسنده در این مقاله پس از معرفی و بیان ابتکارات این تفسیر، نقدهایی نیز بر این تفسیر دارد. در قسمتی از این مقاله نویسنده اشاره می‌کند که بعضی اشکالات این تفسیر مربوط به برداشت‌ها و برخی مربوط به نمایه‌ها است. بخش دیگری از اشکالات نیز در فهرست نهایی پیدا می‌شود که ذیل یک عنوان آیه‌هایی جمع می‌شود که برخی به طور مطابقی بر آن عنوان دلالت دارد، برخی به طور ضمنی و التزامی و برخی از نوع اشاره و امثال آن است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://maarefquran.org/index.php/page,viewArticle/LinkID,8749 تفسیر راهنما از نگاه نقد و معرفی، ابتکارات، نواقص و راه‌حل‌‌ها]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
{{پانویس2}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
*منبع اصلی:‌ یزدی، محمد علی، فصلنامه پژوهش و حوزه، شماره ۵.&lt;br /&gt;
*هاشمی رفسنجانی، اکبر، تفسیر راهنما،ج۱، قم بوستان کتاب،۱۳۶۱.&lt;br /&gt;
*[http://www.khobreganrahbari.com/modules.php?name=Content&amp;amp;pa=showpage&amp;amp;pid=69 پایگاه اطلاع رسانی مجلس خبرگان رهبری].&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:کتاب‌های تفسیری شیعه قرن15(قمری)]]&lt;br /&gt;
[[رده:تفسیرهای قرآن (فارسی)]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A7%DA%A9%D8%A8%D8%B1_%D9%87%D8%A7%D8%B4%D9%85%DB%8C_%D8%B1%D9%81%D8%B3%D9%86%D8%AC%D8%A7%D9%86%DB%8C&amp;diff=63880</id>
		<title>اکبر هاشمی رفسنجانی</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A7%DA%A9%D8%A8%D8%B1_%D9%87%D8%A7%D8%B4%D9%85%DB%8C_%D8%B1%D9%81%D8%B3%D9%86%D8%AC%D8%A7%D9%86%DB%8C&amp;diff=63880"/>
		<updated>2016-06-06T20:04:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* اکبر هاشمی رفسنجانی */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{الگو:منبع الکترونیکی معتبر|ماخذ=پایگاه}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اکبر هاشمی رفسنجانی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی رفسنجانی در سال سوم شهریور ۱۳۱۳ (برابر با ۴ آگوست ۱۹۳۴) در روستای بهرمان شهرستان رفسنجان و در خانواده‌ای نسبتاً ثروتمند به دنیا آمد. او یکی از ۹ فرزند میرزاعلی هاشمی بهرمانی و ماه‌بی‌بی صفریان است. پدرش با تحصیلات حوزوی از باغ‌داران و تاجران پسته بهرمان از توابع بخش نوق رفسنجان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در سن ۵ سالگی تحصیل را از مکتبخانه ای در نوق آغاز نمود. در سن ۱۴ سالگی به [[قم]] رفت و به تحصیل علوم دینی پرداخت. اساتید وی در [[حوزه علمیه]] قم آیات عظام سید حسین طباطبایی بروجردی، امام خمینی، سید محمد محقق داماد، محمدرضا گلپایگانی، سید محمدکاظم شریعتمداری، عبدالکریم حائری یزدی، شهاب‌الدین نجفی مرعشی، محمدحسین طباطبائی و حسین‌علی منتظری بوده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در آنجا تحت اثر تعلیمات امام خمینی به سیاست روی آورد و به مخالفت با حکومت محمدرضا شاه پهلوی و انقلاب سفید او پرداخت. با تبعید امام، نقش هاشمی در مبارزه با شاه و نمایندگی امام در داخل کشور پررنگ‌تر شد. با وجود نگرش ضدغربی انقلابیون، او سفرهای زیادی از ژاپن در شرق تا ۲۰ ایالت از ایالات متحده در غرب نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در سال ۱۳۳۷ با عفت مرعشی که دختری از خانواده روحانی و از نوادگان سید محمدکاظم طباطبایی یزدی است، ازدواج نمود. ثمره این ازدواج ۵ فرزند به ترتیب به نامهای فاطمه، محسن، فائزه، مهدی و یاسر است. دو دختر او با دو پسر حسن لاهوتی اشکوری، امام جمعه سابق رشت و از دوستان او در زندان، (که یکی پزشک و دیگری دندان‌پزشک است) ازدواج کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از بین دختران او تنها فائزه هاشمی وارد سیاست شد و یک بار نماینده مجلس شورای اسلامی شد. فاطمه هاشمی نیز تا سال ۱۳۸۸ در بنیاد امور بیماری‌های خاص فعالیت داشت و محسن هاشمی رئیس سابق مترو تهران بوده ‌است. مهدی هاشمی نیز مسئولیت‌هایی مانند ریاست سازمان بهینه سازی مصرف سوخت و ریاست مرکز تحقیقات دانشگاه آزاد اسلامی را بر عهده داشته‌ است.&lt;br /&gt;
[[تفسیر راهنما]] از آثار ایشان است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://rafsanjani.ir/view.php?id=12088 سایت شخصی ایشان]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوران مبارزه پیش از انقلاب==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اکبر هاشمی رفسنجانی یکی از چهره‌های تاثیرگذار در روند انقلاب ایران و همچنین دوران پس از آن تا امروز است. آشنایی و دوستی او با امام خمینی از اواخر دهه سی شمسی آغاز شد. ولی فعالیت سیاسی خود را از سال ۱۳۴۰ آغاز کرد. او در دوران قبل از انقلاب، بسیار به امام نزدیک بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی پیش از انقلاب، یکی از مخالفان برنامه‌های نوگرایانه شاه (انقلاب سفید) شناخته می‌شد. با تبعید امام، رفسنجانی در ایران ماند و مخالفت‌هایش با این برنامه‌ها افزایش یافت. این مخالفت‌ها سرانجام به دستگیری و زندانی شدن او منجر شد. در مجموع و از سال ۱۳۳۷ تا سال ۱۳۵۷ هاشمی رفسنجانی ۷ بار و مجموعا ۴ سال و ۵ ماه به جرم فعالیت مخفیانه علیه حکومت پهلوی به زندان افتاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگرچه در بعد فردی عمده فعالیت مبارزاتی وی پیش از انقلاب را سخنرانی‌های مختلف و کارهای انتشاراتی تشکیل می‌دادند ولی امام در دوران تبعید، نقش مدیر مالی مبارزات انقلاب و نیز ارتباط با سایر گروه‌های انقلابی را نیز بر عهده وی گذاشته بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از جمله گروه‌هایی که پیوندهای عمیقی با هاشمی داشتند، حزب مؤتلفه اسلامی بود که مسئول ترور حسنعلی منصور شناخته می‌شد. همین ارتباطات یکی دیگر از دلایل دستگیری‌های او بود. در زندان او فرصت یافت تا با سایر گروه‌های مخالف شاه آشنا شود. هاشمی در آغاز دهه پنجاه، به گروه مارکسیست اسلامی مجاهدین خلق ایران پیوست ولی خیلی زود آنان را ترک کرد و به فعالیت اقتصادی بساز و بفروشی آپارتمان در تهران روی آورد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پس از انقلاب==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از پیروزی انقلاب او یکی از اعضای شورای انقلاب اسلامی شد. او از بدو تشکیل این شورا، یکی از قدرتمندترین چهره‌های آن بود همچنین او مدتی سرپرستی وزارت کشور را بر عهده گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او یکی از ۲۸ عضو اولیه و موسس جامعه روحانیت مبارز (یک تشکل راستگرای سنتی) و همچنین یکی از اعضای موسس حزب جمهوری اسلامی در سال اول پس از انقلاب بود. سال‌ها بعد، باز او بود که درخواست انحلال این حزب را به امام داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با تسخیر لانه جاسوسی به ‌وسیله دانشجویان پیرو خط امام در سال ۱۳۵۸، هاشمی رفسنجانی از آن به‌ عنوان یکی از بزرگترین اقدامات سازنده در تاریخ کشور یاد کرد. با این ‌حال او در دهمین سالگرد پیروزی انقلاب در یک مصاحبه گفت که با توجه به تجارب این سال‌ها گروگان‌گیری اشتباه بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نخستین قانون انتخابات پس از انقلاب با مشارکت او تدوین شد و پس از برگزاری اولین انتخابات مجلس به مجلس راه یافت و با آغاز کار مجلس در ۷ خرداد ۱۳۵۹ اولین رئیس مجلس شورای اسلامی ایران شد. در بهار سال ۱۳۶۰ در عزل ابوالحسن بنی‌صدر از فرماندهی کل قوا و سپس تصویب طرح عدم کفایت سیاسی او نقشی تعیین کننده داشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در تابستان ۱۳۶۰ او بود که اعتراض مجلس را به رد یکی از مصوباتش توسط شورای نگهبان به اطلاع امام رساند و توانست برای اولین‌ بار، راهکار قانونی‌ای برای اجرایی شدن قوانینی که توسط شورای نگهبان خلاف شرع دانسته شده بود، ایجاد کند. راهکاری که بعدها به تشکیل مجمع تشخیص مصلحت نظام به ریاست خودش منجر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی در دوره جنگ، علاوه بر ریاست مجلس یکی از ائمه جمعه موقت تهران (تا سی سال بعد)، نماینده امامدر شورای عالی دفاع (بعد از شهادت مصطفی چمران در سال ۱۳۶۰) و جانشین فرمانده کل قوا در ماه‌های پایانی جنگ ایران و [[عراق]] بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریاست جمهوری==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی در انتخابات سال 1368، به ریاست جمهوری رسید. 4 سال بعد در سال 1372، هاشمی توانست بار دیگر به ریاست جمهوری برسد. وی در این دوره به لقب «سردار سازندگی» دست یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوران اصلاحات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با نزدیک شدن به پایان دور دوم ریاست جمهوری، کمسیون فرهنگ و ارشاد مجلس شورای اسلامی تلاش کرد تا اصلاحیه‌ای را به تصویب برساند که بر اساس آن، هاشمی بتواند برای سومین بار پیاپی در انتخابات ریاست جمهوری شرکت کند. این اقدام بی‌درنگ مورد اعتراض قرار گرفت. هاشمی نیز تصمیم گرفت ابتکار عمل را از دست ندهد و همگام با اصلاح‌طلبان مسیر اصلاحات را انتخاب کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او ابتدا برای مدت چند ماه تلاش کرد تا میرحسین موسوی را ترغیب به شرکت در انتخابات کند. ولی پس از این که او نامزدی در انتخابات را نپذیرفت، هاشمی از نامزدی سید محمد خاتمی (که پس از خروج از کابینه در سال ۱۳۷۰ همواره مشاور او بود) حمایت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
او دو سال پس از اتمام دوران ریاست جمهور خود و در سال ۱۳۷۸ در انتخابات مجلس ششم برای بدست آوردن نمایندگی تهران شرکت کرد. در این انتخابات او به سختی توانست آخرین نفر پذیرفته شده باشد. علیرغم این پیروزی، هاشمی رفسنجانی قبل از تحلیف به عنوان نماینده از این پست استعفا داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دوره پس از اصلاحات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هاشمی بار دیگر در انتخابات ریاست جمهوری سال ۱۳۸۴ شرکت کرد. با وجود آنکه او در مرحله اول انتخابات آرایی بیش از محمود احمدی‌نژاد کسب کرده ‌بود ولی در مرحله دوم نتوانست بیش از ۳۶ درصد از آرا را کسب کند. در واقع رای‌دهندگان ترجیح دادند از میان دو فردی که یکی را می‌شناختند و دیگری را نمی‌شناختند، ناشناخته را انتخاب کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پیروزی او در انتخابات مجلس خبرگان رهبری در سال ۱۳۸۶، فرصتی برای جبران شکست‌های پیشین او را فراهم آورد. هاشمی در تهران آرای بیشتری نسبت به سایر نامزدها کسب کرده‌ بود و نماینده اول پایتخت محسوب می‌شد و توانست ریاست خبرگان را کسب کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از انتخابات سال 88، در واکنش به برخی اغتشاشات در تهران، هاشمی سکوت غیرمعمول خود را شکست. او در خطبه‌های نماز جمعه تهران (۲۶ تیر ۱۳۸۸) شورای نگهبان را به از دست دادن فرصت متهم کرد. نتایج انتخابات را از دید مردم مشکوک و تردیدآمیز خواند و از نظام خواست تا با آزادکردن زندانیان سیاسی، اعتماد را به مردم بازگرداند. در فتنه 88 نزدیکان هاشمی به ویژه فائزه هاشمی و مهدی هاشمی دستگیر شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با اعلام کاندیداتوری مهدوی کنی برای ریاست خبرگان در سال ۱۳۸۹، هاشمی از کاندیداتوری برای این سمت نیز استعفا داد و ریاست مجلس خبرگان را به مهدوی کنی واگذار کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
* [http://www.jamnews.ir/detail/News/151069 سایت جام نیوز]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده: شخصیت ها]]&lt;br /&gt;
[[رده:علمای معاصر]]&lt;br /&gt;
[[رده:مفسرین قرآن]]&lt;br /&gt;
[[رده:دولتمردان]]&lt;br /&gt;
[[رده:خطیبان]]&lt;br /&gt;
[[رده:مجتهدین]]&lt;br /&gt;
[[رده:مبارزان علیه پهلوی]]&lt;br /&gt;
[[رده:ائمه جمعه]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%DA%A9%D8%AA%D8%B1_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D9%82%D8%B1%DB%8C%D8%A8&amp;diff=63879</id>
		<title>دکتر محمد قریب</title>
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		<updated>2016-06-06T19:54:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: منبع&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;دکتر محمد قریب «پدر علم پزشکی کودکان ایران» (۱۲۸۸ در تهران – ۱۳۵۳) از اولین پزشکان متخصص طب اطفال ایران و بنیانگذار طب نوین اطفال در [[ایران]] و از بنیانگذاران بیمارستان مرکز طبی کودکان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== زندگینامه ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر محمد قریب در سال ۱۲۸۸ در [[تهران]] متولد شد. پدرش مرحوم علی اصغر خان قریب و از مردم روستای [[گرکان]] از توابع [[تفرش]] بود. تحصیلات ابتدایی را در [[دبستان سیروس]] و متوسطه را در [[دارلفنون]] تهران (دارالمعلمین) گذراند . او در سال ۱۳۰۶ شمسی در زمره اولین گروه دانشجویان ایرانی بود که برای ادامه تحصیل در رشته پزشکی به [[فرانسه]] رفتند. وی در پایان سال اول در شهر رن فرانسه موفق به دریافت جایزه لابراتور تشریح دانشکده پزشکی شد. وی در سال ۱۳۱۴ نخستین ایرانی بود که توانست در کنکور انترنی بیمارستان پاریس موفق شود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب ، به پاس خدمات چشمگیر علمی ، به دریافت نشان دانش از دانشگاه تهران و نشان درجهٔ اول فرهنگ از [[وزارت آموزش و پرورش]] و نشان عالی لژون‌ دونور از دولت فراسه نائل گشت.&lt;br /&gt;
=== جوانی ===&lt;br /&gt;
وی در سال ۱۳۱۵ با دوشیزه زهرا قریب دختر مرحوم [[استاد عبدالعظیم قریب]] ازدواج کرد . و در سال ۱۳۱۷ به ایران بازگشت. پس از طی نمودن دوره سربازی در سال ۱۳۱۹ به عنوان دانشیار طب اطفال در دانشگاه به فعالیت علمی مشغول گردید. وی ابتدا در [[بیمارستان رازی]] به اداره بخش اطفال مشغول شد و بعد از آن به [[بیمارستان هزار تختخوابی]] رفت و در آنجا بخش اطفال را دایر کرد. او در سال ۱۳۱۹ کتاب بیماریهای کودکان را به چاپ رساند و در سال ۱۳۳۵ با همکاری دکتر حسن اهری آن را با اصلاحات جدید تجدید چاپ نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر قریب در سال ۱۳۲۱ موفق به دریافت نشان عالی دولت فرانسه شد و در سال ۱۳۵۰ به عضویت هیئت مدیره انجمن بین المللی بیماریهای کودکان در آمد. همچنین در آخرین سالهای عمر وی موفق به دریافت نشان درجه اول فرهنگ از وزارت آموزش و پرورش شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در طول سالهای فعالیت علمی خود در کنگره‌های مختلف بین المللی در کشورهای مختلف از جمله فرانسه، [[آمریکا]]، [[کانادا]]، [[ژاپن]]، [[ترکیه]] و [[اتریش]] شد و عضویت چندین مجمع علمی بین المللی را برعهده داشت. وی اولین تعویض خون را در ایران انجام داد و از بنیانگذاران انتقال خون در ایران بود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب همواره به یافته های جدید طب جهان احاطه داشت و این گونه مطالب را به دانشجویان خود ارایه کرده، آنان را برای پیگیری پیشرفت های علمی در جهان تشویق می کرد. برای مثال تا قبل از او، کسی در ایران با &amp;quot;آنتی بیوتیک&amp;quot; آشنا نبود، اما ایشان برای اولین بار اعلام کرد که داروهای جدید برای از بین بردن میکروب ها شناخته شده است که ارزش آن بسیار بیشتر از داروهای قبلی می باشد. اما بیش از توجه به روش های نوین، بر آموزش خانواده ها و برخورد عاطفی و اخلاقی با بیماران تاکید می کرد. دستگیری از مستمندان و دردمندان و رسیدگی به نابسامانی های زندگی بیماران، از دیگر ویژگی های بارز استاد قریب بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ساعت های مطالعه وی، بسیار بیشتر از شاگردانش بود و صبح ها در کمال سخاوت، جدیدترین نتایج مطالعات خود را در اختیار دانشجویان قرار می داد. به تربیت مناسب دانشجویان علاقه خاصی داشت و در هنگام درمان کودکان بیمار، دانشجویان خود را نیز در آنجا حاضر می کرد و درباره بیماری از آن ها سوالاتی می پرسید. اگر جواب دانشجویی مناسب نبود، با متلک های استاد رو به رو می شد و همین مسئله سبب می شد تا دانشجویان برای فرار از  سخنان قریب، دقت بیشتری نشان دهند. ویزیت روزانه دکتر قریب برای رزیدنت ها و دانشجویان، تجربه آموزشی بی نظیری بود که اغلب، عده زیادی داوطلب شرکت در آن بودند. وی صبح ها زودتر از دیگران به بیمارستان می رسید و پس از شنیدن گزارش های صبحگاهی دانشجویان، به اتفاق آنان به بالین بیمار می رفت و با بحث و بررسی دقیق، دانشجویان را در تشخیص صحیح راهنمایی می کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که در کلاس درس از  اقدامات رژیم شاه  انتقاد  می‌کرد و پس از واقعه 28 مرداد 32 نیز بدنبال امضای یک بیانیه به همراه ده تن دیگر از اعضاء هیئت علمی دانشگاه مانند مهندس بازرگان، دکتر سحابی و دکتر نعمت‌الهی به دستور شاه از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت او در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی شد.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://chmc.tums.ac.ir/index.php/sdfghujkryuio سایت مرز طبی کودکان]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
=== مهم ترین اقدام‌ها ===&lt;br /&gt;
از مهمترین اقدامات او بنیانگذاری و تأسیس اولین بیمارستان تخصصی کودکان یعنی بیمارستان مرکز طبی کودکان به همراه دکتر حسن اهری بود که ایشان این اقدام را در زمان بازنشستگی خود انجام دادند مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که بارها در کلاس درس به اقدامات رژیم پهلوی انتقاد نموده و پس از واقعه ۲۸ مرداد ۱۳۳۲ نیز پس از امضای یک بیانیه به همراه ۱۰ تن دیگر از اعضای هیئت علمی دانشگاه مانند [[مهندس بازرگان]]، دکتر سحابی و دکتر نعمت الهی به دستور [[محمدرضا شاه]] از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت ایشان در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی گردید.&lt;br /&gt;
=== درگذشت ===&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در سال ۱۳۵۱ به هماچوری (دفع خون از دستگاه ادراری) مبتلا شد که بعدها تشخیص سرطان مثانه داده شد و اقدامات درمانی انجام شده درایران و آمریکا تأثیر چندانی بر بیماری ایشان نداشته و سرانجام در روز سه شنبه اول بهمن ماه ۱۳۵۳ در [[بیمارستان مرکز طبی کودکان]] محل خدمت خود درگذشت و طبق وصیت وی، در [[قبرستان شیخان قم]] به خاک سپرده شد. در مراسم تدفین دکتر محمد قریب [[آیت الله مرعشی]] نماز ایشان را اقامه فرمودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
روزگار قریب نام مجموعه تلویزیونی است که کیانوش عیاری درباره زندگی دکتر محمد قریب ساخته‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شخصیت ها]]&lt;br /&gt;
[[رده: پزشکان بزرگ مسلمان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%DA%A9%D8%AA%D8%B1_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D9%82%D8%B1%DB%8C%D8%A8&amp;diff=63878</id>
		<title>دکتر محمد قریب</title>
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		<updated>2016-06-06T19:42:36Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: اصلاح رده&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;دکتر محمد قریب «پدر علم پزشکی کودکان ایران» (۱۲۸۸ در تهران – ۱۳۵۳) از اولین پزشکان متخصص طب اطفال ایران و بنیانگذار طب نوین اطفال در [[ایران]] و از بنیانگذاران بیمارستان مرکز طبی کودکان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== زندگینامه ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر محمد قریب در سال ۱۲۸۸ در [[تهران]] متولد شد. پدرش مرحوم علی اصغر خان قریب و از مردم روستای [[گرکان]] از توابع [[تفرش]] بود. تحصیلات ابتدایی را در [[دبستان سیروس]] و متوسطه را در [[دارلفنون]] تهران (دارالمعلمین) گذراند . او در سال ۱۳۰۶ شمسی در زمره اولین گروه دانشجویان ایرانی بود که برای ادامه تحصیل در رشته پزشکی به [[فرانسه]] رفتند. وی در پایان سال اول در شهر رن فرانسه موفق به دریافت جایزه لابراتور تشریح دانشکده پزشکی شد. وی در سال ۱۳۱۴ نخستین ایرانی بود که توانست در کنکور انترنی بیمارستان پاریس موفق شود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب ، به پاس خدمات چشمگیر علمی ، به دریافت نشان دانش از دانشگاه تهران و نشان درجهٔ اول فرهنگ از [[وزارت آموزش و پرورش]] و نشان عالی لژون‌ دونور از دولت فراسه نائل گشت.&lt;br /&gt;
=== جوانی ===&lt;br /&gt;
وی در سال ۱۳۱۵ با دوشیزه زهرا قریب دختر مرحوم [[استاد عبدالعظیم قریب]] ازدواج کرد . و در سال ۱۳۱۷ به ایران بازگشت. پس از طی نمودن دوره سربازی در سال ۱۳۱۹ به عنوان دانشیار طب اطفال در دانشگاه به فعالیت علمی مشغول گردید. وی ابتدا در [[بیمارستان رازی]] به اداره بخش اطفال مشغول شد و بعد از آن به [[بیمارستان هزار تختخوابی]] رفت و در آنجا بخش اطفال را دایر کرد. او در سال ۱۳۱۹ کتاب بیماریهای کودکان را به چاپ رساند و در سال ۱۳۳۵ با همکاری دکتر حسن اهری آن را با اصلاحات جدید تجدید چاپ نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر قریب در سال ۱۳۲۱ موفق به دریافت نشان عالی دولت فرانسه شد و در سال ۱۳۵۰ به عضویت هیئت مدیره انجمن بین المللی بیماریهای کودکان در آمد. همچنین در آخرین سالهای عمر وی موفق به دریافت نشان درجه اول فرهنگ از وزارت آموزش و پرورش شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در طول سالهای فعالیت علمی خود در کنگره‌های مختلف بین المللی در کشورهای مختلف از جمله فرانسه، [[آمریکا]]، [[کانادا]]، [[ژاپن]]، [[ترکیه]] و [[اتریش]] شد و عضویت چندین مجمع علمی بین المللی را برعهده داشت. وی اولین تعویض خون را در ایران انجام داد و از بنیانگذاران انتقال خون در ایران بود.&lt;br /&gt;
=== مهم ترین اقدام‌ها ===&lt;br /&gt;
از مهمترین اقدامات او بنیانگذاری و تأسیس اولین بیمارستان تخصصی کودکان یعنی بیمارستان مرکز طبی کودکان به همراه دکتر حسن اهری بود که ایشان این اقدام را در زمان بازنشستگی خود انجام دادند مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که بارها در کلاس درس به اقدامات رژیم پهلوی انتقاد نموده و پس از واقعه ۲۸ مرداد ۱۳۳۲ نیز پس از امضای یک بیانیه به همراه ۱۰ تن دیگر از اعضای هیئت علمی دانشگاه مانند [[مهندس بازرگان]]، دکتر سحابی و دکتر نعمت الهی به دستور [[محمدرضا شاه]] از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت ایشان در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی گردید.&lt;br /&gt;
=== درگذشت ===&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در سال ۱۳۵۱ به هماچوری (دفع خون از دستگاه ادراری) مبتلا شد که بعدها تشخیص سرطان مثانه داده شد و اقدامات درمانی انجام شده درایران و آمریکا تأثیر چندانی بر بیماری ایشان نداشته و سرانجام در روز سه شنبه اول بهمن ماه ۱۳۵۳ در [[بیمارستان مرکز طبی کودکان]] محل خدمت خود درگذشت و طبق وصیت وی، در [[قبرستان شیخان قم]] به خاک سپرده شد. در مراسم تدفین دکتر محمد قریب [[آیت الله مرعشی]] نماز ایشان را اقامه فرمودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
روزگار قریب نام مجموعه تلویزیونی است که کیانوش عیاری درباره زندگی دکتر محمد قریب ساخته‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شخصیت ها]]&lt;br /&gt;
[[رده: پزشکان بزرگ مسلمان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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		<title>دکتر محمد قریب</title>
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		<updated>2016-06-06T19:40:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: دکتر قریب-&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;دکتر محمد قریب «پدر علم پزشکی کودکان ایران» (۱۲۸۸ در تهران – ۱۳۵۳) از اولین پزشکان متخصص طب اطفال ایران و بنیانگذار طب نوین اطفال در [[ایران]] و از بنیانگذاران بیمارستان مرکز طبی کودکان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زندگینامه&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر محمد قریب در سال ۱۲۸۸ در [[تهران]] متولد شد. پدرش مرحوم علی اصغر خان قریب و از مردم روستای [[گرکان]] از توابع [[تفرش]] بود. تحصیلات ابتدایی را در [[دبستان سیروس]] و متوسطه را در [[دارلفنون]] تهران (دارالمعلمین) گذراند . او در سال ۱۳۰۶ شمسی در زمره اولین گروه دانشجویان ایرانی بود که برای ادامه تحصیل در رشته پزشکی به [[فرانسه]] رفتند. وی در پایان سال اول در شهر رن فرانسه موفق به دریافت جایزه لابراتور تشریح دانشکده پزشکی شد. وی در سال ۱۳۱۴ نخستین ایرانی بود که توانست در کنکور انترنی بیمارستان پاریس موفق شود.&lt;br /&gt;
دکتر قریب ، به پاس خدمات چشمگیر علمی ، به دریافت نشان دانش از دانشگاه تهران و نشان درجهٔ اول فرهنگ از [[وزارت آموزش و پرورش]] و نشان عالی لژون‌ دونور از دولت فراسه نائل گشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در سال ۱۳۱۵ با دوشیزه زهرا قریب دختر مرحوم [[استاد عبدالعظیم قریب]] ازدواج کرد . و در سال ۱۳۱۷ به ایران بازگشت. پس از طی نمودن دوره سربازی در سال ۱۳۱۹ به عنوان دانشیار طب اطفال در دانشگاه به فعالیت علمی مشغول گردید. وی ابتدا در [[بیمارستان رازی]] به اداره بخش اطفال مشغول شد و بعد از آن به [[بیمارستان هزار تختخوابی]] رفت و در آنجا بخش اطفال را دایر کرد. او در سال ۱۳۱۹ کتاب بیماریهای کودکان را به چاپ رساند و در سال ۱۳۳۵ با همکاری دکتر حسن اهری آن را با اصلاحات جدید تجدید چاپ نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دکتر قریب در سال ۱۳۲۱ موفق به دریافت نشان عالی دولت فرانسه شد و در سال ۱۳۵۰ به عضویت هیئت مدیره انجمن بین المللی بیماریهای کودکان در آمد. همچنین در آخرین سالهای عمر وی موفق به دریافت نشان درجه اول فرهنگ از وزارت آموزش و پرورش شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در طول سالهای فعالیت علمی خود در کنگره‌های مختلف بین المللی در کشورهای مختلف از جمله فرانسه، [[آمریکا]]، [[کانادا]]، [[ژاپن]]، [[ترکیه]] و [[اتریش]] شد و عضویت چندین مجمع علمی بین المللی را برعهده داشت. وی اولین تعویض خون را در ایران انجام داد و از بنیانگذاران انتقال خون در ایران بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از مهمترین اقدامات او بنیانگذاری و تأسیس اولین بیمارستان تخصصی کودکان یعنی بیمارستان مرکز طبی کودکان به همراه دکتر حسن اهری بود که ایشان این اقدام را در زمان بازنشستگی خود انجام دادند مرحوم دکتر قریب در حین فعالیت علمی فعالیت سیاسی و اجتماعی نیز داشت به گونه‌ای که بارها در کلاس درس به اقدامات رژیم پهلوی انتقاد نموده و پس از واقعه ۲۸ مرداد ۱۳۳۲ نیز پس از امضای یک بیانیه به همراه ۱۰ تن دیگر از اعضای هیئت علمی دانشگاه مانند [[مهندس بازرگان]]، دکتر سحابی و دکتر نعمت الهی به دستور [[محمدرضا شاه]] از دانشگاه اخراج شد که این موضوع باعث افزایش محبوبیت ایشان در بین دانشجویان و جامعه دانشگاهی گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحوم دکتر قریب در سال ۱۳۵۱ به هماچوری (دفع خون از دستگاه ادراری) مبتلا شد که بعدها تشخیص سرطان مثانه داده شد و اقدامات درمانی انجام شده درایران و آمریکا تأثیر چندانی بر بیماری ایشان نداشته و سرانجام در روز سه شنبه اول بهمن ماه ۱۳۵۳ در [[بیمارستان مرکز طبی کودکان]] محل خدمت خود درگذشت و طبق وصیت وی، در [[قبرستان شیخان قم]] به خاک سپرده شد. در مراسم تدفین دکتر محمد قریب [[آیت الله مرعشی]] نماز ایشان را اقامه فرمودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
روزگار قریب نام مجموعه تلویزیونی است که کیانوش عیاری درباره زندگی دکتر محمد قریب ساخته‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شخصیت‌ها]]&lt;br /&gt;
[[رده: پزشکان بزرگ مسلمان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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		<title>آیه 88 سوره اعراف</title>
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		<updated>2016-04-25T14:24:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: اصلاح نام صفحه&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{قرآن در قاب|۞ قَالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَنُخْرِجَنَّكَ يَا شُعَيْبُ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَكَ مِنْ قَرْيَتِنَا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنَا ۚ قَالَ أَوَلَوْ كُنَّا كَارِهِينَ|سوره=7|آیه =88}}&lt;br /&gt;
{{مشخصات آیه&lt;br /&gt;
|شماره آیه = 88  &lt;br /&gt;
|شماره بعدی = 89&lt;br /&gt;
|شماره قبلی = 87&lt;br /&gt;
|سوره= اعراف| سوره اعراف&lt;br /&gt;
|شماره سوره= 7&lt;br /&gt;
|جزء= 9&lt;br /&gt;
|نزول = مکه&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
==ترجمه های فارسی==&lt;br /&gt;
&amp;lt;tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
الهی قمشه‌ای=&lt;br /&gt;
رؤسا و گردنکشان قوم او گفتند: ای شعیب ما تو و پیروانت را از شهر خویش بیرون می‌کنیم مگر آنکه به کیش ما برگردید. شعیب گفت: اگر چه با این نفرت که ما از آیین شما داریم (باز هم به آن بازگردیم).&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
انصاریان=&lt;br /&gt;
اشراف و سران قومش که [از پذیرفتن حق] تکبّر ورزیدند، گفتند: ای شعیب! مسلماً تو و کسانی را که با تو ایمان آورده اند از شهرمان بیرون می کنیم یا اینکه بی چون و چرا به آیین ما بازگردید. گفت: آیا هر چند که نفرت و کراهت [از آن آیین] داشته باشیم؟!&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
فولادوند=&lt;br /&gt;
سران قومش كه تكبر مى‌ورزيدند، گفتند: «اى شعيب، يا تو و كسانى را كه با تو ايمان آورده‌اند، از شهر خودمان بيرون خواهيم كرد؛ يا به كيش ما برگرديد.» گفت: «آيا هر چند كراهت داشته باشيم؟»&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
آیتی=&lt;br /&gt;
مهتران قومش كه سركشى پيشه كرده بودند گفتند: اى شعيب، تو و كسانى را كه به تو ايمان آورده‌اند از قريه خويش مى‌رانيم مگر آنكه به آيين ما برگرديد. گفت: و هر چند از آن كراهت داشته باشيم؟&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
مکارم شیرازی=&lt;br /&gt;
اشراف زورمند و متکبّر از قوم او گفتند: «ای شعیب! به یقین، تو و کسانی را که به تو ایمان آورده‌اند، از شهر و دیار خود بیرون خواهیم کرد، یا به آیین ما بازگردید!» کفت: «آیا (می‌خواهید ما را بازگردانید) اگر چه مایل نباشیم؟!&lt;br /&gt;
&amp;lt;/tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
==ترجمه های انگلیسی(English translations)==&lt;br /&gt;
&amp;lt;tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
Qarai=&lt;br /&gt;
{{چپ به راست|The elite of his people who were arrogant said, ‘O Shu'ayb, we will surely expel you and the faithful who are with you from our town, or else you shall revert to our creed.’ He said, ‘What! Even if we should be unwilling?!}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
Shakir=&lt;br /&gt;
{{چپ به راست|The chiefs, those who were proud from among his people said: We will most certainly turn you out, O Shu'aib, and (also; those who believe with you, from our town, or you shall come back to our faith. He said: What! though we dislike (it)?}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
Pickthall=&lt;br /&gt;
{{چپ به راست|The chieftains of his people, who were scornful, said: Surely we will drive thee out, O Shu'eyb, and those who believe with thee, from our township, unless ye return to our religion. He said: Even though we hate it?}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
yusufali=&lt;br /&gt;
{{چپ به راست|The leaders, the arrogant party among his people, said: &amp;quot;O Shu'aib! we shall certainly drive thee out of our city - (thee) and those who believe with thee; or else ye (thou and they) shall have to return to our ways and religion.&amp;quot; He said: &amp;quot;What! even though we do detest (them)?}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;/tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
==معانی کلمات آیه==&lt;br /&gt;
«أَوْ»: یا این که. مگر این که. «لَتَعُودُنَّ»: در می‌آئید و می‌پذیرید. برمی‌گردید. فعل (لَتَعُودُنَّ) می‌تواند از افعال ناقصه و به معنی (لَتَصِیرُنَّ) بوده و یا از افعال تامّه باشد. «مِلَّة»: دین. آئین. «لَتَعُودُنَّ فِی مِلَّتِنَا»: به آئین ما در می‌آئید. به آئین ما برمی‌گردید. با توجّه به معنی دوم، برگشتن شعیب به آئین ایشان، از راه تغلیب و قلمدادکردن او از زمره مؤمنان است، و یا این که به ظنّ اشراف و رؤسای قوم است، والاّ به سبب عصمت انبیاء نه تنها شعیب بلکه هیچ پیغمبری پیش از نبوّت هم مشرک نبوده است تا دوباره به شرک برگردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تفسیر آیه ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
 تفسیر نور=&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===تفسیر نور (محسن قرائتی)===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{ نمایش فشرده تفسیر|&lt;br /&gt;
قالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَنُخْرِجَنَّكَ يا شُعَيْبُ وَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَكَ مِنْ قَرْيَتِنا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا قالَ أَ وَ لَوْ كُنَّا كارِهِينَ «88»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سران مستكبر قوم شعيب گفتند: اى شعيب! حتماً تو و كسانى را كه با تو ايمان آورده‌اند، از آبادى‌مان بيرون خواهيم كرد، مگر آنكه به آئين ما برگرديد. (شعيب) گفت: گرچه بى‌رغبت باشيم؟&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===نکته ها=== &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زورگويى و تهديد به اخراج و تبعيد، به نوعى در مورد همه‌ى انبيا بوده است، چنانكه در جاى ديگر مى‌خوانيم: كافران نسبت به پيامبران خود چنين تهديدهايى داشته‌اند. «قالَ الَّذِينَ كَفَرُوا لِرُسُلِهِمْ لَنُخْرِجَنَّكُمْ مِنْ أَرْضِنا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا» «1»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هيچ يك از انبيا، پيش از رسالت، مشرك و بت‌پرست نبوده‌اند، ولى برخورد آنان با مشركان آرام بوده است. امّا پس از رسالت با عزم و اراده‌اى قوى‌تر مردم را هدايت كرده و با مشركان مقابله مى‌كردند، لذا خطاب‌ «لَتَعُودُنَّ»، به پيروان انبيا است، نه خود آنان. «2»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===پیام ها===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1- اشراف مستكبر، دشمن انبيا بوده‌اند. قالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا ... لَنُخْرِجَنَّكَ‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2- استدلال و منطق، شيوه‌ى انبياست، «جاءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ» «3» ولى روش كفّار، تهديد و زورگويى است. «لَنُخْرِجَنَّكَ»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
3- مبلّغان نبايد از تهديدهاى مخالفان بترسند، چون در اين راه، تهديد به قتل و تبعيد هميشه بوده است. «لَنُخْرِجَنَّكَ»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
4- تحميل عقائد، شيوه‌ى كفّار است و دين تحميلى سودى ندارد. لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا ... كارِهِينَ‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
«1». ابراهيم، 13.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
«2». تفسير نمونه.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
«3». اعراف، 85.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جلد 3 - صفحه 116&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5- در برخورد با جهالت كافران، از ادب و گفتار نرم و حكميانه استفاده كنيم. «أَ وَ لَوْ كُنَّا كارِهِينَ»&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
اثنی عشری=&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===تفسیر اثنی عشری (حسینی شاه عبدالعظیمی)===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{نمایش فشرده تفسیر|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَنُخْرِجَنَّكَ يا شُعَيْبُ وَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَكَ مِنْ قَرْيَتِنا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا قالَ أَ وَ لَوْ كُنَّا كارِهِينَ (88)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از دعوت شعيب قوم را به توحيد:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ‌: گفتند جماعت بزرگان آنانكه نخوت و تكبر مى‌كردند از قوم شعيب، در قبول توحيد و عبادت خدا و نبوت شعيب، لَنُخْرِجَنَّكَ يا شُعَيْبُ‌: هر آينه البته خارج مى‌كنيم تو را اى شعيب، وَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَكَ مِنْ قَرْيَتِنا: و كسانى كه ايمان آورده‌اند با تو از قريه و شهر خودمان حاصل: تو را با مؤمنين نفى بلد و تبعيد مى‌نمائيم، أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا: يا عود كنيد در كيش ما كه كفر است، يعنى ميان ما و شما يكى از اين دو امر خواهد بود يا اخراج شما از اين قريه، يا عود شما در كفر. شعيب عليه السّلام، گرچه هرگز داخل ملت آنها نبودند، به دلايل قاطعه و براهين ساطعه كه انبياء را جايز نيست بر ملت كفر بوده باشند، لكن قوم تغليب جماعت كردند بر واحد. يا بنابر عقيده فاسده خود كه شعيب عليه السّلام اول مذهب ايشان داشته خطاب كردند او و مؤمنان را به خطاب مذكور، و شعيب نيز جوابشان را بر طبق سؤالشان داد، قالَ أَ وَ لَوْ كُنَّا كارِهِينَ‌: فرمود شعيب از روى انكار، اگر چه ما كاره باشيم بدين شما، ما را جبر و قهر كنيد، يعنى چگونه ما به طوع و رغبت به دين شما در آئيم، و حال آنكه بطلان آن را دانسته‌ايم، مگر آنكه به قهر و جبر برگردانيد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جلد 4 صفحه 139&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
روان جاوید=&lt;br /&gt;
===تفسیر روان جاوید (ثقفى تهرانى)===&lt;br /&gt;
{{نمایش فشرده تفسیر|&lt;br /&gt;
سوره الأعراف «7»: آيات 88 تا 89&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قالَ الْمَلَأُ الَّذِينَ اسْتَكْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَنُخْرِجَنَّكَ يا شُعَيْبُ وَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَكَ مِنْ قَرْيَتِنا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِي مِلَّتِنا قالَ أَ وَ لَوْ كُنَّا كارِهِينَ (88) قَدِ افْتَرَيْنا عَلَى اللَّهِ كَذِباً إِنْ عُدْنا فِي مِلَّتِكُمْ بَعْدَ إِذْ نَجَّانَا اللَّهُ مِنْها وَ ما يَكُونُ لَنا أَنْ نَعُودَ فِيها إِلاَّ أَنْ يَشاءَ اللَّهُ رَبُّنا وَسِعَ رَبُّنا كُلَّ شَيْ‌ءٍ عِلْماً عَلَى اللَّهِ تَوَكَّلْنا رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنا وَ بَيْنَ قَوْمِنا بِالْحَقِّ وَ أَنْتَ خَيْرُ الْفاتِحِينَ (89)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ترجمه‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گفتند جماعتى كه سركشى كردند از قوم او هر آينه بيرون ميكنيم البته تو را اى شعيب و كسانيرا كه گرويدند با تو از بلدمان يا بايد باز گرديد بدين ما گفت آيا و اگر چه باشيم كراهت دارندگان‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بتحقيق بسته باشيم بر خدا دروغ را اگر باز گرديم در دين شما بعد از آنكه نجات داد ما را خدا از آن و روا نباشد از براى ما آنكه باز گرديم در آن مگر آنكه بخواهد خدا پروردگار ما احاطه نمود است پروردگار ما بهمه چيز از روى علم بر خدا توكّل نموديم پروردگار ما حكم كن ميان ما و ميان قوم ما بحق و توئى بهترين حكم كنندگان.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تفسير&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
انبياء عليهم السلام بدليل عقل و نقل معصومند از گناه در تمام عمر چه رسد بآنكه كافر باشند در يك زمان پس مراد از عود آنها در ملت يا عود اهل ايمان است و از باب تغليب بهمه نسبت داده شده يا مراد صيرورت است چون عاد بمعنى صار استعمال ميشود يعنى يا بايد بگرديد همكيش ما يا آنكه اين كلام را آنها بعقيده خود گفته‌اند چون تصور ميكردند آنحضرت قبل از بعثت با آنها هم كيش بوده در هر حال آنحضرت از طرف خود و اهل ايمان جواب فرمود كه چگونه ما هم كيش با شما شويم با آنكه ميدانيم بطلان و فساد كيش شما را اعتقاد كه باكراه و اجبار حاصل نمى‌شود بعلاوه بعد از آنكه خداوند بادلّه واضحه دين حق را بما ارائه فرمود و نگذارد ما وارد در ملت كفر شويم اگر خواسته باشيم وارد شويم شكر احسان او را بجا نياورده‌ايم چون عبادت غير او را نموده‌ايم و احكام مجعوله خودمان را كه باو نسبت ميدهيم افترا بخدا زده‌ايم و سزاوار نباشد كه ما كيش شما را اختيار نمائيم مگر آنكه خدا بخواهد و خدا نخواسته يا مگر آنكه خدا بخواهد ما را مقهور شما بنمايد و شما را قاهر بر ما تا ما باكراه دين شما را قبول نمائيم يا آنكه مراد آنستكه ما حق نداريم دين شما را اختيار نمائيم مگر آنكه خدا خواسته باشد ما را بحال خود واگذار و محروم از لطف خود فرمايد براى عدم قابليت ما چون مشيت خدا تعلق بكفر عباد نمى‌گيرد و خداوند احاطه علميّه بتمام موجودات دارد&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جلد 2 صفحه 452&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
و مصالح و مفاسد آنها را ميداند پس ما بايد اطاعت او را نمائيم كه عالم است نه اطاعت شما را كه جاهليد بر خدا توكل مى‌نمائيم در آنكه ثابت بدارد ما را بر ايمان و موفق فرمايد ما را بازدياد ايقان خدايا تو بگشا مشكليرا كه روى داده است ميان ما و قوم ما براستى تا ظاهر شود حق از باطل و تو بهترين مشكل گشائى در صورتى كه مراد از فتح مشكل گشائى باشد و اگر فتح بمعنى حكم باشد چنانچه قاضى را فتاح ميگويند مراد واضح است لذا در ترجمه ذكر شد اگر چه بنظر حقير روح معنى همان مشكل گشائى است چون قاضى هم از طرفين مشكل گشائى ميكند.&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
اطیب البیان=&lt;br /&gt;
===اطیب البیان (سید عبدالحسین طیب)===&lt;br /&gt;
{{نمایش فشرده تفسیر|&lt;br /&gt;
قال‌َ المَلَأُ الَّذِين‌َ استَكبَرُوا مِن‌ قَومِه‌ِ لَنُخرِجَنَّك‌َ يا شُعَيب‌ُ وَ الَّذِين‌َ آمَنُوا مَعَك‌َ مِن‌ قَريَتِنا أَو لَتَعُودُن‌َّ فِي‌ مِلَّتِنا قال‌َ أَ وَ لَو كُنّا كارِهِين‌َ (88)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گفتند جماعتي‌ ‌از‌ كفار ‌که‌ تكبر ميورزيدند ‌از‌ قوم‌ شعيب‌ بحضرتش‌ خطاب‌ كردند ‌که‌ هراينه‌ ‌ما تو ‌را‌ و كساني‌ ‌که‌ ايمان‌ آورده‌اند ‌با‌ تو ‌از‌ شهر خودمان‌ ‌که‌ مسكن‌ و مأواي‌ ‌شما‌ بوده‌ خارج‌ ميكنيم‌ مگر اينكه‌ دست‌ ‌از‌ كيش‌ ‌خود‌ برداريد و برگرديد بكيش‌ ‌ما فرمود شعيب‌ آيا و ‌لو‌ اينكه‌ ‌ما كراهت‌ داشته‌ باشيم‌.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مسئلة‌-‌ كره‌ مقابل‌ طوع‌ ‌است‌ چنانچه‌ ‌در‌ قرآن‌ ميفرمايد طَوعاً أَو كَرهاً فصّلت‌ ‌آيه‌ 10، طوع‌ عملي‌ ‌است‌ ‌که‌ ‌از‌ روي‌ ميل‌ و رغبت‌ انجام‌ گيرد و ‌از‌ همين‌ باب‌ ‌است‌ اطاعت‌ ‌که‌ امتثال‌ اوامر الهي‌ ‌باشد‌ ‌از‌ روي‌ شوق‌ و ميل‌ و رغبت‌.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
كره‌ بمعني‌ اشمئزاز و تنفر و بي‌ميلي‌ ‌باشد‌ و اكراه‌ آنست‌ ‌که‌ كسي‌ ‌را‌ وادار و مجبور كنند ‌بر‌ عملي‌ ‌که‌ رغبت‌ نداشته‌ و كراهت‌ دارد و خداوند ميفرمايد لا إِكراه‌َ فِي‌ الدِّين‌ِ قَد تَبَيَّن‌َ الرُّشدُ مِن‌َ الغَي‌ِّ بقره‌ ‌آيه‌ 257، ‌بعد‌ ‌از‌ آية الكرسي‌ قال‌َ المَلَأُ الَّذِين‌َ استَكبَرُوا مِن‌ قَومِه‌ِ ملاء بمعني‌ جماعت‌ ‌يعني‌ جمعي‌ ‌از‌ كفار آنهم‌ نه‌ توده‌ مردم‌ بلكه‌ رؤساء و امراء و سران‌ قوم‌ ‌که‌ ‌خود‌ ‌را‌ ‌با‌ قدرت‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جلد 7 - صفحه 386&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
و شوكت‌ و بزرگ‌ ميشمردند اينها تهديد كردند حضرت‌ شعيب‌ و مؤمنين‌ بآن‌ حضرت‌ ‌را‌ ‌که‌ حضرت‌ شعيب‌ دست‌ ‌از‌ دعوت‌ بردارد و مؤمنين‌ برگردند بهمان‌ كفر اولي‌ و شرك‌ و الّا تمام‌ ‌شما‌ ها ‌را‌ لَنُخرِجَنَّك‌َ يا شُعَيب‌ُ وَ الَّذِين‌َ آمَنُوا مَعَك‌َ مِن‌ قَريَتِنا اخراج‌ بلد ميكنيم‌ ‌شما‌ ‌را‌ ‌که‌ ديگر مزاحم‌ ‌ما نباشيد و گفتيم‌ اطلاق‌ قريه‌ ‌بر‌ بلد بسيار داريم‌.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
أَو لَتَعُودُن‌َّ فِي‌ مِلَّتِنا حضرت‌ شعيب‌ ‌که‌ اصلا داخل‌ ‌در‌ ملت‌ ‌آنها‌ نبود ‌که‌ خارج‌ ‌شده‌ ‌باشد‌ ‌تا‌ عود كند و برگردد و مفسرين‌ ‌در‌ ‌اينکه‌ باب‌ بدست‌ و پا افتادند و تصرف‌ ‌در‌ معناي‌ عود كردند ‌با‌ اينكه‌ ‌آنها‌ توهم‌ كرده‌ بودند ‌که‌ شعيب‌ ‌هم‌ بدوا بكيش‌ ‌آنها‌ العياذ كافر و مشرك‌ بوده‌ ‌ يا ‌ اينكه‌ ‌اينکه‌ خطاب‌ متوجه‌ بمؤمنين‌ قوم‌ بوده‌ و چون‌ شعيب‌ ‌هم‌ داخل‌ ‌در‌ مؤمنين‌ بوده‌ خطاب‌ جمعي‌ كردند لكن‌ تمام‌ اينها بي‌مدرك‌ ‌است‌ و ظاهر ‌اينکه‌ نحو بنظر ميرسد ‌که‌ عود شعيب‌ ‌با‌ عود مؤمنين‌ مختلف‌ ‌است‌، عود شعيب‌ اينست‌ ‌که‌ چنانچه‌ قبل‌ ‌از‌ بعثت‌ دعوت‌ نميكردي‌ و كاري‌ بكار ‌ما نداشتي‌ حال‌ ‌هم‌ دست‌ ‌از‌ دعوت‌ بردار و ‌ما ‌را‌ بخود واگذار كن‌ و دخالت‌ ‌در‌ كارهاي‌ ‌ما نداشته‌ باش‌، و عود مؤمنين‌ ‌اينکه‌ ‌است‌ ‌که‌ ‌از‌ اطراف‌ شعيب‌ بيرون‌ شوند و بهمان‌ كيش‌ اولي‌ ‌خود‌ برگردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قال‌َ أَ وَ لَو كُنّا كارِهِين‌َ چگونه‌ ممكن‌ ‌است‌ ‌من‌ دست‌ ‌از‌ دعوت‌ بردارم‌ ‌با‌ مأموريتي‌ ‌که‌ ‌از‌ جانب‌ خداوند دارم‌ و چگونه‌ ممكن‌ ‌است‌ مؤمنين‌ ‌بعد‌ ‌از‌ آني‌ ‌که‌ حق‌ ‌براي‌ ‌آنها‌ مكشوف‌ ‌شده‌ و بطلان‌ كفر و شرك‌ ‌را‌ يقين‌ پيدا كردند البته‌ ‌ما ‌در‌ عود كمال‌ كراهت‌ ‌را‌ داريم‌ و ممكن‌ نيست‌ دست‌ بردار باشيم‌ و ‌در‌ موضوع‌ اخراج‌ بلد ‌هم‌ ‌شما‌ همچه‌ قدرتي‌ نداريد و خداوند چنين‌ فرصتي‌ بشما نخواهد داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
387&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
برگزیده تفسیر نمونه=&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===برگزیده تفسیر نمونه===&lt;br /&gt;
{{نمایش فشرده تفسیر|&lt;br /&gt;
(آیه 88)- در این آیه و آیه بعد عکس العمل قوم مستکبر شعیب در برابر سخنان منطقی این پیامبر بزرگ بیان شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قرآن می‌گوید: «اشراف زورمند و متکبر قوم شعیب به او گفتند سوگند یاد می‌کنیم که قطعا، هم خودت و هم کسانی را که به تو ایمان آورده‌اند، از محیط خود بیرون خواهیم راند، مگر این که هر چه زودتر به آیین ما باز گردید» (قالَ الْمَلَأُ &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ج2، ص69&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
الَّذِینَ اسْتَکْبَرُوا مِنْ قَوْمِهِ لَنُخْرِجَنَّکَ یا شُعَیْبُ وَ الَّذِینَ آمَنُوا مَعَکَ مِنْ قَرْیَتِنا أَوْ لَتَعُودُنَّ فِی مِلَّتِنا)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پاسخی که شعیب در برابر این همه تهدید و خشونت به آنها داد خیلی ساده و ملایم و منطقی بود، «گفت: آیا (می‌خواهید ما را به آیین خودتان بازگردانید) اگر چه مایل نباشیم» (قالَ أَ وَ لَوْ کُنَّا کارِهِینَ).&lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
|-|&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سایر تفاسیر=&lt;br /&gt;
سایرتفاسیر این آیه را می توانید در سایت قرآن مشاهده کنید:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تفسیر های فارسی==&lt;br /&gt;
==={{ترجمه تفسیر المیزان|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر خسروی|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر عاملی|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر جامع|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تفسیر های عربی==&lt;br /&gt;
==={{تفسیر المیزان|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر مجمع البیان|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر نور الثقلین|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر الصافی|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
==={{تفسیر الکاشف|سوره=7 |آیه=88}}===&lt;br /&gt;
&amp;lt;/tabber&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
&amp;lt;div style=&amp;quot;font-size:smaller&amp;quot;&amp;gt;&amp;lt;references/&amp;gt;&amp;lt;/div&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
* [[تفسیر نور]]، [[محسن قرائتی]]، [[تهران]]:مركز فرهنگى درسهايى از قرآن، 1383 ش، چاپ يازدهم&lt;br /&gt;
* [[اطیب البیان فی تفسیر القرآن‌]]، [[سید عبدالحسین طیب]]، تهران:انتشارات اسلام‌، 1378 ش‌، چاپ دوم‌&lt;br /&gt;
* [[تفسیر اثنی عشری]]، [[حسین حسینی شاه عبدالعظیمی]]، تهران:انتشارات ميقات، 1363 ش، چاپ اول&lt;br /&gt;
* [[تفسیر روان جاوید]]، [[محمد ثقفی تهرانی]]، تهران:انتشارات برهان، 1398 ق، چاپ سوم&lt;br /&gt;
* [[برگزیده تفسیر نمونه]]، [[ناصر مکارم شیرازی]] و جمعي از فضلا، تنظیم احمد علی بابایی، تهران: دارالکتب اسلامیه، ۱۳۸۶ش&lt;br /&gt;
* [[تفسیر راهنما]]، [[علی اکبر هاشمی رفسنجانی]]، [[قم]]:بوستان كتاب(انتشارات دفتر تبليغات اسلامي حوزه علميه قم)، 1386 ش‌، چاپ پنجم‌&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:آیات سوره اعراف]]&lt;br /&gt;
[[رده:ترجمه و تفسیر آیات قرآن]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4&amp;diff=58477</id>
		<title>داعش</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4&amp;diff=58477"/>
		<updated>2016-04-25T14:15:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ایجاد پیوندهای درونی&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{ضعیف}}&lt;br /&gt;
«داعش» مخفف عبارت «دولت اسلامی عراق و شام» است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==شکل گیری داعش==&lt;br /&gt;
داعش لعنةالله علیه در ابتدای شکل گیری یکی از شاخه های «[[القاعده]]» بود. اما پس از مدتی بر خودِ القاعده برتری پیدا کرد.&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
در زمان جنگ بین [[عراق]] و [[ایران]]، [[شوروی]] به [[افغانستان]] حمله کرد و بعد عقب نشینی کرد. شیخی فلسطینی به نام «عبد الله عزام» به افغانستان رفت و شروع به جذب جوانان از همه کشورهای اسلامی کرد تا علیه شوروی بجنگند.  مشخص نیست مزدور بوده یا انحراف داشته یا ... .&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در جنگ افغانستان کشته شد و به عنوان [[شهید]] شناخته می شود. گروهی  به نام «کتائب عبد الله عزام» به سفارت ایران حمله کرد. در میان افرادی که در این برهه زمانی به افغانستان رفتند، افرادی مثل ایمن الظواهری، زرقاوی، بن لادن و... بودند. این افراد در جوانی به افغانستان رفتند. بعد از کشته شدن «عزام»، «اسامه بن لادن» به رهبر این گروه  تبدیل شد. این افراد در یک پایگاه نظامی جمع شدند و نام آن را «قاعدة الجهاد» گذاشتند. تشکیلات القاعده در آنجا شکل گرفت و جوانان جهان عرب برای آموزش و اعزام به [[جهاد]] به این مکان می رفتند.&lt;br /&gt;
از همان ابتدا یک دوگانگی در این گروه شکل گرفت. «ابو مصعب زرقاوی»، اهل شمال اردن، (از شهر زرقا که مرکز سلفی ها است) به خیمه بن لادن نرفت. در گوشه دیگری از پایگاه، خیمه ای به نام خیمه «اهل شام» برپا کرد. همه جوانان [[فلسطین]] و [[اردن]] و [[شام]] و... به خیمه او می رفتند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بن لادن از عربستان بود. لذا جوانان عربستانی و حوزه خلیج فارس سراغ او می رفتند. ایمن الظواهری هم مصری بود، جوانان مصری و شمال افریقا سراغ او می رفتند. بن لادن و ظواهری با هم کار می کردند.&lt;br /&gt;
ولی زرقاوی به طور مشخص حسابش را از بقیه جدا کرده بود.  در آن زمان اختلافات بین سرکرده های گروه به صورت بارزی مشخص نبود. بعد از شکست شوروی، بن لادن معتقد بود نوبت امریکا فرا رسیده است و لذا عملیاتها علیه منافع امریکا شروع شد. حمله به سفارت امریکا در کنیا، به ناوچه امریکا در یمن و... . کم کم این گروه مشهور شد. &lt;br /&gt;
نظریه بن لادن چنین بود که امریکا اصل و اسراییل فرع است. اگر به امریکا حمله شود، اسراییل هم از بین می رود. در یک نگاه منصفانه به اعتقادات بن لادن باید گفت: بن لادن هیچ گاه علیه ایران، شیعه و حزب الله صحبت نکرد. هیچ اظهار نظر تکفیری علیه اینها نمی بینید. حتی امریکایی ها «عماد مغنیه» را متهم می کنند که با بن لادن دیدار داشته. بن لادن اصلاً اعتقادی هم به کشتار شیعه نداشت. &lt;br /&gt;
مبدا تشکیل داعش &lt;br /&gt;
با سقوط «صدام»، «بن لادن»، «زرقاوی» را مامور به تشکیل شاخه ی «القاعده» در عراق کرد. او هم در عراق مستقر شد و توحید و جهاد را تشکیل داد. ولی به اسم حمله به امریکا، شیعه کشی هم راه انداخت. بن لادن پیام به او داد که این چه کاری است که بازار را منفجر می کنی و شیعه می کشی؟ او گفت این ها دستشان در دست امریکا است و این ها را هم باید کشت. ولی بن لادن می گفت اصلا این کشتار مردم عادی به ضرر ما است. این اختلاف نظر خودش را نشان داد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از کشته شدن زرقاوی در سال 2006،ابوعمر بغدادی رهبر القاعده در عراق شد. وی اسم گروه را به «دولت اسلامی در عراق» تغییر داد. این امر باعث اختلاف بین گروه شد. اما بن لادن به ابوعمر بغدادی تبریک گفت، از طرفی «الظواهری» با این امر مخالف بود. وی معتقد بود گروه مقاومت، در شرایط مناسب برای تشکیل دولت نیست. زیرا با تشکیل دولت باید جوابگوی نیازهای مردم بود. &lt;br /&gt;
با کشته شدن بغدادی و به دنبال آن، کشته شدن ابو محمد مهاجر، «ابوبکر بغدادی» امیر دولت اسلامی در عراق شد. این دولت اسلامی تا شروع بحران سوریه، در عراق فعالیت می کرد. همزمان با شروع بحران سوریه، ابوبکر بغدادی یکی از اطرافیان خود به نام «ابومحمد جولانی» (وی سوری الاصل بود) را به سوریه فرستاد تا شاخه القاعده  به نام جبهه النصرة در سوریه را تشکیل دهد.  النصرة به سرعت قدرت گرفت و همه تکفیری ها جذب این گروه شدند. و به این ترتیب النصره قوی ترین گروه مسلح در سوریه شد. این گروه با ادبیاتی جهادی-عقیدتی به سختی در جنگها عقب نشینی می کردند.&lt;br /&gt;
امریکا این گروه را در لیست گروه های تروریستی قرار داد. &lt;br /&gt;
با شروع اختلافات بین «بغدادی» و «جولانی» و نهایتا به دلیل استمرار سرپیچی جولانی از بغدادی،ابوبکر بغدادی اعلام کرد: من دو شاخه عراق و شام را ادغام کرده ام. و نام آن را به «دولت اسلامی عراق و شام (داعش)» تغییر داد. &lt;br /&gt;
این تغییر باعث شدت یافتن اختلافات بین جولانی، ابوبکر بغدادی و ایمن الظواهری گردید. نتیجه ی این اختلاف نظامی، کشته  شدن سران اصلی گروه ها به دست گروه مقابل بود. این درحالی بود که اگر دولت سوریه تصمیم به چنین اقدامی می گرفت باید هزیه ی زیادی برای آن می پرداخت. این اختلافات به حدی بود که از آن به بعد داعش فقط با  گروه های مخالف خود می جنگید نه با نظام بشار اسد. در طی دو سال داعش بسیاری از مناطق شمالی و شرقی را در دست گرفت. ابومحمد جولانی خیلی تضعیف شد و حتی بعضی یارانش به داعش پیوستند. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
روند قدرت گیری داعش تا تصرف موصل ادامه داشت. با تصرف موصل بغدادی ودعی خلافت بر کل مسلمین شد. به دنبال این اتفاقات القاعده کاملاً به حاشیه برده شد. &lt;br /&gt;
در حال حاضر گروه داعش ثروتمندترین گروه تروریستی در دنیاست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منبع==&lt;br /&gt;
[http://www.mashreghnews.ir/fa/news/349514/%D9%87%D9%85%D9%87-%D8%A2%D9%86%DA%86%D9%87-%DA%A9%D9%87-%D8%A8%D8%A7%DB%8C%D8%AF-%D8%AF%D8%B1%D8%A8%D8%A7%D8%B1%D9%87-%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4-%D8%A8%D8%AF%D8%A7%D9%86%DB%8C%D9%85-%D9%86%D8%AD%D9%88%D9%87-%D8%B4%DA%A9%D9%84%E2%80%8E%DA%AF%DB%8C%D8%B1%DB%8C-%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4-%D9%88-%D8%B1%D8%A7%D9%87%DA%A9%D8%A7%D8%B1-%D9%85%D9%82%D8%A7%D8%A8%D9%84%D9%87-%D8%A8%D8%A7-%D8%A2%D9%86-%DA%86%DB%8C%D8%B3%D8%AA ماهیت داعش به روایت مسعود اسداللهی]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پیوندها==&lt;br /&gt;
[http://www.daesh.ir/ داعش]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[http://khorafatevahabiyat.blogfa.com/ تبیین عقاید وهابیت]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[http://fa.alalam.ir/ شبکه العالم]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[http://www.yjc.ir/fa/news/4894076/%D8%A7%D8%A8%D9%88%D8%A8%DA%A9%D8%B1-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF%DB%8C-%DB%8C%D8%A7-%D8%B4%DB%8C%D8%AE-%D9%86%D8%A7%D9%85%D8%B1%D8%A6%DB%8C-%DA%A9%DB%8C%D8%B3%D8%AA ابوبکر بغدادی یا &amp;quot;شیخ نامرئی&amp;quot; کیست؟]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[http://www.tvshia.com/farsi/index.php/news/4291-%D8%AF%D8%A7%D8%B3%D8%AA%D8%A7%D9%86-%D8%AC%D8%A7%D9%84%D8%A8%DB%8C-%D8%A7%D8%B2-%D8%A7%D8%A8%D9%88%D8%A8%DA%A9%D8%B1-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF%DB%8C-%D9%88-%D8%AD%D8%A7%D8%AC%DB%8C-%D8%A8%DA%A9%D8%B1%D8%8C-%D9%86%D9%81%D8%B1-%D8%A7%D9%88%D9%84-%D9%88-%D8%AF%D9%88%D9%85-%DA%AF%D8%B1%D9%88%D9%87-%D8%AA%DA%A9%D9%81%DB%8C%D8%B1%DB%8C-%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4 داستان جالبی از ابوبکر بغدادی و حاجی بکر، نفر اول و دوم گروه تکفیری داعش]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[http://www.mashreghnews.ir/fa/news/320466/%D9%88%D8%A7%DA%A9%D8%A7%D9%88%DB%8C-%D8%B1%D9%81%D8%AA%D8%A7%D8%B1%DB%8C-%D8%AF%D8%A7%D8%B9%D8%B4-%D9%88-%D8%A7%D8%A8%D9%88%D8%A8%DA%A9%D8%B1-%D8%A8%D8%BA%D8%AF%D8%A7%D8%AF%DB%8C واکاوی رفتاری داعش و ابوبکر بغدادی]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:فرقه های انحرافی در اسلام]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86&amp;diff=58021</id>
		<title>لبنان</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86&amp;diff=58021"/>
		<updated>2016-04-08T09:09:07Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: اضافه کردن رده&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{الگو:منبع الکترونیکی معتبر|ماخذ=پایگاه}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان کشوری کوچک و کوهستانی در غرب آسیا و خاورمیانه و در کنار کرانه خاوری دریای مدیترانه است که پایتخت آن شهر بندری بیروت است. لبنان از شمال و شرق با کشور سوریه، از جنوب با کشور اسراییل و از غرب با دریای مدیترانه همسایه‌ است و جزیره قبرس نیز در نزدیکی سواحل این کشور قرار دارند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژه لبنان از واژه سامی «لبن» که اشاره به قله‌های سفید کوهستان‌های لبنان دارد، گرفته شده‌ است. تا قبل از جنگ داخلی ۱۹۹۰-۱۹۷۵ لبنان کشوری متمول در منطقه و پایتخت بانکداری جهان عرب محسوب می‌شد و تعداد زیادی توریست را جذب خود می‌کرد تا حدی که بیروت را به عنوان پاریس خاورمیانه می‌شناختند و همچنین به دلیل قدرت مالی بسیار لبنان را به عنوان سوئیس خاورمیانه می‌شناختند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از پایان جنگ تلاشهای بسیاری صورت گرفت تا اقتصاد را بهبود بخشند و زیرساختهای کور را از نو بسازند که نتایج مثبت آن در سالهای اخیر آشکار شده‌ است. تا قبل از ابتدای سال ۲۰۰۶، کشور به ثبات و بازسازی لبنان به پایان رسید و تعداد بسیاری توریست به گردشگاههای لبنان سرازیر شدند. اما با شروع جنگ اسرائیل لبنان در ۱۲ ژوئیه ۲۰۰۶ تعداد بسیاری نظامی و غیرنظامی صدمه دیدند و خسارات بسیاری به زیرساختهای کشور وارد شد و جمعیت گسترده‌ای بی خانمان شدند. از سپتامبر ۲۰۰۶ دولت لبنان برنامه رسیدگی به اموال مخروبه بیروت، طیر و دیگر دهات واقع در جنوب لبنان را شروع کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان زادگاه فینیقی‌ها بوده که مردمانی دریانورد بوده‌اند و قبل از ظهور اسکندر کبیر در مدیترانه پخش شده بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ستونهای یونانی در شهر تیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کارتهاج که رم را تهدید می‌کرد یک قبیله فینیقی بوده‌است. اسکندر تایر را سوزاند که شهر اصلی فینیقی‌ها بود و استقلال آنها را سلب کرد. این کشور جزیی از امپراتوری‌های بعدی به مانند امپراتوری ایران، رم، بیزانس، عرب، صلیبیان و عثمانی گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عهد عثمانی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای ۴۰۰ سال جزئی از امپراتوری عثمانی بود و به دنبال جنگ جهانی اول جزئی از قیمومیت فرانسه بر [[سوریه]] شد. در اول سپتامبر سال ۱۹۲۰ فرانسه کشور لبنان را به عنوان یکی از سرزمین‌های محصور سوریه تشکیل داد. لبنان سرزمینی عمدتاً مسیحی نشین بود (اغلب مارونیتی بودند) ولی دارای جمعیت‌های مسلمان و دروزی هم بود. در اول سپتامبر ۱۹۲۶ فرانسه جمهوری لبنان را تشکیل داد و به آن هویتی مستقل از سوریه اعطاء کرد ولی هنوز تحت قیمومیت فرانسه بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سوریه و لبنان هر دو در سال ۱۹۴۳ به دنبال اشغال فرانسه توسط آلمان اعلام استقلال کردند. ژنرال هنری دنتز کمیسر عالی ویچی برای استقلال هر دو کشور نقش عمده‌ای را ایفاء کرد. مقامات ویچی در سال ۱۹۴۱ به آلمان اجازه دادند تا هواپیماها و تدارکات خود را از طریق سوریه به عراق برساند تا از آن‌ها علیه نیروهای انگلیسی استفاده کند. بریتانیا از ترس این که آلمان‌های نازی کنترل کامل سوریه و لبنان را با فشار بر دولت ضعیف ویچی بدست گیرند ارتش خود را به سوریه و لبنان فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ در لبنان ژنرال چارلز دوگل از منطقه دیدن کرد و تصمیم گرفت علیرغم فشارهای سیاسی از داخل و خارج لبنان این کشور را مستقل اعلام کند. در ۲۶ سپتامبر ۱۹۴۱ ژنرال جرج کترولکس اعلام کرد که لبنان تحت نظر دولت فرانسه آزاد مستقل است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
انتخابات در سال ۱۹۴۳ برگزار شدند و در ۸ نوامبر ۱۹۴۳ دولت لبنان یک طرفه قیمومیت را باطل اعلام کرد. فرانسه با زندان فرستادن دولت جدید واکنش نشان داد ولی با فشارهای بین‌المللی مقامات دولتی را در ۲۲ نوامبر ۱۹۴۳ آزاد که دو استقلال لبنان را قبول کرد.&lt;br /&gt;
متفقین منطقه را تا پایان جنگ جهانی دوم تحت کنترل داشتند آخرین گروه‌های فرانسوی در سال ۱۹۴۶ عقب نشینی کردند. میثاق ملی غیرمکتوب ۱۹۴۳ تصریح کرد که رئیس جمهوری مسیحی و نخست وزیر مسلمان باشد. تاریخ لبنان از زمان استقلال شاهد ثبات سیاسی و همچنین آشوب و هرج و مرج (بمانند بحران نظامی در سال ۱۹۵۸) و شکوفائی به دلیل موقعیت بیروت به عنوان مرکز تجارت و سرمایه گذاری بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اما لبنان چندان مزه رفاه را بچشید چون وضعیت منطقه به هم ریخت. تاریخ سیاه لبنان با شروع جنگ اعراب و اسرائیل در سال ۱۹۴۸ شروع شد. جنگی که در آن لبنان از حمایت لجستیکی ارتش آزادی بخش اعراب وقتی برخوردار شد که از حمایت پایگاه‌های سوریه محروم ماند و سعی کرد تا علیه این کشور یهودی تازه تشکیل شده حمله کند. بلافاصله بعد از شکست ارتش آزادی بخش اعراب در نبرد ساسا لبنان آتش بس با اسرائیل را پذیرفت. مرز اسرائیل - لبنان بسته شد و تا زمان جنگ شش روزه ۱۹۶۷ در آرامش باقی ماند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحله بعدی تاریخ آلوده به جنگ لبنان با جنگ داخلی لبنان در سال ۱۹۷۵ شروع شد که ۱۵ سال طول کشید و اقتصاد این کشور را به کلی تخریب کرد، نیاز به ذکر تلفات جانی و مالی نیست (به طور تقریبی بیش از صد هزار نفر کشته و صد هزار نفر معلول شدند.) با پایان جنگ در سال ۱۹۹۰ و با امضاء توافقنامه طیف از لبنان که زمانی به عنوان سوئیس خاورمیانه شناخته می‌شد جزء ویرانی باقی نمانده بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی جنگ داخلی در سالهای ۱۹۷۸ و ۱۹۸۲ لبنان دوبار از سوی نیروهای دفاعی اسرائیل مورد حمله قرار گرفت و اشغال شد. اسرائیل تا سال۲۰۰۰ کنترل جنوب لبنان را در دست داشت ولی با تصمیم اسرائیلی‌ها که نخست وزیر اسرائیل اهود باراک حامی آن بود نیروهای اسرائیلی به دلیل حملات چریکی از سوی نظامیان حزب ا... و بر اساس این عقیده که فعالیت‌های حزب ا... با عدم حضور اسرائیل در لبنان متوقف خواهد شد از این منطقه عقب نشینی کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگر چه سازمان ملل عقب نشینی اسرائیل را به عنوان عقب نشینی کامل پشت خط آبی طبق قطعنامه ۴۲۵ شورای امنیت (که ۲۲ سال قبل صادر شده بود) اعلام کرد ولی حزب ا... ادعا کرد که اسرائیل هنوز مناطق کوچکی از لبنان را در اشغال خود دارد و عملیات خود علیه اسرائیل را متوقف نخواهد کرد تا زمانی که تمامی این مناطق و آنچه که از آن به عنوان «کل فلسطین اشغالی» یاد کردند را آزاد کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ داخلی و تا به حال علیرغم تنش‌های بین حزب ا... و اسرائیل که هر چند سال یکبار اتفاق می‌افتد لبنان شاهد دوره‌ای صلح نسبی بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حوادث اخیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رسانه‌های خارجی از اصطلاح «انقلاب سرو» استفاده می‌کنند ولی رسانه‌های لبنان از اصطلاح «انتفاضه استقلال» استفاده می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترورها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حادثه‌ای که باعث اعتراضات زیادی شد در ۱۴ فوریه ۲۰۰۵ اتفاق افتاد، زمانی که لبنان با ترور نخست وزیر سابق رفیق حریری در یک بم گذاری ماشین شوکه شد. بعضی شخصیتهای خاص که بعداً رهبران مبارزین ۱۴ مارس شدند سوریه را متهم به این حمله کردند چون سنوریه حضوری گسترده در زمینه نظامی و اطلاعات در لبنان داشت و همچنین چون بین حریری و دمشق به خاطر اصلاحیه قانون اساسی که دوره ریاست جمهوری امیل لحود طرفدار سوریه را تمدید می‌کرد بحث و نزاعی عمومی در جریان بود، سوریه هر گونه دخالتی را رد می‌کند. بقیه که شامل نیروهای ۸ مارس می‌شوند سیا و موساد را متهم به ترور برای آشفته کردن اوضاع کشور کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس از سازمان ملل در مورد ترور حدس می‌زد که این عمل با چنان فراستی انجام شده که تنها با حمایت و منابع یک موسسه دولتی امکان پذیر بوده‌است. کلا همه قبول دارند که توطئه‌ای در این زمینه در کار بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از ترور دادستانهای لبنانی برای دستگیری ۶ استرالیایی که در زمان انفجار به سیدنی پرواز کرده بدنه تضمین‌هایی دادند. مامورین امنیتی لبنان ادعا کردند که صندلی‌های استرالیایی‌ها در هواپیما نشانه‌هایی از وجود مواد منفجره داشته‌اند. پلیس فدرال استرالیا ۱۰ نفر را در سیدنی که با آن پرواز درسیده بدنه بازجویی کرد و ۳ نفر از آنان را بازجویی بدنی کرد و ثابت کرد که این ادعاها بی اساس هستند. ظرف ۴۸ ساعت پلیس فدرال استرالیا این افراد را که مورد درخواست مقامات لبنانی بودند از هر گونه جرمی تبرئه کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس استرالیایی‌ها را مظنون اصلی ماجرا می‌دانست ولی با بررسی مجدد تحقیقات پلیس استرالیا، گزارش مهلیس تحقیقات آنها و نتایجشان را قطعی اعلام کرد. &amp;quot;سرگشاده سرج برامیتز نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظریات دیگر می‌توانند مورد بررسی قرار گیرند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
متأسفانه تروری حریری شروعی برای قتلهای دیگر بود که باعث از دست رفتن بسیاری از اشخاص برجسته لبنان شد. در ۲ ژوئن ۲۰۰۵ روزنامه نگار نو تاریخ دان سمیر کثیر یکی از اعضای موسس حزب چپگرای دموکرات در یک بمب گذار ی ماشین کشته شد. کمتر از یک ماه بعد در ۲۱ ژوئن ۲۰۰۵ جرج هاوی دبیر کل سابق حزب کمونیست لبنان نیز در بیروت در یکی بمگذاری ماشین کشته شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۵ سپتامبر ۲۰۰۵ می‌چید یاک خبر گوی صدا و سیمای لبنان مورد تروری ناموفق قرار گرفت پای چپ خود را از دست داد و به بازوی چپش صدمات جدی وارد شد که منجر به قطع دست چپش شد. بعد از آن وی جایزه جهانی رسانه آزاد گیلر موکانویونسکو را در سال ۲۰۰۶ برد. سردبیر و مدیر عامل روزنامه النهار جبران توئنی در حومه بیروت در ۱۲ دسامبر در یک بمبگذاری ماشین به قتل رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تظاهرات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۸ فوریه سال ۲۰۰۵ با تظاهرات ۷۰ هزار نفر در میدان شهداء نخست وزیر عمر کرامی و کابینه وی استعفاء دادند. در پاسخ حزب ا... نیز تظاهرات بزرگی را در ۸ مارس در بیروت تدارک دید و اعلام حمایت از سوریه کرد و اسرائیل و آمریکا را متهم به دخالت در امور داخلی لبنان کرد. در ۱۴ مارس یکماه بعد از قتل حریری حدود ۵/۱ میلیون نفر در میدان شهداء لبنان تظاهرات کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تظاهرکنندگان خواستار افشای حقیقت در مورد قتل حریری و اعلام استقلال از سوریه بودند و تمایل خود را برای داشتن کشوری متحد، دموکراتیک و خودمختار و فارغ از تسلط سوریه اعلام کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چند هفته بعد از تظاهرات چندین بمب در مناطق مسیحی نشین بیروت منفجر شدند. اگر چه خسارات وارده جانی نبود ولی خطر سقوط لبنان به جنگ‌های فرقه‌ای را ثابت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرانجام با فشار جوامع بین‌المللی سوریه ۱۵ هزار گروه نظامی قدرتمند خود را از لبنان خارج کرد. آخرین سرباز سوری در ۲۶ آوریل ۲۰۰۵ لبنان را ترک کرد. در ۲۷ آوریل ۲۰۰۵ لبنانی ها اولین روز استقلال خود از سوریه را اعلام کردند. نیروهای سازمان طل به رهبری بریگ کن محمود وی نجو سنگالی برای تایید عقب نیشینی نظامی مقرر قطعنامه ۱۵۵۹ شورای امنیت به لبنان فرستاده شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==انتخابات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی اولین انتخابات پارلمانی که بعد از عقب نشینی سوریه از لبنان در می‌۲۰۰۵ برگزار شد گروه‌های ائتلافی ضد سوریه‌ای مسلمانان سنی و احزاب دروزی و مسیحی به رهبری سعد حریری پسر نخست وزیر مقتول اکثریت کرسی‌های پارلمان را تصاحب کردند. حزب آزاد میهن پرستان با لیست شهید رفیق حریری در این انتخابات متحد نشدند چون اعضای لیست فکر می‌کردند آنها هنوز هویت فرقه‌ای خو را حفظ رده‌اند. به همین این حزب اقلیت کرسی‌ها را بدست آورد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ترکیبات انتخاباتی به این دلیل جالب بود که ائتلاف ضد سوریه در بعضی مناطق با حزب ا... و دیگران با حزب امل متحد شدند. آنها نتوانستند دو سوم کرسی‌های مورد نیاز برای اخراج کردن امیل لحود رئیس جمهور انتخابی سوریه را کسب کنند که دلیل آن نمایش غیرمنتظره و قوی حزب آزاد میهن پرستی و مونت لبنان بود که متعلق به ژنرال بازنشسته ارتش میشل آون است. ژنرال آون به خاطر مخالفت با سوریه مشهور بود ولی در دهه گذشته با سیاست‌مداران طرفدار سوریه متحد شد یعنی سلیمان فریخیه و میشل مور اتحاد آنها شمال و منطقه متن از مونت لبنان را در بر گرفت. سعد حریری و ولید جمبلات با نیروهای دو حزب طرفدار سوریه، حزب ا... و عملل، برای کسب قدرت اکثریت در جنوب، بکا، بعبداعلی منطقه مونت لبنان متحد شدند. این اتحاد موقت بود. در ۶ فوریه ۲۰۰۶ حزب ا... پیمان خلع سلاح را با میشل آون رهبر حزب آزاد میهن پرستان امضاء کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از انتخابات حزب آتی حریری که اکنون قدرت سیاسی غالب محسوب می‌شد فواد سینیورا را که قبلاً وزیر دارایی بود را به عنوان نخست وزیر معرفی کرد. دولت پیشنهادی او از پارلمان رای اعتماد گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۸ ژوئیه سال ۲۰۰۵ لبنان دارای پارلمانی بود که اکثریت آن را مخالفان سوریه تشکیل می‌دادند. این پارلمان پیشنهاد آزادی سمیر گانجا را که ۱۱ سال در زندان انفرادی در یک سلول زیرزمینی و بدون هیچ دسترسی به اخبار سپری کرده بود تأیید کرد. روز بعد امیل لحود رئیس جمهور طرفدار سوریه نیز این پیشنهاد در تصویب کرد. ماههای بعدی ثابت کرد که دولت نمی‌تواند اصلاحات اقتصادی و سیاسی را که قول داده بود شروع کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==درگیری لبنان و اسرائیل در ۲۰۰۶==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۲ جولای ۲۰۰۶ دستگیری ۲ سرباز اسرائیلی در عملیاتی مرزی و کشتار بیش از ۸ سرباز در آن عملیات توسط حزب ا... باعث شد تا نخست وزیر اسرائیل اهود اولمرت آن را &amp;quot;آغاز جنگ&amp;quot; بنامد. آن شب اسرائیل حملات گسترده علیه لبنان را با هدف نهایی حذف حزب ا... و باز پس گیری سربازان مجاز اعلام کرد. این عملیات سریعا تبدیل به «جنگ تمام عیار» شد چون اسرائیل بمباران منطاق بزرگ لبنان را ادامه داد و حزب ا... نیز هزاران راکت به سمت شمال اسرائیل فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مناطقی از لبنان که در تاریخ 12 جولای تا 13 آگوست 2006 مورد حمله هوایی اسرائیل قرار گرفتند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دیپلماسی در نهایت منجر به صدور قطعنامه ۱۷۰۱ شورای امنیت شد که خواستار توقف سریع تخاصم و بازگشت بدون شرط دو سرباز گروگان گرفته بود و تهیه سلاح برای حزب ا... را برای هم ممنوع اعلام کرد. سه روز بعد در ۱۴ آگوست ۲۰۰۶ آتش بس موقت اجرا شد و هر دو طرف نفس راحتی کشیدند چون اسرائیل دست از بمباران برداشت و حزب ا... فرستادن موشک به شمال اسرائیل را متوقف کرد. اما اسرائیل محاصره هوایی و دریایی لبنان را ادامه داد تا از رسیدن سلاح به حزب ا... جلوگیری کند. در ۸ سپتامبر ۲۰۰۶ هر دو نوع محاصره رفع شدند. طی آتش بس و بعد از آن چندین مورد نقض آتش بس نیز به ثبت رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سطح تخریبی که به لبنان وارد شد از سوی فواد سینیورا نخست وزیر «غیر قابل تصور» توصیف شد. بسیاری از زیرساختهای لبنان تخریب شد که عمدتاً پلها و جاده‌ها بود و هزینه صدمات ۱۵ میلیارد دلار تخمین زده شد. حدود ۱۲۰۰ غیرنظامی لبنانی کشته و حدود ۴۰۰۰ نفر زخمی شدند. بیش از یک میلیون لبنانی بی خانمان شده و مجبور به فرار به سمت مناطق امن تر شدند. ۱۶۰ اسرائیل کشته و ۸۰۰ نفر زخمی شدند. از ۱۶۰ نفر کشته شده ۴۴ نفر غیرنظامی بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در پاسخ به فشارهای بین‌المللی برای خلع سلاح حزب ا... حسن نصرا... رهبر این حزب «جشن پیروزی» در ۲۲ سپتامبر ۲۰۰۶ در جنوب لبنان برگزار کرد که صدها هزار نفر در آن شرکت کردند و حمایت خود از مقاومت مداوم را نشان دادند.  در این جشن نصرا... اعلام کرد که هیچ کس نخواهد توانست حزب ا... را خلع سلاح کند و متمم خورد که انتقام خصومتهای اسرائیلی را خواهد گرفت. او همچنین افزود که اگر لبنان قادر به دفاع از خود باشد با کمال میل حزب ا... را خلع سلاح خواهد کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریشه‌شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نام لبنان (لوبنان در زبان عربی استاندارد لِبنان در گویش محلی) از ریشه سامی &amp;quot;LBN&amp;quot; گرفته شده که دارای معانی متعددی همچون «شیر» و «سفید» است که شاید اشاره به کوه‌های سر پوشیده از برف لبنان دارد. در زبان انگلیسی نام لبنان را با حروف معرف the به مانند سودان و اوکراین و گامبیا بکار می‌برند. اطلاق حرف معرفه the شاید به این خاطر باشد که وقتی نام این کشورها به وجود آید به جای ممالک مستقل تنها مناطقی جغرافیایی محسوب می‌شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تقسیماتِ اداریِ کشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنجا که مردم لبنان در ۶۰ سال گذشته به شهرنشینی روی آورده‌اند، بیشتر جمعیت این کشور در شهرها یه ویژه در پایتخت آن بیروت و اطراف آن سکنی گزیده‌اند. بیش از نیمی از لبنانی‌ها در بیروت زندگی می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان از شش استان (به عربی: ألمحافظة) تشکیل شده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
استان بیروت، استان جبل لبنان، استان شمالی لبنان، استان بقاع، استان نبطیه، استان جنوبی لبنان، استان بیروت. استان بیروت (به عربی: محافظة بیروت) تنها استان لبنان است که از یک شهرستان و یک شهر تشکیل شده است. مرکز آن شهر بیروت است. مساحت این استان ۱۹٫۸ کیلومتر مربع است و با وجود کوچک بودنش مهم‌ترین استان لبنان بشمار می‌رود. استان جبل لبنان یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیا==&lt;br /&gt;
مرکز این استان شهر بعبدا است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ساختار جمعیتی==&lt;br /&gt;
بیشتر جمعیت این استان را پیروان مسیحیت تشکیل می‌دهند. اقلیت بزرگی از مسلمانان و دروزها نیز در این استان ساکنند. استان شمالی لبنان استان شمالی لبنان یکی از استان‌های لبنان است که مرکز آن شهر تریپولی است. استان بقاع (به عربی: البقاع) یکی از استان‌های لبنان است که ۷۵۰٬۰۰۰ نفر جمعیت دارد. تاکستان‌های نزدیکی شهر زال در دره بقاع مرکزی و نَبَطیه یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این استان در بخش‌های میانی و جنوبی لبنان قرار گرفته است. مرکز شهر نبطیه مساحت آن ۱۰۵۸ کیلومتر مربع و دارای ۱۲۹ شهر و روستا است. سطح استان از کوه و تپه پوشیده شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرهای اصلی آن عبارت‌اند از نبطیه، بنت جبیل و الخیام. شهرستان‌هااستان نبطیه به چهار شهرستان (قضاء) و ۱۱۵ بخش (بلدية) تقسیم شده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرستان نبطیه: ۳۸ بخش، شهرستان حاصبیا: ۱۹ بخش، شهرستان مرجعیون: ۲۶ بخش، شهرستان بنت جُبیل: ۳۶ بخش، استان جنوبی لبنان&lt;br /&gt;
(به عربی: الجنوب) یکی از استان‌های لبنان است. این استان ۳۶۰٬۰۰۰ نفر جمعیت و ۲٬۰۰۰ کیلومتر مربع مساحت دارد. مرکز آن شهر صیدا است و پست‌ترین نقطه آن منطقه‌ای هم‌سطح دریا و بلندترین نقطه آن ۱٬۰۰۰ متر ارتفاع دارد. دژ دریایی صیدا&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حکومت لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در 1991 قانون اساسي اصلاح شد تا متضمن انتخاب مجمع ملي 108 نفره (متشكل از 54 نماينده‌ي منتخب مسلمانان و 54 نماينده‌ي منتخب مسيحيان) با رأي تمامي افراد بالغ شود. اين مجمع رئيس جمهوري (ماروني) را انتخاب و نيز نخست وزير (سني) را انتصاب و نخست وزير هم شوراي وزيران (شش مسيحي و پنج مسلمان) را انتصاب مي كند. احزاب عمده‌ سياسي عبارتند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* حزب الله (بنياد گراي اسلامي)&lt;br /&gt;
* حزب فالانژ (ماروني)&lt;br /&gt;
* حزب امل (طرفدار سوريه)&lt;br /&gt;
* حزب سوسياليست ترقي خواه (عمدتاً دروزي)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دفاع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
كل نيروهاي مسلح :‌ 10.800 (1991) به علاوه‌ي ورود 9.000 شبه نظامي، 30.000 سرباز سوري. «ارتش جنوب لبنان» كه اسرائيل پشتيبان آن است. 2500 سرباز دارد، چندين هزار چريك فلسطيني نيز حضور دارند. خدمت سربازي: ندارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیاي كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان سرزمینی بلند و کوهستانی است که در کرانه شرقی دریای مدیترانه قرار دارد. کرانه‌های لبنان ۲۵۵ کیلومتر درازا دارد. رودخانه‌های مهم لبنان عبارت‌اند از: عاصی (ألعاصی) ولیطانی (أللیطانی) در دره سهل‌البقاع، و کلب (ألکلب). رشته‌کوه‌های لبنان عبارت‌اند از: رشته‌کوه‌های لبنان شرقی و رشته‌کوه‌های لبنان غربی که میان این دو رشته کوه، دره سهل‌البقاع قرار گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان به عنوان یک کشور خاورمیانه‌ای از غرب با دریای مدیترانه حدود ۲۲۵ مرز ساحلی دارد و از شمال و شرق با سوریه و از جنوب با اسرائیل هم مرز است. مرز لبنان با سوریه ۳۷۵ کیلومتر است در حالی که مرز لبنان با اسرائیل تنها ۷۹ کیلومتر است. لبنان یکی از کوچک‌ترین کشورهای دنیاست که مساحتی حدود ۱۰۴۵۲ کیلومتر مربع (۴۰۳۵ مایل مربع) دارد. بسیاری از مناطق آن کوهستانی است به جز مناطق ساحلی کم عرض و دره بقا که بخش مهمی از صنعت کشاورزی لبنان را تشکیل می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقلیم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرزمین لبنان آب‌وهوای مدیترانه‌ای دارد، هوای سواحل در زمستان‌ها سرد و بارانی و در تابستان‌ها گرم و شرجی است. در نواحی بلندتر به ویژه کوهستان‌ها، زمستان‌ها با بارش برف همراه است و دمای هوا به زیر صفر می‌رسد. بخش‌های دیگر این کشور، تابستان‌های گرم و خشک دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مناطق ساحلی زمستانها کلاً سرد و بارانی و تابستانها گرم و مرطوب هستند. در مناطق مرتفع تر در طول زمستان دما به زیر صفر درجه می‌رسد. تابستان‌ها از سوی دیگر گرم و خشک هستند. اگر چه اکثر مناطق لبنان سالانه شاهد بارانهای بسیاری است (در مقایسه با مناطق خشک کنارش) ولی در مناطق خاصی در شمال شرق لبنان به دلیل وجود قله‌های مرتفع کوه‌های غرب که راه ابرهای بارانی به وجود آمده از مدیترانه را سد می‌کنند باران زیادی نمی‌بارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مردم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مردم لبنان را گروه‌های نژادی و قومی گوناگونی تشکیل می‌دهند. عربها ۶۰٪، آسوریان و سریانیها ۳۶٪ و ارمنیها ۴٪، کردها و یهودیان ۱٪ جمعیت را تشکیل می‌دهند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جمعیت شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
میانگین سنی مردم لبنان ۲۴٫۶ سال است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==زبان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زبان رسمی لبنان عربی است، اما هر یک از اقلیتهای نژادی به زبان خود سخن می‌گویند. زبان فرانسه نیز کاربرد دارد. لهجه لبنانی از شاخه عربی شامی است، در کاربرد و تلفظ کلمات با دیگر شاخه‌های زبان عربی تفاوت دارد اما به عربی سوری، فلسطینی و مصری نزدیک است. در تلفظ واج «ج»، «ژ» خوانده می‌شود. به جای «ق»، حرف «ئ» و به جای «ث» نیز «ت» تلفظ می‌شود. برای مثال کلمه کثیر به معنای زیاد، کتیر. قلب به معنای دل، ئلب و جدید به معنای تازه، ژدید ادا می‌گردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقتصاد لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اقتصاد لبنان از چند جهت قابل بررسی است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===کشاورزی===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگرچه لبنان از لحاظ فعالیت‌های کشاورزی (از لحاظ فراهم بودن آب و حاصلخیزی خاک) دارای وضعیت مناسبی است ولی بخش کشاورزی بزرگی ندارد. بخش کشاورزی تنها با جذب ۱۲ درصد نیروی کار کم اهمیت‌ترین بخش اقتصادی لبنان است و تنها ۱۰ درصد از تولید ناخالص داخلی را شامل می‌شود که آن را در پایینترین رده در میان بخش‌های اقتصادی دیگر قرار می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===صنعت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کمبود مواد خام صنعتی و وابستگی محض به کشورهای عربی برای تهیه نفت باعث شده تا لبنان نتواند در فعالیتهای مهم صنعتی مشارکت داشته باشد. با این اوصاف صنعت لبنان محدود به مشاغل کوچکی همچون مونتاژ و بسته بندی مواد وارداتی شده‌است. در سال ۱۹۹۷ صنعت از لحاظ نیروی کار با جمعیت ۲۶ درصدی نیروی کار در رده دوم و همچنین رده دوم تولید ناخالص داخلی قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===خدمات و تجارت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جنگ داخلی ۹۰-۱۹۷۵ لبنان زیرساختهای اقتصادی لبنان را به شدت تخریب کرد، تولید داخلی را به نصف کاهش داد و موقعیت لبنان به عنوان مرکز ترانزیت کالا و بانکداری خاورمیانه را متزلزل کرد. صلح باعث شد تا دولت مرکزی بتواند کنترل را در بیروت به دست گیرد و مالیات جمع آوری کند و دسترسی به امکانات دولتی و مرزی یابد. سیستم بانکی مطلوب و کارخانجات کوچک و متوسط و پول خانواده‌ها و خدمات بانکی صادرات صنعتی و کشاورزی و کمک‌های بین‌المللی به عنوان منابع اصلی مبادلات خارجی به بهبودی اقتصادی کمک کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تا قبل از جنگ لبنان-اسرائیل در سال ۲۰۰۶ اقتصاد لبنان شاهد رشد چشگیری بود و دارایی‌های بانکی به بیش از ۷۰ میلیارد دلار می‌رسید. با این که بخش جهانگردی در سال ۲۰۰۵ ده درصد کاهش داشت بیش از ۲/۱ میلیون نفر جهانگرد از لبنان دیدن کردند. سرمایه گذاری در بازار به بالاترین حد خود رسیده بود که بیش از ۷ میلیون دلار در پایان ژانویه ۲۰۰۶ بود، شروع جنگ آگوست، ژوئن سال ۲۰۰۶ منجر به خسارتهای شدیدی به اقتصاد متزلزل لبنان مخصوصا بخش جهانگردی شد. بر اساس گزارش اولیه چاپ شده از سوی وزارت دارایی در ۳۰ اوت ۲۰۰۶ افت اقتصادی بزرگی در اثر جنگ تحمیل خواهد شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فرودگاه بین‌المللی بیروت مجدداً در سپتامبر ۲۰۰۶ گشایش یافت و تلاش برای بهبود اقتصاد لبنان چندان شتاب نگرفته‌است. حامیان اصلی بازسازی لبنان شامل عربستان سعودی (با کمک ۵/۱ میلیارد دلاری)، اتحادیه اروپا (با کمک ۱ میلیارد دلار) و بعضی کشورهای دیگر حوزه خلیج فارس با کمک‌های بیش از ۸۰۰ میلیون دلاری بوده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دین==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
برآوردی که مردم لبنان را از نظر دین بررسی می کند این گونه است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ۵۹٫۷٪ مسلمان، ۲۰٪ مسلمان اهل سنت/۳۴٪ مسلمان شیعه، ۳۶٪ مسیحی، ۱۹٪ مارونی/ ۶٪ ارتودکس یونانی/۸٪ [[دروز]]/۵٪ کاتولیک یونانی، &lt;br /&gt;
۱٫۳٪ پیروان ادیان دیگر&amp;lt;ref&amp;gt;[http://fa.wikishia.net/view/%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86#.D8.A7.D8.AF.DB.8C.D8.A7.D9.86_.D9.88_.D9.85.D8.B0.D8.A7.D9.87.D8.A8_.D8.AF.D8.B1_.D9.84.D8.A8.D9.86.D8.A7.D9.86 ویکی شیعه]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
* موسسه بین المللی پژوهشی CIRI آمریکا در یک پژوهش نشان داد که لبنان در صدر کشورهای است که محدودیت‌هایی را بر آزادی شهروندان در زمینه دینی، اعمال نمی کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==فرهنگ و هنر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
امروزه فرهنگ و هنر این ملت در آثار موسیقی آن ظاهر شده است که بر دیگر ملل عرب نیز تأثیر گذاشته است. خوانندگان مطرح جهان عرب اغلب از لبنان می‌باشند: اليسا، نوال الزغبی، هیفا وهبی، نانسی عجرم، وائل کفوری، راغب علامه.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای هزاران سال محل عبور تمدن‌های مختلف بوده‌است. پس جای تعجب نیست که این کشور کوچک دارای فرهنگی فوق العاده غنی و زنده باشد. وجود گونه‌های بسیار قومی و مذهبی به رسوم پربار موسیقی، آشپزی و جشنهای لبنان کمک بسیاری کرده‌است. مخصوصاً در بیروت دارای هنر غنی است و نمایش‌ها و نمایشگاه‌ها و شوهای مد و کنسرتهای زیادی در طول سال در نگارخانه‌ها، موزه‌ها، تئاترها و اماکن عمومی برگزار می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جامعه لبنان مدرن، تحصیلکرده و شاید قابل مقایسه با جوامع اروپایی مدیترانه‌ است. اکثر لبنانی‌ها دو زبانه هستند و عربی و فرانسه صحبت می‌کنند. به همین دلیل لبنان عضو سازمان بین‌المللی کشورهای فرانسوی زبان است. با این حال زبان انگلیسی مخصوصا بین دانشجویان لبنانی رایج شده‌است. این کشور نه تنها محل تلاقی مسیحیت با اسلام بلکه دروازه‌ای است که جهان عرب را به اروپا متصل می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان همچنین میزبان دانشگاه‌های معتبر مختلفی همچون دانشگاه لبنان، دانشگاه آمریکایی بیروت، دانشگاه سنت جوزف و دانشگاه آمریکایی لبنان است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فستیوالهای بین‌المللی مختلفی در لبنان برگزار می‌شوند که هنرمندان پرآوازه جهان و مردم بسیار از لبنان و کشورهای دیگر را به سوی خود جذب می‌کنند. مهم‌ترین آن‌ها فستیوالهای تابستانی در بعلبک، بیت الدین و بیبلوس است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نخستین ساکنان شناخته شده لبنان، کنعانی‌ها مردمی از نژاد سامی پوده‌اند که به احتمال زیاد با یونانیان داد و ستد داشته‌اند و یونانیان آنان را فنیقی می‌نامیده‌اند. فنیقی‌ها قومی دریانورد و بازرگان بودند و قلمرو آنان شامل دولت - شهرهایی مستقل در شرق مدیترانه و مهاجرنشین‌هایی در کرانه‌های مدیترانه بود. کوروش بزرگ، فنیقیه را گشود و به مدت دو سده، هخامنشیان فرمانروای این منطقه بوده‌اند. پس از آن، اسکندر مقدونی، شهر صور (پایتخت فنیقیه) را فتح نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دولت‌ها و امپراتوری‌های گوناگونی بر لبنان فرمان رانده‌اند، از جمله شاهنشاهان هخامنشی و ساسانی، یونانیان، امپراتوران روم و بیزانس، خلفای مسلمان، صلیبیان و خلفای عثمانی.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جنگ داخلی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ماه آوریل ۱۹۷۵ (میلادی) مردان مسلح به روی کلیسایی در شرق بیروت آتش گشودند تا پیر جمیل موسس حزب فالانژ لبنان را ترور کنند. البته او جان سالم به در برد ولی این سوءقصد باعث مجموعه‌ای از اقدامات متقابل شد که در نهایت به جنگ داخلی ۱۵ ساله در لبنان منجر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==سیاست==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کشور لبنان جمهوری است و سه مقام ارشد آن برای اعضای گروه‌های مذهبی خاص در نظر گرفته شده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رئیس جمهوری باید مسیحی مارونی باشد. نخست وزیر باید مسلمان سنی باشد. سخنگوی پارلمان می‌بایست مسلمان شیعه باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این ترتیب قسمتی از میثاق ملی (عربی: المیثاق الوطنی - al Mithaq al Watani) است که توافقی غیرکتبی است که در سال ۱۹۴۳ در ملاقاتی بین اولین رئیس جمهور لبنان (یک مارونیتی) و اولین نخست وزیر لبنان (یک سنی) حاصل شد، اگر چه این توافق در قانون اساسی لبنان تا سال ۱۹۹۰ به دنبال توافق طایف رسمی نشد. این میثاق شامل قول و قرار مسیحیان بود مبنی بر این که به دنبال جلب حمایت فرانسه نباشند و وجهه عربی لبنان را قبول داشته باشند و همچنین مسلمانان نیز قول دادند تا مشروعیت استقلال و دولت لبنان و همچنین مرزهای این کشور در سال ۱۹۲۰ را قبول داشته باشند و برای اتحاد با سوریه تلاش نکنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق تا زمان تشکیل هویت ملی لبنان موقت ولی لازم الاجرا بود. به دلیل احساس نیاز شدید مسلمانان به اتحاد به کشورهای همتایی عرب خود این میثاق راه حلی موقت به نظر می‌رسید. از سویی دیگر مسیحیان این میثاق را رد کردند و بعداً برای جلب حمایت فدرالیسم را پیشنهاد دادند و با اسرائیل متحد شدند. لبنان به موجودیت خود ادامه داده و اثرات سوء جنگ‌های داخلی همچنان بر سیاست لبنان سایه افکنده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق همچنین تصریح می‌کرد که کرسی‌های پارلمان به تمامی مذاهب تعلق گیرد یعنی با نسبت ۶ مسیحی به ۵ مسلمان که بر اساس آمارگیری سال ۱۹۳۲ بود که در آن زمان سیحیان مقداری بیشتر بودند. توافق طیف انی نسبت را مساوی کرد تا هر دو گروه مذهبی حق مساوی داشته باشند. حال مسلمانان مخصوصا با احتساب حضور فلسطینی‌ها بیشتر شده‌اند ولی اکثر گروه‌ها در لبنان با این حق تساوی راضی هستند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قانون اساسی لبنان به مردم این حق را می‌دهد تا دولت خود را عوض کنند. با این حال از اواسط دهه ۱۹۷۰ تا انتخابات پارلمانی ۱۹۹۲ جنگ داخلی لبنان از اجرای حقوق سیاسی ممانعت به عمل آورد. طبق قانون اساسی انتخابات مستقیم هر چهار سال یک بار باید برگزار شود. آخرین انتخابات پارلمانی بعد از ترور نخست وزیر حریری انجام شد و معادله قدرت با پیروزی مخالفان حضور سوریه در لبنان و تصاحب اکثر کرسی‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب پارلمان بر اساس هویت مذهبی و قومی و برخلاف مسائل ایدئولوژیکی شکل گرفته‌است. پیمان طیف با پایان دادن جنگ داخلی تقسیمات کرسی‌های پارلمان را تغییر داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پارلمان رئیس جمهور را برای یک دوره شش ساله انتخاب می‌کند. انتخاب مجدد یک رئیس جمهور برای دوره‌ای دیگر ممنوع است. این قانون برآده از قانون اساسی تا به حال دوبار با اصلاحیه‌های موقت از سوی دولت سوریه نادیده گرفته شده‌ است. دوره ریاست جمهوری الیاس حراوی که می‌بایست در سال ۱۹۹۵ تمام می‌شد برای سه سال دیگر تمدید شد. این اتفاق برای امیل لحود نیز افتاد و دوره اش تا سال ۲۰۰۷ تمدید شد. طرفداران دموکراسی این اعمال را محکوم کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آخرین انتخابات ریاست جمهوری در سال ۱۹۹۸ انجام شد. رئیس جمهور نخست وزیر را با پیشنهاد پارلمان انتصاب می‌کند. لبنان حزب‌های سیاسی زیادی دارد ولی آنها نقش مهمی در سیستم پارلمان ندارند. اکثر آنها منافع فرقه‌ای را در عمل نمایندگی می‌کنند. بسیاری از آنها لیستی موقت از نمایندگانی هستند که توسط شخصی معروف از کشور یا شهرشان حمایت می‌شوند. لیست نامزدهای انتخاباتی اغلب بر اساس حوزه انتخاباتی با مذاکر میان رهبران محلی طوایف، گروه‌های مذهبی و احزاب سیاسی شکل می‌گیرند. این ائتلاف‌های پراکنده تنها برای انتخابات شکل می‌گیرند و به ندرت گروهی منسجم در پارلمان را تشکیل می‌دهند. اخیرا پارلمان لبنان به سه گروه متحد تقسیم شده‌است. اتحاد ضد سوریه اتحاد ۱۴ مارس، اتحاد طرفدار سوریه‌ها متشکل از حزب ا... و حزب عمل است و حزب رئیس قبلی مارونیتها با نام میشل آون که اخیراً با حزب ا... متحد شده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سیستم قضایی لبنان بر اساس قانون ناپلئونی تدوین شده‌ است. هیئت منصفه در دادگاه‌های استفاده نمی‌شوند. سیستم دادگاهی لبنان از سه سطح تشکیل شده اتس، دادگاه بدوی، دادگاه استیناف و دادگاه نقض رای. همچنین دادگاه‌های مذهبی وجود دارند که در مسائل ضخصی در جوامع خود با قوانین مربوط به ازدواج، طلا و وراثت حق قضاوت دارند قانون لبنان شامل ازدواج عرضی نمی‌شود (اگر چه چنین ازدواج‌هایی را به مانند قراردادهایی می‌داند که در خارج از کشور صورت گرفته‌اند) تلاش‌های رئیس جمهوری قبلی الیاس حراوی برای قانونی کردن ازدواج عرضی در اواخر دهه ۱۹۹۰ با اعتراضات روحانیون مسلمان با مشکل مواجه شد. به علاوه لبنان دارای سیستمی از دادگاه‌های نظامی است که بر افراد برای جرایمی همچون جاسوسی، خیانت به وطن و دیگر جرایم که مربوط به امنیت هستند حق قضاوت دارد. این دادگاه‌های نظامی از سوی سازمان‌های حقوق بشر از جمله سازمان بین‌المللی عضو بین‌المللی مورد انتقاد قرار گرفته‌اند. &lt;br /&gt;
انتقال آنها یک بوده‌است که استانداردهای بین‌المللی قضاوت منصفانه در این دادگاه‌ها رعایت نمی‌شود و حق قضاوت بسیاری در مورد غیرنظامیان اعمال می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حزب‌الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان یک سازمان سیاسی-نظامی در لبنان است. گروه حزب الله در اوایل سال‌های ۱۹۸۰ و باالهام از ایدئولوژی اسلام سیاسی روح‌الله خمینی در لبنان ظهور کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در زمان جنگ داخلی لبنان، حزب‌الله لبنان به کمک سپاه پاسداران انقلاب اسلامی ایران، تعلیم نظامی داده شده و تحت حمایت مالی و سیاسی نظام جمهوری اسلامی ایران قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان ۳ هدف اصلی را به عنوان آرمان خود اعلام کرده که عبارتند از: محو آثار امپریالیستی غربی در لبنان، مجازات فالانژهای لبنان و برپایی حکومت اسلامی در لبنان. گروه حزب‌الله لبنان در لیست برخی کشورهای غربی به عنوان «گروهی تروریستی» قرار دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب الله لبنان پس از سالها جنگ چریکی موفق به آزاد کردن جنوب لبنان از اشغال اسرائیل در سال ۲۰۰۰ شد. این گروه پس از آن به فعالیت های سیاسی خود تحرک بیشتری داده و به کابینه و مجلس لبنان راه یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخچه حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هسته اولیه حزب الله و ساختار تشکیلاتی آن متشکل از اسلام گرایان، نیروهای حزب الدعوه به رهبری علامه سید محمدحسین فضل‌الله، شاخه دانشجویی حزب الدعوه، مسئولان جنبش امل، اعضای جنبش فتح به رهبری ابوجهاد (خلیل الوزیر) و تمام گروه هاو جریان‌هایی که از انقلاب اسلامی ایران و روح‌الله خمینی تاثیر گرفته بودند، شکل گرفت. سید عباس موسوی که در حمله هلی کوپترهای اسرائیلی به خودرو حامل وی و همسر و فرزندش در سال ۱۹۹۲ کشته شد، شیخ صبحی طفیلی شیخ راغب حرب، شیخ عبدالکریم عبید، سید حسین موسوی، سید حسن نصرالله، سید ابراهیم امین السید، شیخ حسین الکورانی، شیخ نعیم قاسم، شیخ محمد یزبک، حسین خلیل، محمد رعد و محمد فنیش از جمله افرادی بودند که از حزب الدعوه و جنبش امل وارد حزب الله شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سید حسن نصرالله، دبیرکل حزب‌الله لبنان در اولین سالگرد جنگ اسرائیل حزب‌الله لبنان در مصاحبه اختصاصی با صدا و سیمای جمهوری اسلامی اعلام کرد که در طول جنگ از «مولایش»، علی خامنه‌ای «رهنمود و راهنمایی» دریافت می‌کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==رابطه با ایران==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفته‌های محمدحسن اختری سفیر ایران در سوریه در سال‌های (۱۹۹۷-۱۹۹۴) و (۲۰۰۸-۲۰۰۵) ایران به حزب الله کمک‌های مالی و معنوی کرده‌است و سپاه پاسداران انقلاب اسلامی به آموزش نیروهای حزب الله می‌پرداخته‌است ولی اوهرگونه شرکت مستقیم ایران را در درگیرهای حزب الله رد می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جمهوری اسلامی ارتباط نزدیکی با جنبش حزب‌الله دارد و دولت و نهادهای حکومتی ایران، از جمله بنیاد شهید، حمایت‌های مالی قابل توجهی از این گروه و طرفداران و ساکنان مناطق تحت نفوذ آن به عمل می‌آورند. به گفته منابع نزدیک به حزب‌الله، ایران در بین سال‌های ۲۰۰۶ تا ۲۰۱۰، یک میلیارد دلار برای بازسازی بخش‌های جنگ‌زده لبنان هزینه کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* گزارش سرويس بين الملل باشگاه خبرنگاران، نگاهی به تاریخچه لبنان، در دسترس در [http://www.yjc.ir/fa/news/4115877/%D9%86%DA%AF%D8%A7%D9%87%D9%8A-%D8%A8%D9%87-%D8%AA%D8%A7%D8%B1%D9%8A%D8%AE%DA%86%D9%87-%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86-%D8%AA%D8%B5%D8%A7%D9%88%D9%8A%D8%B1 باشگاه خبرنگاران]، بازیابی: 15 آبان ماه 1392.&lt;br /&gt;
{{کشورهای اسلامی}}&lt;br /&gt;
[[رده:کشورهای اسلامی]]&lt;br /&gt;
[[رده:کشورهای شیعه نشین]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
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		<title>لبنان</title>
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		<updated>2016-04-08T09:08:15Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* دین */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{الگو:منبع الکترونیکی معتبر|ماخذ=پایگاه}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان کشوری کوچک و کوهستانی در غرب آسیا و خاورمیانه و در کنار کرانه خاوری دریای مدیترانه است که پایتخت آن شهر بندری بیروت است. لبنان از شمال و شرق با کشور سوریه، از جنوب با کشور اسراییل و از غرب با دریای مدیترانه همسایه‌ است و جزیره قبرس نیز در نزدیکی سواحل این کشور قرار دارند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژه لبنان از واژه سامی «لبن» که اشاره به قله‌های سفید کوهستان‌های لبنان دارد، گرفته شده‌ است. تا قبل از جنگ داخلی ۱۹۹۰-۱۹۷۵ لبنان کشوری متمول در منطقه و پایتخت بانکداری جهان عرب محسوب می‌شد و تعداد زیادی توریست را جذب خود می‌کرد تا حدی که بیروت را به عنوان پاریس خاورمیانه می‌شناختند و همچنین به دلیل قدرت مالی بسیار لبنان را به عنوان سوئیس خاورمیانه می‌شناختند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از پایان جنگ تلاشهای بسیاری صورت گرفت تا اقتصاد را بهبود بخشند و زیرساختهای کور را از نو بسازند که نتایج مثبت آن در سالهای اخیر آشکار شده‌ است. تا قبل از ابتدای سال ۲۰۰۶، کشور به ثبات و بازسازی لبنان به پایان رسید و تعداد بسیاری توریست به گردشگاههای لبنان سرازیر شدند. اما با شروع جنگ اسرائیل لبنان در ۱۲ ژوئیه ۲۰۰۶ تعداد بسیاری نظامی و غیرنظامی صدمه دیدند و خسارات بسیاری به زیرساختهای کشور وارد شد و جمعیت گسترده‌ای بی خانمان شدند. از سپتامبر ۲۰۰۶ دولت لبنان برنامه رسیدگی به اموال مخروبه بیروت، طیر و دیگر دهات واقع در جنوب لبنان را شروع کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان زادگاه فینیقی‌ها بوده که مردمانی دریانورد بوده‌اند و قبل از ظهور اسکندر کبیر در مدیترانه پخش شده بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ستونهای یونانی در شهر تیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کارتهاج که رم را تهدید می‌کرد یک قبیله فینیقی بوده‌است. اسکندر تایر را سوزاند که شهر اصلی فینیقی‌ها بود و استقلال آنها را سلب کرد. این کشور جزیی از امپراتوری‌های بعدی به مانند امپراتوری ایران، رم، بیزانس، عرب، صلیبیان و عثمانی گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عهد عثمانی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای ۴۰۰ سال جزئی از امپراتوری عثمانی بود و به دنبال جنگ جهانی اول جزئی از قیمومیت فرانسه بر [[سوریه]] شد. در اول سپتامبر سال ۱۹۲۰ فرانسه کشور لبنان را به عنوان یکی از سرزمین‌های محصور سوریه تشکیل داد. لبنان سرزمینی عمدتاً مسیحی نشین بود (اغلب مارونیتی بودند) ولی دارای جمعیت‌های مسلمان و دروزی هم بود. در اول سپتامبر ۱۹۲۶ فرانسه جمهوری لبنان را تشکیل داد و به آن هویتی مستقل از سوریه اعطاء کرد ولی هنوز تحت قیمومیت فرانسه بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سوریه و لبنان هر دو در سال ۱۹۴۳ به دنبال اشغال فرانسه توسط آلمان اعلام استقلال کردند. ژنرال هنری دنتز کمیسر عالی ویچی برای استقلال هر دو کشور نقش عمده‌ای را ایفاء کرد. مقامات ویچی در سال ۱۹۴۱ به آلمان اجازه دادند تا هواپیماها و تدارکات خود را از طریق سوریه به عراق برساند تا از آن‌ها علیه نیروهای انگلیسی استفاده کند. بریتانیا از ترس این که آلمان‌های نازی کنترل کامل سوریه و لبنان را با فشار بر دولت ضعیف ویچی بدست گیرند ارتش خود را به سوریه و لبنان فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ در لبنان ژنرال چارلز دوگل از منطقه دیدن کرد و تصمیم گرفت علیرغم فشارهای سیاسی از داخل و خارج لبنان این کشور را مستقل اعلام کند. در ۲۶ سپتامبر ۱۹۴۱ ژنرال جرج کترولکس اعلام کرد که لبنان تحت نظر دولت فرانسه آزاد مستقل است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
انتخابات در سال ۱۹۴۳ برگزار شدند و در ۸ نوامبر ۱۹۴۳ دولت لبنان یک طرفه قیمومیت را باطل اعلام کرد. فرانسه با زندان فرستادن دولت جدید واکنش نشان داد ولی با فشارهای بین‌المللی مقامات دولتی را در ۲۲ نوامبر ۱۹۴۳ آزاد که دو استقلال لبنان را قبول کرد.&lt;br /&gt;
متفقین منطقه را تا پایان جنگ جهانی دوم تحت کنترل داشتند آخرین گروه‌های فرانسوی در سال ۱۹۴۶ عقب نشینی کردند. میثاق ملی غیرمکتوب ۱۹۴۳ تصریح کرد که رئیس جمهوری مسیحی و نخست وزیر مسلمان باشد. تاریخ لبنان از زمان استقلال شاهد ثبات سیاسی و همچنین آشوب و هرج و مرج (بمانند بحران نظامی در سال ۱۹۵۸) و شکوفائی به دلیل موقعیت بیروت به عنوان مرکز تجارت و سرمایه گذاری بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اما لبنان چندان مزه رفاه را بچشید چون وضعیت منطقه به هم ریخت. تاریخ سیاه لبنان با شروع جنگ اعراب و اسرائیل در سال ۱۹۴۸ شروع شد. جنگی که در آن لبنان از حمایت لجستیکی ارتش آزادی بخش اعراب وقتی برخوردار شد که از حمایت پایگاه‌های سوریه محروم ماند و سعی کرد تا علیه این کشور یهودی تازه تشکیل شده حمله کند. بلافاصله بعد از شکست ارتش آزادی بخش اعراب در نبرد ساسا لبنان آتش بس با اسرائیل را پذیرفت. مرز اسرائیل - لبنان بسته شد و تا زمان جنگ شش روزه ۱۹۶۷ در آرامش باقی ماند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحله بعدی تاریخ آلوده به جنگ لبنان با جنگ داخلی لبنان در سال ۱۹۷۵ شروع شد که ۱۵ سال طول کشید و اقتصاد این کشور را به کلی تخریب کرد، نیاز به ذکر تلفات جانی و مالی نیست (به طور تقریبی بیش از صد هزار نفر کشته و صد هزار نفر معلول شدند.) با پایان جنگ در سال ۱۹۹۰ و با امضاء توافقنامه طیف از لبنان که زمانی به عنوان سوئیس خاورمیانه شناخته می‌شد جزء ویرانی باقی نمانده بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی جنگ داخلی در سالهای ۱۹۷۸ و ۱۹۸۲ لبنان دوبار از سوی نیروهای دفاعی اسرائیل مورد حمله قرار گرفت و اشغال شد. اسرائیل تا سال۲۰۰۰ کنترل جنوب لبنان را در دست داشت ولی با تصمیم اسرائیلی‌ها که نخست وزیر اسرائیل اهود باراک حامی آن بود نیروهای اسرائیلی به دلیل حملات چریکی از سوی نظامیان حزب ا... و بر اساس این عقیده که فعالیت‌های حزب ا... با عدم حضور اسرائیل در لبنان متوقف خواهد شد از این منطقه عقب نشینی کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگر چه سازمان ملل عقب نشینی اسرائیل را به عنوان عقب نشینی کامل پشت خط آبی طبق قطعنامه ۴۲۵ شورای امنیت (که ۲۲ سال قبل صادر شده بود) اعلام کرد ولی حزب ا... ادعا کرد که اسرائیل هنوز مناطق کوچکی از لبنان را در اشغال خود دارد و عملیات خود علیه اسرائیل را متوقف نخواهد کرد تا زمانی که تمامی این مناطق و آنچه که از آن به عنوان «کل فلسطین اشغالی» یاد کردند را آزاد کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ داخلی و تا به حال علیرغم تنش‌های بین حزب ا... و اسرائیل که هر چند سال یکبار اتفاق می‌افتد لبنان شاهد دوره‌ای صلح نسبی بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حوادث اخیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رسانه‌های خارجی از اصطلاح «انقلاب سرو» استفاده می‌کنند ولی رسانه‌های لبنان از اصطلاح «انتفاضه استقلال» استفاده می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترورها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حادثه‌ای که باعث اعتراضات زیادی شد در ۱۴ فوریه ۲۰۰۵ اتفاق افتاد، زمانی که لبنان با ترور نخست وزیر سابق رفیق حریری در یک بم گذاری ماشین شوکه شد. بعضی شخصیتهای خاص که بعداً رهبران مبارزین ۱۴ مارس شدند سوریه را متهم به این حمله کردند چون سنوریه حضوری گسترده در زمینه نظامی و اطلاعات در لبنان داشت و همچنین چون بین حریری و دمشق به خاطر اصلاحیه قانون اساسی که دوره ریاست جمهوری امیل لحود طرفدار سوریه را تمدید می‌کرد بحث و نزاعی عمومی در جریان بود، سوریه هر گونه دخالتی را رد می‌کند. بقیه که شامل نیروهای ۸ مارس می‌شوند سیا و موساد را متهم به ترور برای آشفته کردن اوضاع کشور کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس از سازمان ملل در مورد ترور حدس می‌زد که این عمل با چنان فراستی انجام شده که تنها با حمایت و منابع یک موسسه دولتی امکان پذیر بوده‌است. کلا همه قبول دارند که توطئه‌ای در این زمینه در کار بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از ترور دادستانهای لبنانی برای دستگیری ۶ استرالیایی که در زمان انفجار به سیدنی پرواز کرده بدنه تضمین‌هایی دادند. مامورین امنیتی لبنان ادعا کردند که صندلی‌های استرالیایی‌ها در هواپیما نشانه‌هایی از وجود مواد منفجره داشته‌اند. پلیس فدرال استرالیا ۱۰ نفر را در سیدنی که با آن پرواز درسیده بدنه بازجویی کرد و ۳ نفر از آنان را بازجویی بدنی کرد و ثابت کرد که این ادعاها بی اساس هستند. ظرف ۴۸ ساعت پلیس فدرال استرالیا این افراد را که مورد درخواست مقامات لبنانی بودند از هر گونه جرمی تبرئه کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس استرالیایی‌ها را مظنون اصلی ماجرا می‌دانست ولی با بررسی مجدد تحقیقات پلیس استرالیا، گزارش مهلیس تحقیقات آنها و نتایجشان را قطعی اعلام کرد. &amp;quot;سرگشاده سرج برامیتز نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظریات دیگر می‌توانند مورد بررسی قرار گیرند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
متأسفانه تروری حریری شروعی برای قتلهای دیگر بود که باعث از دست رفتن بسیاری از اشخاص برجسته لبنان شد. در ۲ ژوئن ۲۰۰۵ روزنامه نگار نو تاریخ دان سمیر کثیر یکی از اعضای موسس حزب چپگرای دموکرات در یک بمب گذار ی ماشین کشته شد. کمتر از یک ماه بعد در ۲۱ ژوئن ۲۰۰۵ جرج هاوی دبیر کل سابق حزب کمونیست لبنان نیز در بیروت در یکی بمگذاری ماشین کشته شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۵ سپتامبر ۲۰۰۵ می‌چید یاک خبر گوی صدا و سیمای لبنان مورد تروری ناموفق قرار گرفت پای چپ خود را از دست داد و به بازوی چپش صدمات جدی وارد شد که منجر به قطع دست چپش شد. بعد از آن وی جایزه جهانی رسانه آزاد گیلر موکانویونسکو را در سال ۲۰۰۶ برد. سردبیر و مدیر عامل روزنامه النهار جبران توئنی در حومه بیروت در ۱۲ دسامبر در یک بمبگذاری ماشین به قتل رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تظاهرات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۸ فوریه سال ۲۰۰۵ با تظاهرات ۷۰ هزار نفر در میدان شهداء نخست وزیر عمر کرامی و کابینه وی استعفاء دادند. در پاسخ حزب ا... نیز تظاهرات بزرگی را در ۸ مارس در بیروت تدارک دید و اعلام حمایت از سوریه کرد و اسرائیل و آمریکا را متهم به دخالت در امور داخلی لبنان کرد. در ۱۴ مارس یکماه بعد از قتل حریری حدود ۵/۱ میلیون نفر در میدان شهداء لبنان تظاهرات کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تظاهرکنندگان خواستار افشای حقیقت در مورد قتل حریری و اعلام استقلال از سوریه بودند و تمایل خود را برای داشتن کشوری متحد، دموکراتیک و خودمختار و فارغ از تسلط سوریه اعلام کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چند هفته بعد از تظاهرات چندین بمب در مناطق مسیحی نشین بیروت منفجر شدند. اگر چه خسارات وارده جانی نبود ولی خطر سقوط لبنان به جنگ‌های فرقه‌ای را ثابت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرانجام با فشار جوامع بین‌المللی سوریه ۱۵ هزار گروه نظامی قدرتمند خود را از لبنان خارج کرد. آخرین سرباز سوری در ۲۶ آوریل ۲۰۰۵ لبنان را ترک کرد. در ۲۷ آوریل ۲۰۰۵ لبنانی ها اولین روز استقلال خود از سوریه را اعلام کردند. نیروهای سازمان طل به رهبری بریگ کن محمود وی نجو سنگالی برای تایید عقب نیشینی نظامی مقرر قطعنامه ۱۵۵۹ شورای امنیت به لبنان فرستاده شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==انتخابات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی اولین انتخابات پارلمانی که بعد از عقب نشینی سوریه از لبنان در می‌۲۰۰۵ برگزار شد گروه‌های ائتلافی ضد سوریه‌ای مسلمانان سنی و احزاب دروزی و مسیحی به رهبری سعد حریری پسر نخست وزیر مقتول اکثریت کرسی‌های پارلمان را تصاحب کردند. حزب آزاد میهن پرستان با لیست شهید رفیق حریری در این انتخابات متحد نشدند چون اعضای لیست فکر می‌کردند آنها هنوز هویت فرقه‌ای خو را حفظ رده‌اند. به همین این حزب اقلیت کرسی‌ها را بدست آورد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ترکیبات انتخاباتی به این دلیل جالب بود که ائتلاف ضد سوریه در بعضی مناطق با حزب ا... و دیگران با حزب امل متحد شدند. آنها نتوانستند دو سوم کرسی‌های مورد نیاز برای اخراج کردن امیل لحود رئیس جمهور انتخابی سوریه را کسب کنند که دلیل آن نمایش غیرمنتظره و قوی حزب آزاد میهن پرستی و مونت لبنان بود که متعلق به ژنرال بازنشسته ارتش میشل آون است. ژنرال آون به خاطر مخالفت با سوریه مشهور بود ولی در دهه گذشته با سیاست‌مداران طرفدار سوریه متحد شد یعنی سلیمان فریخیه و میشل مور اتحاد آنها شمال و منطقه متن از مونت لبنان را در بر گرفت. سعد حریری و ولید جمبلات با نیروهای دو حزب طرفدار سوریه، حزب ا... و عملل، برای کسب قدرت اکثریت در جنوب، بکا، بعبداعلی منطقه مونت لبنان متحد شدند. این اتحاد موقت بود. در ۶ فوریه ۲۰۰۶ حزب ا... پیمان خلع سلاح را با میشل آون رهبر حزب آزاد میهن پرستان امضاء کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از انتخابات حزب آتی حریری که اکنون قدرت سیاسی غالب محسوب می‌شد فواد سینیورا را که قبلاً وزیر دارایی بود را به عنوان نخست وزیر معرفی کرد. دولت پیشنهادی او از پارلمان رای اعتماد گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۸ ژوئیه سال ۲۰۰۵ لبنان دارای پارلمانی بود که اکثریت آن را مخالفان سوریه تشکیل می‌دادند. این پارلمان پیشنهاد آزادی سمیر گانجا را که ۱۱ سال در زندان انفرادی در یک سلول زیرزمینی و بدون هیچ دسترسی به اخبار سپری کرده بود تأیید کرد. روز بعد امیل لحود رئیس جمهور طرفدار سوریه نیز این پیشنهاد در تصویب کرد. ماههای بعدی ثابت کرد که دولت نمی‌تواند اصلاحات اقتصادی و سیاسی را که قول داده بود شروع کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==درگیری لبنان و اسرائیل در ۲۰۰۶==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۲ جولای ۲۰۰۶ دستگیری ۲ سرباز اسرائیلی در عملیاتی مرزی و کشتار بیش از ۸ سرباز در آن عملیات توسط حزب ا... باعث شد تا نخست وزیر اسرائیل اهود اولمرت آن را &amp;quot;آغاز جنگ&amp;quot; بنامد. آن شب اسرائیل حملات گسترده علیه لبنان را با هدف نهایی حذف حزب ا... و باز پس گیری سربازان مجاز اعلام کرد. این عملیات سریعا تبدیل به «جنگ تمام عیار» شد چون اسرائیل بمباران منطاق بزرگ لبنان را ادامه داد و حزب ا... نیز هزاران راکت به سمت شمال اسرائیل فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مناطقی از لبنان که در تاریخ 12 جولای تا 13 آگوست 2006 مورد حمله هوایی اسرائیل قرار گرفتند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دیپلماسی در نهایت منجر به صدور قطعنامه ۱۷۰۱ شورای امنیت شد که خواستار توقف سریع تخاصم و بازگشت بدون شرط دو سرباز گروگان گرفته بود و تهیه سلاح برای حزب ا... را برای هم ممنوع اعلام کرد. سه روز بعد در ۱۴ آگوست ۲۰۰۶ آتش بس موقت اجرا شد و هر دو طرف نفس راحتی کشیدند چون اسرائیل دست از بمباران برداشت و حزب ا... فرستادن موشک به شمال اسرائیل را متوقف کرد. اما اسرائیل محاصره هوایی و دریایی لبنان را ادامه داد تا از رسیدن سلاح به حزب ا... جلوگیری کند. در ۸ سپتامبر ۲۰۰۶ هر دو نوع محاصره رفع شدند. طی آتش بس و بعد از آن چندین مورد نقض آتش بس نیز به ثبت رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سطح تخریبی که به لبنان وارد شد از سوی فواد سینیورا نخست وزیر «غیر قابل تصور» توصیف شد. بسیاری از زیرساختهای لبنان تخریب شد که عمدتاً پلها و جاده‌ها بود و هزینه صدمات ۱۵ میلیارد دلار تخمین زده شد. حدود ۱۲۰۰ غیرنظامی لبنانی کشته و حدود ۴۰۰۰ نفر زخمی شدند. بیش از یک میلیون لبنانی بی خانمان شده و مجبور به فرار به سمت مناطق امن تر شدند. ۱۶۰ اسرائیل کشته و ۸۰۰ نفر زخمی شدند. از ۱۶۰ نفر کشته شده ۴۴ نفر غیرنظامی بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در پاسخ به فشارهای بین‌المللی برای خلع سلاح حزب ا... حسن نصرا... رهبر این حزب «جشن پیروزی» در ۲۲ سپتامبر ۲۰۰۶ در جنوب لبنان برگزار کرد که صدها هزار نفر در آن شرکت کردند و حمایت خود از مقاومت مداوم را نشان دادند.  در این جشن نصرا... اعلام کرد که هیچ کس نخواهد توانست حزب ا... را خلع سلاح کند و متمم خورد که انتقام خصومتهای اسرائیلی را خواهد گرفت. او همچنین افزود که اگر لبنان قادر به دفاع از خود باشد با کمال میل حزب ا... را خلع سلاح خواهد کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریشه‌شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نام لبنان (لوبنان در زبان عربی استاندارد لِبنان در گویش محلی) از ریشه سامی &amp;quot;LBN&amp;quot; گرفته شده که دارای معانی متعددی همچون «شیر» و «سفید» است که شاید اشاره به کوه‌های سر پوشیده از برف لبنان دارد. در زبان انگلیسی نام لبنان را با حروف معرف the به مانند سودان و اوکراین و گامبیا بکار می‌برند. اطلاق حرف معرفه the شاید به این خاطر باشد که وقتی نام این کشورها به وجود آید به جای ممالک مستقل تنها مناطقی جغرافیایی محسوب می‌شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تقسیماتِ اداریِ کشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنجا که مردم لبنان در ۶۰ سال گذشته به شهرنشینی روی آورده‌اند، بیشتر جمعیت این کشور در شهرها یه ویژه در پایتخت آن بیروت و اطراف آن سکنی گزیده‌اند. بیش از نیمی از لبنانی‌ها در بیروت زندگی می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان از شش استان (به عربی: ألمحافظة) تشکیل شده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
استان بیروت، استان جبل لبنان، استان شمالی لبنان، استان بقاع، استان نبطیه، استان جنوبی لبنان، استان بیروت. استان بیروت (به عربی: محافظة بیروت) تنها استان لبنان است که از یک شهرستان و یک شهر تشکیل شده است. مرکز آن شهر بیروت است. مساحت این استان ۱۹٫۸ کیلومتر مربع است و با وجود کوچک بودنش مهم‌ترین استان لبنان بشمار می‌رود. استان جبل لبنان یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیا==&lt;br /&gt;
مرکز این استان شهر بعبدا است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ساختار جمعیتی==&lt;br /&gt;
بیشتر جمعیت این استان را پیروان مسیحیت تشکیل می‌دهند. اقلیت بزرگی از مسلمانان و دروزها نیز در این استان ساکنند. استان شمالی لبنان استان شمالی لبنان یکی از استان‌های لبنان است که مرکز آن شهر تریپولی است. استان بقاع (به عربی: البقاع) یکی از استان‌های لبنان است که ۷۵۰٬۰۰۰ نفر جمعیت دارد. تاکستان‌های نزدیکی شهر زال در دره بقاع مرکزی و نَبَطیه یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این استان در بخش‌های میانی و جنوبی لبنان قرار گرفته است. مرکز شهر نبطیه مساحت آن ۱۰۵۸ کیلومتر مربع و دارای ۱۲۹ شهر و روستا است. سطح استان از کوه و تپه پوشیده شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرهای اصلی آن عبارت‌اند از نبطیه، بنت جبیل و الخیام. شهرستان‌هااستان نبطیه به چهار شهرستان (قضاء) و ۱۱۵ بخش (بلدية) تقسیم شده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرستان نبطیه: ۳۸ بخش، شهرستان حاصبیا: ۱۹ بخش، شهرستان مرجعیون: ۲۶ بخش، شهرستان بنت جُبیل: ۳۶ بخش، استان جنوبی لبنان&lt;br /&gt;
(به عربی: الجنوب) یکی از استان‌های لبنان است. این استان ۳۶۰٬۰۰۰ نفر جمعیت و ۲٬۰۰۰ کیلومتر مربع مساحت دارد. مرکز آن شهر صیدا است و پست‌ترین نقطه آن منطقه‌ای هم‌سطح دریا و بلندترین نقطه آن ۱٬۰۰۰ متر ارتفاع دارد. دژ دریایی صیدا&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حکومت لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در 1991 قانون اساسي اصلاح شد تا متضمن انتخاب مجمع ملي 108 نفره (متشكل از 54 نماينده‌ي منتخب مسلمانان و 54 نماينده‌ي منتخب مسيحيان) با رأي تمامي افراد بالغ شود. اين مجمع رئيس جمهوري (ماروني) را انتخاب و نيز نخست وزير (سني) را انتصاب و نخست وزير هم شوراي وزيران (شش مسيحي و پنج مسلمان) را انتصاب مي كند. احزاب عمده‌ سياسي عبارتند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* حزب الله (بنياد گراي اسلامي)&lt;br /&gt;
* حزب فالانژ (ماروني)&lt;br /&gt;
* حزب امل (طرفدار سوريه)&lt;br /&gt;
* حزب سوسياليست ترقي خواه (عمدتاً دروزي)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دفاع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
كل نيروهاي مسلح :‌ 10.800 (1991) به علاوه‌ي ورود 9.000 شبه نظامي، 30.000 سرباز سوري. «ارتش جنوب لبنان» كه اسرائيل پشتيبان آن است. 2500 سرباز دارد، چندين هزار چريك فلسطيني نيز حضور دارند. خدمت سربازي: ندارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیاي كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان سرزمینی بلند و کوهستانی است که در کرانه شرقی دریای مدیترانه قرار دارد. کرانه‌های لبنان ۲۵۵ کیلومتر درازا دارد. رودخانه‌های مهم لبنان عبارت‌اند از: عاصی (ألعاصی) ولیطانی (أللیطانی) در دره سهل‌البقاع، و کلب (ألکلب). رشته‌کوه‌های لبنان عبارت‌اند از: رشته‌کوه‌های لبنان شرقی و رشته‌کوه‌های لبنان غربی که میان این دو رشته کوه، دره سهل‌البقاع قرار گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان به عنوان یک کشور خاورمیانه‌ای از غرب با دریای مدیترانه حدود ۲۲۵ مرز ساحلی دارد و از شمال و شرق با سوریه و از جنوب با اسرائیل هم مرز است. مرز لبنان با سوریه ۳۷۵ کیلومتر است در حالی که مرز لبنان با اسرائیل تنها ۷۹ کیلومتر است. لبنان یکی از کوچک‌ترین کشورهای دنیاست که مساحتی حدود ۱۰۴۵۲ کیلومتر مربع (۴۰۳۵ مایل مربع) دارد. بسیاری از مناطق آن کوهستانی است به جز مناطق ساحلی کم عرض و دره بقا که بخش مهمی از صنعت کشاورزی لبنان را تشکیل می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقلیم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرزمین لبنان آب‌وهوای مدیترانه‌ای دارد، هوای سواحل در زمستان‌ها سرد و بارانی و در تابستان‌ها گرم و شرجی است. در نواحی بلندتر به ویژه کوهستان‌ها، زمستان‌ها با بارش برف همراه است و دمای هوا به زیر صفر می‌رسد. بخش‌های دیگر این کشور، تابستان‌های گرم و خشک دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مناطق ساحلی زمستانها کلاً سرد و بارانی و تابستانها گرم و مرطوب هستند. در مناطق مرتفع تر در طول زمستان دما به زیر صفر درجه می‌رسد. تابستان‌ها از سوی دیگر گرم و خشک هستند. اگر چه اکثر مناطق لبنان سالانه شاهد بارانهای بسیاری است (در مقایسه با مناطق خشک کنارش) ولی در مناطق خاصی در شمال شرق لبنان به دلیل وجود قله‌های مرتفع کوه‌های غرب که راه ابرهای بارانی به وجود آمده از مدیترانه را سد می‌کنند باران زیادی نمی‌بارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مردم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مردم لبنان را گروه‌های نژادی و قومی گوناگونی تشکیل می‌دهند. عربها ۶۰٪، آسوریان و سریانیها ۳۶٪ و ارمنیها ۴٪، کردها و یهودیان ۱٪ جمعیت را تشکیل می‌دهند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جمعیت شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
میانگین سنی مردم لبنان ۲۴٫۶ سال است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==زبان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زبان رسمی لبنان عربی است، اما هر یک از اقلیتهای نژادی به زبان خود سخن می‌گویند. زبان فرانسه نیز کاربرد دارد. لهجه لبنانی از شاخه عربی شامی است، در کاربرد و تلفظ کلمات با دیگر شاخه‌های زبان عربی تفاوت دارد اما به عربی سوری، فلسطینی و مصری نزدیک است. در تلفظ واج «ج»، «ژ» خوانده می‌شود. به جای «ق»، حرف «ئ» و به جای «ث» نیز «ت» تلفظ می‌شود. برای مثال کلمه کثیر به معنای زیاد، کتیر. قلب به معنای دل، ئلب و جدید به معنای تازه، ژدید ادا می‌گردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقتصاد لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اقتصاد لبنان از چند جهت قابل بررسی است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===کشاورزی===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگرچه لبنان از لحاظ فعالیت‌های کشاورزی (از لحاظ فراهم بودن آب و حاصلخیزی خاک) دارای وضعیت مناسبی است ولی بخش کشاورزی بزرگی ندارد. بخش کشاورزی تنها با جذب ۱۲ درصد نیروی کار کم اهمیت‌ترین بخش اقتصادی لبنان است و تنها ۱۰ درصد از تولید ناخالص داخلی را شامل می‌شود که آن را در پایینترین رده در میان بخش‌های اقتصادی دیگر قرار می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===صنعت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کمبود مواد خام صنعتی و وابستگی محض به کشورهای عربی برای تهیه نفت باعث شده تا لبنان نتواند در فعالیتهای مهم صنعتی مشارکت داشته باشد. با این اوصاف صنعت لبنان محدود به مشاغل کوچکی همچون مونتاژ و بسته بندی مواد وارداتی شده‌است. در سال ۱۹۹۷ صنعت از لحاظ نیروی کار با جمعیت ۲۶ درصدی نیروی کار در رده دوم و همچنین رده دوم تولید ناخالص داخلی قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===خدمات و تجارت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جنگ داخلی ۹۰-۱۹۷۵ لبنان زیرساختهای اقتصادی لبنان را به شدت تخریب کرد، تولید داخلی را به نصف کاهش داد و موقعیت لبنان به عنوان مرکز ترانزیت کالا و بانکداری خاورمیانه را متزلزل کرد. صلح باعث شد تا دولت مرکزی بتواند کنترل را در بیروت به دست گیرد و مالیات جمع آوری کند و دسترسی به امکانات دولتی و مرزی یابد. سیستم بانکی مطلوب و کارخانجات کوچک و متوسط و پول خانواده‌ها و خدمات بانکی صادرات صنعتی و کشاورزی و کمک‌های بین‌المللی به عنوان منابع اصلی مبادلات خارجی به بهبودی اقتصادی کمک کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تا قبل از جنگ لبنان-اسرائیل در سال ۲۰۰۶ اقتصاد لبنان شاهد رشد چشگیری بود و دارایی‌های بانکی به بیش از ۷۰ میلیارد دلار می‌رسید. با این که بخش جهانگردی در سال ۲۰۰۵ ده درصد کاهش داشت بیش از ۲/۱ میلیون نفر جهانگرد از لبنان دیدن کردند. سرمایه گذاری در بازار به بالاترین حد خود رسیده بود که بیش از ۷ میلیون دلار در پایان ژانویه ۲۰۰۶ بود، شروع جنگ آگوست، ژوئن سال ۲۰۰۶ منجر به خسارتهای شدیدی به اقتصاد متزلزل لبنان مخصوصا بخش جهانگردی شد. بر اساس گزارش اولیه چاپ شده از سوی وزارت دارایی در ۳۰ اوت ۲۰۰۶ افت اقتصادی بزرگی در اثر جنگ تحمیل خواهد شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فرودگاه بین‌المللی بیروت مجدداً در سپتامبر ۲۰۰۶ گشایش یافت و تلاش برای بهبود اقتصاد لبنان چندان شتاب نگرفته‌است. حامیان اصلی بازسازی لبنان شامل عربستان سعودی (با کمک ۵/۱ میلیارد دلاری)، اتحادیه اروپا (با کمک ۱ میلیارد دلار) و بعضی کشورهای دیگر حوزه خلیج فارس با کمک‌های بیش از ۸۰۰ میلیون دلاری بوده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دین==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
برآوردی که مردم لبنان را از نظر دین بررسی می کند این گونه است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ۵۹٫۷٪ مسلمان، ۲۰٪ مسلمان اهل سنت/۳۴٪ مسلمان شیعه، ۳۶٪ مسیحی، ۱۹٪ مارونی/ ۶٪ ارتودکس یونانی/۸٪ [[دروز]]/۵٪ کاتولیک یونانی، &lt;br /&gt;
۱٫۳٪ پیروان ادیان دیگر&amp;lt;ref&amp;gt;[http://fa.wikishia.net/view/%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86#.D8.A7.D8.AF.DB.8C.D8.A7.D9.86_.D9.88_.D9.85.D8.B0.D8.A7.D9.87.D8.A8_.D8.AF.D8.B1_.D9.84.D8.A8.D9.86.D8.A7.D9.86 ویکی شیعه]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
* موسسه بین المللی پژوهشی CIRI آمریکا در یک پژوهش نشان داد که لبنان در صدر کشورهای است که محدودیت‌هایی را بر آزادی شهروندان در زمینه دینی، اعمال نمی کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==فرهنگ و هنر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
امروزه فرهنگ و هنر این ملت در آثار موسیقی آن ظاهر شده است که بر دیگر ملل عرب نیز تأثیر گذاشته است. خوانندگان مطرح جهان عرب اغلب از لبنان می‌باشند: اليسا، نوال الزغبی، هیفا وهبی، نانسی عجرم، وائل کفوری، راغب علامه.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای هزاران سال محل عبور تمدن‌های مختلف بوده‌است. پس جای تعجب نیست که این کشور کوچک دارای فرهنگی فوق العاده غنی و زنده باشد. وجود گونه‌های بسیار قومی و مذهبی به رسوم پربار موسیقی، آشپزی و جشنهای لبنان کمک بسیاری کرده‌است. مخصوصاً در بیروت دارای هنر غنی است و نمایش‌ها و نمایشگاه‌ها و شوهای مد و کنسرتهای زیادی در طول سال در نگارخانه‌ها، موزه‌ها، تئاترها و اماکن عمومی برگزار می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جامعه لبنان مدرن، تحصیلکرده و شاید قابل مقایسه با جوامع اروپایی مدیترانه‌ است. اکثر لبنانی‌ها دو زبانه هستند و عربی و فرانسه صحبت می‌کنند. به همین دلیل لبنان عضو سازمان بین‌المللی کشورهای فرانسوی زبان است. با این حال زبان انگلیسی مخصوصا بین دانشجویان لبنانی رایج شده‌است. این کشور نه تنها محل تلاقی مسیحیت با اسلام بلکه دروازه‌ای است که جهان عرب را به اروپا متصل می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان همچنین میزبان دانشگاه‌های معتبر مختلفی همچون دانشگاه لبنان، دانشگاه آمریکایی بیروت، دانشگاه سنت جوزف و دانشگاه آمریکایی لبنان است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فستیوالهای بین‌المللی مختلفی در لبنان برگزار می‌شوند که هنرمندان پرآوازه جهان و مردم بسیار از لبنان و کشورهای دیگر را به سوی خود جذب می‌کنند. مهم‌ترین آن‌ها فستیوالهای تابستانی در بعلبک، بیت الدین و بیبلوس است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نخستین ساکنان شناخته شده لبنان، کنعانی‌ها مردمی از نژاد سامی پوده‌اند که به احتمال زیاد با یونانیان داد و ستد داشته‌اند و یونانیان آنان را فنیقی می‌نامیده‌اند. فنیقی‌ها قومی دریانورد و بازرگان بودند و قلمرو آنان شامل دولت - شهرهایی مستقل در شرق مدیترانه و مهاجرنشین‌هایی در کرانه‌های مدیترانه بود. کوروش بزرگ، فنیقیه را گشود و به مدت دو سده، هخامنشیان فرمانروای این منطقه بوده‌اند. پس از آن، اسکندر مقدونی، شهر صور (پایتخت فنیقیه) را فتح نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دولت‌ها و امپراتوری‌های گوناگونی بر لبنان فرمان رانده‌اند، از جمله شاهنشاهان هخامنشی و ساسانی، یونانیان، امپراتوران روم و بیزانس، خلفای مسلمان، صلیبیان و خلفای عثمانی.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جنگ داخلی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ماه آوریل ۱۹۷۵ (میلادی) مردان مسلح به روی کلیسایی در شرق بیروت آتش گشودند تا پیر جمیل موسس حزب فالانژ لبنان را ترور کنند. البته او جان سالم به در برد ولی این سوءقصد باعث مجموعه‌ای از اقدامات متقابل شد که در نهایت به جنگ داخلی ۱۵ ساله در لبنان منجر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==سیاست==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کشور لبنان جمهوری است و سه مقام ارشد آن برای اعضای گروه‌های مذهبی خاص در نظر گرفته شده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رئیس جمهوری باید مسیحی مارونی باشد. نخست وزیر باید مسلمان سنی باشد. سخنگوی پارلمان می‌بایست مسلمان شیعه باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این ترتیب قسمتی از میثاق ملی (عربی: المیثاق الوطنی - al Mithaq al Watani) است که توافقی غیرکتبی است که در سال ۱۹۴۳ در ملاقاتی بین اولین رئیس جمهور لبنان (یک مارونیتی) و اولین نخست وزیر لبنان (یک سنی) حاصل شد، اگر چه این توافق در قانون اساسی لبنان تا سال ۱۹۹۰ به دنبال توافق طایف رسمی نشد. این میثاق شامل قول و قرار مسیحیان بود مبنی بر این که به دنبال جلب حمایت فرانسه نباشند و وجهه عربی لبنان را قبول داشته باشند و همچنین مسلمانان نیز قول دادند تا مشروعیت استقلال و دولت لبنان و همچنین مرزهای این کشور در سال ۱۹۲۰ را قبول داشته باشند و برای اتحاد با سوریه تلاش نکنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق تا زمان تشکیل هویت ملی لبنان موقت ولی لازم الاجرا بود. به دلیل احساس نیاز شدید مسلمانان به اتحاد به کشورهای همتایی عرب خود این میثاق راه حلی موقت به نظر می‌رسید. از سویی دیگر مسیحیان این میثاق را رد کردند و بعداً برای جلب حمایت فدرالیسم را پیشنهاد دادند و با اسرائیل متحد شدند. لبنان به موجودیت خود ادامه داده و اثرات سوء جنگ‌های داخلی همچنان بر سیاست لبنان سایه افکنده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق همچنین تصریح می‌کرد که کرسی‌های پارلمان به تمامی مذاهب تعلق گیرد یعنی با نسبت ۶ مسیحی به ۵ مسلمان که بر اساس آمارگیری سال ۱۹۳۲ بود که در آن زمان سیحیان مقداری بیشتر بودند. توافق طیف انی نسبت را مساوی کرد تا هر دو گروه مذهبی حق مساوی داشته باشند. حال مسلمانان مخصوصا با احتساب حضور فلسطینی‌ها بیشتر شده‌اند ولی اکثر گروه‌ها در لبنان با این حق تساوی راضی هستند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قانون اساسی لبنان به مردم این حق را می‌دهد تا دولت خود را عوض کنند. با این حال از اواسط دهه ۱۹۷۰ تا انتخابات پارلمانی ۱۹۹۲ جنگ داخلی لبنان از اجرای حقوق سیاسی ممانعت به عمل آورد. طبق قانون اساسی انتخابات مستقیم هر چهار سال یک بار باید برگزار شود. آخرین انتخابات پارلمانی بعد از ترور نخست وزیر حریری انجام شد و معادله قدرت با پیروزی مخالفان حضور سوریه در لبنان و تصاحب اکثر کرسی‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب پارلمان بر اساس هویت مذهبی و قومی و برخلاف مسائل ایدئولوژیکی شکل گرفته‌است. پیمان طیف با پایان دادن جنگ داخلی تقسیمات کرسی‌های پارلمان را تغییر داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پارلمان رئیس جمهور را برای یک دوره شش ساله انتخاب می‌کند. انتخاب مجدد یک رئیس جمهور برای دوره‌ای دیگر ممنوع است. این قانون برآده از قانون اساسی تا به حال دوبار با اصلاحیه‌های موقت از سوی دولت سوریه نادیده گرفته شده‌ است. دوره ریاست جمهوری الیاس حراوی که می‌بایست در سال ۱۹۹۵ تمام می‌شد برای سه سال دیگر تمدید شد. این اتفاق برای امیل لحود نیز افتاد و دوره اش تا سال ۲۰۰۷ تمدید شد. طرفداران دموکراسی این اعمال را محکوم کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آخرین انتخابات ریاست جمهوری در سال ۱۹۹۸ انجام شد. رئیس جمهور نخست وزیر را با پیشنهاد پارلمان انتصاب می‌کند. لبنان حزب‌های سیاسی زیادی دارد ولی آنها نقش مهمی در سیستم پارلمان ندارند. اکثر آنها منافع فرقه‌ای را در عمل نمایندگی می‌کنند. بسیاری از آنها لیستی موقت از نمایندگانی هستند که توسط شخصی معروف از کشور یا شهرشان حمایت می‌شوند. لیست نامزدهای انتخاباتی اغلب بر اساس حوزه انتخاباتی با مذاکر میان رهبران محلی طوایف، گروه‌های مذهبی و احزاب سیاسی شکل می‌گیرند. این ائتلاف‌های پراکنده تنها برای انتخابات شکل می‌گیرند و به ندرت گروهی منسجم در پارلمان را تشکیل می‌دهند. اخیرا پارلمان لبنان به سه گروه متحد تقسیم شده‌است. اتحاد ضد سوریه اتحاد ۱۴ مارس، اتحاد طرفدار سوریه‌ها متشکل از حزب ا... و حزب عمل است و حزب رئیس قبلی مارونیتها با نام میشل آون که اخیراً با حزب ا... متحد شده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سیستم قضایی لبنان بر اساس قانون ناپلئونی تدوین شده‌ است. هیئت منصفه در دادگاه‌های استفاده نمی‌شوند. سیستم دادگاهی لبنان از سه سطح تشکیل شده اتس، دادگاه بدوی، دادگاه استیناف و دادگاه نقض رای. همچنین دادگاه‌های مذهبی وجود دارند که در مسائل ضخصی در جوامع خود با قوانین مربوط به ازدواج، طلا و وراثت حق قضاوت دارند قانون لبنان شامل ازدواج عرضی نمی‌شود (اگر چه چنین ازدواج‌هایی را به مانند قراردادهایی می‌داند که در خارج از کشور صورت گرفته‌اند) تلاش‌های رئیس جمهوری قبلی الیاس حراوی برای قانونی کردن ازدواج عرضی در اواخر دهه ۱۹۹۰ با اعتراضات روحانیون مسلمان با مشکل مواجه شد. به علاوه لبنان دارای سیستمی از دادگاه‌های نظامی است که بر افراد برای جرایمی همچون جاسوسی، خیانت به وطن و دیگر جرایم که مربوط به امنیت هستند حق قضاوت دارد. این دادگاه‌های نظامی از سوی سازمان‌های حقوق بشر از جمله سازمان بین‌المللی عضو بین‌المللی مورد انتقاد قرار گرفته‌اند. &lt;br /&gt;
انتقال آنها یک بوده‌است که استانداردهای بین‌المللی قضاوت منصفانه در این دادگاه‌ها رعایت نمی‌شود و حق قضاوت بسیاری در مورد غیرنظامیان اعمال می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حزب‌الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان یک سازمان سیاسی-نظامی در لبنان است. گروه حزب الله در اوایل سال‌های ۱۹۸۰ و باالهام از ایدئولوژی اسلام سیاسی روح‌الله خمینی در لبنان ظهور کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در زمان جنگ داخلی لبنان، حزب‌الله لبنان به کمک سپاه پاسداران انقلاب اسلامی ایران، تعلیم نظامی داده شده و تحت حمایت مالی و سیاسی نظام جمهوری اسلامی ایران قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان ۳ هدف اصلی را به عنوان آرمان خود اعلام کرده که عبارتند از: محو آثار امپریالیستی غربی در لبنان، مجازات فالانژهای لبنان و برپایی حکومت اسلامی در لبنان. گروه حزب‌الله لبنان در لیست برخی کشورهای غربی به عنوان «گروهی تروریستی» قرار دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب الله لبنان پس از سالها جنگ چریکی موفق به آزاد کردن جنوب لبنان از اشغال اسرائیل در سال ۲۰۰۰ شد. این گروه پس از آن به فعالیت های سیاسی خود تحرک بیشتری داده و به کابینه و مجلس لبنان راه یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخچه حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هسته اولیه حزب الله و ساختار تشکیلاتی آن متشکل از اسلام گرایان، نیروهای حزب الدعوه به رهبری علامه سید محمدحسین فضل‌الله، شاخه دانشجویی حزب الدعوه، مسئولان جنبش امل، اعضای جنبش فتح به رهبری ابوجهاد (خلیل الوزیر) و تمام گروه هاو جریان‌هایی که از انقلاب اسلامی ایران و روح‌الله خمینی تاثیر گرفته بودند، شکل گرفت. سید عباس موسوی که در حمله هلی کوپترهای اسرائیلی به خودرو حامل وی و همسر و فرزندش در سال ۱۹۹۲ کشته شد، شیخ صبحی طفیلی شیخ راغب حرب، شیخ عبدالکریم عبید، سید حسین موسوی، سید حسن نصرالله، سید ابراهیم امین السید، شیخ حسین الکورانی، شیخ نعیم قاسم، شیخ محمد یزبک، حسین خلیل، محمد رعد و محمد فنیش از جمله افرادی بودند که از حزب الدعوه و جنبش امل وارد حزب الله شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سید حسن نصرالله، دبیرکل حزب‌الله لبنان در اولین سالگرد جنگ اسرائیل حزب‌الله لبنان در مصاحبه اختصاصی با صدا و سیمای جمهوری اسلامی اعلام کرد که در طول جنگ از «مولایش»، علی خامنه‌ای «رهنمود و راهنمایی» دریافت می‌کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==رابطه با ایران==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفته‌های محمدحسن اختری سفیر ایران در سوریه در سال‌های (۱۹۹۷-۱۹۹۴) و (۲۰۰۸-۲۰۰۵) ایران به حزب الله کمک‌های مالی و معنوی کرده‌است و سپاه پاسداران انقلاب اسلامی به آموزش نیروهای حزب الله می‌پرداخته‌است ولی اوهرگونه شرکت مستقیم ایران را در درگیرهای حزب الله رد می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جمهوری اسلامی ارتباط نزدیکی با جنبش حزب‌الله دارد و دولت و نهادهای حکومتی ایران، از جمله بنیاد شهید، حمایت‌های مالی قابل توجهی از این گروه و طرفداران و ساکنان مناطق تحت نفوذ آن به عمل می‌آورند. به گفته منابع نزدیک به حزب‌الله، ایران در بین سال‌های ۲۰۰۶ تا ۲۰۱۰، یک میلیارد دلار برای بازسازی بخش‌های جنگ‌زده لبنان هزینه کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* گزارش سرويس بين الملل باشگاه خبرنگاران، نگاهی به تاریخچه لبنان، در دسترس در [http://www.yjc.ir/fa/news/4115877/%D9%86%DA%AF%D8%A7%D9%87%D9%8A-%D8%A8%D9%87-%D8%AA%D8%A7%D8%B1%D9%8A%D8%AE%DA%86%D9%87-%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86-%D8%AA%D8%B5%D8%A7%D9%88%D9%8A%D8%B1 باشگاه خبرنگاران]، بازیابی: 15 آبان ماه 1392.&lt;br /&gt;
{{کشورهای اسلامی}}&lt;br /&gt;
[[رده:کشورهای اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86&amp;diff=58019</id>
		<title>لبنان</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86&amp;diff=58019"/>
		<updated>2016-04-08T09:06:28Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* دین */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{{الگو:منبع الکترونیکی معتبر|ماخذ=پایگاه}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان کشوری کوچک و کوهستانی در غرب آسیا و خاورمیانه و در کنار کرانه خاوری دریای مدیترانه است که پایتخت آن شهر بندری بیروت است. لبنان از شمال و شرق با کشور سوریه، از جنوب با کشور اسراییل و از غرب با دریای مدیترانه همسایه‌ است و جزیره قبرس نیز در نزدیکی سواحل این کشور قرار دارند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژه لبنان از واژه سامی «لبن» که اشاره به قله‌های سفید کوهستان‌های لبنان دارد، گرفته شده‌ است. تا قبل از جنگ داخلی ۱۹۹۰-۱۹۷۵ لبنان کشوری متمول در منطقه و پایتخت بانکداری جهان عرب محسوب می‌شد و تعداد زیادی توریست را جذب خود می‌کرد تا حدی که بیروت را به عنوان پاریس خاورمیانه می‌شناختند و همچنین به دلیل قدرت مالی بسیار لبنان را به عنوان سوئیس خاورمیانه می‌شناختند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از پایان جنگ تلاشهای بسیاری صورت گرفت تا اقتصاد را بهبود بخشند و زیرساختهای کور را از نو بسازند که نتایج مثبت آن در سالهای اخیر آشکار شده‌ است. تا قبل از ابتدای سال ۲۰۰۶، کشور به ثبات و بازسازی لبنان به پایان رسید و تعداد بسیاری توریست به گردشگاههای لبنان سرازیر شدند. اما با شروع جنگ اسرائیل لبنان در ۱۲ ژوئیه ۲۰۰۶ تعداد بسیاری نظامی و غیرنظامی صدمه دیدند و خسارات بسیاری به زیرساختهای کشور وارد شد و جمعیت گسترده‌ای بی خانمان شدند. از سپتامبر ۲۰۰۶ دولت لبنان برنامه رسیدگی به اموال مخروبه بیروت، طیر و دیگر دهات واقع در جنوب لبنان را شروع کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان زادگاه فینیقی‌ها بوده که مردمانی دریانورد بوده‌اند و قبل از ظهور اسکندر کبیر در مدیترانه پخش شده بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ستونهای یونانی در شهر تیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کارتهاج که رم را تهدید می‌کرد یک قبیله فینیقی بوده‌است. اسکندر تایر را سوزاند که شهر اصلی فینیقی‌ها بود و استقلال آنها را سلب کرد. این کشور جزیی از امپراتوری‌های بعدی به مانند امپراتوری ایران، رم، بیزانس، عرب، صلیبیان و عثمانی گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عهد عثمانی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای ۴۰۰ سال جزئی از امپراتوری عثمانی بود و به دنبال جنگ جهانی اول جزئی از قیمومیت فرانسه بر [[سوریه]] شد. در اول سپتامبر سال ۱۹۲۰ فرانسه کشور لبنان را به عنوان یکی از سرزمین‌های محصور سوریه تشکیل داد. لبنان سرزمینی عمدتاً مسیحی نشین بود (اغلب مارونیتی بودند) ولی دارای جمعیت‌های مسلمان و دروزی هم بود. در اول سپتامبر ۱۹۲۶ فرانسه جمهوری لبنان را تشکیل داد و به آن هویتی مستقل از سوریه اعطاء کرد ولی هنوز تحت قیمومیت فرانسه بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سوریه و لبنان هر دو در سال ۱۹۴۳ به دنبال اشغال فرانسه توسط آلمان اعلام استقلال کردند. ژنرال هنری دنتز کمیسر عالی ویچی برای استقلال هر دو کشور نقش عمده‌ای را ایفاء کرد. مقامات ویچی در سال ۱۹۴۱ به آلمان اجازه دادند تا هواپیماها و تدارکات خود را از طریق سوریه به عراق برساند تا از آن‌ها علیه نیروهای انگلیسی استفاده کند. بریتانیا از ترس این که آلمان‌های نازی کنترل کامل سوریه و لبنان را با فشار بر دولت ضعیف ویچی بدست گیرند ارتش خود را به سوریه و لبنان فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ در لبنان ژنرال چارلز دوگل از منطقه دیدن کرد و تصمیم گرفت علیرغم فشارهای سیاسی از داخل و خارج لبنان این کشور را مستقل اعلام کند. در ۲۶ سپتامبر ۱۹۴۱ ژنرال جرج کترولکس اعلام کرد که لبنان تحت نظر دولت فرانسه آزاد مستقل است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
انتخابات در سال ۱۹۴۳ برگزار شدند و در ۸ نوامبر ۱۹۴۳ دولت لبنان یک طرفه قیمومیت را باطل اعلام کرد. فرانسه با زندان فرستادن دولت جدید واکنش نشان داد ولی با فشارهای بین‌المللی مقامات دولتی را در ۲۲ نوامبر ۱۹۴۳ آزاد که دو استقلال لبنان را قبول کرد.&lt;br /&gt;
متفقین منطقه را تا پایان جنگ جهانی دوم تحت کنترل داشتند آخرین گروه‌های فرانسوی در سال ۱۹۴۶ عقب نشینی کردند. میثاق ملی غیرمکتوب ۱۹۴۳ تصریح کرد که رئیس جمهوری مسیحی و نخست وزیر مسلمان باشد. تاریخ لبنان از زمان استقلال شاهد ثبات سیاسی و همچنین آشوب و هرج و مرج (بمانند بحران نظامی در سال ۱۹۵۸) و شکوفائی به دلیل موقعیت بیروت به عنوان مرکز تجارت و سرمایه گذاری بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اما لبنان چندان مزه رفاه را بچشید چون وضعیت منطقه به هم ریخت. تاریخ سیاه لبنان با شروع جنگ اعراب و اسرائیل در سال ۱۹۴۸ شروع شد. جنگی که در آن لبنان از حمایت لجستیکی ارتش آزادی بخش اعراب وقتی برخوردار شد که از حمایت پایگاه‌های سوریه محروم ماند و سعی کرد تا علیه این کشور یهودی تازه تشکیل شده حمله کند. بلافاصله بعد از شکست ارتش آزادی بخش اعراب در نبرد ساسا لبنان آتش بس با اسرائیل را پذیرفت. مرز اسرائیل - لبنان بسته شد و تا زمان جنگ شش روزه ۱۹۶۷ در آرامش باقی ماند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مرحله بعدی تاریخ آلوده به جنگ لبنان با جنگ داخلی لبنان در سال ۱۹۷۵ شروع شد که ۱۵ سال طول کشید و اقتصاد این کشور را به کلی تخریب کرد، نیاز به ذکر تلفات جانی و مالی نیست (به طور تقریبی بیش از صد هزار نفر کشته و صد هزار نفر معلول شدند.) با پایان جنگ در سال ۱۹۹۰ و با امضاء توافقنامه طیف از لبنان که زمانی به عنوان سوئیس خاورمیانه شناخته می‌شد جزء ویرانی باقی نمانده بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی جنگ داخلی در سالهای ۱۹۷۸ و ۱۹۸۲ لبنان دوبار از سوی نیروهای دفاعی اسرائیل مورد حمله قرار گرفت و اشغال شد. اسرائیل تا سال۲۰۰۰ کنترل جنوب لبنان را در دست داشت ولی با تصمیم اسرائیلی‌ها که نخست وزیر اسرائیل اهود باراک حامی آن بود نیروهای اسرائیلی به دلیل حملات چریکی از سوی نظامیان حزب ا... و بر اساس این عقیده که فعالیت‌های حزب ا... با عدم حضور اسرائیل در لبنان متوقف خواهد شد از این منطقه عقب نشینی کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگر چه سازمان ملل عقب نشینی اسرائیل را به عنوان عقب نشینی کامل پشت خط آبی طبق قطعنامه ۴۲۵ شورای امنیت (که ۲۲ سال قبل صادر شده بود) اعلام کرد ولی حزب ا... ادعا کرد که اسرائیل هنوز مناطق کوچکی از لبنان را در اشغال خود دارد و عملیات خود علیه اسرائیل را متوقف نخواهد کرد تا زمانی که تمامی این مناطق و آنچه که از آن به عنوان «کل فلسطین اشغالی» یاد کردند را آزاد کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از پایان جنگ داخلی و تا به حال علیرغم تنش‌های بین حزب ا... و اسرائیل که هر چند سال یکبار اتفاق می‌افتد لبنان شاهد دوره‌ای صلح نسبی بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حوادث اخیر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رسانه‌های خارجی از اصطلاح «انقلاب سرو» استفاده می‌کنند ولی رسانه‌های لبنان از اصطلاح «انتفاضه استقلال» استفاده می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ترورها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حادثه‌ای که باعث اعتراضات زیادی شد در ۱۴ فوریه ۲۰۰۵ اتفاق افتاد، زمانی که لبنان با ترور نخست وزیر سابق رفیق حریری در یک بم گذاری ماشین شوکه شد. بعضی شخصیتهای خاص که بعداً رهبران مبارزین ۱۴ مارس شدند سوریه را متهم به این حمله کردند چون سنوریه حضوری گسترده در زمینه نظامی و اطلاعات در لبنان داشت و همچنین چون بین حریری و دمشق به خاطر اصلاحیه قانون اساسی که دوره ریاست جمهوری امیل لحود طرفدار سوریه را تمدید می‌کرد بحث و نزاعی عمومی در جریان بود، سوریه هر گونه دخالتی را رد می‌کند. بقیه که شامل نیروهای ۸ مارس می‌شوند سیا و موساد را متهم به ترور برای آشفته کردن اوضاع کشور کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس از سازمان ملل در مورد ترور حدس می‌زد که این عمل با چنان فراستی انجام شده که تنها با حمایت و منابع یک موسسه دولتی امکان پذیر بوده‌است. کلا همه قبول دارند که توطئه‌ای در این زمینه در کار بوده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بلافاصله بعد از ترور دادستانهای لبنانی برای دستگیری ۶ استرالیایی که در زمان انفجار به سیدنی پرواز کرده بدنه تضمین‌هایی دادند. مامورین امنیتی لبنان ادعا کردند که صندلی‌های استرالیایی‌ها در هواپیما نشانه‌هایی از وجود مواد منفجره داشته‌اند. پلیس فدرال استرالیا ۱۰ نفر را در سیدنی که با آن پرواز درسیده بدنه بازجویی کرد و ۳ نفر از آنان را بازجویی بدنی کرد و ثابت کرد که این ادعاها بی اساس هستند. ظرف ۴۸ ساعت پلیس فدرال استرالیا این افراد را که مورد درخواست مقامات لبنانی بودند از هر گونه جرمی تبرئه کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گزارش مهلیس استرالیایی‌ها را مظنون اصلی ماجرا می‌دانست ولی با بررسی مجدد تحقیقات پلیس استرالیا، گزارش مهلیس تحقیقات آنها و نتایجشان را قطعی اعلام کرد. &amp;quot;سرگشاده سرج برامیتز نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظر خود را بعداً عوض کرد و در آخرین گزارش خود اعلام کرد که نظریات دیگر می‌توانند مورد بررسی قرار گیرند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
متأسفانه تروری حریری شروعی برای قتلهای دیگر بود که باعث از دست رفتن بسیاری از اشخاص برجسته لبنان شد. در ۲ ژوئن ۲۰۰۵ روزنامه نگار نو تاریخ دان سمیر کثیر یکی از اعضای موسس حزب چپگرای دموکرات در یک بمب گذار ی ماشین کشته شد. کمتر از یک ماه بعد در ۲۱ ژوئن ۲۰۰۵ جرج هاوی دبیر کل سابق حزب کمونیست لبنان نیز در بیروت در یکی بمگذاری ماشین کشته شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۵ سپتامبر ۲۰۰۵ می‌چید یاک خبر گوی صدا و سیمای لبنان مورد تروری ناموفق قرار گرفت پای چپ خود را از دست داد و به بازوی چپش صدمات جدی وارد شد که منجر به قطع دست چپش شد. بعد از آن وی جایزه جهانی رسانه آزاد گیلر موکانویونسکو را در سال ۲۰۰۶ برد. سردبیر و مدیر عامل روزنامه النهار جبران توئنی در حومه بیروت در ۱۲ دسامبر در یک بمبگذاری ماشین به قتل رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تظاهرات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۲۸ فوریه سال ۲۰۰۵ با تظاهرات ۷۰ هزار نفر در میدان شهداء نخست وزیر عمر کرامی و کابینه وی استعفاء دادند. در پاسخ حزب ا... نیز تظاهرات بزرگی را در ۸ مارس در بیروت تدارک دید و اعلام حمایت از سوریه کرد و اسرائیل و آمریکا را متهم به دخالت در امور داخلی لبنان کرد. در ۱۴ مارس یکماه بعد از قتل حریری حدود ۵/۱ میلیون نفر در میدان شهداء لبنان تظاهرات کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تظاهرکنندگان خواستار افشای حقیقت در مورد قتل حریری و اعلام استقلال از سوریه بودند و تمایل خود را برای داشتن کشوری متحد، دموکراتیک و خودمختار و فارغ از تسلط سوریه اعلام کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چند هفته بعد از تظاهرات چندین بمب در مناطق مسیحی نشین بیروت منفجر شدند. اگر چه خسارات وارده جانی نبود ولی خطر سقوط لبنان به جنگ‌های فرقه‌ای را ثابت کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرانجام با فشار جوامع بین‌المللی سوریه ۱۵ هزار گروه نظامی قدرتمند خود را از لبنان خارج کرد. آخرین سرباز سوری در ۲۶ آوریل ۲۰۰۵ لبنان را ترک کرد. در ۲۷ آوریل ۲۰۰۵ لبنانی ها اولین روز استقلال خود از سوریه را اعلام کردند. نیروهای سازمان طل به رهبری بریگ کن محمود وی نجو سنگالی برای تایید عقب نیشینی نظامی مقرر قطعنامه ۱۵۵۹ شورای امنیت به لبنان فرستاده شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==انتخابات==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
طی اولین انتخابات پارلمانی که بعد از عقب نشینی سوریه از لبنان در می‌۲۰۰۵ برگزار شد گروه‌های ائتلافی ضد سوریه‌ای مسلمانان سنی و احزاب دروزی و مسیحی به رهبری سعد حریری پسر نخست وزیر مقتول اکثریت کرسی‌های پارلمان را تصاحب کردند. حزب آزاد میهن پرستان با لیست شهید رفیق حریری در این انتخابات متحد نشدند چون اعضای لیست فکر می‌کردند آنها هنوز هویت فرقه‌ای خو را حفظ رده‌اند. به همین این حزب اقلیت کرسی‌ها را بدست آورد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ترکیبات انتخاباتی به این دلیل جالب بود که ائتلاف ضد سوریه در بعضی مناطق با حزب ا... و دیگران با حزب امل متحد شدند. آنها نتوانستند دو سوم کرسی‌های مورد نیاز برای اخراج کردن امیل لحود رئیس جمهور انتخابی سوریه را کسب کنند که دلیل آن نمایش غیرمنتظره و قوی حزب آزاد میهن پرستی و مونت لبنان بود که متعلق به ژنرال بازنشسته ارتش میشل آون است. ژنرال آون به خاطر مخالفت با سوریه مشهور بود ولی در دهه گذشته با سیاست‌مداران طرفدار سوریه متحد شد یعنی سلیمان فریخیه و میشل مور اتحاد آنها شمال و منطقه متن از مونت لبنان را در بر گرفت. سعد حریری و ولید جمبلات با نیروهای دو حزب طرفدار سوریه، حزب ا... و عملل، برای کسب قدرت اکثریت در جنوب، بکا، بعبداعلی منطقه مونت لبنان متحد شدند. این اتحاد موقت بود. در ۶ فوریه ۲۰۰۶ حزب ا... پیمان خلع سلاح را با میشل آون رهبر حزب آزاد میهن پرستان امضاء کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از انتخابات حزب آتی حریری که اکنون قدرت سیاسی غالب محسوب می‌شد فواد سینیورا را که قبلاً وزیر دارایی بود را به عنوان نخست وزیر معرفی کرد. دولت پیشنهادی او از پارلمان رای اعتماد گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۸ ژوئیه سال ۲۰۰۵ لبنان دارای پارلمانی بود که اکثریت آن را مخالفان سوریه تشکیل می‌دادند. این پارلمان پیشنهاد آزادی سمیر گانجا را که ۱۱ سال در زندان انفرادی در یک سلول زیرزمینی و بدون هیچ دسترسی به اخبار سپری کرده بود تأیید کرد. روز بعد امیل لحود رئیس جمهور طرفدار سوریه نیز این پیشنهاد در تصویب کرد. ماههای بعدی ثابت کرد که دولت نمی‌تواند اصلاحات اقتصادی و سیاسی را که قول داده بود شروع کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==درگیری لبنان و اسرائیل در ۲۰۰۶==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ۱۲ جولای ۲۰۰۶ دستگیری ۲ سرباز اسرائیلی در عملیاتی مرزی و کشتار بیش از ۸ سرباز در آن عملیات توسط حزب ا... باعث شد تا نخست وزیر اسرائیل اهود اولمرت آن را &amp;quot;آغاز جنگ&amp;quot; بنامد. آن شب اسرائیل حملات گسترده علیه لبنان را با هدف نهایی حذف حزب ا... و باز پس گیری سربازان مجاز اعلام کرد. این عملیات سریعا تبدیل به «جنگ تمام عیار» شد چون اسرائیل بمباران منطاق بزرگ لبنان را ادامه داد و حزب ا... نیز هزاران راکت به سمت شمال اسرائیل فرستاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مناطقی از لبنان که در تاریخ 12 جولای تا 13 آگوست 2006 مورد حمله هوایی اسرائیل قرار گرفتند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دیپلماسی در نهایت منجر به صدور قطعنامه ۱۷۰۱ شورای امنیت شد که خواستار توقف سریع تخاصم و بازگشت بدون شرط دو سرباز گروگان گرفته بود و تهیه سلاح برای حزب ا... را برای هم ممنوع اعلام کرد. سه روز بعد در ۱۴ آگوست ۲۰۰۶ آتش بس موقت اجرا شد و هر دو طرف نفس راحتی کشیدند چون اسرائیل دست از بمباران برداشت و حزب ا... فرستادن موشک به شمال اسرائیل را متوقف کرد. اما اسرائیل محاصره هوایی و دریایی لبنان را ادامه داد تا از رسیدن سلاح به حزب ا... جلوگیری کند. در ۸ سپتامبر ۲۰۰۶ هر دو نوع محاصره رفع شدند. طی آتش بس و بعد از آن چندین مورد نقض آتش بس نیز به ثبت رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سطح تخریبی که به لبنان وارد شد از سوی فواد سینیورا نخست وزیر «غیر قابل تصور» توصیف شد. بسیاری از زیرساختهای لبنان تخریب شد که عمدتاً پلها و جاده‌ها بود و هزینه صدمات ۱۵ میلیارد دلار تخمین زده شد. حدود ۱۲۰۰ غیرنظامی لبنانی کشته و حدود ۴۰۰۰ نفر زخمی شدند. بیش از یک میلیون لبنانی بی خانمان شده و مجبور به فرار به سمت مناطق امن تر شدند. ۱۶۰ اسرائیل کشته و ۸۰۰ نفر زخمی شدند. از ۱۶۰ نفر کشته شده ۴۴ نفر غیرنظامی بودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در پاسخ به فشارهای بین‌المللی برای خلع سلاح حزب ا... حسن نصرا... رهبر این حزب «جشن پیروزی» در ۲۲ سپتامبر ۲۰۰۶ در جنوب لبنان برگزار کرد که صدها هزار نفر در آن شرکت کردند و حمایت خود از مقاومت مداوم را نشان دادند.  در این جشن نصرا... اعلام کرد که هیچ کس نخواهد توانست حزب ا... را خلع سلاح کند و متمم خورد که انتقام خصومتهای اسرائیلی را خواهد گرفت. او همچنین افزود که اگر لبنان قادر به دفاع از خود باشد با کمال میل حزب ا... را خلع سلاح خواهد کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ریشه‌شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نام لبنان (لوبنان در زبان عربی استاندارد لِبنان در گویش محلی) از ریشه سامی &amp;quot;LBN&amp;quot; گرفته شده که دارای معانی متعددی همچون «شیر» و «سفید» است که شاید اشاره به کوه‌های سر پوشیده از برف لبنان دارد. در زبان انگلیسی نام لبنان را با حروف معرف the به مانند سودان و اوکراین و گامبیا بکار می‌برند. اطلاق حرف معرفه the شاید به این خاطر باشد که وقتی نام این کشورها به وجود آید به جای ممالک مستقل تنها مناطقی جغرافیایی محسوب می‌شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تقسیماتِ اداریِ کشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنجا که مردم لبنان در ۶۰ سال گذشته به شهرنشینی روی آورده‌اند، بیشتر جمعیت این کشور در شهرها یه ویژه در پایتخت آن بیروت و اطراف آن سکنی گزیده‌اند. بیش از نیمی از لبنانی‌ها در بیروت زندگی می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان از شش استان (به عربی: ألمحافظة) تشکیل شده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
استان بیروت، استان جبل لبنان، استان شمالی لبنان، استان بقاع، استان نبطیه، استان جنوبی لبنان، استان بیروت. استان بیروت (به عربی: محافظة بیروت) تنها استان لبنان است که از یک شهرستان و یک شهر تشکیل شده است. مرکز آن شهر بیروت است. مساحت این استان ۱۹٫۸ کیلومتر مربع است و با وجود کوچک بودنش مهم‌ترین استان لبنان بشمار می‌رود. استان جبل لبنان یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیا==&lt;br /&gt;
مرکز این استان شهر بعبدا است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ساختار جمعیتی==&lt;br /&gt;
بیشتر جمعیت این استان را پیروان مسیحیت تشکیل می‌دهند. اقلیت بزرگی از مسلمانان و دروزها نیز در این استان ساکنند. استان شمالی لبنان استان شمالی لبنان یکی از استان‌های لبنان است که مرکز آن شهر تریپولی است. استان بقاع (به عربی: البقاع) یکی از استان‌های لبنان است که ۷۵۰٬۰۰۰ نفر جمعیت دارد. تاکستان‌های نزدیکی شهر زال در دره بقاع مرکزی و نَبَطیه یکی از استان‌های کشور لبنان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این استان در بخش‌های میانی و جنوبی لبنان قرار گرفته است. مرکز شهر نبطیه مساحت آن ۱۰۵۸ کیلومتر مربع و دارای ۱۲۹ شهر و روستا است. سطح استان از کوه و تپه پوشیده شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرهای اصلی آن عبارت‌اند از نبطیه، بنت جبیل و الخیام. شهرستان‌هااستان نبطیه به چهار شهرستان (قضاء) و ۱۱۵ بخش (بلدية) تقسیم شده است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرستان نبطیه: ۳۸ بخش، شهرستان حاصبیا: ۱۹ بخش، شهرستان مرجعیون: ۲۶ بخش، شهرستان بنت جُبیل: ۳۶ بخش، استان جنوبی لبنان&lt;br /&gt;
(به عربی: الجنوب) یکی از استان‌های لبنان است. این استان ۳۶۰٬۰۰۰ نفر جمعیت و ۲٬۰۰۰ کیلومتر مربع مساحت دارد. مرکز آن شهر صیدا است و پست‌ترین نقطه آن منطقه‌ای هم‌سطح دریا و بلندترین نقطه آن ۱٬۰۰۰ متر ارتفاع دارد. دژ دریایی صیدا&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حکومت لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در 1991 قانون اساسي اصلاح شد تا متضمن انتخاب مجمع ملي 108 نفره (متشكل از 54 نماينده‌ي منتخب مسلمانان و 54 نماينده‌ي منتخب مسيحيان) با رأي تمامي افراد بالغ شود. اين مجمع رئيس جمهوري (ماروني) را انتخاب و نيز نخست وزير (سني) را انتصاب و نخست وزير هم شوراي وزيران (شش مسيحي و پنج مسلمان) را انتصاب مي كند. احزاب عمده‌ سياسي عبارتند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* حزب الله (بنياد گراي اسلامي)&lt;br /&gt;
* حزب فالانژ (ماروني)&lt;br /&gt;
* حزب امل (طرفدار سوريه)&lt;br /&gt;
* حزب سوسياليست ترقي خواه (عمدتاً دروزي)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دفاع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
كل نيروهاي مسلح :‌ 10.800 (1991) به علاوه‌ي ورود 9.000 شبه نظامي، 30.000 سرباز سوري. «ارتش جنوب لبنان» كه اسرائيل پشتيبان آن است. 2500 سرباز دارد، چندين هزار چريك فلسطيني نيز حضور دارند. خدمت سربازي: ندارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جغرافیاي كشور لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان سرزمینی بلند و کوهستانی است که در کرانه شرقی دریای مدیترانه قرار دارد. کرانه‌های لبنان ۲۵۵ کیلومتر درازا دارد. رودخانه‌های مهم لبنان عبارت‌اند از: عاصی (ألعاصی) ولیطانی (أللیطانی) در دره سهل‌البقاع، و کلب (ألکلب). رشته‌کوه‌های لبنان عبارت‌اند از: رشته‌کوه‌های لبنان شرقی و رشته‌کوه‌های لبنان غربی که میان این دو رشته کوه، دره سهل‌البقاع قرار گرفته‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان به عنوان یک کشور خاورمیانه‌ای از غرب با دریای مدیترانه حدود ۲۲۵ مرز ساحلی دارد و از شمال و شرق با سوریه و از جنوب با اسرائیل هم مرز است. مرز لبنان با سوریه ۳۷۵ کیلومتر است در حالی که مرز لبنان با اسرائیل تنها ۷۹ کیلومتر است. لبنان یکی از کوچک‌ترین کشورهای دنیاست که مساحتی حدود ۱۰۴۵۲ کیلومتر مربع (۴۰۳۵ مایل مربع) دارد. بسیاری از مناطق آن کوهستانی است به جز مناطق ساحلی کم عرض و دره بقا که بخش مهمی از صنعت کشاورزی لبنان را تشکیل می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقلیم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سرزمین لبنان آب‌وهوای مدیترانه‌ای دارد، هوای سواحل در زمستان‌ها سرد و بارانی و در تابستان‌ها گرم و شرجی است. در نواحی بلندتر به ویژه کوهستان‌ها، زمستان‌ها با بارش برف همراه است و دمای هوا به زیر صفر می‌رسد. بخش‌های دیگر این کشور، تابستان‌های گرم و خشک دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مناطق ساحلی زمستانها کلاً سرد و بارانی و تابستانها گرم و مرطوب هستند. در مناطق مرتفع تر در طول زمستان دما به زیر صفر درجه می‌رسد. تابستان‌ها از سوی دیگر گرم و خشک هستند. اگر چه اکثر مناطق لبنان سالانه شاهد بارانهای بسیاری است (در مقایسه با مناطق خشک کنارش) ولی در مناطق خاصی در شمال شرق لبنان به دلیل وجود قله‌های مرتفع کوه‌های غرب که راه ابرهای بارانی به وجود آمده از مدیترانه را سد می‌کنند باران زیادی نمی‌بارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مردم==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مردم لبنان را گروه‌های نژادی و قومی گوناگونی تشکیل می‌دهند. عربها ۶۰٪، آسوریان و سریانیها ۳۶٪ و ارمنیها ۴٪، کردها و یهودیان ۱٪ جمعیت را تشکیل می‌دهند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جمعیت شناسی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
میانگین سنی مردم لبنان ۲۴٫۶ سال است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==زبان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زبان رسمی لبنان عربی است، اما هر یک از اقلیتهای نژادی به زبان خود سخن می‌گویند. زبان فرانسه نیز کاربرد دارد. لهجه لبنانی از شاخه عربی شامی است، در کاربرد و تلفظ کلمات با دیگر شاخه‌های زبان عربی تفاوت دارد اما به عربی سوری، فلسطینی و مصری نزدیک است. در تلفظ واج «ج»، «ژ» خوانده می‌شود. به جای «ق»، حرف «ئ» و به جای «ث» نیز «ت» تلفظ می‌شود. برای مثال کلمه کثیر به معنای زیاد، کتیر. قلب به معنای دل، ئلب و جدید به معنای تازه، ژدید ادا می‌گردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==اقتصاد لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اقتصاد لبنان از چند جهت قابل بررسی است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===کشاورزی===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگرچه لبنان از لحاظ فعالیت‌های کشاورزی (از لحاظ فراهم بودن آب و حاصلخیزی خاک) دارای وضعیت مناسبی است ولی بخش کشاورزی بزرگی ندارد. بخش کشاورزی تنها با جذب ۱۲ درصد نیروی کار کم اهمیت‌ترین بخش اقتصادی لبنان است و تنها ۱۰ درصد از تولید ناخالص داخلی را شامل می‌شود که آن را در پایینترین رده در میان بخش‌های اقتصادی دیگر قرار می‌دهد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===صنعت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کمبود مواد خام صنعتی و وابستگی محض به کشورهای عربی برای تهیه نفت باعث شده تا لبنان نتواند در فعالیتهای مهم صنعتی مشارکت داشته باشد. با این اوصاف صنعت لبنان محدود به مشاغل کوچکی همچون مونتاژ و بسته بندی مواد وارداتی شده‌است. در سال ۱۹۹۷ صنعت از لحاظ نیروی کار با جمعیت ۲۶ درصدی نیروی کار در رده دوم و همچنین رده دوم تولید ناخالص داخلی قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===خدمات و تجارت===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جنگ داخلی ۹۰-۱۹۷۵ لبنان زیرساختهای اقتصادی لبنان را به شدت تخریب کرد، تولید داخلی را به نصف کاهش داد و موقعیت لبنان به عنوان مرکز ترانزیت کالا و بانکداری خاورمیانه را متزلزل کرد. صلح باعث شد تا دولت مرکزی بتواند کنترل را در بیروت به دست گیرد و مالیات جمع آوری کند و دسترسی به امکانات دولتی و مرزی یابد. سیستم بانکی مطلوب و کارخانجات کوچک و متوسط و پول خانواده‌ها و خدمات بانکی صادرات صنعتی و کشاورزی و کمک‌های بین‌المللی به عنوان منابع اصلی مبادلات خارجی به بهبودی اقتصادی کمک کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تا قبل از جنگ لبنان-اسرائیل در سال ۲۰۰۶ اقتصاد لبنان شاهد رشد چشگیری بود و دارایی‌های بانکی به بیش از ۷۰ میلیارد دلار می‌رسید. با این که بخش جهانگردی در سال ۲۰۰۵ ده درصد کاهش داشت بیش از ۲/۱ میلیون نفر جهانگرد از لبنان دیدن کردند. سرمایه گذاری در بازار به بالاترین حد خود رسیده بود که بیش از ۷ میلیون دلار در پایان ژانویه ۲۰۰۶ بود، شروع جنگ آگوست، ژوئن سال ۲۰۰۶ منجر به خسارتهای شدیدی به اقتصاد متزلزل لبنان مخصوصا بخش جهانگردی شد. بر اساس گزارش اولیه چاپ شده از سوی وزارت دارایی در ۳۰ اوت ۲۰۰۶ افت اقتصادی بزرگی در اثر جنگ تحمیل خواهد شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فرودگاه بین‌المللی بیروت مجدداً در سپتامبر ۲۰۰۶ گشایش یافت و تلاش برای بهبود اقتصاد لبنان چندان شتاب نگرفته‌است. حامیان اصلی بازسازی لبنان شامل عربستان سعودی (با کمک ۵/۱ میلیارد دلاری)، اتحادیه اروپا (با کمک ۱ میلیارد دلار) و بعضی کشورهای دیگر حوزه خلیج فارس با کمک‌های بیش از ۸۰۰ میلیون دلاری بوده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==دین==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
برآوردی که مردم لبنان را از نظر دین بررسی می کند این گونه است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* ۵۹٫۷٪ مسلمان، ۲۰٪ مسلمان اهل سنت/۳۴٪ مسلمان شیعه، ۳۶٪ مسیحی، ۱۹٪ مارونی/ ۶٪ ارتودکس یونانی/۸٪ [[دروز]]/۵٪ کاتولیک یونانی، &lt;br /&gt;
۱٫۳٪ پیروان ادیان دیگر&amp;lt;ref&amp;gt;ویکی شیعه&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
* موسسه بین المللی پژوهشی CIRI آمریکا در یک پژوهش نشان داد که لبنان در صدر کشورهای است که محدودیت‌هایی را بر آزادی شهروندان در زمینه دینی، اعمال نمی کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==فرهنگ و هنر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
امروزه فرهنگ و هنر این ملت در آثار موسیقی آن ظاهر شده است که بر دیگر ملل عرب نیز تأثیر گذاشته است. خوانندگان مطرح جهان عرب اغلب از لبنان می‌باشند: اليسا، نوال الزغبی، هیفا وهبی، نانسی عجرم، وائل کفوری، راغب علامه.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان برای هزاران سال محل عبور تمدن‌های مختلف بوده‌است. پس جای تعجب نیست که این کشور کوچک دارای فرهنگی فوق العاده غنی و زنده باشد. وجود گونه‌های بسیار قومی و مذهبی به رسوم پربار موسیقی، آشپزی و جشنهای لبنان کمک بسیاری کرده‌است. مخصوصاً در بیروت دارای هنر غنی است و نمایش‌ها و نمایشگاه‌ها و شوهای مد و کنسرتهای زیادی در طول سال در نگارخانه‌ها، موزه‌ها، تئاترها و اماکن عمومی برگزار می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جامعه لبنان مدرن، تحصیلکرده و شاید قابل مقایسه با جوامع اروپایی مدیترانه‌ است. اکثر لبنانی‌ها دو زبانه هستند و عربی و فرانسه صحبت می‌کنند. به همین دلیل لبنان عضو سازمان بین‌المللی کشورهای فرانسوی زبان است. با این حال زبان انگلیسی مخصوصا بین دانشجویان لبنانی رایج شده‌است. این کشور نه تنها محل تلاقی مسیحیت با اسلام بلکه دروازه‌ای است که جهان عرب را به اروپا متصل می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لبنان همچنین میزبان دانشگاه‌های معتبر مختلفی همچون دانشگاه لبنان، دانشگاه آمریکایی بیروت، دانشگاه سنت جوزف و دانشگاه آمریکایی لبنان است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فستیوالهای بین‌المللی مختلفی در لبنان برگزار می‌شوند که هنرمندان پرآوازه جهان و مردم بسیار از لبنان و کشورهای دیگر را به سوی خود جذب می‌کنند. مهم‌ترین آن‌ها فستیوالهای تابستانی در بعلبک، بیت الدین و بیبلوس است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نخستین ساکنان شناخته شده لبنان، کنعانی‌ها مردمی از نژاد سامی پوده‌اند که به احتمال زیاد با یونانیان داد و ستد داشته‌اند و یونانیان آنان را فنیقی می‌نامیده‌اند. فنیقی‌ها قومی دریانورد و بازرگان بودند و قلمرو آنان شامل دولت - شهرهایی مستقل در شرق مدیترانه و مهاجرنشین‌هایی در کرانه‌های مدیترانه بود. کوروش بزرگ، فنیقیه را گشود و به مدت دو سده، هخامنشیان فرمانروای این منطقه بوده‌اند. پس از آن، اسکندر مقدونی، شهر صور (پایتخت فنیقیه) را فتح نمود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دولت‌ها و امپراتوری‌های گوناگونی بر لبنان فرمان رانده‌اند، از جمله شاهنشاهان هخامنشی و ساسانی، یونانیان، امپراتوران روم و بیزانس، خلفای مسلمان، صلیبیان و خلفای عثمانی.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==جنگ داخلی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ماه آوریل ۱۹۷۵ (میلادی) مردان مسلح به روی کلیسایی در شرق بیروت آتش گشودند تا پیر جمیل موسس حزب فالانژ لبنان را ترور کنند. البته او جان سالم به در برد ولی این سوءقصد باعث مجموعه‌ای از اقدامات متقابل شد که در نهایت به جنگ داخلی ۱۵ ساله در لبنان منجر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==سیاست==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
کشور لبنان جمهوری است و سه مقام ارشد آن برای اعضای گروه‌های مذهبی خاص در نظر گرفته شده‌اند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رئیس جمهوری باید مسیحی مارونی باشد. نخست وزیر باید مسلمان سنی باشد. سخنگوی پارلمان می‌بایست مسلمان شیعه باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این ترتیب قسمتی از میثاق ملی (عربی: المیثاق الوطنی - al Mithaq al Watani) است که توافقی غیرکتبی است که در سال ۱۹۴۳ در ملاقاتی بین اولین رئیس جمهور لبنان (یک مارونیتی) و اولین نخست وزیر لبنان (یک سنی) حاصل شد، اگر چه این توافق در قانون اساسی لبنان تا سال ۱۹۹۰ به دنبال توافق طایف رسمی نشد. این میثاق شامل قول و قرار مسیحیان بود مبنی بر این که به دنبال جلب حمایت فرانسه نباشند و وجهه عربی لبنان را قبول داشته باشند و همچنین مسلمانان نیز قول دادند تا مشروعیت استقلال و دولت لبنان و همچنین مرزهای این کشور در سال ۱۹۲۰ را قبول داشته باشند و برای اتحاد با سوریه تلاش نکنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق تا زمان تشکیل هویت ملی لبنان موقت ولی لازم الاجرا بود. به دلیل احساس نیاز شدید مسلمانان به اتحاد به کشورهای همتایی عرب خود این میثاق راه حلی موقت به نظر می‌رسید. از سویی دیگر مسیحیان این میثاق را رد کردند و بعداً برای جلب حمایت فدرالیسم را پیشنهاد دادند و با اسرائیل متحد شدند. لبنان به موجودیت خود ادامه داده و اثرات سوء جنگ‌های داخلی همچنان بر سیاست لبنان سایه افکنده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این میثاق همچنین تصریح می‌کرد که کرسی‌های پارلمان به تمامی مذاهب تعلق گیرد یعنی با نسبت ۶ مسیحی به ۵ مسلمان که بر اساس آمارگیری سال ۱۹۳۲ بود که در آن زمان سیحیان مقداری بیشتر بودند. توافق طیف انی نسبت را مساوی کرد تا هر دو گروه مذهبی حق مساوی داشته باشند. حال مسلمانان مخصوصا با احتساب حضور فلسطینی‌ها بیشتر شده‌اند ولی اکثر گروه‌ها در لبنان با این حق تساوی راضی هستند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قانون اساسی لبنان به مردم این حق را می‌دهد تا دولت خود را عوض کنند. با این حال از اواسط دهه ۱۹۷۰ تا انتخابات پارلمانی ۱۹۹۲ جنگ داخلی لبنان از اجرای حقوق سیاسی ممانعت به عمل آورد. طبق قانون اساسی انتخابات مستقیم هر چهار سال یک بار باید برگزار شود. آخرین انتخابات پارلمانی بعد از ترور نخست وزیر حریری انجام شد و معادله قدرت با پیروزی مخالفان حضور سوریه در لبنان و تصاحب اکثر کرسی‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب‌های پارلمان توسط آنها شاهد تغییرات بسیاری بود. ترکیب پارلمان بر اساس هویت مذهبی و قومی و برخلاف مسائل ایدئولوژیکی شکل گرفته‌است. پیمان طیف با پایان دادن جنگ داخلی تقسیمات کرسی‌های پارلمان را تغییر داد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پارلمان رئیس جمهور را برای یک دوره شش ساله انتخاب می‌کند. انتخاب مجدد یک رئیس جمهور برای دوره‌ای دیگر ممنوع است. این قانون برآده از قانون اساسی تا به حال دوبار با اصلاحیه‌های موقت از سوی دولت سوریه نادیده گرفته شده‌ است. دوره ریاست جمهوری الیاس حراوی که می‌بایست در سال ۱۹۹۵ تمام می‌شد برای سه سال دیگر تمدید شد. این اتفاق برای امیل لحود نیز افتاد و دوره اش تا سال ۲۰۰۷ تمدید شد. طرفداران دموکراسی این اعمال را محکوم کردند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پارلمان لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آخرین انتخابات ریاست جمهوری در سال ۱۹۹۸ انجام شد. رئیس جمهور نخست وزیر را با پیشنهاد پارلمان انتصاب می‌کند. لبنان حزب‌های سیاسی زیادی دارد ولی آنها نقش مهمی در سیستم پارلمان ندارند. اکثر آنها منافع فرقه‌ای را در عمل نمایندگی می‌کنند. بسیاری از آنها لیستی موقت از نمایندگانی هستند که توسط شخصی معروف از کشور یا شهرشان حمایت می‌شوند. لیست نامزدهای انتخاباتی اغلب بر اساس حوزه انتخاباتی با مذاکر میان رهبران محلی طوایف، گروه‌های مذهبی و احزاب سیاسی شکل می‌گیرند. این ائتلاف‌های پراکنده تنها برای انتخابات شکل می‌گیرند و به ندرت گروهی منسجم در پارلمان را تشکیل می‌دهند. اخیرا پارلمان لبنان به سه گروه متحد تقسیم شده‌است. اتحاد ضد سوریه اتحاد ۱۴ مارس، اتحاد طرفدار سوریه‌ها متشکل از حزب ا... و حزب عمل است و حزب رئیس قبلی مارونیتها با نام میشل آون که اخیراً با حزب ا... متحد شده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سیستم قضایی لبنان بر اساس قانون ناپلئونی تدوین شده‌ است. هیئت منصفه در دادگاه‌های استفاده نمی‌شوند. سیستم دادگاهی لبنان از سه سطح تشکیل شده اتس، دادگاه بدوی، دادگاه استیناف و دادگاه نقض رای. همچنین دادگاه‌های مذهبی وجود دارند که در مسائل ضخصی در جوامع خود با قوانین مربوط به ازدواج، طلا و وراثت حق قضاوت دارند قانون لبنان شامل ازدواج عرضی نمی‌شود (اگر چه چنین ازدواج‌هایی را به مانند قراردادهایی می‌داند که در خارج از کشور صورت گرفته‌اند) تلاش‌های رئیس جمهوری قبلی الیاس حراوی برای قانونی کردن ازدواج عرضی در اواخر دهه ۱۹۹۰ با اعتراضات روحانیون مسلمان با مشکل مواجه شد. به علاوه لبنان دارای سیستمی از دادگاه‌های نظامی است که بر افراد برای جرایمی همچون جاسوسی، خیانت به وطن و دیگر جرایم که مربوط به امنیت هستند حق قضاوت دارد. این دادگاه‌های نظامی از سوی سازمان‌های حقوق بشر از جمله سازمان بین‌المللی عضو بین‌المللی مورد انتقاد قرار گرفته‌اند. &lt;br /&gt;
انتقال آنها یک بوده‌است که استانداردهای بین‌المللی قضاوت منصفانه در این دادگاه‌ها رعایت نمی‌شود و حق قضاوت بسیاری در مورد غیرنظامیان اعمال می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==حزب‌الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان یک سازمان سیاسی-نظامی در لبنان است. گروه حزب الله در اوایل سال‌های ۱۹۸۰ و باالهام از ایدئولوژی اسلام سیاسی روح‌الله خمینی در لبنان ظهور کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پرچم حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در زمان جنگ داخلی لبنان، حزب‌الله لبنان به کمک سپاه پاسداران انقلاب اسلامی ایران، تعلیم نظامی داده شده و تحت حمایت مالی و سیاسی نظام جمهوری اسلامی ایران قرار گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب‌الله لبنان ۳ هدف اصلی را به عنوان آرمان خود اعلام کرده که عبارتند از: محو آثار امپریالیستی غربی در لبنان، مجازات فالانژهای لبنان و برپایی حکومت اسلامی در لبنان. گروه حزب‌الله لبنان در لیست برخی کشورهای غربی به عنوان «گروهی تروریستی» قرار دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حزب الله لبنان پس از سالها جنگ چریکی موفق به آزاد کردن جنوب لبنان از اشغال اسرائیل در سال ۲۰۰۰ شد. این گروه پس از آن به فعالیت های سیاسی خود تحرک بیشتری داده و به کابینه و مجلس لبنان راه یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تاریخچه حزب الله لبنان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هسته اولیه حزب الله و ساختار تشکیلاتی آن متشکل از اسلام گرایان، نیروهای حزب الدعوه به رهبری علامه سید محمدحسین فضل‌الله، شاخه دانشجویی حزب الدعوه، مسئولان جنبش امل، اعضای جنبش فتح به رهبری ابوجهاد (خلیل الوزیر) و تمام گروه هاو جریان‌هایی که از انقلاب اسلامی ایران و روح‌الله خمینی تاثیر گرفته بودند، شکل گرفت. سید عباس موسوی که در حمله هلی کوپترهای اسرائیلی به خودرو حامل وی و همسر و فرزندش در سال ۱۹۹۲ کشته شد، شیخ صبحی طفیلی شیخ راغب حرب، شیخ عبدالکریم عبید، سید حسین موسوی، سید حسن نصرالله، سید ابراهیم امین السید، شیخ حسین الکورانی، شیخ نعیم قاسم، شیخ محمد یزبک، حسین خلیل، محمد رعد و محمد فنیش از جمله افرادی بودند که از حزب الدعوه و جنبش امل وارد حزب الله شدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سید حسن نصرالله، دبیرکل حزب‌الله لبنان در اولین سالگرد جنگ اسرائیل حزب‌الله لبنان در مصاحبه اختصاصی با صدا و سیمای جمهوری اسلامی اعلام کرد که در طول جنگ از «مولایش»، علی خامنه‌ای «رهنمود و راهنمایی» دریافت می‌کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==رابطه با ایران==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفته‌های محمدحسن اختری سفیر ایران در سوریه در سال‌های (۱۹۹۷-۱۹۹۴) و (۲۰۰۸-۲۰۰۵) ایران به حزب الله کمک‌های مالی و معنوی کرده‌است و سپاه پاسداران انقلاب اسلامی به آموزش نیروهای حزب الله می‌پرداخته‌است ولی اوهرگونه شرکت مستقیم ایران را در درگیرهای حزب الله رد می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
جمهوری اسلامی ارتباط نزدیکی با جنبش حزب‌الله دارد و دولت و نهادهای حکومتی ایران، از جمله بنیاد شهید، حمایت‌های مالی قابل توجهی از این گروه و طرفداران و ساکنان مناطق تحت نفوذ آن به عمل می‌آورند. به گفته منابع نزدیک به حزب‌الله، ایران در بین سال‌های ۲۰۰۶ تا ۲۰۱۰، یک میلیارد دلار برای بازسازی بخش‌های جنگ‌زده لبنان هزینه کرده‌ است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* گزارش سرويس بين الملل باشگاه خبرنگاران، نگاهی به تاریخچه لبنان، در دسترس در [http://www.yjc.ir/fa/news/4115877/%D9%86%DA%AF%D8%A7%D9%87%D9%8A-%D8%A8%D9%87-%D8%AA%D8%A7%D8%B1%D9%8A%D8%AE%DA%86%D9%87-%D9%84%D8%A8%D9%86%D8%A7%D9%86-%D8%AA%D8%B5%D8%A7%D9%88%D9%8A%D8%B1 باشگاه خبرنگاران]، بازیابی: 15 آبان ماه 1392.&lt;br /&gt;
{{کشورهای اسلامی}}&lt;br /&gt;
[[رده:کشورهای اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AE%D8%B1%D9%85%D8%B4%D9%87%D8%B1&amp;diff=54252</id>
		<title>خرمشهر</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AE%D8%B1%D9%85%D8%B4%D9%87%D8%B1&amp;diff=54252"/>
		<updated>2015-12-31T17:49:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: شروع مطلب+صفحه جدید&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;خرمشهر که خونین شهر هم لقب گرفته بود در ۱۳ آبان ۱۳۵۹ بعد از ۳۴ روز مقاومت جانانه سقوط کرد و بحمدلله در ۳ خرداد ۱۳۶۱ در عملیات بیت المقدس آزاد شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تاریخچه مختصر شهر خرمشهر  ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 قدمت تاریخی شهر خرمشهر به 2173 سال پیش یعنی بسال 163 قبل از میلاد برمیگردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خرمشهر اولین و برزگترین بندر ایران و [[خاور میانه]] قبل از وقوع جنگ تحمیلی عراق علیه ایران (بتاریخ 31/6/1359) بوده و هم اکنون دومین بندر حمل کانتینری بعد از بندر شهید رجائی با  13 اسکله حمل و تخلیه بار میباشد.این شهر بخاطر داشتن رونق اقتصادی عظیم  250 هزار نفر جمعیت داشته ولی هم اکنون جمعیت آن با احتساب بخشها و دهستانهای تابعه به 163هزار نفر کاهش یافته است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اهمیت اقتصادی و موقعیت استراتژیکی این شهر و وجود ذخائر عظیم نفتی و داشتن دو رودخانه آب شیرین و دسترسی  به خلیج فارس از طریق رودخانه اروندرود باعث شده است که همیشه این عروس جنوبی ایران  مورد چشم داشت و حسادت دشمنان و استعمارگران قرار گیرد.قبل از وقوع جنگ مذکور خرمشهر بزرگترین صادر کننده انواع خرما به جهان نیز بوده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اولین نامی که برای این شهر در تاریخ ثبت شده است چاراکس(charax) که مقارن با فتح این شهر توسط اسکندر  امپراطور روم بدست سردار لشکرش چاراکس بنام وی نامگذاری شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سپس قبل از ظهور اسلام به بارما تغییر نام یافت و پس از ظهور [[اسلام]] و از قرن یکم  تا  قرن 12 هجری قمری بیان نام داشت  سپس  درسال 1342 به خرمشهر تغییر نام یافت .&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خرمشهر در تاریخ 10/8/1359 به اشغال نیروهای بعثی عراق در آمد و بخاطر مقاومت 40 روزه  و قهرمانانه مردم بی سلاح و بی دفاع این شهر در برابر ارتش مجهز عراق '''خونین شهر''' نامگذاری شد و در  تاریخ 3/3/1361 در عملیاتی بی نظیر بنام عملیات بیت المقدس آزاد شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از مهم‌ترین آثار تاریخی این شهر میتوان به کانال (شط) عضدی که در عهد عضد الدوله دیلمی ما بین سال 936 الی 983 میلادی(مصادف با 324-372 هجری قمری) برای ارتباط رودخانه کارون به اروندرود و کوتاه نمودن مسیر اهواز - بصره احداث گردیده اشاره نمود . حفاری این کانال که 4600 متر طول و 200 متر عرض دارد 47 سال طول کشید و شهر خرمشهر را به 2 قسمت جنوبی و شمالی تقسیم میکند.(تصویر بالا)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خرمشهر که چندین بار توسط جذر و مد آب (بالا آمدن آب رودخانه) تخریب گردید مجددا در سال 1768 میلادی قسمت جنوبی آن و در سال 1812 میلادی قسمت شمالی آن بنا شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 از دیگر جنگ‌های مهمی که در این شهر رخ داده است میتوان به  جنگ [[سید موسی مبرقع]] علیه خلیفه عباسی در قرن 4 هجری - جنگ محدود در سال  1827و1831 میلادی بین ایران و عراق در زمان امپراتوری عثمانی و ولایت داودپاشا در بغداد - اشغال کامل خرمشهر و [[آبادان]]  توسط نیروهای عراقی در سال 1837 میلادی در زمان امپراطوری عثمانی و سپس عودت مالکیت خرمشهر و آبادان به ایران طبق معاهده ارضروم و دفع خسارت جنگ به دولت ایران  بمبلغ 300000 تومان آنزمان - اشغال توسط نیروهای انگلیسی در سال 1942 میلادی در جنگ جهانی دوم و احداث راه اهن خرمشهر - تهران - باکو برای ارسال نیرو و شکست نیروهای آلمانی در روسیه&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مشخصات جغرافیائی ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
موقعیت : منتهي اليه جنوب غربي كشور  ايران و در استان خوزستان حاشيه [[خليج فارس]] بين دو رودخانه كارون و اروند رود (30 درجه شمالی و 48 درجه شرقی)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مساحت (کلیومترمربع): 67.5      حریم قانونی : 32.7      محدوده قانونی : 22.8&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 فاصله تا پايتخت : 1100 كيلومتر       فاصله تا مركز استان([[اهواز]]) : 125 كيلومتر&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== جمعیت ==&lt;br /&gt;
 طبق آخرین سرشماری نفوس و مسکن سال 1390&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 	        جمعیت 	مرد 	زن 	خانوار&lt;br /&gt;
 خرمشهر 	163701 	80875 	82826 	42187&lt;br /&gt;
 نقاط شهري 	130707 	64445 	66262 	33957&lt;br /&gt;
 نقاط روستايي 	32994 	16430 	16564 	8230&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
 &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== اهم فعاليت‌هاي اقتصادي ==&lt;br /&gt;
1- كشاورزي علي الخصوص كاشت درخت خرما و سيفيجات&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2-امور بندري و گمرگي و ترانزيت كالا&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
3-منطقه ويژه اقتصادي بندر خرمشهر و شهرك صنعتي&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
4-مجاورت با منطقه آزاد اروند محدوده ضلع جنوبي شهر خرمشهر &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
5- اتصال به  راه آهن سراسری کشور&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
6-مجاورت با فرودگاه بین المللی آبادان&lt;br /&gt;
&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.khorramshahr.ir/index.aspx?fkeyid=&amp;amp;siteid=1&amp;amp;pageid=175 سایت شهرداری خرمشهر- ۱۰دی ۱۳۹۴- ساعت ۲۱:۱۴]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== منابع ==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شهرهای ایران]][[رده:دفاع مقدس]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D9%87%D8%AF%DB%8C_%D8%AE%D8%AF%D8%A7%DB%8C%DB%8C&amp;diff=54251</id>
		<title>بحث کاربر:سید مهدی خدایی</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D9%87%D8%AF%DB%8C_%D8%AE%D8%AF%D8%A7%DB%8C%DB%8C&amp;diff=54251"/>
		<updated>2015-12-31T17:41:30Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* در مورد مقاله خرمشهر */ بخش جدید&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==تشکر==&lt;br /&gt;
بدین وسیله از زحمات شما در این سال در جهت افزودن به غنای دانشنامه اسلامی و بهبود محتوای قدردانی می گردد. امید است سال آینده نیز این دانشنامه همچنان از قلم و حسن عنایت شما بهره مند باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنچه امسال بدان رسیدیم:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*رتبه دانشنامه در بین سایتهای ایرانی: 1500&lt;br /&gt;
*دانشنامه از کمتر 1000 بازدید روزانه در ابتدای سال به میانگین بازدید 3000 در یک روز رسیده است.&lt;br /&gt;
*این دانشنامه در حال حاضر در بسیاری از واژه ها  جزء 10 نتیجه اول گوگل هستند: نمونه ها : دانشنامه اسلام، پیامبر اسلام، امام علی علیه السلام، امام باقر علیه السلام، امام صادق علیه السلام، امام حسن عسکری علیه السلام ، ایمان، منابع اجتهاد شیعه‌، پراکندگی شیعه در جهان، فرقه های شیعه، مکه، مدینه، کوفه، نجف، علامه طباطبائی، جنگ های صدر اسلام، وقایع تقویم تاریخ اسلام، بحارالانوار، فهرست سوره های قرآن،  قصه‌ های قرآنی، فرهنگ و تمدن اسلام&lt;br /&gt;
*برخی دیگر از آمارهای دانشنامه را می توانید از [[ویژه:آمار|اینجا]] ببینید&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سال خوبی داشته باشید &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آرزوی توفیق روز افزون در نشر معارف اسلامی برای شما--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۸ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۲۰ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تشکر ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
از اینکه صفحاتی را در دستور کار قرار دادید که مورد نیاز هستند و بیشترین استفاده در دیگر صفحات را دارند کمال تشکر را دارم.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ‌۱۵ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۱:۵۹ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مقاله علوم قرآنی==&lt;br /&gt;
سلام و خدا قوت!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
دوست گرامی مقاله علوم قرآنی با نوشتن مباحث علوم قرآنی توسط شما کامل تر و خواندنی تر شده است. اما مطابق با قوانی دانشنامه شما باید منبع یا منابع خود را بنویسید در غیر این صورت مطالب حذف خواهند شد. پس هر چه زودتر این کار را انجام دهید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۹ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۰:۱۳ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==صفحه پیش نویس الگوی قرآن شناسی==&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از آنجا که شما ویرایش های خوبی در بخش قران داشته اید . دوست داریم از نظرات شما هم در این صفحه بهره مند شویم: [[پیش نویس الگوی قرآن شناسی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله تبریز در نهضت تنباکو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با عرض سلام و احترام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
موارد اصلاحی مورد نظرتان را اعلام و  راهنمایی فرمایید تا بنده تغییر بدهم. [[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۲۲ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۷:۲۰ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله تبریز در نهضت تنباکو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با عرض سلام و احترام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بار دیگر صفحه را ایجاد کرده ام و عناوین فرعی را اضافه کرده ام. خواهشمند است راهنمایی فرمایید.[[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۲۳ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۷:۰۰ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله تبریز در نهضت تنباکو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با عرض سلام و احترام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی&lt;br /&gt;
مقاله را تغییر داده ام . لطفا راهنمایی فرمایید . با تشکر [[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۲۴ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۷:۴۷ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله تبریز در نهضت تنباکو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با عرض سلام و احترام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
قسمت : &amp;quot;واقعه ی نهضت تنباکو یکی از رویداد های مهم و نقطه ی تحوّلی در تاریخ کشور ماست، زیرا نخستین خیزش ملّت ایران، علیه استعمار غرب می باشد&amp;quot;. را  از مقدمه ی کتاب تبریز در نهضت تنباکو, اضافه کرده ام و قسمت : &amp;quot;مؤلف در این کتاب نقش تبریز و اندیشه های نهضت تنباکو به رهبری میرزای شیرازی را بررسی کرده است. و به تبیین ابعاد تاریخی _ اجتماعی ِ این نهضت مهم شیعی پرداخته است. و مسأله ی استعمار و استبداد ِ دشمنان ایران اسلامی را بررسی کرده است.&amp;quot;  را خودم نوشته و اضافه کرده ام . با تشکر راهنمایی فرمایید [[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۲۵ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۲۱:۲۷ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله تبریز در نهضت تنباکو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با عرض سلام و احترام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نقل قول ها را در قسمت پانویس , اضافه کرده ام. راهنمایی فرمایید . با تشکر [[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۸:۳۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== در مورد مقاله خرمشهر ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از ویکی پدیا میارم می گن معتبر نیست نیار شروع می کنم اشکال می گیرید. بسیار صفحات بوده که در ویکیپدیا با یک یا چند خط شروع کردم و الان مطالب بسیاری داره- خواهش می کنم شما جدی بگیرید و مشارکت کنید--- خیلی دیروز سر مطالب دیگر وقتم گرفته شده بود امروز میخواستم کاملش کنم که پیامتون رو دیدم-مشارکتی هست نه این که یه مقاله کامل بنویسم-حجت‌اله (بحث) ‌۳۱ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۲۱:۰۸ (IRST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=54250</id>
		<title>بحث کاربر:Goodosuser</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=54250"/>
		<updated>2015-12-31T17:38:57Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* در مورد مقاله خرمشهر */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==خوش‌آمدید!==&lt;br /&gt;
{{پیام خوش آمد}}--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از مشارکتهای خوبتان . مشخص است قواعد کار در ویکی را می دانید و کاربر مبتدی نیستید. امیداورم مشارکت شما با این دانشنامه پایدار باشد. به امید آنکه با کمک عزیزانی همچون شما این سایت به مرور رونق بگیرد و به فضایی برای مشارکت افراد توانمند در این زمینه مبدل شود .&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لطفا برای همه مقالات خود حتما منبع را ذکر کنید و در صورتی که به سایتی ارجاع می دهید به سایت مربوطه لینک دهید. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
موفق باشید --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۴۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ابراز خشنودی از بازگشتتان ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! پس از بیش از یك هفته غیبتتان در ویرایش‌های دانش‌نامه اسلامی، اكنون از بازگشت دوباره تان خوشنودم. با توجه به نسبتاً نوپا بودن این دانش‌نامه، امیدوارم كمتر شاهد این غیبت‌های كاربری تأثیرگذاری چون شما باشم.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۱۱ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۴:۲۵ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
بدین وسیله از زحمات شما در این سال در جهت افزودن به غنای دانشنامه اسلامی و بهبود محتوای قدردانی می گردد. امید است سال آینده نیز این دانشنامه همچنان از قلم و حسن عنایت شما بهره مند باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنچه امسال بدان رسیدیم:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*رتبه دانشنامه در بین سایتهای ایرانی: 1500&lt;br /&gt;
*دانشنامه از کمتر 1000 بازدید روزانه در ابتدای سال به میانگین بازدید 3000 در یک روز رسیده است.&lt;br /&gt;
*این دانشنامه در حال حاضر در بسیاری از واژه ها  جزء 10 نتیجه اول گوگل هستند: نمونه ها : دانشنامه اسلام، پیامبر اسلام، امام علی علیه السلام، امام باقر علیه السلام، امام صادق علیه السلام، امام حسن عسکری علیه السلام ، ایمان، منابع اجتهاد شیعه‌، پراکندگی شیعه در جهان، فرقه های شیعه، مکه، مدینه، کوفه، نجف، علامه طباطبائی، جنگ های صدر اسلام، وقایع تقویم تاریخ اسلام، بحارالانوار، فهرست سوره های قرآن،  قصه‌ های قرآنی، فرهنگ و تمدن اسلام&lt;br /&gt;
*برخی دیگر از آمارهای دانشنامه را می توانید از [[ویژه:آمار|اینجا]] ببینید&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سال خوبی داشته باشید &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آرزوی توفیق روز افزون در نشر معارف اسلامی برای شما--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۸ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنده هم متشکرم و آرزوی داشتن سال خوبی برای شما و سایر خدمتگزاران اهل بیت را دارم.&lt;br /&gt;
اگر تمرکز بر روی صفحاتی که بیشترین پیوند را داشته ملاک قرار بگیرد([[صفحه‌های مورد نیاز]]) بهتر پیش خواهیم رفت و چنانچه این موضوع در نظر گرفته نشود ممکن است کم تر از وقت بگذارم.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چنانچه منظور آمار الکسا باشد صرفا سایت‌های ایرانی ملاک نبوده سایتی هایی که در ایران بالاترین رتب مشاهده داشته باشند منظور است.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۲۲ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۱۱ (IRDT)&lt;br /&gt;
==صفحات نو==&lt;br /&gt;
سلام و خدا قوت&lt;br /&gt;
لطفا به هنگام ایجاد صفحات نو یک ویرایش حداقلی هم انجام بدهید که خوب دیده بشود. متوجه هستم که می خواهید بعدا ویرایش کنید اما در هر صورت تا شما ویرایشتان را انجام بدهید صفحه توسط دیگران دیده می شود و این برای دانشنامه مناسب نیست. --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۲ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۰:۳۰ (IRDT)&lt;br /&gt;
اگر مصداقی‌تر به صفحه و ویرایش حداقلی مورد نیاز اشاره می شد ممنون می شدم--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۶:۰۵ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
به عنوان نمونه این صفحه را عرض میکنم:[[آستان قدس رضوی]] . موارد دیگری هم اشکالات جزئی تری دارد مثل [[مؤمن (اسم الله)]] که پی نوشت ها رف نخورده. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۷ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''یک نکته در مورد ویرایش:''' علت اینکه در برخی موارد دور یک مطلب خط چین می گذارد این است که مطلب از ابتدای پاراگراف شروع نشده و یک یا چند فاصله در ابتدا خورده است.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۹ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عجله نکنید==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از زحماتی که می کشید . ولی توصیه میکنم در ساخت صفحات بیشتر شتاب زده عمل نکنید و سعی کنید با تامل و تحقیق صفحه بسازید نه با کپی صرف. به عنوان نمونه نبود صفحه ای در مورد تبریز بهتر است تا این شهر بزرگ اسلامی فقط با اطلاعاتی از سایت دم دست ویکی پدیا پر شود و با توجه بهخ اینکه اینجا دانشنامه اسلامی است هیچ توضیحی در مورد زمان ورود اسلام به این شهر، نقش آن در تاریخ اسلام و اماکن مقدسه آن را نداشته باشد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سعی کنید یک صفحه را آن طوری که حقش هست بسازید یا در تکمیل صفحات ایجاد شده قبلی بکوشید. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ([[بحث کاربر:Zamani|بحث]]) ‌۱۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۵۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خودتون احتمالا بهتر از بنده می دونید که حتی در همین سطحش هم چه قدر زمان بر هست چون کپی صرف نیست و تنظیم موارد فنیش و حذف الگو های وجود نداشته در این دانشنامه زیاد وقت می خواد. مضاف بر این که در این دانشنامه مانند بقیه دانشنامه ها بقیه هم باید در تکمیل و ویرایش کمک کنند و اگر بنا باشد مقاله ای در سطحی که مد نظر شماست گذاشته شود بسیاری از صفحات بدون مطلب باقی می مانند که شاید از نظر شما مشکلی نباشد اما از نظر بنده هست.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۱۴ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۰:۴۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:پس لطفا از سایتهایی کپی کنید که معیارهای اعتبار را داشته باشند. ویکی پدیا به دلیل اینکه توسط کاربران اینترنت نوشته می شود و مرکز شناخته شده ای پشت تدوین آن نیست اعتبار لازم قید شده در شرط منبع معتبر در [[دانشنامه اسلامی:قوانین دانشنامه اسلامی|قوانین]] این دانشنامه را ندارد.  لطفا این مورد را ببینید:[[دانشنامه اسلامی:پایگاه های معتبر]]--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ([[بحث کاربر:Zamani|بحث]]) ‌۱۴ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۳:۱۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حداقل مزیت رونوشت برداری بنده برای این دانشنامه این شد که صفحه منابع معتبر هم ایجاد شد. پیشنهاد می‌کنم قواعد کلی نگارش فارسی هم در دستور العمل قراردهید چون ویکیپدیای در این مورد از اینجا پیشی گرفته است.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۲۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۳:۰۴ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==در مورد مقاله خرمشهر==&lt;br /&gt;
سلام . یک خط مقاله بدون سند و هیچگونه ویرایش چندان برای دانشنامه مناسب به نظر نمی رسد. لطفا   دانشنامه اسلامی را جدی بگیرید           -[[کاربر:سید مهدی خدایی|مدیر]] ([[بحث کاربر:سید مهدی خدایی|بحث]]) ‌۳۱ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۲۴ (IRST)&lt;br /&gt;
از ویکی پدیا میارم می گن معتبر نیست نیار&lt;br /&gt;
شروع می کنم اشکال می گیرید.&lt;br /&gt;
بسیار صفحات بوده که در ویکیپدیا با یک یا چند خط شروع کردم و الان مطالب بسیاری داره- خواهش می کنم شما جدی بگیرید و مشارکت کنید--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۳۱ دسامبر ۲۰۱۵، ساعت ۲۱:۰۸ (IRST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AE%D8%B1%D9%85%D8%B4%D9%87%D8%B1&amp;diff=54212</id>
		<title>خرمشهر</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AE%D8%B1%D9%85%D8%B4%D9%87%D8%B1&amp;diff=54212"/>
		<updated>2015-12-30T22:47:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: شروع مطلب&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;خرمشهر که خونین شهر هم لقب گرفته بود در ۱۳ آبان ۱۳۵۹ بعد از ۳۴ روز مقاومت جانانه سقوط کرد و بحمدلله در ۳ خرداد ۱۳۶۱ در عملیات بیت المقدس آزاد شد.&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D8%B9%D9%84%DB%8C_%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86_%D8%A2%D8%B1%D8%A7&amp;diff=54211</id>
		<title>محمد علی جهان آرا</title>
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		<updated>2015-12-30T22:04:18Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: Goodosuser صفحهٔ محمد علی جهان آرا را به سید محمد علی جهان آرا منتقل کرد: آن طور که سایت شهید آوینی نوشته اند سید هستند ایشان&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;#تغییر_مسیر [[سید محمد علی جهان آرا]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%B4%D9%87%DB%8C%D8%AF_%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D8%B9%D9%84%DB%8C_%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86_%D8%A2%D8%B1%D8%A7&amp;diff=54210</id>
		<title>شهید سید محمد علی جهان آرا</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%B4%D9%87%DB%8C%D8%AF_%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D8%B9%D9%84%DB%8C_%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86_%D8%A2%D8%B1%D8%A7&amp;diff=54210"/>
		<updated>2015-12-30T22:04:17Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: Goodosuser صفحهٔ محمد علی جهان آرا را به سید محمد علی جهان آرا منتقل کرد: آن طور که سایت شهید آوینی نوشته اند سید هستند ایشان&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|width=&amp;quot;100%&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; cellspacing=&amp;quot;0&amp;quot; cellpadding=&amp;quot;4&amp;quot;  style=&amp;quot;margin:1em 1em 1em 1; text-align:center;border-style:solid;&amp;quot;&lt;br /&gt;
|- style=&amp;quot;background:#ADA96E;&amp;quot;&lt;br /&gt;
! width=&amp;quot;15%&amp;quot; | منبع &lt;br /&gt;
! width=&amp;quot;45%&amp;quot; | توضیح برای مشارکت کنندگان&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&amp;lt;tt&amp;gt; '''مقاله نشریه'''&lt;br /&gt;
|محتوای فعلی این صفحه '''مقاله ای از یک نشریه''' است. چنین گمان شده که این منبع میتواند محتوای مورد نیاز این صفحه را تامین کند و با وجود آن نیازی به نوشتن نیست. در صورتی که فکر می کنید چنین نیست و شما قصد جایگزینی یا تغییر این نوشته را دارید [[شیوه نامه تدوین مقاله|اینجا]] را کلیک کنید.&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;noinclude&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سید محمد علی جهان آرا (1333-1360) از فرماندهان جنگ تحمیلی و مبارزان با رژیم پهلوی بود و پس از خدمات فراوان به اسلام و انقلاب و به خصوص شهر [[خرمشهر]] در سال ۱۳۶۰ در یک سانحه هوایی به شهادت رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==گزیده زندگی‌نامه شهید جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
محمدعلی جهان آرا، در سال ۱۳۳۳ در خانواده تهیدست ولی باایمان در خرمشهر دیده به جهان گشود. او همچون سایر اعضای خانواده خویش، عشق فراوانی به خاندان عصمت و طهارت داشت. جهان آرا از ۱۵ سالگی به صف مبارزه بر ضد طاغوت پیوست و در سال ۱۳۴۹ به عضویت گروه حزب الله خرمشهر درآمد و پا به پای افراد این گروه، تلاش وسیعی را دربراندازی رژیم پهلوی آغاز کرد. دوران جوانی شهید جهان آرا همزمان با حکومت پهلوی بود و با پیروزی انقلاب اسلامی در ۲۲ بهمن سال ۱۳۵۷، آرزوی دیرینه جهان آرا به تحقق پیوست و شادمان از پیروزی انقلاب اسلامی، کوشش بی وقفه ای را در راه حراست از دستاوردهای انقلاب آغاز کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقش شهید جهان آرا در خرمشهر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
محمد جهان آرا از بزرگ مردانی بود که نقش بسیار مهمی در تشکیل سپاه پاسداران خرمشهر ایفا کرد. او پس از تشکیل سپاه خرمشهر، به مبارزه خویش با عوامل استکبار و منافقان سرعت بیش‌تری بخشید و با عوامل مزدوری که از خارج مرزها تحریک و تغذیه می شدند، مردانه جنگید.&lt;br /&gt;
[[پرونده:جهان-آرا۶.jpg]]&lt;br /&gt;
جهان آرا با ابراز لیاقت خود در این راه به فرماندهی سپاه خرمشهر منصوب شد و در این سمت، بسیاری از توطئه هایی را که بر ضد نظام اسلامی طراحی می شد، خنثی کرد. فداکاری و از جان گذشتگی این سردار شهید در جریان رزم خونین خرمشهر زبانزد همگان و نام او، تداعی کننده استقامت و پایداری در برابر تجاوز بعثیان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در جبهه‌های نبرد به ویژه در سنگرهای گرم آبادان و خرمشهر، ضربه‌های کمرشکن بر متجاوزان بعثی وارد کرد. تلاش، مجاهدت، استقامت، صبر، پایداری و از همه مهمتر فرماندهی خردمندانه او در پیروزی بر دشمن متجاوز نقش عمده ای داشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقش شهید جهان آرا در جنگ تحمیلی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با شروع جنگ تحمیلی و تجاوز وحشیانه رژیم مزدور صدام بر ضد جمهوری اسلامی ایران و حمله وحشیانه ارتش بعث به خرمشهر، سپاه پاسداران خرمشهر به فرماندهی شهید جهان آرا، استوار و جان بر کف در برابر دشمن مقاومت کرده، حماسه‌ای ماندگار آفریدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
یک سال حضور مداوم شهید جهان آرا در جبهه نبرد از وی متفکری نظامی و برنامه ریز در میدان جهاد ساخته بود. از این رو در اوایل سال ۱۳۶۰ با حفظ سمت فرماندهی سپاه خرمشهر به سمت فرماندهی سپاه پاسداران اهواز و سرپرستی ستاد منطقه هشت سپاه منصوب گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بدین ترتیب دور تازه ای از فعالیت های رزمیِ شهید جهان آرا آغاز شد و آن شهید عزیز برای پاسداری از ارزش ها و دستاوردهای نظام و انقلاب، بیش از پیش همت گماشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نام «خونین شهر» برای همیشه در تاریخ پرافتخار این سرزمین با رشادت‌های دلاورمردانی چون جهان‌آرا می‌درخشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عشق شهید جهان آرا به امام خمینی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اخلاص و ارادات شهید جهان آرا به امام خمینی رحمه الله زبانزد همگان بوده و او به خاطر همین عشق به اسلام و امام، خستگی نمی‌شناخت. او از رادمردان خط مقدم مبارزه در شهرهای آبادان و خرمشهر بود. شهید جهان آرا همچنین در هدایت حرکت های مردمی و بسیج نیروهای نظامی و سازماندهی آنان بر ضد نیروهای بعثی و منافقان نقش عمده ای به عهده داشت؛ زیرا از نظر وی کسانی که در مقابل انقلاب و امام ایستاده بودند، قابل گذشت نبودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==خصوصیات اخلاقی شهید جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهید جهان آرا از خودنمایی، تظاهر و شهرت طلبی گریزان بود. شهید محمد جهان آرا، مرد فضیلت و تقوا و نمونه ای از مردان خدا بود. او از نظر فروتنی در مرتبه ای عالی قرار داشت و برای دیگران احترام و ارزش فراوانی قائل بود و برای رزمندگان سپاه خرمشهر و اهواز پدری مهربان و شایسته به شمار می آمد. برای خدا سخن می گفت و پیوسته به یاد خدا بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خواهر ایشان در این باره می گوید: «از آنجا که عاشق اسلام و امام بود، آرامش نداشت و شبانه روز در اختیار مردم بود و کار می کرد. وقتی با او درباره امام بحث می شد، آنچنان از امام صحبت می کرد و آنچنان از خصوصیات امام می گفت که گویی امام در جلوی او نشسته است. او با تمام وجود امام را درک می کرد».&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==شهادت جهان آرا و همرزمانش==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هشتم مهرماه سال ۱۳۶۰ در حالی که سرداران و سربازان فاتح ارتش اسلام پس از رزمی بی امان با بعثیان متجاوز، با سرافرازی از جبهه نبرد حق علیه باطل برمی گشتند، هواپیمایی که این عزیزان را به تهران می آورد، در حوالی کهریزک دچار سانحه غم انگیزی گشته و سقوط کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در این حادثه علاوه بر شهید شدن تعدادی از رزمندگان اسلام، فرمانده سرافراز و نامور سپاه خرمشهر محمدعلی جهان آرا به همراه چهار سردار بزرگ اسلام سرلشگر فلاحی جانشین رئیس ستاد مشترک ارتش، سرتیپ نامجو وزیر دفاع، سرتیپ فکوری جانشین رئیس ستاد مشترک ارتش و شهید یوسف کلاهدوز قائم مقام فرمانده سپاه پاسداران انقلاب اسلامی به شهادت رسیدند. یاد همه شهدای انقلاب اسلامی گرامی و نامشان پررهرو باد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پیام امام خمینی به مناسبت شهادت جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهید جهان آرا پس از عمری مبارزه، سرانجام در سانحه هوایی کهریزک جان به جان آفرین تسلیم کرد و شربت شهادت نوشید. حضرت امام خمینی رحمه الله به مناسبت وقوع سانحه هوایی و به شهادت رسیدن جهان آرا و یاران هم سنگرش، در پیامی چنین فرمودند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
«اینان، خدمت گزار رشید و متعهدی بودند که در انقلاب و پس از پیروزی انقلاب، با سرافرازی و شجاعت در راه هدف و در حال خدمت به میهن اسلامی به جوار رحمت حق تعالی شتافتند. شک نیست که همه باید این راه را برویم و به سوی حق و سرنوشت خویش بشتابیم، پس چه سعادتی بالاتر از آن که در حال جهاد با دشمنان اسلام و خدمت به حق و خلق و مجاهدت در راه هدف و شرف این راه طی شود و چه سعادت مند بودند این شهیدان که دین خود را به اسلام و ملت شریف ایران ادا نموده و به جایگاه مجاهدین و شهدای اسلام شتافتند...».&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تجلیل مقام معظم رهبری از شهید محمد جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
من مایلم اینجا یادی بکنم از محمد جهان آرا، شهید عزیز خرمشهر و شهدایی که در خرمشهر مظلوم آن طور مقاومت کردند. آن روزها بنده در اهواز از نزدیک شاهد قضایا بودم. خرمشهر در واقع هیچ نیروی مسلح نداشت. نه که صد و بیست هزار (مانند بغداد) نداشت بلکه ده هزار، پنج هزار هم نداشت. چند تانک تعمیری از کار افتاده را مرحوم شهید اقارب پرست - که افسر ارتشی بسیار متعهدی بود - از خسروآباد به خرمشهر آورده بود، تعمیر کرد.&lt;br /&gt;
[[پرونده:138912151214370829 11595-جهان-آرا.jpg]]&lt;br /&gt;
(البته این مال بعد است، در خود آن قسمت اصلی خرمشهر نیرویی نبود) محمد جهان آرا و دیگر جوانهای ما در مقابل نیروهای مهاجم عراقی - یک لشکر مجهز زرهی عراقی با یک تیپ نیروی مخصوص و با نود قبضه توپ که شب و روز روی خرمشهر می بارید - سی و پنج روز مقاومت کردند. همانطور که روی بغداد موشک می زدند، خمپاره ها و توپهای سنگین در خرمشهر روی خانه های مردم مرتب می بارید اما جوانان ما سی و پنج روز مقاومت کردند. بغداد سه روزه تسلیم شد ملت ایران به این جوانان و رزمندگانتان افتخار کنید. بعد هم که می خواستند خرمشهر را تحویل بگیرند، دوباره سپاه و ارتش و بسیج با نیرویی به مراتب کمتر از نیروی عراقی رفتند خرمشهر را محاصره کردند و حدود پانزده هزار اسیر در یکی دو روز از عراقی ها گرفتند. جنگ تحمیلی هشت ساله ما، داستان عبرت آموز عجیبی است. من نمی دانم چرا بعضی ها در ارائه مسائل افتخارآمیز دوران جنگ تحمیلی کوتاهی می کنند.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://farsi.khamenei.ir/others-memory?id=11595 شهید جهان آرا به روایت امام خامنه‌ای]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
* روزنامه همشهری، محمد ملاحسینی، شنبه 4 خرداد 1392، در دسترس در [http://hamshahrionline.ir/details/215770 همشهری آنلاین]، بازیابی: 27 آذر ماه 1392.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شهدای هشت سال دفاع مقدس]]&lt;br /&gt;
[[رده:فرماندهان سپاه پاسداران انقلاب اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%B4%D9%87%DB%8C%D8%AF_%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D8%B9%D9%84%DB%8C_%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86_%D8%A2%D8%B1%D8%A7&amp;diff=54209</id>
		<title>شهید سید محمد علی جهان آرا</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%B4%D9%87%DB%8C%D8%AF_%D8%B3%DB%8C%D8%AF_%D9%85%D8%AD%D9%85%D8%AF_%D8%B9%D9%84%DB%8C_%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86_%D8%A2%D8%B1%D8%A7&amp;diff=54209"/>
		<updated>2015-12-30T22:02:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ویرایش جزیی و اضافه کردن منبع و عکس&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|width=&amp;quot;100%&amp;quot; border=&amp;quot;1&amp;quot; cellspacing=&amp;quot;0&amp;quot; cellpadding=&amp;quot;4&amp;quot;  style=&amp;quot;margin:1em 1em 1em 1; text-align:center;border-style:solid;&amp;quot;&lt;br /&gt;
|- style=&amp;quot;background:#ADA96E;&amp;quot;&lt;br /&gt;
! width=&amp;quot;15%&amp;quot; | منبع &lt;br /&gt;
! width=&amp;quot;45%&amp;quot; | توضیح برای مشارکت کنندگان&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|&amp;lt;tt&amp;gt; '''مقاله نشریه'''&lt;br /&gt;
|محتوای فعلی این صفحه '''مقاله ای از یک نشریه''' است. چنین گمان شده که این منبع میتواند محتوای مورد نیاز این صفحه را تامین کند و با وجود آن نیازی به نوشتن نیست. در صورتی که فکر می کنید چنین نیست و شما قصد جایگزینی یا تغییر این نوشته را دارید [[شیوه نامه تدوین مقاله|اینجا]] را کلیک کنید.&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
&amp;lt;noinclude&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سید محمد علی جهان آرا (1333-1360) از فرماندهان جنگ تحمیلی و مبارزان با رژیم پهلوی بود و پس از خدمات فراوان به اسلام و انقلاب و به خصوص شهر [[خرمشهر]] در سال ۱۳۶۰ در یک سانحه هوایی به شهادت رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==گزیده زندگی‌نامه شهید جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
محمدعلی جهان آرا، در سال ۱۳۳۳ در خانواده تهیدست ولی باایمان در خرمشهر دیده به جهان گشود. او همچون سایر اعضای خانواده خویش، عشق فراوانی به خاندان عصمت و طهارت داشت. جهان آرا از ۱۵ سالگی به صف مبارزه بر ضد طاغوت پیوست و در سال ۱۳۴۹ به عضویت گروه حزب الله خرمشهر درآمد و پا به پای افراد این گروه، تلاش وسیعی را دربراندازی رژیم پهلوی آغاز کرد. دوران جوانی شهید جهان آرا همزمان با حکومت پهلوی بود و با پیروزی انقلاب اسلامی در ۲۲ بهمن سال ۱۳۵۷، آرزوی دیرینه جهان آرا به تحقق پیوست و شادمان از پیروزی انقلاب اسلامی، کوشش بی وقفه ای را در راه حراست از دستاوردهای انقلاب آغاز کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقش شهید جهان آرا در خرمشهر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
محمد جهان آرا از بزرگ مردانی بود که نقش بسیار مهمی در تشکیل سپاه پاسداران خرمشهر ایفا کرد. او پس از تشکیل سپاه خرمشهر، به مبارزه خویش با عوامل استکبار و منافقان سرعت بیش‌تری بخشید و با عوامل مزدوری که از خارج مرزها تحریک و تغذیه می شدند، مردانه جنگید.&lt;br /&gt;
[[پرونده:جهان-آرا۶.jpg]]&lt;br /&gt;
جهان آرا با ابراز لیاقت خود در این راه به فرماندهی سپاه خرمشهر منصوب شد و در این سمت، بسیاری از توطئه هایی را که بر ضد نظام اسلامی طراحی می شد، خنثی کرد. فداکاری و از جان گذشتگی این سردار شهید در جریان رزم خونین خرمشهر زبانزد همگان و نام او، تداعی کننده استقامت و پایداری در برابر تجاوز بعثیان بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
وی در جبهه‌های نبرد به ویژه در سنگرهای گرم آبادان و خرمشهر، ضربه‌های کمرشکن بر متجاوزان بعثی وارد کرد. تلاش، مجاهدت، استقامت، صبر، پایداری و از همه مهمتر فرماندهی خردمندانه او در پیروزی بر دشمن متجاوز نقش عمده ای داشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==نقش شهید جهان آرا در جنگ تحمیلی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با شروع جنگ تحمیلی و تجاوز وحشیانه رژیم مزدور صدام بر ضد جمهوری اسلامی ایران و حمله وحشیانه ارتش بعث به خرمشهر، سپاه پاسداران خرمشهر به فرماندهی شهید جهان آرا، استوار و جان بر کف در برابر دشمن مقاومت کرده، حماسه‌ای ماندگار آفریدند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
یک سال حضور مداوم شهید جهان آرا در جبهه نبرد از وی متفکری نظامی و برنامه ریز در میدان جهاد ساخته بود. از این رو در اوایل سال ۱۳۶۰ با حفظ سمت فرماندهی سپاه خرمشهر به سمت فرماندهی سپاه پاسداران اهواز و سرپرستی ستاد منطقه هشت سپاه منصوب گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بدین ترتیب دور تازه ای از فعالیت های رزمیِ شهید جهان آرا آغاز شد و آن شهید عزیز برای پاسداری از ارزش ها و دستاوردهای نظام و انقلاب، بیش از پیش همت گماشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نام «خونین شهر» برای همیشه در تاریخ پرافتخار این سرزمین با رشادت‌های دلاورمردانی چون جهان‌آرا می‌درخشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عشق شهید جهان آرا به امام خمینی==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اخلاص و ارادات شهید جهان آرا به امام خمینی رحمه الله زبانزد همگان بوده و او به خاطر همین عشق به اسلام و امام، خستگی نمی‌شناخت. او از رادمردان خط مقدم مبارزه در شهرهای آبادان و خرمشهر بود. شهید جهان آرا همچنین در هدایت حرکت های مردمی و بسیج نیروهای نظامی و سازماندهی آنان بر ضد نیروهای بعثی و منافقان نقش عمده ای به عهده داشت؛ زیرا از نظر وی کسانی که در مقابل انقلاب و امام ایستاده بودند، قابل گذشت نبودند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==خصوصیات اخلاقی شهید جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهید جهان آرا از خودنمایی، تظاهر و شهرت طلبی گریزان بود. شهید محمد جهان آرا، مرد فضیلت و تقوا و نمونه ای از مردان خدا بود. او از نظر فروتنی در مرتبه ای عالی قرار داشت و برای دیگران احترام و ارزش فراوانی قائل بود و برای رزمندگان سپاه خرمشهر و اهواز پدری مهربان و شایسته به شمار می آمد. برای خدا سخن می گفت و پیوسته به یاد خدا بود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خواهر ایشان در این باره می گوید: «از آنجا که عاشق اسلام و امام بود، آرامش نداشت و شبانه روز در اختیار مردم بود و کار می کرد. وقتی با او درباره امام بحث می شد، آنچنان از امام صحبت می کرد و آنچنان از خصوصیات امام می گفت که گویی امام در جلوی او نشسته است. او با تمام وجود امام را درک می کرد».&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==شهادت جهان آرا و همرزمانش==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
هشتم مهرماه سال ۱۳۶۰ در حالی که سرداران و سربازان فاتح ارتش اسلام پس از رزمی بی امان با بعثیان متجاوز، با سرافرازی از جبهه نبرد حق علیه باطل برمی گشتند، هواپیمایی که این عزیزان را به تهران می آورد، در حوالی کهریزک دچار سانحه غم انگیزی گشته و سقوط کرد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در این حادثه علاوه بر شهید شدن تعدادی از رزمندگان اسلام، فرمانده سرافراز و نامور سپاه خرمشهر محمدعلی جهان آرا به همراه چهار سردار بزرگ اسلام سرلشگر فلاحی جانشین رئیس ستاد مشترک ارتش، سرتیپ نامجو وزیر دفاع، سرتیپ فکوری جانشین رئیس ستاد مشترک ارتش و شهید یوسف کلاهدوز قائم مقام فرمانده سپاه پاسداران انقلاب اسلامی به شهادت رسیدند. یاد همه شهدای انقلاب اسلامی گرامی و نامشان پررهرو باد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پیام امام خمینی به مناسبت شهادت جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهید جهان آرا پس از عمری مبارزه، سرانجام در سانحه هوایی کهریزک جان به جان آفرین تسلیم کرد و شربت شهادت نوشید. حضرت امام خمینی رحمه الله به مناسبت وقوع سانحه هوایی و به شهادت رسیدن جهان آرا و یاران هم سنگرش، در پیامی چنین فرمودند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
«اینان، خدمت گزار رشید و متعهدی بودند که در انقلاب و پس از پیروزی انقلاب، با سرافرازی و شجاعت در راه هدف و در حال خدمت به میهن اسلامی به جوار رحمت حق تعالی شتافتند. شک نیست که همه باید این راه را برویم و به سوی حق و سرنوشت خویش بشتابیم، پس چه سعادتی بالاتر از آن که در حال جهاد با دشمنان اسلام و خدمت به حق و خلق و مجاهدت در راه هدف و شرف این راه طی شود و چه سعادت مند بودند این شهیدان که دین خود را به اسلام و ملت شریف ایران ادا نموده و به جایگاه مجاهدین و شهدای اسلام شتافتند...».&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تجلیل مقام معظم رهبری از شهید محمد جهان آرا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
من مایلم اینجا یادی بکنم از محمد جهان آرا، شهید عزیز خرمشهر و شهدایی که در خرمشهر مظلوم آن طور مقاومت کردند. آن روزها بنده در اهواز از نزدیک شاهد قضایا بودم. خرمشهر در واقع هیچ نیروی مسلح نداشت. نه که صد و بیست هزار (مانند بغداد) نداشت بلکه ده هزار، پنج هزار هم نداشت. چند تانک تعمیری از کار افتاده را مرحوم شهید اقارب پرست - که افسر ارتشی بسیار متعهدی بود - از خسروآباد به خرمشهر آورده بود، تعمیر کرد.&lt;br /&gt;
[[پرونده:138912151214370829 11595-جهان-آرا.jpg]]&lt;br /&gt;
(البته این مال بعد است، در خود آن قسمت اصلی خرمشهر نیرویی نبود) محمد جهان آرا و دیگر جوانهای ما در مقابل نیروهای مهاجم عراقی - یک لشکر مجهز زرهی عراقی با یک تیپ نیروی مخصوص و با نود قبضه توپ که شب و روز روی خرمشهر می بارید - سی و پنج روز مقاومت کردند. همانطور که روی بغداد موشک می زدند، خمپاره ها و توپهای سنگین در خرمشهر روی خانه های مردم مرتب می بارید اما جوانان ما سی و پنج روز مقاومت کردند. بغداد سه روزه تسلیم شد ملت ایران به این جوانان و رزمندگانتان افتخار کنید. بعد هم که می خواستند خرمشهر را تحویل بگیرند، دوباره سپاه و ارتش و بسیج با نیرویی به مراتب کمتر از نیروی عراقی رفتند خرمشهر را محاصره کردند و حدود پانزده هزار اسیر در یکی دو روز از عراقی ها گرفتند. جنگ تحمیلی هشت ساله ما، داستان عبرت آموز عجیبی است. من نمی دانم چرا بعضی ها در ارائه مسائل افتخارآمیز دوران جنگ تحمیلی کوتاهی می کنند.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://farsi.khamenei.ir/others-memory?id=11595 شهید جهان آرا به روایت امام خامنه‌ای]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منابع==&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
* روزنامه همشهری، محمد ملاحسینی، شنبه 4 خرداد 1392، در دسترس در [http://hamshahrionline.ir/details/215770 همشهری آنلاین]، بازیابی: 27 آذر ماه 1392.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:شهدای هشت سال دفاع مقدس]]&lt;br /&gt;
[[رده:فرماندهان سپاه پاسداران انقلاب اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%BE%D8%B1%D9%88%D9%86%D8%AF%D9%87:%D8%AE%D8%A7%D9%85%D9%86%D9%87_%D8%A7%DB%8C_(%DB%B3%DB%B4).jpg&amp;diff=54208</id>
		<title>پرونده:خامنه ای (۳۴).jpg</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%BE%D8%B1%D9%88%D9%86%D8%AF%D9%87:%D8%AE%D8%A7%D9%85%D9%86%D9%87_%D8%A7%DB%8C_(%DB%B3%DB%B4).jpg&amp;diff=54208"/>
		<updated>2015-12-30T22:01:16Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: از سایت امام خامنه ای&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;از سایت امام خامنه ای&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
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		<title>پرونده:جهان-آرا۶.jpg</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%BE%D8%B1%D9%88%D9%86%D8%AF%D9%87:%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86-%D8%A2%D8%B1%D8%A7%DB%B6.jpg&amp;diff=54207"/>
		<updated>2015-12-30T21:59:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: شهید جهان آرا از سایت شهیدآوینی
http://www.aviny.com/Album/tasvir-sazi/shakhes/kamel2/06.jpg&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;شهید جهان آرا از سایت شهیدآوینی&lt;br /&gt;
http://www.aviny.com/Album/tasvir-sazi/shakhes/kamel2/06.jpg&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Zamani&amp;diff=52993</id>
		<title>بحث کاربر:Zamani</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Zamani&amp;diff=52993"/>
		<updated>2015-11-20T23:59:11Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* کپی برداری */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==مقاله [[سبحان مهرداد محمدپور]]==&lt;br /&gt;
سلام و احترام خدمت جناب زمانی و سایر دوستان عزیز ، چشم ، در خصوص مقاله [[سبحان مهرداد محمدپور]] دستوراتتان اجرا خواهد شد ، لطفا در ویرایش و تکمیل عزیزان یاری کنند و فرصت بیشتر دهند تا تکمیل شود ، دوستان اگر بتونن کمک کن ادبیاتش رو به قالب مقاله اسلامی برگردونیم ممنون میشم&lt;br /&gt;
چند تا مقاله جدید رو هم دارم رو کاغذ مینویسم تکمیل بشه رو سایت قرار خواهم داد ، ممنون التماس دعا&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ایام البیض==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام خسته نباشید&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ایام بیض به صورت أيام بیض و الأیام البیض صفت و موصوف در نظر گرفته میشه یابه صورت ایام البیض مضاف و مضاف الیه؟؟&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام. ممنون. من به تبع مفاتیح الجنان نامش را عوض کردم. ظاهرا که آنجا مضاف ومضاف الیه گرفته. علتش را نمیدانم؟!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تفسیر مطلع‌الانوار==&lt;br /&gt;
با سلام&lt;br /&gt;
شما اخیرا تمام مطالبی که من درباره‌ی تفاسیر را در [[فهرست تفاسیر عرفانی شیعه]] و [[فهرست منابع قرآن شناسی و علوم قرآن]] و [[فهرست تفاسیر عرفانی]] و [[فهرست تفاسیر ترتیبی]] اضافه کرده بودم حذف نمودید. دلیل این کار چیست؟&lt;br /&gt;
من تفسیر مطلع‌الانوار را به عنوان تفسیر روایی-تاویلی اضافه کرده بودم و امروز قصد داشتم تا مقاله مربوط به کتاب و نویسنده آن‌را به ویکی اضافه کنم که متوجه شدم شما آن‌را حذف کردید. لطفا دلیل این کارتان را به من بگویید.&lt;br /&gt;
ممنون&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==امضا==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! چرا شما به عنوان مدیر و دیگر كاربران همانند شما، ویرایش‌هایتان در صفحه‌های بحث را امضا نمیكنید؟[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۱ نوامبر ۲۰۱۴، ساعت ۱۷:۲۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مقالات مرتبط با دانش‌نامه==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام دوباره! مقاله [[محمد خزائلی]] را به دلیل نامشخص بودن ارتباطش با دانش‌نامه حذف نمودید. ارتباط با دانش‌نامه از چه معیاری پیروی میكند؟ لطفاً، مستند به قوانین و راهنمایی‌های دانش‌نامه اسلامی پاسخ دهید![[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۱ نوامبر ۲۰۱۴، ساعت ۱۷:۲۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از پاسختان در [[بحث کاربر:فرزند ایران اسلامی|صفحه بحث من]] متشكرم. لطفاً مقاله [[محمد خزائلی]] را احیا نمایید تا اطلاعات لازم را در روزهای آينده به آن بیفزایم.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۲ نوامبر ۲۰۱۴، ساعت ۱۸:۱۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==رده‌ها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! شایسته است که رده‌های مناسب در ویکی‌پدیا، در این دانش‌نامه هم استفاده شود.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۲ نوامبر ۲۰۱۴، ساعت ۱۸:۱۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==مقالات مربوط به قاریان==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! اينكه مقالاتی برای فهرست قاریان قرآن ایجاد شود كه شده‌است، بسیار نیكوست، اما آيا مقاله‌ای صرفاً شامل فهرستي خام از نام قاریان بدون قالب خاص (جدول يا ...) و بدون اطلاعات دانشنامه‌ای (سال تولد، درگذشت، محل تولد و اقامت و ...)، شایسته یك دانشنامه است؟[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۳ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۳:۱۲ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==استفاده از سایر ویکی ها==&lt;br /&gt;
دلیل همکاری نکردن یا موازی کاری‌هایی که با ویکی فقه(بیش از ۲۰هزار مدخل)، ویکی علوم اسلامی(بیش از ۶۰هزار مدخل) و ویکی شیعه(بیش از ۳هزار مدخل) و . . . (اونا با این دانشنامه و بالعکس)انجام مي شه رو می‌دونید، &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خیلی صفحات داریم این جا ایجاد می کنیم که اون جا هست و خیلی صفحات هم اونا دارن اضافه می کنند که این جا هست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ویکی شیعه الگو های خیلی خوبی داره در مورد زندگی نامه اهل بیت که خیلی خوب بود این سمت هم استفاده بشه.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگه بشه یک هم افزایی ایجاد کرد می شه ادعا کرد از ویکیپدیای فارسی جلوتر و مستند تر خواهیم بود.[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۳ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۹:۲۹ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
.........&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ممنون از تذکر بجایتان. در فکرش هستیم و دغدغه ما هم همین هست. با دعای دوستان ان شاء الله بتوانیم باب همکاری را باز کنیم. قطعا هدف مشترک ما و آن عزیزان که الحق تلاش خوبی هم دارند به انضمام دعای شما کار را به نتیجه می رساند.&lt;br /&gt;
امضا فراموشتان نشود--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۲۰:۲۰ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منبع نامعتبر==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! به نظر شما، آيا در [[البلاغ فى تفسير القرآن بالقرآن|اين مقاله]] معتبر شايسته يك دانشنامه قوی و غنی است؟[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۶ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۲۲:۰۲ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عنوان در صفحات بحث==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! بیشتر اوقات مشاهده مي‌كنم كه در صفحات بحث بدون ايجاد عنوان مستقل، مطلبتان را مي‌نویسید! به نظر مي‌رسد این كار موجب در هم تنيدگي محتوا خواهد شد. در چند مورد عناوین را ایجاد كرده‌ام، اما عنایت بیشتر خودتان را مي‌طلبد.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۱۳ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۳:۱۲ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==استفاده از جمع فارسی==&lt;br /&gt;
سلام! بهتر است در نام‌گذاری رده‌ها و مقاله‌ها از جمع فارسی استفاده نمایید. برای نمونه:&lt;br /&gt;
*مدفونان به جای مدفونین؛&lt;br /&gt;
*مجتهدان به جای مجتهدین؛&lt;br /&gt;
*مفسران به جای مفسرین؛&lt;br /&gt;
جمع بستن مفرد با «ین» در فارسی متداول نیست، گرچه بعضی جمع‌های مكسر و جمع با «ات» گهگاه متداول است.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۱ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۵:۵۳ (IRST)&lt;br /&gt;
سلام! هر سه کلمه عربی است و این نوشتار در کتابها متداول تر است. چنانچه قاعده ای در فرهنگستان زبان فارسی در این مورد به تصویب رسیده است بگویید تا موارد جدید را اینچنین بگذاریم--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۱ ژانویهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۲۷ (IRST) ظاهرا فرهنگستان از هر دو املا استفاده کرده است.[http://parsijoo.ir/websearch?q=%D9%85%D9%81%D8%B3%D8%B1%DB%8C%D9%86&amp;amp;site=http%3A%2F%2Fwww.persianacademy.ir&amp;amp;filetype=any&amp;amp;period=all&amp;amp;acinput=&amp;amp;acvalue= مفسرین در فرهنگستان]--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۱ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۰:۱۷ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ساخت الگو==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
كوشیدم [[الگو:انتقال رده|الگویی]] را ویژه رده‌های انتقال یافته به عنوان جدید ایجاد نمایم كه به دلیل آشنا نبودن با كدهای برنامه‌نویسی موفق نشدم. لطفاً در ایجاد آن به من كمك كنید! برای مثال درباره رده [[:رده:منابع حدیثی|منابع حدیثی]]:&lt;br /&gt;
{|&lt;br /&gt;
!عنوان الگو&lt;br /&gt;
!آنچه مي‌بینیم&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|انتقال رده  |  منابع حدیثی } } &lt;br /&gt;
|صفحات زیر رده این رده به رده [[:رده:منابع حدیثی|منابع حدیثی]] انتقال يافته است. اگر صفحه‌اي را به این رده مربوط نمودید يا پیشتر صفحه‌اي به آن مربوط شده است، آن را در عنوان جدید رده‌بندی نمایید!&lt;br /&gt;
|}[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۲۴ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۹:۰۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== اشکال در پیوند صفحه اول ==&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در وقایع و مناسبت های تقویم صفحه اصلی ولادت [[زینب کبری سلام الله علیها|حضرت زینب سلام الله علیها]] در تقویم به صفحه ای جدید که وجود ندارد هدایت می‌شود.+ این‌که ظاهرا شماره روز و سال صحیح وارد نشده.&lt;br /&gt;
--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۲۸ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۰۹ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بله . درست کردم. تشکر از اینکه متذکر شدید.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۸ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۰:۳۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== امکان افزودن پرونده ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
امکان افزودن پرونده(عکس) برای مطالب وجود ندارد.-خطا می دهد--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۲ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۰۰:۳۲ (IRST)&lt;br /&gt;
:بله - متاسفانه مدتی است اینطوری شده - ان شاء الله با نصب نسخه جدید مشکل حل میشه--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۷ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۲:۰۵ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== کپی برداری ==&lt;br /&gt;
سلام علیکم&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی در تعدادی از مقاله ها از منابعی که آزاد بودن آنها محلّ شک است یعنی نویسنده ی اصلی مطلب , آزاد بودن مطلب را ذکر نکرده است&lt;br /&gt;
کپی برداری شده است و در دانشنامه اسلامی قرار گرفته است خواهشمند است این مطالب مشکوک را از دانشنامه اسلامی حذف کنید . حتی بنده نیز جند مقاله را به این منوال ثبت کرده ام. انها را نیز حذف کنید .منتظر جوابتان هستم  mohamadhosein 1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:ممنون از دقتتان. لطفا نمونه ها را ذکر کنید.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۷ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۱:۵۴ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
صفحه ی&amp;quot;مواهب الرحمان في تفسير القرآن &amp;quot; که منبع آن از مقاله ای در نشریه ی &amp;quot; مطالعات قرآنی و روایی &amp;quot; آمده است اما در سایت نشریه آزاد بودن مطالب ذکر نشده است و محل شک است&lt;br /&gt;
&amp;quot;البلاغ فى تفسير القرآن بالقرآن &amp;quot; که منبع ان از&amp;quot; وبلاگ شخصی عزت الله مرتضایی &amp;quot; آمده است در حالیکه در وبلاگ ایشان به آزاد بودن یا نبودن مطالب اشاره ای نشده است&lt;br /&gt;
یا مقاله&amp;quot; شیراز &amp;quot; از سایت دانشگاه سراسری شیراز کپی شده است در حالیکه سایت مذکور در مورد حق تکثیر مطلبی ذکر نکرده است و محل شک است &lt;br /&gt;
مقاله ی احكام القرآن(شافعى) از موسسه قرآن پژوهان شمال کپی برداری شده است در حالیکه سایت مذکور در مورد حق تکثیر مطلبی ذکر نکرده است و محل شک است و ...&lt;br /&gt;
به نظر بنده دانشنامه ی اسلامی در مورد حق تکثیر مشکوک بایستی سیاست حذف در پیش بگیرد اما در ابتدا در بالای صفحه به کاربر نویسنده ی دانشنامه ی اسلامی اخطار و پیام جایگزینی دهد منتظر جوابتان هستم التماس دعا   mohamadhosein1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:ممنون دوست گرامی! بلاخص که با بزرگواری از مقالات خودتان شروع نمودید. من بخشهایی از قانون کپی رایت رو در اینجا می آورم شما باز چک کنید و ببینید کدوم مطابق با آن مشکلی نداره و بقیه رو بهم بگید . چون خودم فرصت چک کردن دقیق رو ندارم:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* آنچه در اینترنت میبینیم در صورتی قابل کپی کردن است که یا دولتی باشد مانند سفارت خانه ها، دانشگاهها و مانند آن ...، یا تاریخ کپی رایت آن منقضی شده باشد و یا صاحب وب سایت حقوق خود را لغو یا واگذار کرده باشد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* صاحبان فایلها و برنامه های Midi، تصاویر گرافیکی (عکسها، نشانه ها، آثار هنری دیجیتالی)، نوشته ها، متون، HTML، javascripts و تمام مواردی که استفاده از آن مجاز اعلام شده اند، به شما اجازه نمی دهند که مواد مورد نظر را به نام خود ثبت کنید و این اجازه به معنای احراز مالکیت نیست. &lt;br /&gt;
* علامت کپی رایتی که در پایین صفحه یک وب سایت میبینید برای بخشهایی است که دارنده سایت خودش به وجود آورده (مثلا طرح گرافیکی یک وب سایت موسیقی) نه بخشهایی که صاحب سایت اجازه استفاده آنها را دارد. (منبع: [http://rasekhoon.net/article/show/161041/%D9%82%D8%A7%D9%86%D9%88%D9%86%20%DA%A9%D9%BE%DB%8C%20%D8%B1%D8%A7%DB%8C%D8%AA%20(%20Copy%20right%20)/  قانون کپی رایت ( Copy right )، سایت راسخون])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مورد دیگر اینکه غالب سایتهای فارسی خودشون تولید کننده محتوا نیستند و محتوای وبگاه های دیگه رو منتشر می کنند لذا خیلی وقتها اگر پیگیری کنید متوجه می شوید که اون سایت هم خودش از جای دیگه برداشته ولی متاسفانه منبع اصلی رو ذکر نکرده. معمولا با جستجوی یکی از جملات مقاله در گوگل می تونید سایت های دیگه ای که اون مطلب رو دارند پیدا کنید و به منبع اصلی برسید که در خیلی از موارد برداشت از منبع اصلی مجاز هم هست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در آخر اینکه سایت دانشنامه اسلامی از معدود سایتهاست که روی معتبر بودن و همچنین دست اول بودن مطالب و مجاز بودن کپی از اونها حساسیت ویژه دارد . چنانچه در پایین صفحات ویرایش بدان اشاره شده است.  هر مطلبی قوانین کپی رایت رو رعایت نکرده باشه باید حذف بشه . فقط چیزی که هست چون این سایت یک سایت مشارکتی است عدم رعایت قوانین رو هم همگان باید بهم متذکر بشند و در صورت اصرار نویسنده‌ای گزارش کنند تا حذف بشه. لیستی از سایتها معتبر و مجاز در این صفحه قرار داده شده است که البته کامل نیست: [[دانشنامه اسلامی:پایگاه های معتبر]]--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۸ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۱:۰۴ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
علاقه مند به این بودم ابتدا صفحاتی که اعداد پیوند بیشتری را به خود اختصاص داده اند شروع کنم. با توجه به این که ویکی پدیا جزء منابع معتبر شمرنده نمی شود و مطالبی که ا آن رونوشت برداشتم و مورد اعتراضتان قرارگرفت که  اطلاعات مربوط به شهر ها یا کشورها را با ان کامل کردم. چنانچه منبعی برای این گونه مطالب برای رونوشت برداری در اختیار داشتید معرفی فرمایید یا این که وقتی [[روم]] توسط بزرگواری کامل شد یا پیوند به مطلب دیگری بالاتر رفت. در صورت تمایل از طریق رایانامه مطلعم کنید. خدانگهدارتان--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۲۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۳:۲۹ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تشکر ==&lt;br /&gt;
سلام علیکم&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی&lt;br /&gt;
انشاءالله سال با عزّتی داشته باشید  mohamadhosein1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تبریک سال جدید ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
ضمن تشکر و ضمن [[تسلیت]][[ ایام فاطمیه]] امیدوارم که سال پر خیر و برکتی برای شما و سایر خدمتگزاران اسلام و اهل بیت علیهم السلام آرزومندم.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پیشنهاد می کنم دورهمی هایی شبیه به آن چه متاسفانه در ویکیپدیا و حتی ویکی شیعه به [http://fa.wikishia.net/view/%D9%88%DB%8C%DA%A9%DB%8C%E2%80%8C%D8%B4%DB%8C%D8%B9%D9%87:%D9%82%D9%87%D9%88%D9%87%E2%80%8C%D8%AE%D8%A7%D9%86%D9%87 قهوه خانه] مشهور است، داشته باشیم تا به پیشبرد کارها هدفمند کمک کنیم.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ایجاد صفحه راهنمای الگوها==&lt;br /&gt;
با عرض سلام و خسته نباشید . در صفحه راهنما الگوها به خوب یمعرفی نشده است. بنده صفحه ای را آماده کرده ام که به معرفی الگوها پرداخته و الگوهای پر کاربرد را معرفی نموده است. لطفا این صفحه را در بخش راهنما اضافه نمایید. البته هنوز در حال ویرایش ان هستم . لطفا راهنمایی فرمایید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:سلام و خدا قوت! - بله واقعا جایش خالی بود. در [[:رده:الگوها]] الگوها بر اساس نوع الگو دسته یندی شده اند. اگر ملاحظه بفرمایید فکر می کنم بهتر بتوانید این صفحه را بنویسید. من منتظر می شوم تا شما باز هم این صفحه را تکمیل کنید بعد بگذارم. ضمنا امضا در صفحات بحث فراموشتان نشود جناب خدائی--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۳ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۱:۱۱ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== حذف صفحه و اصلاح پیوندها ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
[http://wiki.ahlolbait.com/index.php/%D9%88%DB%8C%DA%98%D9%87:%D9%BE%DB%8C%D9%88%D9%86%D8%AF_%D8%A8%D9%87_%D8%A7%DB%8C%D9%86_%D8%B5%D9%81%D8%AD%D9%87/%D8%A2%D8%B3%D8%AA%D8%A7%D9%86_%D9%82%D8%AF%D8%B3_%D8%B1%D8%B6%D9%88%D9%89 پیوندهای به آستان قدس رضوی] باید اصلاح شود. «ی» در رضوی ظاهرا متفاوت است و باعث شد دو صفحه با نام کاملا شبیه بسازم&lt;br /&gt;
[[آستان قدس رضوى]] و [[آستان قدس رضوی]] که دومی صحیح است.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۳ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۱۸ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
انجام شد. چرا منبع ندارد!. برای اینکه زحمتتتان حذف نشود باید حتما منبعتان را بنویسید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۳ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۵۷ (IRDT)&lt;br /&gt;
ظاهرا انجام نشده است. الان چندین صفحه وجود دارد که به اولی لینک هستند. منبع هم خود سایت آستان قدس را گذاشته بودم.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۵ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۱:۳۸ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:: اونی که در بخش مطالب مرتبط آوردید منظورتون هست؟ باید به عنوان منبع بنویسید.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۵ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۱:۱۵ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پیشنهاد می کنم دو مورد باقی مانده به [http://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%88%DB%8C%DA%98%D9%87%3A%D9%BE%DB%8C%D9%88%D9%86%D8%AF+%D8%A8%D9%87+%D8%A7%DB%8C%D9%86+%D8%B5%D9%81%D8%AD%D9%87&amp;amp;target=%DA%A9%D8%A7%D9%81%DB%8C&amp;amp;namespace= کافی] اصلاح شود و صفحه [[الکافی]] ملاک قرارگیرد.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ‌۱۰ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۷:۲۹ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
::نیازی به این کار نیست . تغییر مسیر برای چنین مواقعی است. الان کافی تغییر مسیر داده شده به الکافی و با کلیک بر روی کافی خودبخود الکافی باز می شود.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۰ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۸:۲۸ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مطلب صفحه اول ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در صفحه اول نشانی سایت [[دانشکده‌ علوم حدیث]] صحیح نبود اصلاح و صفحه ای به نام [[دانشگاه قرآن و حدیث]] ایجاد کردم که بهتر است جایگزین شود.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۳ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۱۸ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام. برای چنین کاری باید به جای ساختن صفحه جدید صفحه با عنوان کنونی را به عنوان جدید منتقل کنید. این امکان در کنار باکس جستجو (سمت راست باکس) از طریق مثلت کوچک در دسترس شما قرار گرفته است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
من دو تا صفحه را مقایسه کردم. صفحه قبلی مفصل تر بود اما برخی اطلاعاتی که شما در این صفحه آورده اید را ندارد. پیشنهاد میکنم صفحه قبلی را تکمیل کنید و بعد بگویید تا صفحه جدید را حذف کنم تا بتوانید این انتقال را انجام بدهید.(چون شما امکان حذف صفحه را ندارید و این انتقال الان نیازمند حذف صفحه هم هست)--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۳ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۴۹ (IRDT)-&lt;br /&gt;
منظورم حذف از و جایگزینی در صفحه اصلی بود.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۱۵ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۰۱:۳۳ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تاریخ شمسی در امضا ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام&lt;br /&gt;
در امضا تاریخ شمسی نمی خورد. ممنون می شوم پیگیری فرمایید./&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==قرار دادن صفحه برای افراد زنده==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام علیکم&lt;br /&gt;
مدیریت محترم دانشنامه اسلامی آیا می توان با ذکر منابع سرشناسی برای افراد زنده در دانشنامه اسلامی صفحه زندگینامه ( بیوگرافی ) قرار داد؟&lt;br /&gt;
و اینکه چند منبع سرشناسی بایست ذکر شود ؟&lt;br /&gt;
با تشکر mohamadhosein1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ویرایش کتاب ذهن و زبان حافظ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام علیکم&lt;br /&gt;
جمله ی : &amp;quot; بهاالدین خرمشاهی این کتاب را بدیع و علمی نگارش کرده است &amp;quot; را حذف کرده ام&lt;br /&gt;
و جمله ی : &amp;quot; کتاب ذهن و زبان حافظ تحلیل ِ ارزشمند در زمینه ی حافظ پژوهی است. &amp;quot; را با حذف واژگان ِ : &amp;quot; تحلیل ِ ارزشمند &amp;quot; , تغییر داده ام  &lt;br /&gt;
با تشکر راهنمایی فرمایید mohamadhosein1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ویرایش کتاب اندیشه سبز , زندگی سرخ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام علیکم مدیریت محترم دانشنامه اسلامی&lt;br /&gt;
علایم نگارشی و جمله بندی را تغییر داده ام . با تشکر لطفا راهنمایی فرمایید . mohamadhosein1&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== علت حذف چه بود؟ ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
باسلام بنده فهرستی کامل ازمطالب قرآن در قسمت کاربری نوشتم تا بمرور زمان با مقایسه با مطالب سایت نقاط خالی را یافته وبرای تکمیل آن تلاش کنیم علت حذف چه بود آیا مشکلی درکار است ممنونم--[[کاربر:Behabadi|Behabadi]] ([[بحث کاربر:Behabadi|بحث]]) ‌۸ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۵:۱۹ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ویرایش کتاب اندیشه سبز , زندگی سرخ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام علیکم &lt;br /&gt;
نویسنده ی کتاب اندیشه سبز , زندگی سرخ در دانشنامه ویکی پدیای فارسی صفحه ی زندگینامه دارد و بنده این کتاب را از کتابخانه ی معتبر شهر خویش تهیه و مطالعه کردم&lt;br /&gt;
و در قسمت منبع مقاله , لینک زندگینامه و لینک لیست آثار را در سایت ویکی پدیای فارسی اضافه کردم .&lt;br /&gt;
التماس دعا&lt;br /&gt;
لطفا راهنمایی فرمایید&lt;br /&gt;
[[کاربر:Mohamadhosein1|mohamadhosein1]] ([[بحث کاربر:Mohamadhosein1|بحث]]) ‌۸ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۸:۰۷ (IRST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D9%85%D8%AC%D8%A7%D8%B2%DB%8C_%D9%85%DA%A9%D8%AA%D8%A8_%D8%A7%D9%87%D9%84_%D8%A8%DB%8C%D8%AA(%D8%B9)&amp;diff=52992</id>
		<title>دانشنامه مجازی مکتب اهل بیت(ع)</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D9%85%D8%AC%D8%A7%D8%B2%DB%8C_%D9%85%DA%A9%D8%AA%D8%A8_%D8%A7%D9%87%D9%84_%D8%A8%DB%8C%D8%AA(%D8%B9)&amp;diff=52992"/>
		<updated>2015-11-20T23:44:13Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: صفحه جدید&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''ویکی شیعه'''، دانشنامه‌ای مجازی در شبکه جهانی اینترنت است که هدف آن بیان و توضيح تمامی مفاهیم و مسائل دخیل در شناخت [[شیعه]] و سایر مذاهب پیرو مکتب [[اهل بیت]] (ع)(شامل تاریخ، جغرافیا، فقه، اصول فقه، مفاهیم، باورها، نام‌ها و...) است. واژگان و نام‌هایی که برای دستیابی به این هدف لازم‌اند، در این دانشنامه توضيح داده خواهند شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در ویکی شیعه از ارائه تحلیل‌ها و نظرهاي شخصی و نیز نظریات جدیدِ اثبات‌نشده پرهیز می‌شود. قضاوت درباره اختلافات علمی و تاریخی بر عهده خوانندگان است و ویکی شیعه در این موارد بی‌طرف است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با توجه به اختلافات مذهبی، بنای نویسندگان بر این است که تا مي‌توانند از منابع دست اول و پذیرفته‌شده نزد دو فرقه بزرگ [[اسلام|اسلامی]] ([[شیعه]] و [[سنی]]) استفاده كنند.&lt;br /&gt;
==تاریخچه ویکی شیعه==&lt;br /&gt;
=== زمینه‌های ایجاد===&lt;br /&gt;
دین به طور اعم و اسلام و تشیع به طور خاص جزو موضوعاتی هستند که در دانشنامه‌های مجازی اطلاعات گسترده‌ای راجع به آنها وجود دارد. ولی از آنجا که نویسندگان این دانشنامه‌ها یا با معارف اسلامی آشنایی درستی ندارند و یا این که ممکن است اصولا معتقد به اسلام یا تشیع نباشند، در مقالات مربوط به مفاهیم اسلامی مطالب اشتباه مشاهده می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با توجه به مشکلاتی که در پایگاه‌های اینترنتی درباره باورهای شیعه وجود دارد و همچنین با توجه به نیاز شیعیان جهان و نیز سایر جستجوگران برای دستیابی آسان به باورهای اصیل شیعی و اسلامی لازم دیده شد که جایگزینی برای این دانشنامه در فضای وب عرضه شود. به همین دلیل راه‌اندازی ویکی شیعه با رویکرد معرفی و دفاع از مکتب [[اهل بیت]](ع) جزو برنامه‌های معاونت فرهنگی [[مجمع جهانی اهل بیت]](ع) قرار گرفت.&lt;br /&gt;
=== آغاز به کار===&lt;br /&gt;
در روز اول خرداد ماه ۱۳۹۲ نخستین جلسه هماهنگی [[ویژه:فهرست_کاربران|نویسندگان]] ویکی شیعه برگزار شد و بعد از چند جلسه آموزش، در تاریخ ۲۷ خرداد ماه [[صریا|نخستین مقاله]] ویکی شیعه در فضای مجازی منتشر شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در تیر ماه ۱۳۹۲ امکان مشاهده سایت بدون نام کاربری برای همه کاربران اینترنت مهیا شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== افتتاح رسمی ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:افتتاح ویکی شیعه.jpg|بندانگشتی|در آئین افتتاحیه کنگره سبط النبی، دانشنامه مجازی مکتب اهل بیت(ع) ویکی شیعه توسط رئیس جمهور رونمایی شد.]]&lt;br /&gt;
ویکی شیعه در اول تیر ماه ۱۳۹۳ ضمن برگزاری کنگره سبط النبی(ع) در [[تهران]]، توسط [[حسن روحانی]] رئیس [[جمهوری اسلامی ایران]] به صورت رسمی رونمایی شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==ویژگی‌ها==&lt;br /&gt;
===گستره محتوایی===&lt;br /&gt;
*محتوای ویکی شیعه عبارت است از: عقاید، شخصیت‌ها، کتاب‌ها، اماکن، حوادث، مراسم و مناسک، فرقه‌های معتقد به اهل بیت(ع)، تاریخ [[تشیع]]، و هر عنوان دیگری که به نحوی به [[اهل بیت]](ع) و پیروان ایشان مربوط باشد.&lt;br /&gt;
*مفاهیم عام اسلامی که مورد اعتقاد همه مسلمانان باشد یا اینکه با تاریخ [[اسلام]] مرتبط باشد نیز در ویکی شیعه یاد می‌شود.&lt;br /&gt;
*مفاهیم مربوط به سایر فرق اسلامی در صورتی در ویکی شیعه معرفی می‌شوند که به نحوی به مکتب اهل بیت مربوط باشد یا بسامد استفاده از آنها در ویکی شیعه زیاد باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
===نظارت بر محتوا===&lt;br /&gt;
*بر محتوای ویکی شیعه نظارت می‌شود، بنابر این می‌توان به عنوان منبعی معتبر برای معرفی شیعه تکیه کرد.&lt;br /&gt;
*ویکی شیعه دانشنامه‌ای است که فعلا با محدودیت فعالیت می‌کند ولی در افق آینده خود آزادسازی را مد نظر دارد تا تمام شیعیان علاقمند و توانا بتوانند در تکمیل آن نقش ایفا کنند و آموزه‌های مکتب اهل بیت(ع) را ترویج کند. ورود به این دانشنامه با تایید مدیران امکان پذیر خواهد بود. این امکان در ویکی شیعه به کاربران اجازه می‌دهد که با مشارکت و هم افزایی در نوشتن مقاله‌ها، ارزش علمی مقاله‌ها را افزایش دهند.&lt;br /&gt;
===سیاست بی‌طرفی===&lt;br /&gt;
*سیاست بی‌طرفی در مباحث فکری درون مذهب شیعه و پیروان اهل بیت(ع) رعایت می‌شود ولی روشن است که ویکی شیعه مروج مکتب اهل بیت است و مقالات با هدف تبیین و دفاع از این آموزه‌ها نوشته می‌شوند.&lt;br /&gt;
*مقاله‌های ویکی شیعه، مقاله علمی پژوهشی نیستند. به این معنا که تحقیقات دست اول و منتشر نشده نیستند و در پی حل معضلات علمی بر نمی‌آیند. اساس ویکی شیعه ارائه اطلاعات بر اساس منابع موجود است. نویسندگان نباید نظریات خود را منتشر کنند.&lt;br /&gt;
*قضاوت درباره اختلافات علمی و تاریخی به خواننده واگذار می‌شود. بنابراین، ویکی شیعه در این موارد بی‌طرف است.&lt;br /&gt;
*با توجه به اختلافات مذهبی، بنای نویسندگان بر این است که حتی الامکان از منابع دست اول و پذیرفته شده نزد دو فرقه بزرگ [[اسلام|اسلامی]] ([[شیعه]] و [[سنی]]) استفاده شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== چند زبانه بودن===&lt;br /&gt;
*انتشار مقالات به چند زبان. از آنجا که منابع شیعی به زبان‌های دیگر برای بسیاری از شیعیان و نیز سایر علاقمندان به شیعه و شیعه شناسی بسیار محدود است، این امکان می‌تواند باعث ترویج و تبلیغ بیشتر مکتب اهل بیت(ع) شده و حقیقت تشیع را به زبان صحیح معرفی کند.&lt;br /&gt;
* ویکی شیعه هم اکنون به هشت زبان در دسترس است که عبارتند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[http://fa.wikishia.net ویکی‌ شیعه فارسی]&lt;br /&gt;
*[http://ar.wikishia.net ویکی شیعه عربی]&lt;br /&gt;
*[http://en.wikishia.net ویکی شیعه انگلیسی]&lt;br /&gt;
*[http://tr.wikishia.net ویکی شیعه ترکی استانبولی]&lt;br /&gt;
*[http://ur.wikishia.net ویکی شیعه اردو]&lt;br /&gt;
*[http://es.wikishia.net ویکی شیعه اسپانیولی]&lt;br /&gt;
*[http://fr.wikishia.net ویکی شیعه فرانسوی]&lt;br /&gt;
*[http://id.wikishia.net ویکی شیعه اندونزیایی]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==سایر ویژگی‌ها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* قابلیت ویرایش دائمی.&lt;br /&gt;
*امکان به روز کردن و افزودن اطلاعات مقاله‌ها.&lt;br /&gt;
*وجود صفحه تاریخچه مقاله در بالای همه صفحه‌ها. در صفحه تاریخچه هر گونه تغییری در مقاله ثبت و ضبط می‌شود و مراجعه کنندگان می‌توانند از تغییرات ایجاد شده و نویسندگان مطالب آگاهی یابند.&lt;br /&gt;
*صفحه‌ تغییرات اخیر که تمامی تغییرات ایجاد شده در همه صفحات ویکی را در معرض دید کاربران قرار می‌دهد.&lt;br /&gt;
*امکان بازیابی مطالب و تغییرات گذشته.&lt;br /&gt;
*ارتباط مدخل‌ها با یکدیگر. به این صورت که خواننده مقاله می‌تواند برای فهم هر یک از این عبارات به کاررفته در متن، بدون جستجو و در همان لحظه صفحه مربوط به آن مفهوم را باز کرده و مطالعه کند. این ویژگی باعث می‌شود که مراجعه کننده بتواند در هنگام مطالعه هر مدخل به سادگی به تمام مفاهیم به کاررفته در آن مدخل نیز دست یابد و اطلاعات کاملی درباره موضوع مورد مطالعه به دست بیاورد.&lt;br /&gt;
*ارتباط هر مقاله به همان موضوع در زبان‌های دیگر ویکی شیعه.&lt;br /&gt;
*استفاده از رده‌ها در انتهای مقاله؛ رده‌ها عناوینی کلی هستند که عنوان یک مقاله زیر مجموعه آن رده محسوب می‌شود، رده‌ها فهرست موضوعی ویکی‌ شیعه محسوب می‌شوند.&lt;br /&gt;
*الگوی ناوبری، ناوباکس (Navigation templates). الگوهای ناوبری الگوهایی هستند که پیوندهای مرتبط با مقاله را در جعبه‌ای افقی در پائین مقاله جمع آوری می‌کنند و گاهی به صورت جعبه عمودی در بالای مقالات کاربرد دارند. ارتباط بین عناوین مندرج در این جدول‌ها به صورت عرضی است یعنی همه عناوین در ذیل یک عنوان جامع قرار می‌گیرند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*جعبه اطلاعات (Infobox) به الگوهایی گفته می‌شود که معمولاً در بالای مقاله قرار می‌گیرند و نقش جمع آوری اطلاعات به صورت مختصر را دارند. با مراجعه به جعبه اطلاعات می‌توان بدون مطالعه همه مقاله از اطلاعات اصلی مندرج در متن مقاله آگاه شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*هر صفحه و مقاله در ویکی در کنار خود یک صفحه بحث نیز دارد. صفحه بحث این امکان را در اختیار کاربران قرار می‌دهد تا نظرات خود را درباره مقاله به اطلاع نویسنده یا نویسندگان و ویراشگران مقاله برسانند. صفحه بحث در واقع محلی برای گفتگوی صاحب نظران و علاقمندان به موضوع مقاله است و به غنای شکلی و محتوایی مقاله نوشته شده کمک می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==منبع ==&lt;br /&gt;
[http://fa.wikishia.net/view/%D9%88%DB%8C%DA%A9%DB%8C%E2%80%8C%D8%B4%DB%8C%D8%B9%D9%87:%D8%A2%D8%B4%D9%86%D8%A7%DB%8C%DB%8C_%D8%A8%D8%A7_%D9%88%DB%8C%DA%A9%DB%8C%E2%80%8C%D8%B4%DB%8C%D8%B9%D9%87 آشنایی با ویکی شیعه]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C:%D9%BE%D8%A7%DB%8C%DA%AF%D8%A7%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%85%D8%B9%D8%AA%D8%A8%D8%B1&amp;diff=52991</id>
		<title>دانشنامه اسلامی:پایگاه های معتبر</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C:%D9%BE%D8%A7%DB%8C%DA%AF%D8%A7%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%85%D8%B9%D8%AA%D8%A8%D8%B1&amp;diff=52991"/>
		<updated>2015-11-20T23:41:22Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ویرایش  جزیی و اضافه کردن ویکی شیعه&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''پایگاه های معتبر''' از نظر این دانشنامه پایگاه‌هایی هستند که خصوصیات زیر را داشته باشند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
1. توسط یک مرکز شناخته شده تدوین شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
2. قوانین مربوط به حق نشر منابع را محترم می شمارند. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
3. مطالب را به شیوه علمی با ذکر کامل مشخصات ارائه می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
معمولا دسته های زیر از سایت‌ها از خصوصیات پیش گفته برخوردار هستند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
الف- سایت‌های مرجع علمی شناخته شده در زمینه های مختلف&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ب- سایت‌های وابسته دفتر تبلیغات اسلامی و مدیریت حوزه علمیه &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
د- سایت‌های پژوهشکده های اسلامی&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ه- سایت‌های موسسات علمی تحقیقاتی&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
علاوه بر آن هر سایتی در مطالب مربوط به خود و نشر دیجیتال آثار مکتوب خود معتبر به حساب می آید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در جدول زیر تعدادی از پایگاه های معتبر (واجد ملاک های فوق) فهرست شده اند:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{| border=&amp;quot;1&amp;quot; cellpadding=&amp;quot;5&amp;quot; cellspacing=&amp;quot;0&amp;quot;|-&lt;br /&gt;
|+ '''جدول پایگاه های معتبر'''&lt;br /&gt;
! رديف ||نام پایگاه||مرکز تولید کننده پایگاه||نشانی اینترنتی پایگاه&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|1 ||[[پایگاه پژوهشكده باقر العلوم‌ عليه السلام]]|| [[پژوهشكده باقر العلوم‌ عليه السلام]] (وابسته به مركز آموزش و پژوهش سازمان تبليغات اسلامی) ||http://www.pajoohe.com  &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|2 ||[[پایگاه پاسخگو]]|| [[مرکز ملی پاسخگویی به سوالات دینی]] زیر نظر دفتر تبلیغات اسلامی حوزه علمیه قم||http://www.pasokhgoo.ir&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|3 ||[[پایگاه اسلامیک داک]]|| [[مرکز اطلاعات و مدارک اسلامی]] زیر نظر معاونت پژوهشی دفتر تبلیغات اسلامی حوزه علمیه قم ||http://www.islamicdoc.org&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|4 ||[[پایگاه اطلاع رسانی سراسری اسلامی (پارسا)]]|| دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با حمایت و اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)||http://www.islamicdatabank.com&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|5 ||[[پایگاه حوزه]]|| [[مرکز تحقیقات کامپیوتری علوم اسلامی]]  ||http://www.hawzah.net &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|6 ||[[پایگاه مجلات تخصصی نور]]|| [[مرکز تحقیقات کامپیوتری علوم اسلامی]]  ||http://www.noormags.com/view/fa/default &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|7 ||پایگاه [[کتابخانه دیجیتال نور]]|| [[مرکز تحقیقات کامپیوتری علوم اسلامی]]  ||http://www.noorlib.ir/View/fa/default.rem&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|8 ||[[پایگاه اندیشوران]] (نخستین بانک اطلاعات محققان حوزوی)|| [[مرکز تحقیقات کامپیوتری علوم اسلامی]]  ||http://www.andishvaran.com/fa/Default.html &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|9 ||[[پایگاه کتابخانه تخصصی تاریخ اسلام و ایران]]|| دفتر آیت الله العظمی سیستانی (با مدیریت استاد جعفریان و نظارت حجت الاسلام شهرستانی) ||http://www.historylib.com &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|10 ||[[پایگاه اندیشه قم]]|| [[مرکز مطالعات و پاسخ گويی به شبهات]] ||http://www.andisheqom.com/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|11 ||[[پایگاه الشیعه]]|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.al-shia.org/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|12 ||[[پايگاه تخصصی نهج البلاغه]]|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.balaghah.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|13 ||شبكه یا زهرا (س)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.yazahra.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|14 ||شبکه امام باقر (ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imambaqer.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|15 ||شبکه امام صادق (ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imam-sadiq.net &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|16 ||شبکه امام کاظم (ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imamkathem.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|17 ||شبکه امام رضا(ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imamreza.net/per/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|18 ||شبکه امام جواد (ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imamjawad.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|19 ||شبکه امام هادی (ع)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://www.imamhadi.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|20 ||شبکه امام مهدی (عج)|| [[مرکز جهانی اطلاع رسانی آل البیت]] (ع)، زیر نظر دفتر آیت الله العظمی سیستانی ( با اشراف حجت الاسلام و المسلمین حاج سید جواد شهرستانی)  ||http://mahdinet.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|21 ||[[پایگاه اطلاع رسانی موسسه کتاب شناسی شیعه]] (الأثر)||[[موسسه کتابشناسی شیعه]] ||http://al-athar.ir/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|22||[[پایگاه پژوهشگاه علوم و فن آوری اطلاعات ایران]]|| وزارت علوم تحقیقات و فناوری ||http://www.irandoc.ac.ir/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|23 ||[[پایگاه راهنمای پایگاه های اینترنت درباره امیر المومنین(ع)]] || مركز تحقيقات امام علي عليه السلام وابسته به پژوهشگاه علوم انسانی و مطالعات فرهنگی ||http://www.imamali.ir/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|24 ||[[پایگاه پرتال جامع علوم انسانی – علوم اسلامی]]||[[پژوهشگاه علوم انسانی و مطالعات فرهنگی]] ||http://www.ensani.ir/fa/6000/default.aspx &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|25 ||[[پایگاه اطلاعات علمی]]|| [[جهاد دانشگاهی]] ||http://www.sid.ir/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|26 ||پایگاه سازمان اسناد و کتابخانه ملی جمهوری اسلامی ایران|| [[سازمان اسناد و کتابخانه ملی جمهوری اسلامی ایران]]  ||http://www.nlai.ir/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|27||پایگاه [[دانشنامه جهان اسلام]] ||[[بنیاد دائره المعارف اسلامی]] ||http://www.encyclopaediaislamica.com/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|28 ||[[پایگاه اطلاع رسانی حدیث شیعه]]|| مؤسسه علمى ـ فرهنگی [[دارالحدیث]] ||http://www.hadith.net/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|29 ||[[پایگاه اطلاع رسانی کتابخانه های ایران]]||مؤسسه علمى ـ فرهنگی [[دارالحدیث]] ||http://www.lib.ir&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|30 ||[[پایگاه شهر حدیث]] (طرحی نو در ارائه احادیث اهلبیت علیهم السلام||مؤسسه علمى ـ فرهنگی [[دارالحدیث]]  ||http://www.hadithcity.com/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|31 ||[[پایگاه خانه کتاب]]||موسسه [[خانه کتاب]]||http://www.ketab.ir/  &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|32 ||پایگاه [[بانک اطلاعات نشریات کشور]]|| بخش خصوصی ||http://www.magiran.com/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|33 ||[[پایگاه مرکز دائره المعارف بزرگ اسلامی]] (مرکزپژوهشهای ایرانی واسلامی)||[[مرکز دائره المعارف بزرگ اسلامی]] ||http://www.cgie.org.ir/ &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|34 ||[[پایگاه گنجینه کتاب]]|| شرکت نرم افزار و سخت افزار ایران (نوسا) ||http://www.nosabooks.com &lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|35 ||[[پایگاه شعائر]]|| [[مؤسسه دارالمهدی و القرآن الحكیم]] زير نظر آيت الله العظمی حاج سيد صادق حسينی شيرازی||http://www.shaaer.com/&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|36 ||[[پایگاه دانشنامه های انقلاب اسلامی و تاریخ ایران]]||[[مرکز اسناد انقلاب اسلامی]] ||http://daneshnameh.irdc.ir/?page_id=3694&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|۳۷ ||[[دانشنامه مجازی مکتب اهل بیت(ع)]]||[[مجمع جهانی اهل بیت(ع)]] ||http://www.wikishia.net/&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
[[رده:دانشنامه اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=52990</id>
		<title>بحث کاربر:Goodosuser</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=52990"/>
		<updated>2015-11-20T23:34:44Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* عجله نکنید */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==خوش‌آمدید!==&lt;br /&gt;
{{پیام خوش آمد}}--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از مشارکتهای خوبتان . مشخص است قواعد کار در ویکی را می دانید و کاربر مبتدی نیستید. امیداورم مشارکت شما با این دانشنامه پایدار باشد. به امید آنکه با کمک عزیزانی همچون شما این سایت به مرور رونق بگیرد و به فضایی برای مشارکت افراد توانمند در این زمینه مبدل شود .&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لطفا برای همه مقالات خود حتما منبع را ذکر کنید و در صورتی که به سایتی ارجاع می دهید به سایت مربوطه لینک دهید. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
موفق باشید --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۴۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ابراز خشنودی از بازگشتتان ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! پس از بیش از یك هفته غیبتتان در ویرایش‌های دانش‌نامه اسلامی، اكنون از بازگشت دوباره تان خوشنودم. با توجه به نسبتاً نوپا بودن این دانش‌نامه، امیدوارم كمتر شاهد این غیبت‌های كاربری تأثیرگذاری چون شما باشم.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۱۱ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۴:۲۵ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
بدین وسیله از زحمات شما در این سال در جهت افزودن به غنای دانشنامه اسلامی و بهبود محتوای قدردانی می گردد. امید است سال آینده نیز این دانشنامه همچنان از قلم و حسن عنایت شما بهره مند باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنچه امسال بدان رسیدیم:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*رتبه دانشنامه در بین سایتهای ایرانی: 1500&lt;br /&gt;
*دانشنامه از کمتر 1000 بازدید روزانه در ابتدای سال به میانگین بازدید 3000 در یک روز رسیده است.&lt;br /&gt;
*این دانشنامه در حال حاضر در بسیاری از واژه ها  جزء 10 نتیجه اول گوگل هستند: نمونه ها : دانشنامه اسلام، پیامبر اسلام، امام علی علیه السلام، امام باقر علیه السلام، امام صادق علیه السلام، امام حسن عسکری علیه السلام ، ایمان، منابع اجتهاد شیعه‌، پراکندگی شیعه در جهان، فرقه های شیعه، مکه، مدینه، کوفه، نجف، علامه طباطبائی، جنگ های صدر اسلام، وقایع تقویم تاریخ اسلام، بحارالانوار، فهرست سوره های قرآن،  قصه‌ های قرآنی، فرهنگ و تمدن اسلام&lt;br /&gt;
*برخی دیگر از آمارهای دانشنامه را می توانید از [[ویژه:آمار|اینجا]] ببینید&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سال خوبی داشته باشید &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آرزوی توفیق روز افزون در نشر معارف اسلامی برای شما--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۸ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنده هم متشکرم و آرزوی داشتن سال خوبی برای شما و سایر خدمتگزاران اهل بیت را دارم.&lt;br /&gt;
اگر تمرکز بر روی صفحاتی که بیشترین پیوند را داشته ملاک قرار بگیرد([[صفحه‌های مورد نیاز]]) بهتر پیش خواهیم رفت و چنانچه این موضوع در نظر گرفته نشود ممکن است کم تر از وقت بگذارم.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چنانچه منظور آمار الکسا باشد صرفا سایت‌های ایرانی ملاک نبوده سایتی هایی که در ایران بالاترین رتب مشاهده داشته باشند منظور است.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۲۲ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۱۱ (IRDT)&lt;br /&gt;
==صفحات نو==&lt;br /&gt;
سلام و خدا قوت&lt;br /&gt;
لطفا به هنگام ایجاد صفحات نو یک ویرایش حداقلی هم انجام بدهید که خوب دیده بشود. متوجه هستم که می خواهید بعدا ویرایش کنید اما در هر صورت تا شما ویرایشتان را انجام بدهید صفحه توسط دیگران دیده می شود و این برای دانشنامه مناسب نیست. --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۲ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۰:۳۰ (IRDT)&lt;br /&gt;
اگر مصداقی‌تر به صفحه و ویرایش حداقلی مورد نیاز اشاره می شد ممنون می شدم--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۶:۰۵ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
به عنوان نمونه این صفحه را عرض میکنم:[[آستان قدس رضوی]] . موارد دیگری هم اشکالات جزئی تری دارد مثل [[مؤمن (اسم الله)]] که پی نوشت ها رف نخورده. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۷ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''یک نکته در مورد ویرایش:''' علت اینکه در برخی موارد دور یک مطلب خط چین می گذارد این است که مطلب از ابتدای پاراگراف شروع نشده و یک یا چند فاصله در ابتدا خورده است.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۹ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عجله نکنید==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از زحماتی که می کشید . ولی توصیه میکنم در ساخت صفحات بیشتر شتاب زده عمل نکنید و سعی کنید با تامل و تحقیق صفحه بسازید نه با کپی صرف. به عنوان نمونه نبود صفحه ای در مورد تبریز بهتر است تا این شهر بزرگ اسلامی فقط با اطلاعاتی از سایت دم دست ویکی پدیا پر شود و با توجه بهخ اینکه اینجا دانشنامه اسلامی است هیچ توضیحی در مورد زمان ورود اسلام به این شهر، نقش آن در تاریخ اسلام و اماکن مقدسه آن را نداشته باشد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سعی کنید یک صفحه را آن طوری که حقش هست بسازید یا در تکمیل صفحات ایجاد شده قبلی بکوشید. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ([[بحث کاربر:Zamani|بحث]]) ‌۱۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۵۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خودتون احتمالا بهتر از بنده می دونید که حتی در همین سطحش هم چه قدر زمان بر هست چون کپی صرف نیست و تنظیم موارد فنیش و حذف الگو های وجود نداشته در این دانشنامه زیاد وقت می خواد. مضاف بر این که در این دانشنامه مانند بقیه دانشنامه ها بقیه هم باید در تکمیل و ویرایش کمک کنند و اگر بنا باشد مقاله ای در سطحی که مد نظر شماست گذاشته شود بسیاری از صفحات بدون مطلب باقی می مانند که شاید از نظر شما مشکلی نباشد اما از نظر بنده هست.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۱۴ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۰:۴۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
:پس لطفا از سایتهایی کپی کنید که معیارهای اعتبار را داشته باشند. ویکی پدیا به دلیل اینکه توسط کاربران اینترنت نوشته می شود و مرکز شناخته شده ای پشت تدوین آن نیست اعتبار لازم قید شده در شرط منبع معتبر در [[دانشنامه اسلامی:قوانین دانشنامه اسلامی|قوانین]] این دانشنامه را ندارد.  لطفا این مورد را ببینید:[[دانشنامه اسلامی:پایگاه های معتبر]]--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ([[بحث کاربر:Zamani|بحث]]) ‌۱۴ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۳:۱۳ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
حداقل مزیت رونوشت برداری بنده برای این دانشنامه این شد که صفحه منابع معتبر هم ایجاد شد. پیشنهاد می‌کنم قواعد کلی نگارش فارسی هم در دستور العمل قراردهید چون ویکیپدیای در این مورد از اینجا پیشی گرفته است.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۲۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۳:۰۴ (IRST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C:%D9%82%D9%88%D8%A7%D9%86%DB%8C%D9%86_%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C&amp;diff=52989</id>
		<title>دانشنامه اسلامی:قوانین دانشنامه اسلامی</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C:%D9%82%D9%88%D8%A7%D9%86%DB%8C%D9%86_%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C&amp;diff=52989"/>
		<updated>2015-11-20T23:29:25Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ویرایش  جزیی&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;{|class=&amp;quot;wikitable&amp;quot;&lt;br /&gt;
|-&lt;br /&gt;
|گرچه رعایت قوانین نوشته شده در این صفحه برای تمامی اعضای دانشنامه الزامی است اما در عین حال قوانین نوشته شده در حال حاضر پیش نویسی از قوانین دانشنامه می باشند و کاربران می‌توانند در صفحه [[بحث:دانشنامه اسلامی:قوانین دانشنامه اسلامی|بحث]] برای تغییر آن پیشنهاد دهند&lt;br /&gt;
|}&lt;br /&gt;
'''قانون اول:'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آن چه به عنوان [[دانشنامه اسلامی:منشور اخلاقی|منشور اخلاقی دانشنامه]] تعیین شده است، لازم‌الاجراست. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''قانون دوم:''' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در دانشنامه هر مدعایی نیازمند به ذکر [[دانشنامه اسلامی:منابع معتبر|منبع معتبر]] یا [[دانشنامه اسلامی:اثبات منطقی|اثبات منطقی]] است و نوشته‌هایی که مدعاهایشان چنین نباشد حذف خواهد شد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''قانون سوم:''' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مطالب ذکر شده در مقالات نباید با ضروریات مذهب شیعه مغایرت داشته باشد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''قانون چهارم:''' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در موضوعات مختلف این دانشنامه نظرات شاذ و نادر مطرح نمی شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''قانون پنجم:''' &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مقالات در مباحث اعتقادی بایستی تمامی آراء مشهور را پوشش بدهند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پیوندها==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*[[دانشنامه اسلامی:منشور اخلاقی دانشنامه اسلامی]]&lt;br /&gt;
*[[دانشنامه اسلامی:شیوه نامه تدوین مقاله]] &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:دانشنامه اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=52890</id>
		<title>بحث کاربر:Goodosuser</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%A8%D8%AD%D8%AB_%DA%A9%D8%A7%D8%B1%D8%A8%D8%B1:Goodosuser&amp;diff=52890"/>
		<updated>2015-11-13T21:13:50Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: عجله!!؟؟&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;==خوش‌آمدید!==&lt;br /&gt;
{{پیام خوش آمد}}--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از مشارکتهای خوبتان . مشخص است قواعد کار در ویکی را می دانید و کاربر مبتدی نیستید. امیداورم مشارکت شما با این دانشنامه پایدار باشد. به امید آنکه با کمک عزیزانی همچون شما این سایت به مرور رونق بگیرد و به فضایی برای مشارکت افراد توانمند در این زمینه مبدل شود .&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
لطفا برای همه مقالات خود حتما منبع را ذکر کنید و در صورتی که به سایتی ارجاع می دهید به سایت مربوطه لینک دهید. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
موفق باشید --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۶ دسامبر ۲۰۱۴، ساعت ۲۲:۴۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ابراز خشنودی از بازگشتتان ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سلام! پس از بیش از یك هفته غیبتتان در ویرایش‌های دانش‌نامه اسلامی، اكنون از بازگشت دوباره تان خوشنودم. با توجه به نسبتاً نوپا بودن این دانش‌نامه، امیدوارم كمتر شاهد این غیبت‌های كاربری تأثیرگذاری چون شما باشم.[[کاربر:فرزند ایران اسلامی|فرزند ایران اسلامی]] ‌۱۱ فوریهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۱۴:۲۵ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==تشکر==&lt;br /&gt;
بدین وسیله از زحمات شما در این سال در جهت افزودن به غنای دانشنامه اسلامی و بهبود محتوای قدردانی می گردد. امید است سال آینده نیز این دانشنامه همچنان از قلم و حسن عنایت شما بهره مند باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
آنچه امسال بدان رسیدیم:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
*رتبه دانشنامه در بین سایتهای ایرانی: 1500&lt;br /&gt;
*دانشنامه از کمتر 1000 بازدید روزانه در ابتدای سال به میانگین بازدید 3000 در یک روز رسیده است.&lt;br /&gt;
*این دانشنامه در حال حاضر در بسیاری از واژه ها  جزء 10 نتیجه اول گوگل هستند: نمونه ها : دانشنامه اسلام، پیامبر اسلام، امام علی علیه السلام، امام باقر علیه السلام، امام صادق علیه السلام، امام حسن عسکری علیه السلام ، ایمان، منابع اجتهاد شیعه‌، پراکندگی شیعه در جهان، فرقه های شیعه، مکه، مدینه، کوفه، نجف، علامه طباطبائی، جنگ های صدر اسلام، وقایع تقویم تاریخ اسلام، بحارالانوار، فهرست سوره های قرآن،  قصه‌ های قرآنی، فرهنگ و تمدن اسلام&lt;br /&gt;
*برخی دیگر از آمارهای دانشنامه را می توانید از [[ویژه:آمار|اینجا]] ببینید&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سال خوبی داشته باشید &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آرزوی توفیق روز افزون در نشر معارف اسلامی برای شما--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۱۸ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۲۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنده هم متشکرم و آرزوی داشتن سال خوبی برای شما و سایر خدمتگزاران اهل بیت را دارم.&lt;br /&gt;
اگر تمرکز بر روی صفحاتی که بیشترین پیوند را داشته ملاک قرار بگیرد([[صفحه‌های مورد نیاز]]) بهتر پیش خواهیم رفت و چنانچه این موضوع در نظر گرفته نشود ممکن است کم تر از وقت بگذارم.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چنانچه منظور آمار الکسا باشد صرفا سایت‌های ایرانی ملاک نبوده سایتی هایی که در ایران بالاترین رتب مشاهده داشته باشند منظور است.--[[کاربر:Goodosuser|Goodosuser]] ‌۲۲ مارس ۲۰۱۵، ساعت ۰۲:۱۱ (IRDT)&lt;br /&gt;
==صفحات نو==&lt;br /&gt;
سلام و خدا قوت&lt;br /&gt;
لطفا به هنگام ایجاد صفحات نو یک ویرایش حداقلی هم انجام بدهید که خوب دیده بشود. متوجه هستم که می خواهید بعدا ویرایش کنید اما در هر صورت تا شما ویرایشتان را انجام بدهید صفحه توسط دیگران دیده می شود و این برای دانشنامه مناسب نیست. --[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۲۲ آوریل ۲۰۱۵، ساعت ۱۰:۳۰ (IRDT)&lt;br /&gt;
اگر مصداقی‌تر به صفحه و ویرایش حداقلی مورد نیاز اشاره می شد ممنون می شدم--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۶:۰۵ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
به عنوان نمونه این صفحه را عرض میکنم:[[آستان قدس رضوی]] . موارد دیگری هم اشکالات جزئی تری دارد مثل [[مؤمن (اسم الله)]] که پی نوشت ها رف نخورده. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۷ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''یک نکته در مورد ویرایش:''' علت اینکه در برخی موارد دور یک مطلب خط چین می گذارد این است که مطلب از ابتدای پاراگراف شروع نشده و یک یا چند فاصله در ابتدا خورده است.--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ‌۴ مهٔ ۲۰۱۵، ساعت ۰۹:۰۹ (IRDT)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==عجله نکنید==&lt;br /&gt;
سلام. ممنون از زحماتی که می کشید . ولی توصیه میکنم در ساخت صفحات بیشتر شتاب زده عمل نکنید و سعی کنید با تامل و تحقیق صفحه بسازید نه با کپی صرف. به عنوان نمونه نبود صفحه ای در مورد تبریز بهتر است تا این شهر بزرگ اسلامی فقط با اطلاعاتی از سایت دم دست ویکی پدیا پر شود و با توجه بهخ اینکه اینجا دانشنامه اسلامی است هیچ توضیحی در مورد زمان ورود اسلام به این شهر، نقش آن در تاریخ اسلام و اماکن مقدسه آن را نداشته باشد. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
سعی کنید یک صفحه را آن طوری که حقش هست بسازید یا در تکمیل صفحات ایجاد شده قبلی بکوشید. موفق باشید--[[کاربر:Zamani|Zamani]] ([[بحث کاربر:Zamani|بحث]]) ‌۱۱ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۱۶:۵۱ (IRST)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
خودتون احتمالا بهتر از بنده می دونید که حتی در همین سطحش هم چه قدر زمان بر هست چون کپی صرف نیست و تنظیم موارد فنیش و حذف الگو های وجود نداشته در این دانشنامه زیاد وقت می خواد. مضاف بر این که در این دانشنامه مانند بقیه دانشنامه ها بقیه هم باید در تکمیل و ویرایش کمک کنند و اگر بنا باشد مقاله ای در سطحی که مد نظر شماست گذاشته شود بسیاری از صفحات بدون مطلب باقی می مانند که شاید از نظر شما مشکلی نباشد اما از نظر بنده هست.--[[کاربر:Goodosuser|حجت‌اله]] ([[بحث کاربر:Goodosuser|بحث]]) ‌۱۴ نوامبر ۲۰۱۵، ساعت ۰۰:۴۳ (IRST)&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52889</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52889"/>
		<updated>2015-11-13T21:09:34Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* پس از اسلام */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، ''المسالک والممالک''، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;&amp;gt;نشانی=http://www.loghatnaameh.com/dehkhodaworddetail-aa8ed0320c04444b9063a47502e6138a-fa.html|عنوان=تبریز|تاریخ بازدید=۱۶ ژانویه ۲۰۰۸|نویسنده=دهخدا|نشانی نویسنده=|نویسندگان دیگر=|تاریخ=|سال=|ماه=|قالب=|اثر=لغت‌نامهٔ دهخدا|ناشر=|صفحه=|زبان=|نشانی بایگانی=|تاریخ بایگانی=|نقل قول=&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52888</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52888"/>
		<updated>2015-11-13T21:08:11Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* پس از اسلام */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، ''المسالک والممالک''، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;&amp;gt;{{یادکرد وب|نشانی=http://www.loghatnaameh.com/dehkhodaworddetail-aa8ed0320c04444b9063a47502e6138a-fa.html|عنوان=تبریز|تاریخ بازدید=۱۶ ژانویه ۲۰۰۸|نویسنده=دهخدا|نشانی نویسنده=|نویسندگان دیگر=|تاریخ=|سال=|ماه=|قالب=|اثر=لغت‌نامهٔ دهخدا|ناشر=|صفحه=|زبان=|نشانی بایگانی=|تاریخ بایگانی=|نقل قول=}}&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52887</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52887"/>
		<updated>2015-11-13T21:05:58Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* پس از اسلام */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، ''المسالک والممالک''، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Brit&amp;quot;/&amp;gt; در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52886</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52886"/>
		<updated>2015-11-13T21:02:54Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: ویرایش جزیی&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، ''المسالک والممالک''، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52885</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52885"/>
		<updated>2015-11-13T21:01:39Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: اصلاح تگ مرجع&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، {{به عربی|''المسالک والممالک''}}، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52884</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52884"/>
		<updated>2015-11-13T20:57:24Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* پس از اسلام */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، {{به عربی|''المسالک والممالک''}}، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%BE%D8%B1%D9%88%D9%86%D8%AF%D9%87:Azerbajan_in_Abbasid_Caliphate.jpg&amp;diff=52883</id>
		<title>پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D9%BE%D8%B1%D9%88%D9%86%D8%AF%D9%87:Azerbajan_in_Abbasid_Caliphate.jpg&amp;diff=52883"/>
		<updated>2015-11-13T20:55:51Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: &lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52882</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52882"/>
		<updated>2015-11-13T20:54:12Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: /* نام */&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، {{به عربی|''المسالک والممالک''}}، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52881</id>
		<title>تبریز</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AA%D8%A8%D8%B1%DB%8C%D8%B2&amp;diff=52881"/>
		<updated>2015-11-13T20:51:29Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: تکمیل جزیی نیازمند ویرایش&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;تبریز  یکی از شهرهای بزرگ [[ایران]] و مرکز استان [[آذربایجان شرقی]] است. این شهر بزرگ‌ترین شهر منطقهٔ شمال‌غرب ایران و مناطق آذری‌نشین و قطب اداری، ارتباطی، بازرگانی، سیاسی، صنعتی، فرهنگی و نظامی این منطقه شناخته می‌شود.[[پرونده:Tabriz_Urbanization.jpg|left]]&lt;br /&gt;
جمعیت تبریز در سال ۱۳۹۰ خورشیدی بالغ بر ۱٬۴۹۴٬۹۹۸ نفر بوده که این رقم با احتساب جمعیت ساکن در حومهٔ شهر به حدود ۱٬۸ میلیون نفر می‌رسد.[ تبریز در سال ۱۵۰۰ و در زمان پایتختی [[صفویان]] به‌عنوان پنجمین شهر بزرگ جهان شناخته می‌شده‌است. این شهر همچنین بزرگ‌ترین، مهم‌ترین و متجددترین شهر ایران در عصر [[قاجار]] بوده‌است. امروزه زبان محاوره در بین مردمان تبریز زبان ترکی آذربایجانی و لهجهٔ تبریزی است. برخی اسناد و شواهد تاریخی نشان می‌دهد که تا سده یازدهم هجری زبان آذری، شاخه‌ای از زبانی ایرانی، در این شهر تکلم می‌شده‌است.&lt;br /&gt;
تبریز در غرب استان آذربایجان شرقی و در منتهی‌الیه مشرق و جنوب شرق جلگهٔ تبریز قرار گرفته‌است. این شهر از سمت شمال به کوه‌های پکه‌چین و [[عون بن علی]]، از سمت شمال‌شرق به کوه‌های باباباغی و گوزنی، از سمت شرق به گردنهٔ پایان و از سمت جنوب به دامنه‌های کوه سهند محدود شده‌است. آب و هوای تبریز در زمستان‌ها بسیار سرد و در تابستان‌ها خشک و گرم است.&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Mount-Sahand.jpg|بندانگشتی|[[سهند|کوه سهند]]؛ به عقیدهٔ برخی، واژهٔ تبریز (تب‌پنهان‌کن) به جهت پنهان‌کنندگی تف و گرمای کوه سهند به این شهر اطلاق شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[یاقوت حموی]] در «معجم‌البلدان» گزارش می‌دهد که نام شهر در زمان دیدار یاقوت از تبریز در زبان محلی «تِبریز» تلفظ می‌شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;&amp;gt;یاقوت حموی، «تبریز»، ''معجم البلدان ج۲''، ۱۳&amp;lt;/ref&amp;gt; با توجه به این، [[ولادیمیر مینورسکی|مینورسکی]] معتقد است که تلفظ تِبریز باید به گویش ایرانی [[زبان آذری|آذری]] قدیم تعلق داشته‌باشد. این گویش به گویش‌های موسوم به گویش‌های ایرانی جنوب [[دریای خزر]] وابسته‌است؛ یا به احتمال بیش‌تر، تلفظ تِبریز معرب‌شدهٔ نام شهر در باب فِعلیل (در [[زبان عربی]]) است. هم‌چنین شیوهٔ نگارش نام این شهر در [[زبان ارمنی]] و تجزیه و تحلیل صیغهٔ ارمنی، نمایانگر وابستگی واژهٔ تَوریژ به «زبان پهلوی شمالی» می‌باشد. مینورسکی در پایان چنین نتیجه می‌گیرد که این مسئله نشان می‌دهد که ریشهٔ نام شهر به زمان‌های بسیار دور تا اوایل سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]] یا شاید قبل از [[اشکانیان]] برمی‌گردد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بنابر گفتهٔ مصطفی مؤمنی در دانشنامهٔ جهان اسلام، اهالی بومی آذربایجان تبریز را توری (چشمه یا رود گرم) می‌خوانده‌اند. تا اوایل سدهٔ چهاردهم خورشیدی نیز روستاییان اطراف تبریز این شهر را توری می‌نامیده‌اند. حتی در حال حاضر مردمان «قنبرآباد» در اطراف تبریز به این شهر توری می‌گویند. در نوشته‌های کهن (برای نمونه [[ابوالفدا]]) نام این شهر به شکل «تُوریز» آمده و هنوز هم در زبان‌های [[زبان کردی|کردی]] و [[زبان تاتی ایران|تاتی]] «توریز» و «تُوْری» به کار می‌رود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:AZARBAIJAN MAP.JPG|بندانگشتی|راست|بخشی از [[نقشه ایران و توران در دوره قاجاریه|نقشهٔ ایران و توران در دورهٔ قاجاریه]]؛ نام تبریز در میانهٔ نقشه مشهود است.]]&lt;br /&gt;
عده‌ای از شرق‌شناسان و منابع کهن، نام شهر را دارای ریشه‌ای کهن در [[زبان پارسی میانه|پارسی میانه]] و [[زبان فارسی باستان|کهن]] و مرتبط با گرما و فعالیت‌های گرمایی [[سهند|کوه سهند]] دانسته‌اند. هم‌چنین منابع ارمنی که نام شهر را در سدهٔ پنجم (یا چهارم) میلادی، «تورژ» و «تَوْرِش» دانسته‌اند و به فارسی هم تَورز تلفظ کرده‌اند و با توجه به معنای متداول فارسی «تب‌ریز» و «تب‌پنهان‌کن» و احتمالاً نام تبریز «پنهان‌کنندهٔ تف و گرما» و با «جنبش‌های آتشفشانی کوه سهند» مرتبط بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; [[دانشنامه بریتانیکا|دانشنامهٔ بریتانیکا]] نیز نظری مشابه دارد و تبریز را در اصل «تپ + ریز» می‌داند، چیزی که باعث روان شدن گرما می‌شود و احتمالاً به‌خاطر چشمه‌های آب‌گرم اطراف آن است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Brit&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در مورد نام شهر توجیه مصطلح ولی عامیانهٔ دیگری وجود دارد؛ از جمله این‌که زبیده زن [[هارون‌الرشید]] به بیماری تب نوبه مبتلا شده بود؛ چند روزی در آن حوالی اقامت کرده، در اثر هوای لطیف و دل‌انگیز آن‌جا بیماری وی زایل شده، فرموده شهری در آن‌محل بنا کنند و نام آن را «تب‌ریز» بگذارند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;OnGeo&amp;quot;&amp;gt;عنوان=آشنایی با تبریز؛ پیشینهٔ تبریز، برگرفته از کتاب آشنایی با تبریز: از انتشارات شهرداری تبریز|نویسنده=عباداله فتح الهی |ناشر=وب‌گاه دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی درمانی تبریز|نشانی=http://www.tbzmed.ac.ir/abouttabriz/history%20of%20tabriz%203.htm|تاریخ بازدید=۱۳ نوامبر ۲۰۰۸| پیوند بایگانی = http://www.webcitation.org/67VIIbpo5 | تاریخ بایگانی = ۰۸ مه ۲۰۱۲&amp;lt;/ref&amp;gt; هرچند [[احمد کسروی]] در کتاب [[آذری یا زبان باستان آذربایجان (کتاب)|آذری یا زبان باستان آذربایجان]] توجیهات از این دست را عامیانه و نادرست می‌داند.&amp;lt;ref&amp;gt;احمد کسروی (۱۳۲۲)، صفحهٔ ۹&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پیش از اسلام ===&lt;br /&gt;
شماری از محققان بر این عقیده‌اند که دژ «تارویی–تارمکیس» که نام آن در کتیبهٔ سارگن دوم (پادشاه [[آشور]] در بین سال‌های ۷۰۵ تا ۷۲۱ پیش از میلاد مسیح) آمده، در محل شهر کنونی تبریز قرار داشته‌است. در کتیبهٔ سارگن دوم این دژ را دژی بزرگ و آباد و دارای باروی تودرتو وصف شده‌است. این دژ بنابر نوشته‌های کتیبهٔ سارگن، محل نگه‌داری اسب‌های ذخیرهٔ سواران [[اورارتو]] بوده که در حملهٔ [[آشور|آشوری‌ها]] ویران شده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; اما این ارتباط تبریز با شهرها و قلعه‌های دوران [[ماد|مادها]]، مورد اختلاف بین محققین است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;&amp;gt; Tabrīz, Encyclopaedia of Islam&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در کتاب تاریخ ایران (چاپ [[دانشگاه کمبریج]]) آمده که تبریز در اوایل دورهٔ ساسانی (سدهٔ سه یا چهار میلادی) بنا شده یا به احتمال بیش‌تر در سدهٔ هفتم این واقعه روی داده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;&amp;gt;William Bayne Fisher, J. A. Boyle (1968), p. 14&amp;lt;/ref&amp;gt; شهر کنونی تبریز برروی خرابه‌های شهر «تَوْرِژ» (بارها) بنا شده‌است. تورژ یکی از بااهمیت‌ترین مراکز بازرگانی منطقه بوده و به عنوان پل ارتباطی میان شرق و غرب اهمیت فراوانی داشته‌است. این شهر در زمان حکمرانان [[اشکانیان|اشکانی‌تبار]] [[ارمنستان]]، پایتخت این منطقه بوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Encarta&amp;quot;&amp;gt;Tabrīz, Microsoft Encarta&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=&amp;quot;Faria&amp;quot;&amp;gt;Ramirez-faria, Carlos, p. 704&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ولادیمیر مینورسکی]] در دانشنامهٔ اسلام بیان می‌کند، این داستان که شاه اشکانی‌تبار ارمنستان به‌خاطر انتقام کشته‌شدن اردوان (آخرین پادشاه اشکانی) به دست [[اردشیر بابکان]] (بنیان‌گذار سلسلهٔ [[ساسانیان|ساسانی]]) تبریز را اشغال کرده و این شهر را پایتخت ارمنستان قرار داده، تنها براساس نوشته‌های واردان (تاریخ‌نگار ارمنی در سدهٔ چهاردهم میلادی) در منابع قدیمی به چنین چیزی اشاره نشده و این روایت ریشه‌ای عامیانه دارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پس از اسلام ===&lt;br /&gt;
[[پرونده:Azerbajan in Abbasid Caliphate.jpg|بندانگشتی|راست|جایگاه تبریز در نقشهٔ [[استان آذربایجان]] در دورهٔ [[خلافت عباسیان|خلفای عباسی]].]]&lt;br /&gt;
در زمان فتح آذربایجان به دست [[مردم عرب|اعراب]] در سال ۲۲ هجری، آن‌گونه که در کتاب فتوح‌البلدان [[احمدبن یحیی بلاذری|بلاذری]] آمده، توجه سپاه اعراب بیش‌تر متوجه شهر [[اردبیل]] بوده و حتی نامی از تبریز در فهرست شهرهایی که مرزبان پارسی از آن‌ها سربازگیری کرده بود، نیامده‌است. چنین پیدا است که تبریز همان‌گونه که «فاستوس بیزانسی» اشاره کرده، در سدهٔ چهارم میلادی ویران شده بود و در زمان حملهٔ اعراب، قریه‌ای کوچک بیش نبوده‌است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از فتح آذربایجان، گروهی از اعراب در آذربایجان ساکن شدند. در زمان خلافت [[ابوجعفر عبدالله منصور|منصور عباسی]] (۱۵۸–۱۳۶) و در حدود سال ۱۳۷ هجری، مردی به نام «رَوّاد» از قبیلهٔ «اَزْد» از قبایل مشهور [[یمن]] در تبریز مسکن گزید و پسران او اقدام به ساخت نخستین دیوار شهر کردند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به گفتهٔ [[یاقوت حموی]]، تبریز قریه‌ای بود تا آن‌که رواد ازدی در زمان [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] به آن درآمد. پس از رواد، پسرش «وجنا» با برادرانش در آن‌جا قصرها ساختند و گرد شهر دیوار کشیدند. سپس مردم به آن شهر درآمدند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;yaq&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
نویسندگانی مانند [[ابن خردادبه|ابن خرداذبه]]،&amp;lt;ref&amp;gt;ابن خرداذبه، {{به عربی|''المسالک والممالک''}}، ۱۱۹–۱۲۰ و ۲۱۳.&amp;lt;/ref&amp;gt; [[احمدبن یحیی بلاذری]]&amp;lt;ref&amp;gt;Al-Balâdhuri, ''The origins of the Islamic state vol 2'' 27&amp;lt;/ref&amp;gt; و [[طبری]]، تبریز را در بین شهرهای کوچک آذربایجان نام برده‌اند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; درحالی که [[مطهر بن طاهر مقدسی]] شهر را تحسین کرده و هم‌عصر او [[ابن حوقل]] (حدود ۳۶۷ هجری) تبریز را آبادتر از اغلب شهرهای کوچک آذربایجان می‌شمارد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
تبریز از نیمهٔ نخست سدهٔ سوم هجری روبه گسترش نهاد و اهمیت آن در منطقهٔ آذربایجان به اندازه‌ای بود که [[ابوالفضل جعفر متوکل|متوکل عباسی]] پس از زمین‌لرزهٔ سخت و ویرانگر تبریز در سال ۲۴۴ هجری، بی‌درنگ فرمان بازسازی شهر را صادر نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;&amp;gt; تبریز، دانشنامه جهان اسلام، جلد ۶، ت، زیرنظر: غلامعلی حداد عادل، تهران: بنیاد دائرةالمعارف اسلامی، ۱۳۸۰، سرواژه تبریز، ص۳۸۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; این شهر که در دورهٔ فرمانروایی «ابومنصور وهسودان روادی» روبه گسترش و آبادانی نهاده بود، در اثر زمین‌لرزهٔ سال ۴۳۴ هجری مجدداً به‌شدت آسیب دید.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt; به طوری که [[ناصرخسرو]] که در ۴۳۸ هجری از این شهر دیدن کرده، مساحت تبریز را ۱۴۰۰ در ۱۴۰۰ گام بیان کرده که بر این اساس به نظر نمی‌رسد مساحت شهر متجاوز از یک کیلومتر مربع بوده باشد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اعضای خاندان روادیان تا ۴۴۶ هجری با چند وقفه، حاکمان تبریز بوده‌اند. در این سال [[طغرل بیک|طغرل سلجوقی]]، وهسودان روادی را خراج‌گزار خود کرد و به گفتهٔ [[ابن اثیر]]، طغرل در سال ۴۵۰ هجری «مملان بن وهسودان» را به حکمرانی آذربایجان گماشت. [[آلپ ارسلان|الب ارسلان]] (جانشین طغرل) در ۴۶۳ حملان را از حکومت آذربایجان برکنار نمود و نزدیک به چهارصدسال فرمانروایی خاندان روادی را در این سرزمین پایان داد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;TabrizDaneshnaameEslamy&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در نوشته‌های تاریخی از دوران سلجوقی، اشاره‌های زیادی به تبریز یافت نمی‌شود. در [[راحةالصدور]] آمده که [[طغرل بیک|طغرل]] جشن ازدواج خود را با دختر خلیفه در نزدیکی این شهر برپا ساخت.&amp;lt;ref&amp;gt;ابن راوندی، ''راحةالصدور''، ۱۱۱.&amp;lt;/ref&amp;gt; بعد از وفات [[سلطان محمود غزنوی]] (به سال ۵۲۵ هجری) بین داود پسر سلطان محمود و مسعود برادر وی تنشی جهت تصاحب تبریز پیش آمد که در این میان داود پیروز شد و تبریز را مقر حکومت خود ساخت. آن‌چنان‌که از شواهد تاریخی برمی‌آید از زمان قزل ارسلان (۵۸۷–۵۸۲ هجری) به بعد تبریز برای همیشه پایتخت آذربایجان گردید. در ابتدای سدهٔ هفتم هجری [[مغول|مغولان]] دوبار به تبریز حمله بردند؛ ولی با دریافت غرامت بازگشتند. در سال ۶۲۷ هجری مغول‌ها در نهایت بر تمام آذربایجان و به ویژه تبریز دست یافتند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;DehKhoda&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:A06c5c97.jpg|بندانگشتی|راست|[[سفینه تبریز|سفینهٔ تبریز]]؛ از آثار برجستهٔ ادبی دورهٔ [[ایلخانان]] که در میان سال‌های ۷۲۱ تا ۷۲۳ هجری توسط ابوالمجد تبریزی در تبریز گردآوری و کتابت شده‌است.]]&lt;br /&gt;
[[پرونده:AbaqaOnHorseArghunStandingGhazanAsAChild.jpg|بندانگشتی|طرحی از [[اباقاخان]] بر روی اسب، [[ارغون‌خان]] ایستاده، و دوران کودکی [[غازان خان]].]]&lt;br /&gt;
در دوران [[ایلخانان]] تبریز به اوج شکوفایی خود رسید. ابقا خان دومین پادشاه از سلسله ایلخانان تبریز [[پایتخت]] قلمرو این سلسله برگزید و حکمرانی خود را بر قلمرویی از [[نیل]] تا [[آسیای مرکزی]] در این شهر ادامه داد. در زمان حکمرانی [[غازان پسر ارغون|غازان خان]] اصلاحات غازانی از این شهر شروع شد و بناهای متعددی از جمله بنای دو شهر اقماری و نمونه [[شنب غازان]] و [[ربع رشیدی]] در این دوران انجام شد. [[مارکو پولو]] جهانگرد ونیزی که در سال ۱۲۷۵ میلادی از این شهر عبور نمود دربارهٔ شکوفایی این شهر در آن دوران نوشته‌است:&lt;br /&gt;
{{نقل قول|... شهری بسیار بزرگ که با باغ‌های زیبا و دل‌انگیز محصور شده‌است. موقعیت قرار گرفتن این شهر بسیار عالی است بطوریکه کالاها از همه نقاط به این شهر آورده می‌شوند. بازرگانان لاتین و بویژه ژنوی‌ها به این شهر می‌روند تا کالاهایی که از سایر نقاط به این شهر آورده شده‌اند را خریداری نمایند.&amp;lt;ref&amp;gt; book | title=Marco Polo (1854) The travels of Marco Polo: the Venetian | publisher=G. Bell &amp;amp; sons | year=1854 | page=44&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Tabriz-16.PNG|بندانگشتی|طرحی از شهر تبریز در قرن شانزدهم میلادی توسط ریاضی‌دان عثمانی ماتریچی نسوه.]]&lt;br /&gt;
دوران شکوه تبریز در سلسله‌های [[تیموریان]]، [[قراقویونلو|قراقویونلوها]] و اوایل سلسلهٔ [[صفویان|صفویه]] ادامه یافت.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Cambridge&amp;quot;/&amp;gt; به سال ۱۵۰۰ میلادی (۹۰۶ هجری) [[شاه اسماعیل یکم|شاه اسماعیل]] تبریز را به تصرف خود درآورد و نخستین پایتخت ایران جدید در دورهٔ صفویه را در این شهر بنیان گذارد. در این زمان حدود دوسوم جمعیت ۳۰۰–۲۰۰ هزار نفری تبریز [[سنی|سنی‌مذهب]] بودند و به‌زودی سیاست‌های سختی جهت تحمیل مذهب شیعه بر سنیان اعمال گردید. نزدیکی این شهر به مرز ایران و [[امپراتوری عثمانی|عثمانی]] موجب شد که تبریز در برابر تهدیدهای این حکومت آسیب‌پذیر شود؛ به طوری که چندین‌بار به تصرف عثمانیان درآمد تا این که [[شاه طهماسب یکم|شاه طهماسب صفوی]] در سال ۱۵۱۴ میلادی (۹۲۰ هجری) پایتخت را از تبریز به [[قزوین]] منتقل نمود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در اواخر دوران صفویان این شهر دچار خسارات فراوانی شد. در زلزله مهیبی در ۱۷۲۱ میلادی هشتاد هزار تن از ساکنان این شهر کشته شدند. در اشغال مجدد شهر توسط عثمانی‌ها ما بین سال‌های ۱۷۲۴–۱۷۲۵ میلادی حدود دویست هزار تن از مردم این شهر بدست قوای عثمانی کشته‌شدند.&amp;lt;ref&amp;gt;Tadeusz Jan Krusiński, Du Cerceau (Jean-Antoine, père), The history of the revolution of Persia, Volume 1, Edition of Father du Cerceau, London 1728&amp;lt;/ref&amp;gt; در سال ۱۷۸۰ زلزله مهیب دیگری دویست هزار نفر دیگر از مردمان این شهر را کشت.&amp;lt;ref&amp;gt;web |first=David | last=Hall |url=http://across.co.nz/WorldsWorstDisasters.html |title=Worlds Worst Natural Disasters |publisher=Across.co.nz |date=1999-12-14 |accessdate=2012-04-02&amp;lt;/ref&amp;gt; این بلایای متعدد باعث شدند تا در اواخر قرن هیجدهم میلادی تبریز با جمعیتی سی‌هزار نفری به شهر ارواح مبدل شود. در این سال‌ها هر قسمتی از شهر توسط خانواده‌ای اداره می‌شد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:City Gate , Tabriz by Eugène Flandin.jpg|بندانگشتی|یکی از [[دروازه‌های تبریز]] قدیم (۱۸۴۱).]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با آغاز دوران قاجار این شهر دوباره مورد توجه قرار گرفت. تبریز در دورهٔ [[قاجاریان]] به عنوان ولی‌عهدنشین این سلسله انتحاب شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;EI&amp;quot;/&amp;gt; در این دوران با آغاز [[جنگ‌های ایران و روسیه]] این شهر یکی از اهداف قوای روس به شمار می‌رفت. روس‌ها سرانجام در سال ۱۸۲۶ این شهر را به تصرف خود درآوردند. با امضای توافقنامه صلح بین ایران و روس این شهر دوباره به دست نیروهای ایرانی افتاد. با آرامش حاصل از صلح [[عباس میرزا]] ولیعهد وقت و والی آذربایجان، شروع به اصلاحات گسترده و مدرن سازی این شهر نمود. او نقشه جدیدی از شهر تهیه کرد و به بازسازی بقایای تبریز پرداخت. سیستم پستی و مالیاتی نوینی را در این شهر بنیان نهاده‌شد و صنایع جدید و همچنین مدرنسازی نظامی ارتش ایران در این شهر آغاز شد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;Gregorian2008&amp;quot;&amp;gt; book|author=Vartan Gregorian|title=The Road to Home: My Life and Times|url=http://books.google.com/books?id=ItHMQaSdGEIC|date=30 June 2008|publisher=Simon and Schuster|isbn=978-1-4391-2911-1&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==پانویس==&lt;br /&gt;
منبع  [http://www.example.com ویکیپدیای فارسی]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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		<title>ماوراءالنهر</title>
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		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: صفحه جدید-نیازمند  ویرایش جزیی&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''فرارود''' یا '''ورارود'''&amp;lt;ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
|عنوان= ورارود (لغت‌نامهٔ دهخدا)&lt;br /&gt;
|نشانی= http://www.vajehyab.com/dehkhoda/%D9%88%D8%B1%D8%A7%D8%B1%D9%88%D8%AF&lt;br /&gt;
|ناشر=واژه‌ياب&lt;br /&gt;
&amp;lt;/ref&amp;gt; یا '''ماوراء‌النهر'''به سرزمینی گفته می‌شود که در میان دو رود [[آمودریا]] (جیحون) و [[سیردریا]] (سیحون) جای دارد. در واقع معنی اصلی آن، آن سوی رود آموی (جیحون یا آمودریا) است. این سرزمین بخشی از [[آسیای میانه]] است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این سرزمین در دوران [[هخامنشیان]] جزو [[ساتراپی]] [[سغد]] بوده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== نام ==&lt;br /&gt;
نام این منطقه در [[فارسی باستان]] ''«پردری»'' و در [[پهلوی]] ''«فرارود»'' بود. در سده اول هجری فاتحان عرب این منطقه را ماوراء‌النهر نام نهادند. [[فردوسی]] در مورد این تغییر نام می‌سراید&amp;lt;ref&amp;gt;* نویسنده=فروزانی، سید ابوالقاسم|مقاله=ضرورت‌ها و هدف‌های ترویج فرهنگ ایرانی در عهد سامانیان|ژورنال=آموزش تاریخ|تاریخ=زمستان ۱۳۸۴|شماره=شماره ۲|صفحه=ص ۳۱&amp;lt;/ref&amp;gt;:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اگر پهلوانی ندانی زبان|فرارود را ماور النهر خوان&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[پرونده:Aral map.png|thumb|left|300px|فرارودان]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== شهرها ==&lt;br /&gt;
برخی از شهرهای این سرزمین عبارت اند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[سمرقند]]، [[بخارا]]، [[چاچ]] ([[تاشکند]])، [[نخشب]] (نَسَف یا قـَرشی)، [[ترمذ|تِرمِذ]]، [[خیوه]]، [[شهر سبز]] (کَش)، [[اندگان]] ([[اندیجان]])، [[جیزخ|جیزّخ]] (دَیزَک یا دِزَک)، [[خوقند]] (قوقان)، [[کاث]] (ویرانه‌های این شهر نزدیک شهر بیرونی در استان قره‌قالپاقستان است.) و [[نمنگان]] در [[ازبکستان]] کنونی &lt;br /&gt;
* [[خجند]]، [[کولاب]]، [[استروشن|اِستَرَوشن]] ([[اراتپه|اُراتپه]] یا اسروشنه)، [[پنجکنت]] (زادگاه رودکی)، [[دوشنبه]]، [[قرغان تپه|قُرغان تپه]] در [[تاجیکستان]] کنونی&lt;br /&gt;
* [[ترکستان، قزاقستان|یَسی]] (حضرت ترکستان)، [[تراز]] و [[فاراب|پاراب]] ([[اترار|اُترار]])، [[اسپیجاب]] (سیرام در نزدیکی شیمکنت) در [[قزاقستان]] کنونی&lt;br /&gt;
* [[اوش]]، [[بلاساغون]] و [[اوزگند]] در [[قرقیزستان]] کنونی.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== منابع ==&lt;br /&gt;
{{پانویس}}&lt;br /&gt;
* [[شاهنامه]] - حکیم ابوالقاسم [[فردوسی]]&lt;br /&gt;
* لغت نامه - دهخدا&lt;br /&gt;
* پرنیان و حریر و ابریشم - میرزا شکورزاده&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:آسیای مرکزی]]&lt;br /&gt;
[[رده:سرزمین‌های کهن شرق]]&lt;br /&gt;
[[رده:سلوکیان]]&lt;br /&gt;
[[رده:خوارزمشاهیان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;&lt;/div&gt;</summary>
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		<title>دانشنامه اسلامی:صفحه های مورد نیاز/پروژه ایجاد صفحات اولویت دار</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%D8%AF%D8%A7%D9%86%D8%B4%D9%86%D8%A7%D9%85%D9%87_%D8%A7%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%DB%8C:%D8%B5%D9%81%D8%AD%D9%87_%D9%87%D8%A7%DB%8C_%D9%85%D9%88%D8%B1%D8%AF_%D9%86%DB%8C%D8%A7%D8%B2/%D9%BE%D8%B1%D9%88%DA%98%D9%87_%D8%A7%DB%8C%D8%AC%D8%A7%D8%AF_%D8%B5%D9%81%D8%AD%D8%A7%D8%AA_%D8%A7%D9%88%D9%84%D9%88%DB%8C%D8%AA_%D8%AF%D8%A7%D8%B1&amp;diff=52838"/>
		<updated>2015-11-11T03:53:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: حذف هندوستان&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;•  [[اثر (علم الحدیث)]] ‌(۴۳ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[اعلام (علم الحدیث)]] ‌(۴۳ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[خبر (علم الحدیث)]] ‌(۴۳ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[قرائت (علم الحدیث)]] ‌(۴۳ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[راشد (خلیفه عباسی)]] ‌(۳۸ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[کتابهای قواعد فقه]] ‌(۳۰ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[ظهور]] ‌(۲۷ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[غیبت امام زمان (عج)]] ‌(۲۵ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[وقایع الایام]] ‌(۲۲ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[البدایة و النهایة]] ‌(۲۲ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[ابن هشام]] ‌(۲۱ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[نماز اول وقت]] ‌(۱۹ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[خط تحریر]] ‌(۱۶ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[هرات]] ‌(۱۵ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[امام جمعه]] ‌(۱۴ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[روم]] ‌(۱۴ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[تبریز]] ‌(۱۳ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[رحمت]] ‌(۱۲ پیوند) (خ)&lt;br /&gt;
•  [[نیشابور]] ‌(۱۲ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[هند]] ‌(۳۰ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[حوزه علميه قم]] ‌(۱۲ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[رویت هلال ماه]] ‌(۱۲ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۶۰ هجری قمری]] ‌(۱۱ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[بیروت]] ‌(۱۱ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[ماوراءالنهر]] ‌(۱۱ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[مؤمن]] ‌(۱۱ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[سیر و سلوک]] ‌(۱۱ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[نفس اماره]] ‌(۱۱ پیوند) (خ)&lt;br /&gt;
•  [[شجره طیبه]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[ابن اسحاق]] ‌(۱۰ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[صوفیه]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[هدايت]] ‌(۱۰ پیوند) (خ)&lt;br /&gt;
•  [[فرهنگ اسلامی]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[قصص قرآن]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[البدايه والنهايه]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[علوم اسلامى]] ‌(۱۰ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[یزد]] ‌(۹ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[فقر]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[ابن حجر]] ‌(۹ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[مذهب]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[ابن ابى الحديد]] ‌(۹ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[فخر رازى]] ‌(۹ پیوند) (حی)&lt;br /&gt;
•  [[ارسطو]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[مسلمان]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱۱ هجری قمری]] ‌(۹ پیوند) (حق)&lt;br /&gt;
•  [[مسلمانان]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[مدح]] ‌(۹ پیوند) (ز)&lt;br /&gt;
•  [[صالحان]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مهاجر]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[صفات پسندیده]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سعدی]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سيره ابن هشام]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بيروت]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[فیلسوف]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تاريخ دمشق]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابوموسى اشعرى]] ‌(۸ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[محمد بن مسلم]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[زاهد]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حجامت]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[منافقين]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابوبصير]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[طبری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نجوم]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قاجار]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[زبير بن عوام]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[منابع اسلامى]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مجتهد]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[شیعیان]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نماز وتر]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[افلاطون]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[موصل]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بنى تميم]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[درایة الحدیث]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عزوجل]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱۰ هجری قمری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۲ هجری قمری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳ هجری قمری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۶ هجری قمری]] ‌(۷ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۷ هجری قمری]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۴ هجری قمری]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۶۴ هجری قمری]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۹ هجری قمری]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[استانبول]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عابد]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابن کثیر]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[شبهه]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[صحیح بخاری]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مباح]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قاهره]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[آفرينش]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[رحمت خدا]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سفينة البحار]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[آیات]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ظهور اسلام]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نماز طواف]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[غزوات]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[شجره طيبه]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[انساب الاشراف]] ‌(۶ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[یزد]] -&lt;br /&gt;
•  [[عرفه]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[دعای سمات]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بصیرت]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[احمد بن حنبل]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[معاذ بن جبل]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[امام جماعت]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حجاج بن يوسف]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[آيات]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بخارا]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[طبقات ابن سعد]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حمزه]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مفاتيح الغيب]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[زنا]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ملکوت]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مفسر]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[فلسفه اسلامی]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[خلقت]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ادبیات]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[اخلاق اسلامی]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سمرقند]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قرائت قرآن]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[كاشان]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[خيبر]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مرجع تقلید]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[معارف اسلامی]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قزوین]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حلب]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نماز مسافر]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[طبرستان]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[توابين]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[صحف]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عبدالله بن رواحه]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عرفان عملی]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[منبر]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱ هجری قمری]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱۴۸ هجری قمری]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱۶۹ هجری قمری]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۵ هجری قمری]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۵ هجری قمری]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[کافران]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قطب الدین راوندی]] ‌(۵ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[منافق]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[انعام]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بصيرت]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[أنوار التنزيل و أسرار التأويل]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابوالفرج اصفهانى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[كابل]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ارمنستان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حقوق]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ام کلثوم]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مشرکان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[جامعه اسلامی]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[رحمت الهی]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مازندران]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تصوف]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ملك الشعرا]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سيره حلبى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۲۹۶ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بلخ]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[دعای صباح]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[کاشان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مراجع تقلید]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[لندن]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[علماء شیعه]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[اصول عقاید]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سلوک]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قبض روح]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مشعرالحرام]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[منافقین]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[طوس]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مرو]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[آذربایجان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بصره‌]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سبحان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نعمت]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[نفرين]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بخاری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابن جوزی]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابن قتیبه]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[رى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[المغازی]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[شيراز]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مغول]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[دارالفنون]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[آتش دوزخ]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قوم نوح]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[علم صرف]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مشركان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[فاطمیان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[حكمت نظرى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مهدویت]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[جامعه]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[شفا]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[معاد جسمانى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[اصحاب رسول خدا]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[کنز العمال]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[خراسان رضوی]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عرب]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[دائرة المعارف]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[جهان اسلام]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تبريز]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[قرب الاسناد]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[المغازى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سعد بن ابى وقاص]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[عبدالرحمن بن عوف]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[بلاذري]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[فتوح البلدان]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[كوه طور]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[مسند الامام الرضا]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[أنساب الاشراف]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[جامعه اسلامى]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[فضل بن سهل]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[صحیح مسلم]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[ابورافع]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[جزيرة العرب]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۱۴ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۲۰۳ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۲۲۰ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۲۲ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۲۹ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۳۸ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۴۰ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۶ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[سال ۸ هجری قمری]] ‌(۴ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[البحر المحيط فى التفسير]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[الكشاف عن حقائق غوامض التنزيل]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[المحرر الوجيز فى تفسير الكتاب العزيز]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تاج التراجم فى تفسير القرآن للاعاجم]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تفسير الجلالين]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[تفسير غرائب القرآن و رغائب الفرقان]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[احكام القرآن(ابن العربى)]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[احكام القرآن(جصاص)]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[احكام القرآن(كيا هراسى)]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
•  [[التفسير المنير فى العقيدة و الشريعة و المنهج]] ‌(۳ پیوند)&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:پروژه های دانشنامه اسلامی]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
	</entry>
	<entry>
		<id>https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%DB%8C%D8%B2%D8%AF&amp;diff=52837</id>
		<title>یزد</title>
		<link rel="alternate" type="text/html" href="https://wiki.ahlolbait.com/index.php?title=%DB%8C%D8%B2%D8%AF&amp;diff=52837"/>
		<updated>2015-11-11T03:51:40Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: هند&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''یزد'''  مرکز [[استان یزد|استان]] و [[شهرستان یزد]] در مرکز [[ایران]] است. این شهر بین رشته‌های [[شیرکوه]] و [[خرانق]] و در دشتی گسترده به نام دشت یزد ـ اردکان قرار گرفته‌است. یزد اولین شهر خشتی و دومین شهر تاریخی جهان است&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.tribuneindia.com/2005/20050925/spectrum/main2.htm Many facets of Iran] » The Sunday Tribune&amp;lt;/ref&amp;gt;، به قسمی که اولین صندوق امانات جهان در ۱۷۰۰ سال پیش در حوضه تمدن این شهر بنا نهاده شده است.&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.melli.org/1394/02/25/1700-%D8%B3%D8%A7%D9%84-%D9%BE%DB%8C%D8%B4%D8%8C-%D9%86%D8%AE%D8%B3%D8%AA%DB%8C%D9%86-%D8%A8%D8%A7%D9%86%DA%A9-%D8%AC%D9%87%D8%A7%D9%86-%D8%AF%D8%B1-%D8%B4%D9%87%D8%B1-%DB%8C%D8%B2%D8%AF-%D8%B4%D8%B1/ نخستین بانک جهان در شهر یزد] » خبرنامه ملی ایرانیان&amp;lt;/ref&amp;gt; اوج آبادانی یزد از سدهٔ «هشتم هجری» به بعد بوده و [[اتابکان یزد]] از مهم‌ترین عوامل پیش‌رفت این شهر در سده‌های گذشته به‌شمار می‌روند.&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://yazdp.ir/c/portal/layout?p_l_id=PUB.1012.90&amp;amp;p_p_id=68_INSTANCE_p0bp&amp;amp;p_p_action=0&amp;amp;p_p_state=maximized&amp;amp;p_p_mode=view&amp;amp;struts_action=%2Ffixcontent_display%2Fview&amp;amp;directoryId=&amp;amp;region=&amp;amp;township=all&amp;amp;city=all&amp;amp;directBy=&amp;amp;masir=&amp;amp;showComplteContent=1&amp;amp;fixContentId=42&amp;amp;redirect=%2Fc%2Fportal%2Flayout%3Fp_l_id%3DPUB.1012.90%26p_p_id%3D68_INSTANCE_p0bp%26p_p_action%3D0%26p_p_state%3Dmaximized%26p_p_mode%3Dview%26township%3Dall%26directoryId%3D21%26struts_action%3D%252Ffixcontent_display%252Fview%26masir%3D3%253B%253Ball%253Ball%253Bdirectory%26region%3D%26directBy%3Ddirectory%26city%3Dall] » استان یزد برای گردشگران&amp;lt;/ref&amp;gt;یزد در منطقه جنوب شرق ایران واقع شده‌است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
این شهر به «شهر بادگیرها» و «شهر دوچرخه‌ها» معروف است.&amp;lt;ref&amp;gt;[http://iranicaonline.org/articles/badgir-traditional-structure-for-passive-air-conditioning بریتانیکا]&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== پیشینه نام یزد ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژهٔ یزد در لغت به معنای مقدس و پاک بوده و وجه‌تسمیهٔ این شهر، [[سرزمین مقدس]] و شهر خدا است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژه‌هایی که در [[تاریخ|تاریخها]]، [[سفرنامه|سفرنامه‌ها]]، سیاحت‌نامه‌ها و دیگر مدارک تاریخی مربوط به پیش از [[اسلام]]، [[ماد]] و [[پارت]] و نیز پیش از ورود [[آریایی‌ها]] تا دوران کنونی به یزد داده شده‌است عبارتند از:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
الف: ایز - ایزاطیخه – ایزدیس – ایساتیس – ایستخای&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ک: کت – کتروا - کته – کث – کثه – که – کهثه&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
گ: گث – گبست&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
د: دارالسیاده – داراشیعه – دارالعباده – دارالمومنین - دارلعلم&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ش: شهر ایزد&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ی: یزجی – یزد – یزدان شهر - یزدان گرد – یست – یسدی – یسن – یکس&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
واژه «یزش» به معنای ستایش و نیایش در زبان پارسی میانه‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[ابن بلخی]] در کتاب [[فارسنامه]] که در قرن ششم هجری تالیف شده نام اصلی یزد را «کثه» نامیده و احمد بن حسین بن علی کاتب نیز در قرن نهم در کتاب تاریخ یزد نام «کثه» را تایید نموده که معنی شهر کوچک است زیرا در [[پارسی باستان]] این واژه به معنای کوچک است زیرا کثه در مقایسه با ایساتیس که شهر بزرگی بود در حومه یزد قرار داشته و کوچک بوده‌است.&lt;br /&gt;
اصطخری درباره یزد می‌گوید:«کثه مرکز یزد، شهری است درحاشیه [[کویر]] دارای هوای خوب ودرعین حال واجد آسایش وتنعم شهرهای بزرگ است».&lt;br /&gt;
درزمان [[ساسانیان]] به فرمان [[یزدگرد یکم|یزدگرد اول]] در این محل شهری بناشد که آن را «یزدان گرد» نام نهادند و یزد گرد شهر را به دختر خود هدیه داد.&lt;br /&gt;
واژه یزد نامی است باستانی که ریشه در «یشت» یا «یزت» و «یسن» داردبا مفاهیمی چون ستایش، نیایش، پرستش، ایزد و... که یکی از فصول پنجگانه [[اوستا]] هم با یکی از این نامها یعنی یشت خوانده شده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعداز آمدن اسلام وگرایش مردم یزد به [[دین اسلام]] عنوان «دارالعباده» به این شهر داده شد. این نام توسط [[ملکشاه سلجوقی]] انتخاب شد زیرا [[علاء الدوله کالنجار]] تقاضای حکومت یزد را از وی کرده بود تا درآن جا به عبادت بپردازد.&amp;lt;ref&amp;gt;کتاب=نام مکان‌های جغرافیایی در بستر زمان|نویسنده = مهرالزمان نوبان|ناشر =انتشارات ما|چاپ=اول|شهر=تهران|صفحه=۲۰۸|سال=۱۳۷۶|شابک=964-6497-00-4&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[احمد کاتب]] مورخ یزدی قرن نهم هجری قمری نوشته‌است که:&lt;br /&gt;
«در سال ۵۰۴ [[هجری قمری]] [[ملکشاه]] [[سلجوقی]] حکومت یزد را به [[علاء الدوله]] [[کالنجار]] واگذار کرد و آن را دارالعباده نامید.»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اسامی منتسب به این شهر یعنی کثه (شهر دارای کتس=قنات)، فرافر (دژ بالایی)، هرفت (دژ نگهبانی)، ایساتیس (شهر دارای چشمه پوشیده نیرومند یا قنات نیرومند)، ایستیخای خبر [[بطلمیوس]] در صحرای [[کرمان]] (&amp;quot;ایس- تی-خا&amp;quot; به همان معنی ایساتیس) و یزد (شهر دارای چشمه پوشیده=قنات) نشانگر اهمیت دیرین و بزرگی این شهر کویری باستانی می‌باشند. وجه اشتقاق خود نامهای فارسی [[قنات]] یعنی [[کاریز]] (کا- ریز) و کتس (کت- اوس) هم [[چشمه ریزان]] و [[خانه چشمه|خانه چشمهاست]]. آثار این قنات نیرومند تاریخی دورتر از خود شهر یزد در بین کوههای [[شیرکوه]] و [[مهریز]] باقی‌مانده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== تاریخ و قدمت &amp;lt;ref&amp;gt;«[http://af.samta.ir/atlas تاریخچه یزد] » سامانه مدیریت تبلیغات اسلامی&amp;lt;/ref&amp;gt; ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
یزد اولین شهر خشتی و دومین شهر تاریخی جهان بعد از شهر [[ونیز]] [[ایتالیا|ایتالیاست]]. استان یزد از سرزمینهای کهن و تاریخی ایران زمین است.[[ابن حوقل]] در کتاب «ایران فی صورة الارض» درباره یزد می‌نویسد: «از مهمترین شهرهای ولایت اصطخر از سوی [[خراسان]] [[کثه|«کثه»]] است و آن حومه یزد و [[ابرکوه|ابرقویه]] می‌باشد... اما [[کثه]] که حومه یزد است شهری است در کنار [[بیابان]] و هوای آن خشک سالم است و مانند شهرهای کوهستانی فراخ نعمت است و روستایی دارد که محصولش ارزان است. بیشتر بناهای آن دراز شکل است و از گل ساخته شده. در آنجا شهری است استوار که قلعه‌ای با دو دروازه آهنین دارد: یکی به نام ایزد(باب ایزد) و دیگری در مسجد(باب‌المسجد) که نزدیک [[مسجد جامع یزد|مسجد جامع]] است. این جامع در ربض قرار دارد و آبهای آن از [[قنات]] تامین می‌شود...»&amp;lt;ref name=&amp;quot;ابن حوقل&amp;quot;&amp;gt; کتاب | تاریخ بازبینی=۱۴ مه ۲۰۱۳ | ترجمه=دکتر جعفر شعار | زبان=فارسی | سال=۱۳۶۶ | عنوان=ایران فی صورة الارض | مکان=تهران | ناشر=امیرکبیر&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
در بعضی از منابع بنای اولیه برخی از شهرهای این استان چون (میبد) را به سلیمان پیغمبر، (یزد) را به ضحاک و اسکندر مقدونی و (ابر کوه) را به [[ابراهیم پیغمبر]] نسبت داده‌اند. این بیانگر قدمت و دیرینگی پیشینیه تاریخی و فرهنگی سرزمین و مردم این دیار است. مجموعه آثار باستانی پراکنده موجود در این استان نیز به سهم خود گویای این پیشینه تاریخی است. آثاری چون دست افزارهای سنگی بدست آمده از دره‌های شیر کوه، نگاره‌های روی تخت سنگ کوه ارنان، تکه سفالهای منقوش [[نارین قلعه]] [[میبد]] – متعلق به [[دوره ایلامی]]، غارهای استان و آثار معماری و شهر سازی باستانی و... نشان می‌دهد مدنیت یزد، در چهار کانون باستانی ([[مهریز]] و [[فهرج]])، (یزد)، (رستاق و [[میبد]]) و ([[اردکان (یزد)|اردکان]]) متمرکز بود. پژوهشگران این منطقه را که در مسیر شاهراه‌های باستانی (ری – کرمان) و (پارس – خراسان) قرار داشت، جزء سرزمینهای دوردست مادها شمرده‌اند&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
احمد بن حسین بن علی کاتب یزدی، می‌نویسد : «هنگامی که عده‌ای از بزرگان ایران در ری علیه [[اسکندر]] مقدونی به مخالفت پرداختند، اسکندر آنان را دستگیر کرد و خواست که همراه خود به استخر [[استان فارس|فارس]] ببرد، چون به ناحیه‌ی یزد رسید، زندانیان را درچاهی محبوس کرد و آن محل را کِثَه (به [[یونانی]] یعنی زندان) نامید. پس از اینکه [[اسکندر]] یزد را ترک گفت، نگهبانان به کمک زندانیان به آبادانی و عمران یزد همت گماشتند»&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
برخی از جغرافی نگاران، تاریخ ساخت یزد را به [[یزدگرد اول]]، [[ساسانی]] نسبت می‌دهند که وجه تسمیه­ی یزد در ارتباط با نام وی و واژه­ی «یزش» به معنی ستایش و نیایش در زبان فارسی میانه است.&lt;br /&gt;
[[بهرام گور]] نیز در هنگام حرکت خود به سوی [[خراسان]] چون به ولایت کثه (یزد) رسید، بیماری وی اندکی بهبود یافت و این سرزمین مبارک داشت و دستور داد در آنجا شهری بسازند و چون به نام یزدان می‌ساخت آن را «یزدان گرد» نام نهاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
چون [[بهرام گور]] درگذشت یزدگرد به پادشاهی رسید. وی دو پسر داشت به نام شاه فیروز و شاه بلاس. بعد از مدتی یزدگرد، یزد را به دو فرزندش بخشید و آن دو شهر را بین خود تقسیم کردند. شاه فیروز دو ده در ولایت یزد ساخت، یکی «فیروز آباد مجو مرد» و دیگری «فیروز آباد میبد».&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
زمانی که [[انوشیروان]] به حکومت رسید، یزد را به دختر خود «مهرنگار» بخشید و وی را از [[مداین]] به یزد فرستاد و در آنجا ساختمان‌های زیادی ساخت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در هشت فرسنگی یزد دهی ساخت و آن را «مهرگرد» نام گذاشت و اکنون آن قریه را «مهریجرد» می‌گویند. هم‌چنین در کنار میبد دهی ساخت و آن را «مهرجرد» نام نهاد و برادر وی «شاه هرمز» در جنب مهریجرد دهی ساخت و آن را «هرمیز» نام گذاشت که اکنون به «خورمیز» شهرت دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
پس از [[انوشیروان]] [[خسروپرویز]] به پادشاهی رسید. وی ولایت یزد را به دو دختر خود به نام‌های ایران دخت و توران دخت بخشید و دستور داد دهی بسازند و آن را «توران پشت» نام نهاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
توران دخت هشت ماه پادشاهی کرد و بعد درگذشت. بعد از وی ایران دخت به سلطنت رسید. وی نماینده‌ای به نام «ابرند» به یزد فرستاد و به وی دستور داد که بر عمارت و آبادی یزد بیفزاید. ابرند نیز در دو فرسنگی شهر یزد ده جدیدی احداث کرد و آن را «ابرند آباد» نام نهاد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== [[اتابکان یزد]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اتابکان یزد نزدیک به ۱۴۰ سال بر این خطه حکومت کردند. با کشته شدن فرامرز بن علی در جنگ با خان فتای، [[سلطان سنجر]]، حکومت یزد را به دختران فرمانده خود که پسری نداشت واگذاشت و رکن الدین سام از سرداران سپاه فرامرز را برای اداره یزد به اتابکی آنان گماشت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
رکن الدین سام نخستین ایمر این خاندان به علت پیری و ناتوانی در اداره حکومت در سال ۵۸۴ ه .ق جای خود را به برادر کوچکش عز الدین لنگر سپرد. با مرگ عزالدین در سال ۶۴۰ ه .ق ورد انزور به حکومت رسید و در سال ۶۵۲ ه .ق حکومت به ابو منصور اسفهسالار مشهور به قطب الدین رسید. مادر او مریم ترکان بناهای زیادی را در یزد ساخت و در دوره [[قطب الدین]] مغولان به ایران حمله کردند. اتابک چیرگی مغولان را پذیرفت و یزد را از سپاه [[مغول]] مصون داشت. با مرگ قطب الدین در سال ۶۲۶ ه .ق پسرش محمد بر تخت نشست و او نیز تا سال ۶۳۹ ه .ق حکومت کرد. پس از او به ترتیب سفلر شاه (متوفی ۶۴۹ ه .ق)، طفی شاه (متوفی ۶۷۰)، علاء الدوله (متوفی ۶۷۳) یوسف شاه (متوفی ۶۹۰) حکومت کردند. در دوره یوسف شاه در اثر بی احترامی او به فرستاده [[غازان خان]]، سپاه غازان وی به یزد حمله کرد و او مجبور به فرار به [[سیستان]] شد اما مردم یزد به همراه علما به نزد امیر محمد ابداجی فرمانده سپاه غازان رفتند و او را از ورود به داخل یزد بازداشتند. سرانجام سلسله اتابکان یزد در سال ۷۱۸ به دست [[امیر مبارز الدین]] برچیده شد و آخرین امیر سلسله اتابکان حاجی شاه فرزند یوسف شاه سرنگون گردید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دوره [[مغول]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در زمان حکومت [[سلطان قطب الدین]]، [[چنگیزخان]] مغول به ایران حمله کرد. وی سلطه مغولان را پذیرفت و جانشینانش به عنوان دست نشاندگان مغولان در یزد ابقا شدند و با کفایت و زیرکی یزد را از خشم مغولان مصون داشتند. در سایه امنیت و آرامش نسبی یزد، در این دوره بازرگانی و مبادله کالاهای مختلف رونق یافت. عوامل متعددی در بسط و توسعه بازرگانی دخیل بود از جمله این که ایالات جنوبی ایران تحت حاکمیت مغولان قرار گرفته بود، لذا کالاهای یزدی تا آن سوی آب‌های جنوبی ایران به خصوص [[هند|هندوستان]] راه یافت و تنها مشکل، حفظ و حراست راه‌های منتهی به بازار فروش بود. راهداری و نگهداری راه‌های کشور از زمان مغولان مورد توجه قرار گرفت و حفاظت راه‌ها را اغلب به امرا و بزرگان واگذار می‌کردند. در اوایل قرن هشتم هر دو جنبه، یعنی گسترش شبکه راه‌های منتهی به یزد و هم امنیت آن حاصل شد و این دو از مواردی بود که نقش به سزایی در توسعه بازرگانی یزد و در نهایت شکوفایی اقتصادی و فرهنگی و اجتماعی این ایالت داشت. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== حاکمان [[آل مظفر]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اهمیت راهداری، امنیت و گسترش راه‌ها در گذشته به اندازه‌ای بود که خاندان مظفر از راهداری یزد و میبد به پادشاهی رسیدند. امیر مظفر، بزرگ این خاندان، از نوادگان [[غیاث الدین خراسانی]] بود، که در دربار [[ایلخان]] مغول وارد خدمت شد و به حکومت [[میبد]] رسید. پس از مرگ او، پسرش [[امیر مبارز الدین محمد]] در اوایل حکومت ابو سعید بهادر خان (۷۱۶ـ۷۳۶ ه .ق) ایلخان مغول به حکومت میبد و راهداری یزد انتخاب شد. در سال ۷۱۸ ه .ق، حاجی شاه بن یوسف، اتابک یزد را در نبردی شکست داد و به حکومت اتابکان یزد پایان داد و از سوی ابو سعید بهادر خان، به حکومت یزد نیز رسید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مبارز الدین محمد، پس از درگذشت ابو سعید بهادر خان، دم از استقلال زد و بر کرمان، شیراز و قلمرو حکومت ملوک [[شبانکاره]] در جنوب ایران چیره شد و در سال ۷۲۳ ه .ق حکومت [[آل مظفر]] را تشکیل داد. حکومت آل مظفر نقطه عطفی در تاریخ یزد به حساب می‌آید، چرا که برای نخستین بار این خطه در طی حیات دیرینه‌اش سلسله‌ای را در درون خود پرورانید که بیش از نیم قرن مقدرات صفحات جنوبی ایران را در دست داشت. آل مظفر، میبد را پایگاه اصلی خود قرار دادند و از اینجا به نواحی دیگر ([[کرمان]]، [[استان فارس|فارس]]، [[اصفهان]] و [[تبریز]]) چنگ انداختند، لذا یزد از نظر سیاسی و اقتصادی به چنان اعتبار و اهمیتی دست یافت که در هیچ عصری از تاریخ خود بدان منزلت نرسیده بود. اوج شکوفایی و عظمت فرهنگی یزد نیز مربوط به همین زمان است. در هیچ جای ایران به اندازه یزد دارالتعلیم به وجود نیامد، به گونه‌ای که یزد به «دارالعلم» ملقب شد. در مدارس، مساجد، دارالسیاده‌ها و خانقاه‌ها علوم مختلف رایج زمان تدریس می‌شد. ویژگی دیگر دوران آل مظفر رونق [[تصوف]] در یزد است. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دوره [[تیموریان]] ===&lt;br /&gt;
در سال ۷۹۵ ه .ق [[امیر تیمور]] در یورش سه ساله خود طومار دولت مظفری را درنوردید و یزد را به یکی از عمال خود سپرد. بعد از مراجعت تیمور به [[ماوراءالنهر]] گروهی از همدلی مردم نسبت به آل مظفر سوء استفاده کرده، به رهبری حاجی آبدار، یزد را از تصرف حاکم تیمور بیرون آوردند و سپس سلطان محمد پسر ابو سعید طبسی، یزد را به چنگ آورد و استقلال آنرا اعلام کرد. حاکمان تیموری، [[اصفهان]]، [[نایین]] و [[اردستان]] برای اعاده نظم به یزد لشکر کشیدند، اما شکست خوردند. به ناچار پیر محمد بن عمر شیخ بن تیمور، حاکم [[استان فارس|فارس]]، با سپاهی فراوان رهسپار یزد شد و به امر [[تیمور]]، حاکم [[سیستان]] هم همراهی و مساعدت کرد و از هر سو یزد را در محاصره گرفتند و در نهایت یزد را گشودند. کاشی کاری‌های مسجد جامع و [[میدان امیر چخماق]] و مسجد امیر چخماق، مصلای عتیق و ... از آثار این دوران است. مدارس و کتابخانه های متعددی چون مدرسه و کتابخانه قطبیه سرپلوک، مدرسه دارالصفا، مدرسه و کتابخانه یوسف چهره، مدرسه و کتابخانه اصیلیه سرد هوک و کتابخانه باوردیه تاسیس شدند، که نویسندگان و علما و مورخان نامی نظیر [[شرف الدین علی یزدی]] در آنها پرورش یافتند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دوره [[صفویه]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مقارن ظهور [[شاه اسماعیل صفوی]] طایفه های مختلفی در ایران حکومت می‌کردند. در سراسر ایران در حدود چهل حاکم مستقل و نیمه مستقل حکم می‌راندند و یزد در تصرف [[مراد بیک بایندری]] بود. شاه اسماعیل مدعیان را منکوب کرد و یزد را به تصرف خویش درآورد. اما افراط در تعصب مذهبی و کشتارهای بی‌مورد خسارت معنوی بزرگی به ایران و به ویژه یزد وارد کرد. نمونه آن کشتن دانشمند بزرگ آن روزگار [[قاضی میر حسین میبدی]] است. درگیری یزدی‌ها با عامل حکومت منجر به یورش محمد کره حاکم ابرقو به یزد شد. وی با کمک لرهای خویشاوندش یزد را گرفت و شاه اسماعیل جهت دفع وی به یزد آمد و بعد از مدتی محاصره، وی را دستگیر و در اصفهان سوزاند. نعمت الله باقی پسر امیر میرزا عبدالباقی (صوفی سرشناس) که در جنگ چالدران کشته شد، در زمان شاه طهماسب، دختر شاه اسماعیل را به زنی گرفت و حاکم یزد شد. وی دیوان خانه‌ای به نام «عباسیه» ساخت و مسجد [[شاه طهماسب]] در نزدیکی میدان بعثت از یادگارهای اوست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بعد از وی پسرش میر میران، حاکم یزد شد که غیاث آباد تفت از جمله یادگارهای اوست. مدرسه شفیعیه یادگار میرزا شفیع از حاکمان یزد در این دوران است. در عصر صفوی بازرگانی ایران رواج و اهمیت زیادی یافت، به ویژه ابریشم و منسوجات ایران در بازارهای اروپایی به خوبی معرفی شد و بازرگانان خارجی به ایران روی آوردند. از یک سو بازرگانان اروپایی و از سوی دیگر تجار هندی از طریق راه‌های زمینی بین اصفهان و [[دهلی]] در رفت‌وآمد بودند و یزد به علت داشتن [[ابریشم]] و منسوجات مرغوب و موقعیتی که در مسیر راه زمینی داشت رونق و اهمیت زیادی یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در زمان یورش افغانها به ایران، یزدی‌ها به رهبری میرزا عنایت سلطان دلاوری‌های فراوانی از خود نشان دادند. [[محمود افغان]] در تصرف یزد ناکام ماند و عاقبت یزد را رها کرد و اصفهان را فتح کرد. [[اشرف افغان]] جانشین محمود چهار سال با یزدی‌ها و عنایت سلطان جنگید و عاقبت با حیله بر او و دودمانش دست یافت و به استثنای مؤمن خان و محمد تقی خان، خواهر زادگان عنایت سلطان، همه را به قتل رساند. مؤمن خان، از جانب [[نادرشاه افشار]]، حاکم کرمان شد و محمد تقی خان و فرزندانش تا اواخر زمان قاجار در نقش حاکم یا مستوفی یزد خدمت کردند. این خاندان خدمات ارزنده‌ای به یزد کردند و آثار و بناهای فراوانی در یزد ساختند. [[باغ دولت آباد]]، باغ ناصریه، مدرسه خان، میدان خان، بازار خان، بازار قیصریه و ... از آثار این خاندان است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دوره [[زندیه]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
از فرماندارانی که در سلطنت [[زندیه]] به یزد آمده‌اند از زین العابدین خان و بعد از او عبدالرحیم خان نام برده شده است. عبدالرحیم خان به آبادی و عمران میل زیادی داشت و مزرعه رحیم آباد را که جزء حومه یزد است احداث نمود. همچنین مدرسه عبدالرحیم خان که اکنون با عنوان دبستان همت است از بناهای اوست. او در سال ۱۲۰۱ ه .ق مرحوم شد. در سال ۱۳۰۹ ه .ق لطفعلی خان زند (آخرین جانشین [[کریم خان زند]]) پس از واقعه ایرج به [[لار]] رفت و چون نتیجه‌ای نگرفت عازم راور [[کرمان]] گردید و چون حاکم کرمان قصد دستگیری او را داشت از طریق لوط و چهل پایه و نای بند خود را به [[طبس]] رساند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
امیر حسینخان طبسی مقدم [[لطفعلی خان]] و اتباعش را گرامی شمرد و بعد از ۵۰ روز پذیرایی سیصد سوار در اختیار او قرار داد. خان زند که در مدت اقامت خود در طبس از تخریب قلعه و حصار شیراز خبر یافت، لذا با همان نفرات کم به عزم تسخیر آن شهر حرکت کرد. در حوالی یزد محمد تقی خان یزدی به مخالفت برخاست و به مقابله آمد. لطفعلی خان با سپاه زند و سواران طبس در ناحیه [[اردکان]] بر خان یزدی حمله برد و افرادش را پراکنده و منهزم و گروهی را اسیر نمود و راه [[ابرقو]] را در پیش گرفت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دوره [[قاجاریه]] ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
با به حکومت رسیدن [[آقا محمد خان قاجار]]، محمد تقی خان که از سال ۱۱۶۱ (دوره [[افشاریه]]) حاکم یزد بود در مقام خود باقی‌ماند. با مرگ وی در سال ۱۲۱۳ ه .ق چند تن از فرزندانش از سوی [[فتحعلی شاه]] به حکومت رسیدند. فرزندان وی در دوره حکومت خود به عمران و آبادی یزد پرداختند. در سال ۱۲۳۶ ه .ق فتحعلی شاه فرزند ۳۲ ساله خود محمد ولی میرزا را به حکومت یزد گماشت. وی در دوران حکومت به تعمیر و گسترش برخی از بناها پرداخت. در سال ۱۲۴۳ ه .ق [[ظل السلطان]] به حکومت یزد انتخاب گردید اما پس از مرگ فتحعلی شاه قبل از آنکه ولیعهد رسمی محمد شاه از تبریز به پایتخت برسد از یزد به سوی تهران شتافت و به یاری برادران بر تخت سلطنت جلوس کرد و خود را عادلشاه نامید. اما پس از ۹۰ روز مغلوب شد و به [[روسیه]] گریخت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مردم ==&lt;br /&gt;
=== زبان ===&lt;br /&gt;
مردم یزد به زبان فارسی رایج با [[گویش یزدی]] سخن می‌گویند و بسیاری از واژه‌ها و ترکیبات زیبای فارسی را در گویش خود حفظ کرده‌اند. در استان یزد برخی ویژگی‌های گویشی میان شهرستانهای مختلف محسوس است. معتقدان به آیین [[زرتشتی]] در میان خود به [[گویش بهدینان|زبان بهدینی]] (گَورونی یا دری زرتشتی) سخن می‌گویند&amp;lt;ref&amp;gt;[http://www.cgie.org.ir/shavad.asp?id=123&amp;amp;avaid=5249 بهدینان]، دائرةالمعارف بزرگ اسلامی&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref name=iranica&amp;gt;|نویسنده = |نشانی= http://www.iranicaonline.org/articles/behdinan-dialect |عنوان= BEHDĪNĀN DIALECT | ناشر =دانشنامه ایرانیکا |تاریخ = |تاریخ بازبینی=&amp;lt;/ref&amp;gt; و به ویژه مراسم مذهبی خود را با این زبان انجام می‌دهند. گویش یزدی بخشی از فارسی دری (فارسی خالص و اولیهٔ ایرانیان) است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== دین ===&lt;br /&gt;
بیشتر مردم یزد [[مسلمان]] و [[شیعه دوازده امامی]] هستند. همچنین گروه بزرگی از [[زرتشتیان]] [[ایران]] در یزد ساکن هستند. اقلیت کوچکی از [[یهودیان]] نیز ساکن این شهر می‌باشند.&lt;br /&gt;
عموما استان یزد را در ایران به عنوان استان مذهبی قلمداد می کنند که دلیل آن توجه مردمان این دیار به بحث مذهب و تلاششان برای نگهداری آن است. گواه این مطلب را می توان برگزاری مراسمهای مختلف مذهبی شیعیان آن علی الخصوص مراسم نخل برداری (نخل نوعی سازه چوبی است که نماد طابوت امام حسین (ع) امام سوم شیعیان محسوب میشود) که در ماه محرم اجرا می شود اشاره نمود. همچنین در بخشی از سفرنامه فرد ریچاردز آمده است که &amp;quot;احساسات مذهبی مردم یزد خیلی جدی تر از اغلب شهرهای ایران است.&amp;quot; علاوه بر ایتکه بیشتر مردم یزد مسلمان هستند اما اقلیت های دینی دیگری که در بالا اشاره شد نیز حضور دارند. در اطراف شهر یزد و همچنین داخل آن زیارتگاههای مختلفی برای زرتشتیان به جشم می خورد که در هر ماه و یا فصل مراسمهای ویژه ی پیروان این دین در آنها برگزار می گردد. از آن جمله می توان به جشن سده اشاره نمود که یکی از مراسمهای معروف و عمومی زرتشتیان است و هر ساله در روز دهم بهمن ماه همزمان با مناطق دیگر ایران در یزد برگزار می شود.&amp;lt;ref&amp;gt; کتاب |نام خانوادگی= زنده دل|نام= حسن|کتاب= استان یزد| ناشر= نشر ایرانگردان|سال= ۱۳۷۷&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== جمعیت ===&lt;br /&gt;
بر اساس سرشماری عمومی نفوس و مسکن در سال ۱۳۹۰ جمعیت شهرستان یزد در مجموع ۵۸۲٬۶۸۲ نفر است که این تعداد در ۱۶۸٬۵۲۸ خانوار زندگی می‌کنند که از این جمعیت ۲۹۷٬۵۴۶ مرد و ۲۸۵٬۱۳۶ نفر زن هستند.&amp;lt;ref name=&amp;quot;AMAR&amp;quot;&amp;gt;«[http://www.amar.org.ir/Portals/2/census-90/jamiat/ostan-jamiat-21.xls نتایج سرشماری عمومی نفوس و مسکن ۱۳۹۰]» درگاه ملی آمار ایران&amp;lt;/ref&amp;gt; در این شهرستان ۴۸۴٬۱۶۷ نفر جمعیت شهری و ۴۲٬۰۰۹ نفر جمعیت روستایی اعلام شده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== جغرافیا&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.safar-bank.ir/forums/16-اطلاعات-ایران-شناسی/15-همه-چیز-درباره-استان-یزد همه چیز درباره یزد] » بانک اطلاعات صنعت گردشگری و توریسم&amp;lt;/ref&amp;gt; ==&lt;br /&gt;
قرار گرفتن در بخش مرکزی [[فلات ایران]] در برگیرنده نا مناسب ترین عوامل طبیعی چیره بر [[فلات]] مرکزی ایران نیز است. بارش اندک همراه با [[تبخیر]] شدید، دور بودن از دریا، نزدیکی با کویر خشک و پهناور نمک، رطوبت نسبی کم همراه با گرمای بسیار، از عواملی هستند، که یزد را به گونه یکی از خشک ترین مناطق ایران در آورده است. گذشته از آن، در این منطقه نوسان شدید درجه حرارت نیز وجود دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهرستان یزد در دره‌ای خشک و پهناور بین کوه‌های [[شیرکوه]] و [[خرانق]]، در ۱۵ درجه و ۵۳ دقیقه تا ۴۰ درجه و ۵۴ دقیقه درازای خاوری و ۴۶ درجه و ۳۱ دقیقه تا ۱۵ درجه و ۳۲ دقیقه پهنای شمالی واقع شده است. این شهرستان از سوی شمال به شهرستان‌های [[میبد]] و [[اردکان]] از خاور به شهرستان‌های [[اردکان (یزد)|اردکان]] و [[بافق]]، از باختر به استان [[اصفهان]] و از جنوب به شهرستان [[تفت]]، [[ابرکوه]] و [[مهریز]] محدود می‌شود. میانگین بلندی شهرستان یزد از سطح دریا ۱۲۰۰ متراست.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مناطق گردشگری ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== بناها و مکان‌های تاریخی ===&lt;br /&gt;
[[بادگیر باغ دولت آباد]]&lt;br /&gt;
[[آب انبار رستم گیو]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== بازارهای تاریخی&amp;lt;ref name=&amp;quot;NeginKavir&amp;quot;&amp;gt;یزد نگین کویر، مجموعه اطلاعات و راهنمای سیاحتی یزد، استانداری یزد، ۱۳۷۵&amp;lt;/ref&amp;gt; ====&lt;br /&gt;
* [[بازار خان]]&lt;br /&gt;
* [[بازار زرگری]]&lt;br /&gt;
* [[بازارچه پنجه علی]]&lt;br /&gt;
* [[بازار قیصریه (یزد)|بازار قیصریه]]&lt;br /&gt;
* [[بازار علاقبندی]]&lt;br /&gt;
* [[بازار کاشی‌گری]]&lt;br /&gt;
* [[بازار چیت سازی]]&lt;br /&gt;
* [[بازار مسجد ملااسماعیل]]&lt;br /&gt;
* [[بازار افشار]]&lt;br /&gt;
* [[بازار حاجی قنبر]]&lt;br /&gt;
* [[بازار محمد علی خان]]&lt;br /&gt;
* [[بازار جعفرخان]]&lt;br /&gt;
* [[بازار صدری]] (شاهزاده فاضل)&lt;br /&gt;
* [[بازار دروازه مهریز]]&lt;br /&gt;
* [[بازار مسگری]]&lt;br /&gt;
* [[بازار نخود بریزی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[خانه کلاه‌دوزها(موزه آب یزد)]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== میدان‌ها و لَـرد&amp;lt;ref&amp;gt;میدان محله‌ای را لَـرد گویند.&amp;lt;/ref&amp;gt;های تاریخی&amp;lt;ref name=&amp;quot;Afshar&amp;quot;&amp;gt;افشار، ایرج، یادگارهای یزد، جلد دوم (شهر یزد)، انتشارات انجمن آثار ملی، ۱۳۵۴&amp;lt;/ref&amp;gt; ====&lt;br /&gt;
[[میدان امیرچقماق]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[میدان خان و بازارهای اطراف|میدان خان]]&lt;br /&gt;
* [[میدان بعثت]]&lt;br /&gt;
* [[میدان قلعه]]&amp;lt;ref&amp;gt;در حال حاضر اثری از این میدان برجای نمانده‌است.&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
* [[میدان امیرچخماق|میدان امیرچقماق]]&lt;br /&gt;
* [[میدان وقت و ساعت]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد آسیاب]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد باجوردی]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد تازیان]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد خواجه خضر]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد فهادان]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد کیوان]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد گودال مصلی]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد کوچه میرقطب]]&lt;br /&gt;
* [[لَـرد مشیر]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== مساجد تاریخی و معروف&amp;lt;ref name=&amp;quot;Afshar&amp;quot;/&amp;gt; ====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[مسجد جامع یزد]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد امیرچخماق|مسجد امیرچقماق]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد سرریگ]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد ملا اسماعیل|مسجد ملااسماعیل]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد شاه طهماسب]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد فرط]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد حظیره]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد بیاق خان]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد جامع اهرستان|مسجد اهرستان]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد شاه یحیی(قلعه کهنه)]]&lt;br /&gt;
* [[مسجد بزرگ پشت باغ آب انبار رباط|مسجد بزرگ پشت باغ]]&lt;br /&gt;
در محلات تاریخی یزد، در حدود ۳۰ مسجد دیگر را نیز می‌توان نام برد، که در مقیاس کوچکتر، نقش «مساجد محله‌ای» را ایفا می‌کنند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== محلات تاریخی ====&lt;br /&gt;
مسلماً بارزترین خصوصیت شهر یزد را می‌توان وجود محله‌های قدیمی و سنتی با کوچه پس کوچه‌های خشت و گلی در هم تنیده، بازارها، مساجد، حمام و خانه‌های آن دانست.&amp;lt;ref&amp;gt; کتاب |نام خانوادگی= قهرمانی|نام خانوادگی= سپهر|نام= ابوالفتح|نام= مسعود|کتاب= یزد، نگین کویر مجموعه اطلاعات و راهنمای سیاحتی | ناشر= انجمن کتابخانه های عمومی یزد|سال= ۱۳۷۵&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
در مجموع ۷۷ محله از مجموعه محلات شهر یزد به دلیل قرار گرفتن در محدوده بافت تاریخی و یا در حریم آن، در سال ۱۳۸۴ و با شماره '''۱۵۰۰۰'''، تحت عنوان '''«بافت تاریخی یزد»''' به [[آثار ملی ایران|ثبت آثار ملی]] رسیده‌اند.&amp;lt;ref&amp;gt;خادم زاده، محمد حسن، محلات تاریخی شهر یزد، نشر: سبحان نور، پایگاه میراث فرهنگی شهر تاریخی یزد،۱۳۸۶&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[['''مسجد امیرچقماق''']]&lt;br /&gt;
[['''دبیرستان ایرانشهر''']]&lt;br /&gt;
==== مراکز آموزشی قدیمی &amp;lt;ref name=&amp;quot;NeginKavir&amp;quot;/&amp;gt; ====&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[دبیرستان مارکار]]&lt;br /&gt;
* دبیرستان ایرانشهر&lt;br /&gt;
* [[دبیرستان کیخسروی]]&lt;br /&gt;
* [[مدرسه بدر]]&lt;br /&gt;
* [[دبستان خسروی]]&lt;br /&gt;
* [[دبستان دینیاری]]&lt;br /&gt;
* [[مدرسه اردشیری]]&lt;br /&gt;
* [[دبستان مهرنرسی‌آباد]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
==== دیگر آثار تاریخی&amp;lt;ref&amp;gt;در این فهرست از آثاری نام برده شده‌است که، قابل بازدید توسط گردشگران است.&amp;lt;/ref&amp;gt;&amp;lt;ref&amp;gt;اداره میراث فرهنگی یزد، یزد پردیس کویر(راهنمای گردشگری استان یزد)، تهران: یزدا،۱۳۸۹&amp;lt;/ref&amp;gt; ====&lt;br /&gt;
[[برج خاموشان(دخمه زرتشتیان)]]&lt;br /&gt;
* آب انبارها ([[آب‌انبار رستم گیو|رستم گیو]]،[[آب‌انبار شش بادگیر|شش بادگیری]])&lt;br /&gt;
* باغها ([[باغ دولت آباد]]،[[باغ خان]])&lt;br /&gt;
* زرتشتیان ([[آتشکده یزد|آتشکده زرتشتیان]]،[[دخمه زرتشتیان (یزد)|دخمهٔ زرتشتیان]])&lt;br /&gt;
* یهودیان ([[کنیسه کمال]])&lt;br /&gt;
* ارگ و برج و بارو ([[برج و باروهای یزد|برج و باروی یزد]]،[[ارگ حکومتی]]،[[قلعه اسدان]])&lt;br /&gt;
* امامزاده‌ها ([[امامزاده جعفر (یزد)|امامزاده جعفر]]،[[شاهزاده فاضل]]،[[امام زاده سید جعفر]]،[[سید فتح الرضا]])&lt;br /&gt;
* قبه‌ها و بقعه‌ها ([[آرامگاه دوازده‌امام|قبهٔ دوازده امام]]،[[آرامگاه سید رکن‌الدین|بقعه سیدرکن الدین]]،[[آرامگاه سید خلیل|بقعهٔ سیدخلیل]])&lt;br /&gt;
* خانه‌های تاریخی ([[خانهٔ رسولیان]]،[[خانهٔ عرب‌ها]]،[[خانهٔ لاری‌ها]]، [[خانه مرتاضیون (دکتر مرتاض)|خانه مرتاض]]،[[خانهٔ ملک‌التجار]])&lt;br /&gt;
* مدارس قدیمی ([[مدرسهٔ خان(یزد)]]،[[زندان اسکندر|مدرسهٔ ضیائیه]]([[زندان اسکندر]])،[[مدرسه شهاب الدین]]،[[مدرسه مصلی صفدر‌خان]])&lt;br /&gt;
* مجموعه مازاری‌ها(حناسایی‌ها) ([[مازاری جوشن]]،[[مازاری اتابکی]]،[[مازاری صلحی‌زاده]])&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== روستاهای شهرستان یزد ===&lt;br /&gt;
یکی از بهترین روستا های یزد میتوان به مَنشاد جای بسیار خوش آب و هوا اشاره کرد که تنها ۶۰km با شهر یزد فاصله دارد.&lt;br /&gt;
از مناطق روستایی یزد به روستاهای شمالی یزد در مسیر یزد اردکان، همچون [[اسلام‌آباد (میمونه)]]، [[بندر آباد]]، [[عـلی‌آباد]]، [[شمسی (اشکذر)]]، [[حسن‌آباد]]، [[حسـین آباد]] و غیره می‌توان اشاره نمود. در طرف دیگر یزد به سمت جنوب، به روستاهایی همچون [[احمد آبـاد]] و [[محمدآباد]] و [[دهـنو]] و... اشاره توان کرد. از روستاهای غربی یزد هم به روستای [[شحنه]] واز شرق به روستاهای منطقهٔ [[دُربید]] ازجمله [[دُربید]] و [[دَربید]] و [[طامهر]] و [[دشت ده]] و [[خورشید آباد]] و [[نیوک]] و [[تنوره]] و [[کلمند]] و [[انـجیره]] و [[نارستانه]] و [[مرزعه تراب]] اشاره می‌شود که بعضی از این روستاها مانند [[نارستانه]]، یکی از مناطق مقدس [[زرتشتیان]] می‌باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== اقتصاد ==&lt;br /&gt;
=== کشاورزی ===&lt;br /&gt;
یزد از دیرباز به خشکی و کم‌آبی شهره بوده و لقب کم باران‌ترین شهر کشور را داشته است. &amp;lt;ref&amp;gt;«[http://alef.ir/vdcfmjdy1w6djea.igiw.html?14wml کم باران ترین شهر کشور] » جامعه خبری تحلیلی الف&amp;lt;/ref&amp;gt; استان یزد که اکنون تنها یک درصد از زمینهای کشاورزی کل کشور را در اختیار داردودر فقر منابع آبی به سر می‌برد، در سال ۱۳۸۷ توانست بیش از ۱۲ میلیون تن محصول کشاورزی در بخش‌های گلخانه‌ای، زراعی و باغی به دست آورد.&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.agrofoodnews.com/news/details.php?EType=news&amp;amp;id=1860 مرکز تحقیقات کشاورزی] » پایگاه خبری صنعت غذا و کشاورزی&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
یزد در تولید محصولاتی نظیر [[روناس]]، پرورش [[کبک (پرنده)|کبک]] و [[بلدرچین]] رتبه نخست، تولید [[زعفران]] رتبه دوم، [[پسته]] رتبه سوم، [[بادام]] و [[انار]] رتبه پنجم و تولید گل‌های زینتی رتبه ششم را دارد.&lt;br /&gt;
[[گندم]]، [[جو (گیاه)|جو]]، [[ذرت]] دانه‌ای، روناس و [[یونجه]] از شاخص‌ترین تولیدات بخش زراعی و پسته، انار، بادام، [[خرما]]، [[انگور]]، [[زردآلو]] و [[زیتون]] نیز از شاخص‌ترین محصولات باغی استان یزد به شمار می‌رود که بسیاری از این محصولات در میزان تولید، در کشور رکورددار هستند. استان یزد همچنین در تولید محصولات گلخانه‌ای نیز در کشور حرف‌های بسیاری برای گفتن دارد،یزد هم‌اکنون رتبه ششم در تولید محصولات گلخانه‌ای را داراست و در تولید [[خیار]] گلخانه‌ای و گل توانسته به موفقیت‌های چشمگیری دست پیدا کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در سال زراعی ۹۱، بیش از هزار و ۱۱۶ هکتار از اراضی گلخانه‌ای استان یزد به کشت سبزی و صیفی اختصاص یافته که از این میزان سطح زیرکشت، بیش از ۳۴۳ هزار و ۴۰۰ تن محصول برداشت شده است.هم‌اکنون بیش از ۱۱ هکتار گلخانه زیرکشت گل‌های زینتی رفته که از این میزان سطح زیرکشت، بیش از ۱۹ میلیون شاخه گل برداشت شده است.البته تولیدات استان یزد تنها به بخش زراعی، باغی و گلخانه‌ای منحصر نمی‌شود و این استان در تولید محصولات دامی و پرورش دام نیز حرف‌های زیادی برای گفتن دارد.&lt;br /&gt;
در سال ۱۳۹۱، ۲۱۰هزار تن شیر، ۱۴هزار تن گوشت قرمز، بیش از ۴۵ هزار و ۵۰۰ تن گوشت [[مرغ خانگی|مرغ]]، بیش از ۱۸هزار تن [[تخم مرغ]]، ۲۳۰ تن [[عسل]]، ۶۹۰ تن [[ماهی]] و بیش از ۳هزار و ۲۰۰ تن انواع ماکیان دیگر تولید شده است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== صنایع یزد ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
در یزد صنایع بزرگی همچون [[نساجی]] [[فرش]]، نساجی پارچه‌های طرح دار و ساده، [[فولاد]] و [[معادن ایران|معادن]] آهن، معادن [[زغال سنگ|ذغال سنگ]] و [[معادن ایران|معادن]] [[سنگ]]، کارخانجات [[کاشی]]، کارخانه‌های [[کابل]] و [[فیبر نوری]] و [[صنایع غذایی]] جای گرفته‌است که با وجود این صنایع حدود ۵۳ درصد از مصرف برق در تعرفه صنعتی استفاده می‌شود که از نظر رتبه بندی کشوری نیز پنجمین استان صنعتی کشور شناخته می‌شود. صنعت زرگری یا [[مهندسی طلاسازی|طلا سازی]] در یزد از مهمترین و مشهورترین صنایع یزد در سطح کشور است. یزد با داشتن بیش ازسه هزار واحد صنعتی، در فهرست شهرهای دارای آلودگی بالای کشورایران قرار دارد.&lt;br /&gt;
برخی از شرکتها و کارخانجات مهم شهر یزد به شرح زیر است:&lt;br /&gt;
* ''' کارخانه یزد باف&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://yazdbaf.ir/fa/fhistory.htm تاریخچه شرکت یزد باف] » پایگاه رسمی شرکت یزد باف&amp;lt;/ref&amp;gt; ''' '''&lt;br /&gt;
کارخانجات یزدباف [[شرکت سهامی عام|(سهامی عام)]] در سال ۱۳۳۵ در شهر تاریخی یزد در زمینی به مساحت ۱۲۰ هزار متر مربع برای ایجاد کارخانجات [[ریسندگی]]، [[بافندگی]]، چاپ و تکمیل انواع پارچه‌های [[پنبه]] ای تاسیس گردید.&lt;br /&gt;
در حال حاضر شرکت یزدباف با سرمایه ثبت شده ۳۶٬۰۰۰٬۰۰۰٬۰۰۰ ریال وبیش از ۷۵۰۰ سهامدار در زمینی به مساحت ۲۷۰٬۰۰۰ متر مربع با مجموعه‌ای از مدرن ترین ماشین آلات اروپایی و دانش فنی روز در کنار تلاش شبانه روزی بیش از ۱۴۰۰ پرسنل متخصص و سخت کوش خود و با استفاده از بهترین مواد اولیه، تولید کننده انواع پارچه‌های پنبه‌ای و الیاف مصنوعی و مخلوط آنها به عنوان یکی از بزرگترین کارخانجات نساجی [[خاورمیانه]] مطرح می‌باشد.&lt;br /&gt;
* ''' کابلهای شهید قندی&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://sgccir.com/sg/pagecontent.php?rQV=8B0NyMjM1AkOyVmYtVnbklUZnFGc8BEMApTZwlHV05WZ052bjxHQwAkOlBXeUVmc1R3Y1JHdzxHQzgDQ6UGb0lGd درباره کابلهای شهید قندی] » پایگاه رسمی کابلهای شهید قندی&amp;lt;/ref&amp;gt; '''&lt;br /&gt;
در آبان ماه سال ۱۳۶۳ با هدف تولید انواع کابلهای مخابراتی، توسعه ارتباطات و ایجاد تحول در شبکه عظیم مخابراتی کشور، تحت پوشش [[وزارت پست و تلگراف و تلفن]] وقت در شهر یزد درزمینی به وسعت یک میلیون مترمربع و بازیربنایی معادل دویست هزارمترمربع همگام باآخرین فناوری روزجهان وبه عنوان پدیده‌ای نو درعرصه تولیدکابلهای مخابراتی تاسیس گردید.&lt;br /&gt;
فعالیتهای شرکت:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- تولیدکننده انواع کابلهای مخابراتی نوری، [[مسی]] و ترکیبی&lt;br /&gt;
- تنها تولیدکننده [[صفحه خورشیدی|پانلهای خورشیدی]] در کشور&lt;br /&gt;
- امکان سنجی، طراحی، مشاوره و آموزش در زمینه‌های پروژه‌های مخابراتی&lt;br /&gt;
- تولیدکننده کابلهای خاص برای مصارف [[گاز]]، [[نفت]]،[[پتروشیمی]]،[[راه آهن]]،[[مترو]] و [[کنترل ترافیک]] و...&lt;br /&gt;
- انجام پروژه‌های خدمات فنی ومهندسی&lt;br /&gt;
* ''' فولاد آلیاژی ایران&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.iasco.ir/SC.php?type=static&amp;amp;id=27 تاریخچه شرکت فولاد آلیاژی] » پایگاه رسمی شرکت فولاد آلیاژی ایران&amp;lt;/ref&amp;gt; '''&lt;br /&gt;
فولاد آلیاژی ایران از پیشرفته ­ترین و بزرگترین تولید کنندگان انواع [[فولاد آلیاژی]] و مخصوص در ایران و خاورمیانه و یکی از مدرن ترین کارخانجات فولادآلیاژی دنیا با ظرفیت تولید سالیانه ۱۴۰،۰۰۰ تن در فاز اول و ۲۰۰،۰۰۰ تن در فاز دوم می­باشد که در سال ۱۳۷۸ به بهره برداری رسید. کارخانجات فولاد سازی، نورد مقاطع سنگین، نورد مقاطع سبک، عملیات حرارتی و تکمیل کاری این شرکت، مجهز به پیشرفته­ترین تجهیزات و برخوردار از بالاترین سطح دانش فنی روز دنیا، امکان تولید فولادهای آلیاژی و مخصوص را با بهترین کیفیت و منطبق با استانداردهای بین‌المللی میسر ساخته است. محصولات این شرکت درصنایع نفت و [[پتروشیمی]]، ابزارسازی، ساخت لوازم [[پزشکی]] و جراحی، صنایع خودرو سازی، ماشین سازی و سایر صنایع کاربرد وسیع دارد.&lt;br /&gt;
* ''' گروه پیشگامان کویر&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.pishgaman.net/SC.php?type=static&amp;amp;id=1&amp;amp;mid=7 درباره گروه پیشگامان] » پایگاه رسمی گروه پیشگامان کویر یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; '''&lt;br /&gt;
- سال تاسیس: ۱۳۷۵&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- حوزه اصلی فعالیت: فناوری اطلاعات و ارتباطات&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- حوزه‌های توسعه‌ای: بانکداری، بیمه، حمل و نقل هوایی و ریلی، فیبر نوری زیر دریایی و...&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- اشتغال ایجاد شده: اشتغال مستقیم نزدیک به ۴۰۰ نفر و غیر مستقیم: بیش از ۱۵۰۰ نفر&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- تعداد شرکت‌ها: در حال حاضر ۲۶ شرکت&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- مدل اقتصادی: اقتصاد تعاونی&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- خدمات اصلی: سرمایه گذاری در حوزه ICT&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- خدمات فرعی: انواع نرم‌افزارهای تحت وب به سفارش مشتری، خدمات [[سامانه بازشناسی با امواج رادیویی]]، سیستم‌های هوشمند، [[ویدئو کنفرانس]]، سرورهای امنیتی و کلیه سرویس‌های [[ارزش افزوده]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
- گستره جغرافیایی فعالیت: نمایندگی مستقیم در استان‌های کرمان، اصفهان، قزوین، فارس، بوشهر، خراسان بزرگ، هرمزگان و در کشورهای کانادا، امارات، مالزی.&lt;br /&gt;
* ''' گروه ستاره کویر&amp;lt;ref&amp;gt;«[http://www.setarehkavir.com/j2/92/index.php?option=com_content&amp;amp;view=article&amp;amp;id=75&amp;amp;Itemid=470&amp;amp;lang=fa پیشینه گروه ستاره کویر] » پایگاه رسمی فرش ستاره کویر یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; '''&lt;br /&gt;
[[فرش]] ستاره کویر یزد اولین شرکت گروه ستاره کویر یزد می‌باشد.&lt;br /&gt;
شرکت‌های این گروه به تولید الیاف رنگی، نخ [[اکرلیک]] و [[پلی پروپیلن]] و بافت فرش ماشینی اشتغال دارند.&lt;br /&gt;
فرش ستاره کویر یزد و فرش خاطره کویر یزد شرکتهای بافندگی فرش ماشینی در این گروه هستند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
فرش ستاره کویر یزد که در سال ۱۳۶۰ تاسیس شد از ابتدای فعالیت همواره در سطح اول بازار فرش ماشینی کشور قرار داشته است.&lt;br /&gt;
در تداوم فعالیت‌های گروه، توسعه شرکت ستاره کویر در شرکت فرش خاطره کویر تبلور یافت. خاطره کویر که از مدرن ترین و پیشرفته ترین دستگاه‌های بافندگی فرش ماشینی بهره می‌برد، در سال ۱۳۷۵ تاسیس شد و هم اکنون در کنار ستاره کویر تنوعی بسیار چشمگیر از انواع [[گلیم]]، [[جاجیم]]، [[گلیم فرش]] و [[فرش]] را به بازارهای داخلی و خارجی عرضه می‌کند.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''نیروگاه سیکل ترکیبی شیرکوه'''&lt;br /&gt;
وجود [[نیروگاه سیکل ترکیبی شیرکوه]] در این استان باعث رونق بخش صنعت و زیرساخت‌های این استان بویژه در شبکه سراسری برق می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== معماری یزد ==&lt;br /&gt;
[[پرونده:Windcatchers in Yazd.jpg|چپ|250px|بندانگشتی|بنایی دارای چند [[بادگیر]] در یزد]]&lt;br /&gt;
* '''معماری قدیم یزد'''&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
مشخص‌ترین وجهه شهر، [[معماری]] خاص کویری آن است. [[بادگیر|بادگیرها]]، [[مناره|مناره‌ها]] و گنبدها مشخص‌ترین جنبه ظاهری معماری شهر است. در این معماری از [[بادگیر]] برای گرفتن جریان باد و خنک‌کردن فضای ساختمان به کار می‌رفته‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
بافت و ساخت معماری ویژهٔ منطقهٔ یزد از بارزترین نمونه‌های معماری خاص اقلیم‌های گرم و خشک در جهان است. تناسب آن با نیازها و شرایط اقلیمی- فرهنگی مردم منطقه، گذشته از زیبایی خاص این معماری، از ویژگی‌های آن است. در مرکز هر محله معمولاً حمام، بازارچه، آب انبار، مسجد، حسینیه، لرد، کارگاه‌های کوچک، جوی آب (برای دسترسی به قنات) قرار دارد که بسیاری از این امکانات هنوز پا برجا هستند.&lt;br /&gt;
[[مجتمع تجاری تفریحی ستاره یزد]]&lt;br /&gt;
* '''معماری جدید یزد''' &lt;br /&gt;
ایجاد گذرگاه‌های جدید غیر هم سطح همچون میدانهای امام حسین(ع)، شهدای محراب، معلم، شهید باهنر و گذرگاه تازه تاسیس میدان مهدیه همچنین&lt;br /&gt;
ایجاد مجموعه تجاری جدید مثل آریا و پردیس سینمایی تک در صفائیه یزد و مجتمع تجاری، تفریحی ستاره در میدان آزادی (باغ ملی) و مجتمع در حال ساخت بازار بزرگ شهر در منطقه صفائیه می‌توان اشاره کرد.&lt;br /&gt;
ایجاد مجتمع‌های مسکونی در مناطق مختلف از جمله صفائیه (مجتمع شقایق، هادی، فرهنگ و...)و شهرک رزمندگان.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ترابری ==&lt;br /&gt;
=== فرودگاه &amp;lt;ref name=&amp;quot;A&amp;quot;&amp;gt;«[http://yazd.airport.ir/HomePage.aspx?TabID=8029&amp;amp;Site=yazd.airport&amp;amp;Lang=fa-IR تاریخچه فروگاه یزد]» پایگاه فرودگاه یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; ===&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[فرودگاه]] یزد در سال ۱۳۴۸ در زمینی به مساحت ۵۷۵ هکتار تأسیس که در حاشیه جنوبی [[کویر مرکزی]] [[ایران]] و تقریباً در مرکز جغرافیایی کشور و در غرب شهر یزد در فاصله ۳/۵ ناتیکال مایل(حدود ۱۰ کیلومتری)از مرکز شهر قرار دارد. طول باند فرودگاه ۴۱۰۰ متر و عرض آن ۶۰ متر(۱۵ متر sholder)می‌باشد. این فرودگاه در محل تقاطع محورهای اصلی حمل و نقل شمــالی–جنوبی واقع شده و راه‌های هوایی بین‌المللی UL125 وUL124 و داخلی R663 , R654 و W5 از فراز آن می‌گذرد، در نتیجه اکثر هواپیماهای داخلی و خارجی اعم از نظامی و کشوری از فضای فرودگاه یزد عبور می‌کنند. این فرودگاه علاوه بر پروازهای برنامه‌ای و غیر برنامه‌ای که در حال انجام می‌باشد، می‌تواند در مواقع اضطراری مورد استفاده هواپیماها قرار گیرد، همان‌طور که در زمان [[جنگ ایران و عراق]] نیز مورد استفاده هواپیماهای نظامی بوده‌است و به عنوان بیس آموزشی شرکت‌های هواپیمائی تعیین گردیده بود، همچنین در حال حاضر دو فروند هواپیمای فوق سبک در حال انجام پروازهای آموزشی و تفریحی می‌باشند. فرودگاه در حال حاضر به صورت ۲۴ ساعته می‌باشد.&lt;br /&gt;
* ارتفــاع فرودگــاه از سطح دریــا ۱۲۳۰ متر (۴۰۵۵ پا) و برای هواپیماهای تا رده 200-747 B پیش بینی گردیده‌است.&lt;br /&gt;
* پارکینگ هواپیماها به ابعاد ۱۲۰×۴۲۰ متر می‌باشد که ظرفیت پذیرش آن یک فروند هواپیمای بدنه وسیع و سه فروند هواپیمای بدنه متوسط را به طور همزمان می‌باشد. این پارکینگ به وسیله دو تاکسی وی به باند مرتبط می‌باشد.&lt;br /&gt;
* محدوده منطقه تحت کنترل واحد مراقبت پرواز فرودگاه (CTR) دایره‌ای به شعاع ۳۰ مایل از دستگاه VOR/DME می‌باشد که تا ارتفاع ۱۷۵۰۰ پا از سطح دریا گسترش دارد.&lt;br /&gt;
* از نظر [[توپوگرافی]] در داخل این منطقه (CTR)دو رشته کوه موازی در فاصله تقریبی ۴۰ کیلومتر از یکدیگر قرار دارند که فرودگاه تقریباً در وسط این دو رشته کوه قرار دارد، در قسمت جنوب فرودگاه، [[شیرکوه]] در جهت شرقی–غربی امتداد یافته ولی خوشبختانه ارتفاعات موجود در نشست و برخاست هواپیماها اشکال ایجاد نمی‌کند و از این نظر فرودگاه از ایمنی بالایی برخوردار است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== راه آهن &amp;lt;ref name=&amp;quot;railway&amp;quot;&amp;gt;«[http://yazd.rai.ir/Site.aspx?ParTree=A09000501314 تاریخچه راه آهن یزد] » پایگاه اداره کل راه آهن یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; ===&lt;br /&gt;
اتصال به شبکه حمل و نقل ریلی و جابجایی مسافر و بار از طریق ناوگان ریلی از آرزوهای هر شهروندی می‌باشد. آرزوی مردم استان یزد به بهره‌مندی از راه‌آهن در تاریخ اول خرداد ماه سال ۱۳۵۰ محقق گردید. البته پروژه راه‌آهن جنوب‌شرق، در راستای اهداف متصور برای آن با عنوان راه‌آهن [[قم]] ــ [[زرند]] در سال ۱۳۱۷ آغاز گردید و بخش عمده‌ای از فعالیت‌های زیربنائی آن نیز انجام گرفت اما به دلیل اوضاع سیاسی کشور در این سال‌ها افتتاح و بهره‌برداری آن تا سال ۱۳۵۰ به تعویق افتاد. با طلیعه عصر انقلاب صنعتی و ایجاد کارخانه [[ذوب آهن اصفهان]] ضرورت دستیابی به منابع معدنی [[ذغال سنگ]] و [[سنگ آهن]] باعث گردید تا مسئولین وقت با اهمیت خاصی این پروژه عظیم اقتصادی را در اولویت کار خود قرار دهند. کلیه عملیات فنی و نقشه برداری‌ها به دست مهندسین و کارگران ایرانی در مدت زمانی بسیار کوتاه انجام یافت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[راه‌آهن جمهوری اسلامی ایران]] در یک شبکه گسترده و عظیم از خطوط، مهمترین نقاط حمل و نقل کشور را که در برگیرنده بنادر جنوب و شمال، مراکز صنعتی و اقتصادی از قبیل کارخانجات و مراکز اقتصادی و تجاری همچنین معادن عظیم مستقر در اقصی نقاط کشور را به یکدیگر متصل نموده‌است. این مجموعه گسترده تا سال ۱۳۹۰ در برگیرنده ۹۵۰۰ کیلومتر خط اصلی، در قالب ۱۸ اداره کل تقسیم‌بندی گردیده‌است.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اداره کل راه‌آهن یزد یکی از این ادارات کل ۱۸گانه راه‌آهن می‌باشد. این اداره کل در سال ۱۳۵۰ با اتصال به شبکه راه‌آهن به منظور بهره‌برداری از معادن سنگ آهن و ذغال سنگ جهت تغذیه [[کارخانه ذوب آهن اصفهان]]، فعالیت خود را آغاز نمود. در حال حاضر این اداره کل دارای ۶۸۰ کیلومتر خط اصلی می‌باشد. مرکز آن در ایستگاه یزد قرار دارد و با اتصال به ۴ اداره کل (شرق، اصفهان، هرمزگان و کرمان) سهم و اهمیت قابل توجهی را در شبکه حمل و نقل ریلی به خود اختصاص داده‌است. این اداره کل از خروجی ایستگاه [[بادرود]] در استان [[اصفهان]] شروع و در ایستگاه [[بافق]] به ادارات کل راه‌آهن [[کرمان]]، [[هرمزگان]] و شرق متصل می‌گردد. نقشه خطوط اداره کل راه‌آهن یزد به پیوست می‌باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
اهمیت استراتژیک اداره کل راه‌آهن یزد بدلیل واقع شدن در منطقه معدنی کشور و نقش آن در جابجایی و انتقال مواد معدنی همچنین اتصال بخش اصلی کریدورهای ترانزیتی ریلی راه‌آهن، اهمیتی قابل توجه می‌باشد. به گونه‌ای که مبتنی بر آمار عملکرد در دهه هشتاد در مجموع از حیث شاخص‌های عملکردی در راه‌آهن رتبه اول را کسب نموده‌است. کسب ۴۰? درآمد راه‌آهن در بین ۱۸ اداره کل بسیار حائز اهمیت و تحسین برانگیز می‌باشد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== پایانه مسافربری &amp;lt;ref name=&amp;quot;bus station&amp;quot;&amp;gt;«[http://yazdpayanehha.ir/history تاریخچه پایانه مسافربری یزد ] » سازمان پایانه های شهرداری یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; ===&lt;br /&gt;
در زمینی به مساحت ۵۷ هکتار حد فاصل جاده شهرک صنعتی و جاده ترانزیتی و بلوار شهید دهقان که متعلق به [[سازمان مسکن وشهرسازی]] بود طی مراحل قانونی تملک، و در تاریخ ۷۷/۱/۲۵ عملیات عمرانی پایانه آغاز شد و در تاریخ ۱۳۸۸/۱۰/۱۵ با تعطیلی پایانه قدیم، خدمات دهی به مردم در پایانه جدید آغاز شد. زیر بنا پایانه بزرگ حدود ۱۴۰۰۰ مترمربع شامل ساختمان، حیات مرکزی و رواق‌هامی باشد که هزینه حدود ۱۰۰،۰۰۰٫۰۰۰٫۰۰۰ریال است که توسط شهرداری یزد ساخته شده‌است. ۱۲ هکتار فضای جنگلی- ۲ هکتار فضای سبز تزئینی - ۱۷ مرکز تجاری عرضه سوغات وتنقلات، مطبوعات، میوه فروشی، اسباب بازی فروشی، محصولات فرهنگی وخدماتی – رستوران بزرگ ومجهز – نمازخانه بزرگ- پاسگاه نیروی انتظامی – کافی نت – کافی شاپ – ۱۶ دفتر فروش بلیط باامکانات کافی وبه روز به مساحت هرکدام ۳۵۰مترمربع در سه طبقه، محل استراحت رانندگان(یک واحد ۸۰مترمربعی)، اتاق مدیریت مشرف به سالن انتظار مسافر، شرکت وگیشه فروش بلیط - سرویس‌های بهداشتی متعدد(۶۴ چشمه)-تعداد۱۲۸ سکوی سوار شدن مسافر – پارکینگ خودروهای سبک به تعداد۳۰۰ واحد (۲۰۰ واحد مسقف و۱۰۰ واحد بدون سقف) - سیستم تهویه مطبوع – ساختمان اداری مناسب – سالن عمومی بسیار مناسب به مساحت ۱۵۰۰مترمربع – ۳۵۰۰۰مترمربع کف فرش و ۵۰۰۰۰ مترمربع آسفالت.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== رسانه ==&lt;br /&gt;
=== رادیو و تلویزیون &amp;lt;ref name=&amp;quot;yazd tv&amp;quot;&amp;gt;«[http://yazd.irib.ir/aboutus/date-yazd.html تاریخچه مرکز صدا و سیمای یزد ] » صدا وسیمای مرکز یزد&amp;lt;/ref&amp;gt; ===&lt;br /&gt;
[[صدا و سیمای مرکز یزد]] در تاریخ ۱۳۵۱/۱۱/۶ با یک فرستنده ۱۰ [[کیلووات]] و صرفاً به عنوان یک مرکز خبری و تقویت کننده رادیویی واقع در کیلومتر جاده یزد - [[کرمان]] کار خود را آغاز کرد. در سال ۱۳۵۳ با اضافه شدن یک [[فرستنده]] ۵۰ کیلو وات تلویـزیونی به عنوان تقویت کننده برنامه‌های شبکه سراسری ([[شبکه ۱ سیمای جمهوری اسلامی ایران|شبکه یک]]) این مرکز از حیث فنی تکمیل تر و به عنوان رادیو و تلویزیون محلی یزد نام گرفت. در بیست و پنج مهر ماه سال ۱۳۵۷ شبکه استانی صدای مرکز یزد با ظرفیت تولید و پخش ۳ الی ۴ هزار ساعت برنامه در سال بر روی [[فرکانس]] ۱۰۳۵ راه اندازی گردید. افتتاح شبکه استانی سیما با نام '''[[صدا و سیمای مرکز یزد|تابان]]''' در تاریخ ۱۳۸۲/۲/۲۸ با ظرفیت تولید بیش از هزار و صدساعت و پخش بیش از ۴۰۰۰ ساعت برنامه صورت گرفت. سطح پوشش برنامه‌های صدا و سیما یزد در سال ۱۳۸۳ با افتتاح سیستم uplink به خارج از مرزهای استان و حتی خارج از کشور گسترش یافت. شبکه استانی تابان هم اکنون بر روی ماهواره‌های Asiasat و Badrsat پخش می‌شود.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
=== سینما ===&lt;br /&gt;
شهر یزد دارای ۵ سینما است:&lt;br /&gt;
* سینما فرهنگ&lt;br /&gt;
* سینما ایران&lt;br /&gt;
* سینما جام جم&lt;br /&gt;
* پردیس سینمایی تک (۵ سالن)&lt;br /&gt;
* سینما دانش آموز (منحصر به برگزاری مراسمهای خاص اداره کل آموزش و پرورش)&lt;br /&gt;
در حال حاضر، سینما فرهنگ و سینما ایران بعنوان قدیمی‌ترین سینماهای یزد چند سالی است، تعطیل شده‌اند؛ حتی خبرهایی مبنی بر فروش و تغییر کاربری یکی از آنها نیز به میان آمده بود.&amp;lt;ref name=&amp;quot;ilna&amp;quot;&amp;gt;خبرگزاری کار ایران (ایلنا) | تاریخ بازبینی=۱۹ سپتامبر ۲۰۱۳ | نشانی=http://ilna.ir/news/news.cfm?id=35736&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== پارک‌ها و فضای سبز ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
شهر یزد دارای ۱۲ پارک بزرگ (شهری) و ۱۵۳ پارک کوچک (محله‌ای) می‌باشد.&amp;lt;ref name=&amp;quot;khabarnegaran&amp;quot;&amp;gt;باشگاه خبرنگاران | تاریخ بازبینی=۱۹ سپتامبر ۲۰۱۳ | نشانی=http://www.yjc.ir/fa/news/4546507/نصب-وسایل-جدید-بازی-در-پارک‌های-یزد-پارک‌های-محله‌ای-رونق-می‌گیرند&amp;lt;/ref&amp;gt;&lt;br /&gt;
از این میان، پر رونق ترین پارک‌های یزد، عبارتند از:&lt;br /&gt;
* پارک کوهستان (در حال توسعه)&lt;br /&gt;
* پارک شادی (دارای شهر بازی)&lt;br /&gt;
* پارک مارکار (پارک بزرگ شهر)&lt;br /&gt;
* پارک غدیر&lt;br /&gt;
* پارک هفت تیر&lt;br /&gt;
پارک کوهستان یزد یکی از پر رونق ترین فضاهای سبز شهری یزد محسوب می شود که فاز دوم آن از جمله ست های بازی، کف پوش، آلاچیق در حال ساخت است. همچنین نصب آب‌نمای هارمونی موزیکال در این پارک در حال پیگیری است.&amp;lt;ref name=&amp;quot;khabarnegaran&amp;quot;/&amp;gt;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== ره‌آورد &amp;lt;ref name=&amp;quot;NeginKavir&amp;quot;/&amp;gt; ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* '''[[شیرینی]]:'''&lt;br /&gt;
::[[قطاب]]، [[پشمک]]، [[باقلوا]]، [[کیک یزدی]]، [[لوز|لوزهای پنجگانه]]، [[حاجی بادام]]، [[سوهان]] ، [[نان برنجی]].&lt;br /&gt;
* '''[[پارچه]]:'''&lt;br /&gt;
::[[شعربافی]]، [[ترمه|ترمه یا انگشت بافت]]، [[زربفت|زری‌دوزی]]، [[مخمل]]، [[دارایی‌بافی|دارایی‌بافی(ایکات)]]، [[شمد]]، [[چادرشب]]، روتختی، [[دستمال یزدی]].&lt;br /&gt;
* '''روانداز و زمین پوش:'''&lt;br /&gt;
::[[قالی]]، [[قالیچه]]، [[گلیم]]، [[سجاده]]، [[زیلو]]، [[پتو]]، سفره، بقچه، روفرشی، [[لنگ]]، [[حصیربافی|حصیر]].&lt;br /&gt;
* '''خاکینه:'''&lt;br /&gt;
::[[سفال]]، [[سرامیک]]، [[کاشی]].&lt;br /&gt;
* '''سایر:'''&lt;br /&gt;
::[[انار]]، [[ارده]]، [[حلوا ارده]]، [[گیوه]]، [[سریشم]]، [[مهندسی طلاسازی|زیورآلات طلا]].&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== آب وهوا ==&lt;br /&gt;
یزد، دارای آب و هوای اقلیمی ـ گرم و خشک و بیابانی است و نوسان دما در تابستان و زمستان و حتی در شب و روز بالا و متغیراست و این از ویژگیهای آب و هوایی منطقه به شمار می‌رود، از این نگاه می‌توان گفت: یزد دارای دو فصل است فصل بلند گرما (از اسفند تا مهر) و فصل کوتاه سرما (از آبان تا اواخر بهمن).&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مشاهیر یزد ==&lt;br /&gt;
مقالهٔ اهالی مشهور این شهر را در [[:رده:اهالی یزد]] ببینید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[سید محمد خاتمی]]&lt;br /&gt;
* [[سید رضا حسینی‌نسب]]&lt;br /&gt;
* [[محمد رضا عارف]]&lt;br /&gt;
* [[محمد صدوقی]]&lt;br /&gt;
* [[سید ضیاءالدین طباطبایی]]&lt;br /&gt;
* [[رضا پاک‌نژاد]]&lt;br /&gt;
* [[مهدی آذریزدی]]&lt;br /&gt;
* [[محمدعلی اسلامی ندوشن]]&lt;br /&gt;
* [[محمد رحمتی]]&lt;br /&gt;
* [[محمدعلی جعفری]]&lt;br /&gt;
* [[سید علی خاتمی]]&lt;br /&gt;
* [[محمد فرخی یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[شمس کسمایی]]&lt;br /&gt;
* [[شیخ حسن کرباسی یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[شیخ عبدالکریم حائری یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[مهدی حائری یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[پهلوان ابراهیم یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[ابوالقاسم قلم‌سیاه]]&lt;br /&gt;
* [[محمدتقی مصباح یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[محمدحسن احمدی فقیه یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[موشه کاتساو]]&lt;br /&gt;
* [[جیحون یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[سید محمدکاظم طباطبایی یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[ایرج افشار]]&lt;br /&gt;
* [[محمدکریم پیرنیا]]&lt;br /&gt;
* [[وحشی بافقی]]&lt;br /&gt;
* [[محمدحسین پاپلی یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[سید یحیی دارابی]]&lt;br /&gt;
* [[عبدالحسین آیتی]]&lt;br /&gt;
* [[علی‌اصغر دادبه]]&lt;br /&gt;
* [[محمدعلی ریاضی یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[علی‌محمد کاردان]]&lt;br /&gt;
* [[محمدصادق فاتح یزدی]]&lt;br /&gt;
* [[ابوالقاسم هرندی]]&lt;br /&gt;
* [[سید علی یزدی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مراکز علمی، آموزشی و فرهنگی ==&lt;br /&gt;
یزد از لحاظ میزان باسوادی در زمره شهرهای نخست کشور قرار دارد&amp;lt;ref name=&amp;quot;savad&amp;quot;&amp;gt;«[http://amar.org.ir/Portals/0/Files/abstract/1390/sarshomari90_nahaii.pdf ویژگی‌های استانها]» مرکز آمار ایران&amp;lt;/ref&amp;gt;. در سال ۹۲ برای نوزدهیمن سال پیاپی یزدی‌ها مقام نخست پذیرش در [[کنکور سراسری]] را بخود اختصاص دادند&amp;lt;ref name=&amp;quot;konkoor&amp;quot;&amp;gt;«[http://www.yazdfarda.com/news/1392/07/60491.html نوزدهمین صدرنشینی یزددرکنکور]» یزد فردا&amp;lt;/ref&amp;gt; و همیچنین یزد پس از [[تهران]] با سه نفر بیشترین رتبه تک رقمی در سال ۹۲ را دارا بوده است&amp;lt;ref name=&amp;quot;bartar&amp;quot;&amp;gt;«[http://forum.hammihan.com/thread83331.html نفرات برتر کنکور]» پایگاه اطلاع رسانی هم میهن&amp;lt;/ref&amp;gt;. در یزد مراکز علمی و آموزشی و فرهنگی بسیار وجود دارد که در زیر شماری از آنها آمد است:&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [http://yazduni.ac.ir دانشگاه یزد]&lt;br /&gt;
* [http://ystp.ac.ir پارك علم و فناوري یزد]&lt;br /&gt;
* [http://iauyazd.ac.ir دانشگاه آزاد یزد]&lt;br /&gt;
* [http://yazd.pnu.ac.ir دانشگاه پیام نور یزد]&lt;br /&gt;
* [[دانشگاه جامع علمی وکاربردی یزد]]&lt;br /&gt;
* [[دانشگاه علوم پزشکی شهید صدوقی یزد]]&lt;br /&gt;
* [http://yazdjdu.ac.ir دانشگاه علم و هنر یزد]&lt;br /&gt;
* [[دانشگاه پیراپزشکی یزد]]&lt;br /&gt;
* [[مرکز تربیت معلم یزد]]&lt;br /&gt;
* [http://srbiau.ac.ir دانشگاه علوم و تحقیقات واحد یزد]&lt;br /&gt;
* [[موزه علوم طبیعی یزد]]&lt;br /&gt;
* [[فرهنگسرای شهرداری]]&lt;br /&gt;
* [[مجتمع فرهنگی مهنور]]&lt;br /&gt;
* [[مجتمع فرهنگی امام علی]]&lt;br /&gt;
* [[موسسه آموزش عالی جواد یزد]]&lt;br /&gt;
* [[موسسه آموزش عالی ملاصدرا یزد]]&lt;br /&gt;
* [http://www.juast.ir مرکز علمی کاربردی جوادالائمه]]&lt;br /&gt;
* [[آموزشکده شهید صدوقی یزد]]&lt;br /&gt;
* [[آموزشکده امام علی (ع) یزد]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مراکز پزشکی ==&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[مرکز ناباروری یزد]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان مرتاض]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان سوانح سوختگی شهید صدوقی]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان فوق تخصصی زنان و زایمان ونازایی مادر]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان تخصصی قلب افشار]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان شهید رهنمون(فرخی)]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان شهید صدوقی]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان تامین اجتماعی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان گودرز]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان سیدالشهدا]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان مجیبیان]]&lt;br /&gt;
* [[مرکز پرتو درمانی و شیمی درمانی رمضان زاده]]&lt;br /&gt;
* [[مرکز پزشکی خاتم‌الانبیا]]&lt;br /&gt;
* [[کلینیک تخصصی و فوق تخصصی بقایی پور]]&lt;br /&gt;
* [[مرکز پزشکی هراتی]]&lt;br /&gt;
* [[بیمارستان شاه ولی]]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== مراکز نظامی ==&lt;br /&gt;
* پادگان آیت ا... خاتمی&lt;br /&gt;
* پادگان شهید صدوقی&lt;br /&gt;
* پادگان تیپ ۱۸ الغدیر&lt;br /&gt;
* صنایع دفاع یزد&lt;br /&gt;
* پادگان ولی عصر(ع)&lt;br /&gt;
* ستاد سپاه الغدیر استان یزد&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== پانویس ==&lt;br /&gt;
برگرفته از ویکی پدیای فارسی&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt;&lt;br /&gt;
== منابع ==&lt;br /&gt;
* |نویسنده=افشار، ایرج|کتاب=یادگارهای یزد|شهر=تهران|ناشر=انتشارات انجمن آثار ملی|سال=۱۳۵۴|شابک=&lt;br /&gt;
* نویسنده=خادم زاده، محمد حسن|کتاب=محلات تاریخی شهر یزد|شهر=تهران|ناشر=سبحان نور، پایگاه میراث فرهنگی شهر تاریخی یزد|سال=۱۳۸۶|شابک=ISBN 964-2745-20-3&lt;br /&gt;
* نویسنده=قریشی زاده، سید عبدالرضا|کتاب=یزد گوهر کویر|شهر=تهران|ناشر=فرهنگسرای میردشتی|سال=۱۳۸۷|شابک=ISBN 964-2708-11-6&lt;br /&gt;
* |نویسنده=استانداری یزد|کتاب=یزد نگین کویر (مجموعه اطلاعات و راهنمای سیاحتی یزد)|شهر=یزد|ناشر=اداره کل فرهنگ و ارشاد اسلامی استان یزد|سال=۱۳۷۵|شابک=&lt;br /&gt;
* |نویسنده=اداره کل میراث فرهنگی، گردشگری و صنایع دستی یزد|کتاب=یزد پردیس کویر (راهنمای گردشگری استان یزد)|شهر=تهران|ناشر=یزدا|سال=۱۳۸۹|شابک=ISBN 600-165-028-4&lt;br /&gt;
* نویسنده=سید علی زاده، سید احمد|کتاب=دیوارهای بلند کاه گلی|شهر=تهران|ناشر=انتشارات  بقیه العتره |سال=۱۳۹۱|شابک=978-964-1620-67-&lt;br /&gt;
* نویسنده=مسرت، حسین|کتاب=یزد، یادگار تاریخ|شهر=یزد|ناشر=انتشارات انجمن کتابخانه‌های عمومی یزد |سال=۱۳۷۷|شابک=978964-6541-04-6&lt;br /&gt;
* نویسنده=قهرمانی، ابوالفتح و مسعود سپهر|کتاب=یزد، نگین کویر مجموعه اطلاعات و راهنمای سیاحتی، جلد اول|شهر=یزد|ناشر=انتشارات انجمن کتابخانه های عمومی یزد|سال=۱۳۷۵&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== پیوند به بیرون ==&lt;br /&gt;
* [http://www.ptewiki.com/wiki/index.php5?title=یزد جغرافیای تاریخی جهان اسلام]&lt;br /&gt;
* [http://ystp.ac.ir/ پارك علم و فناوري یزد]&lt;br /&gt;
* [http://ssu.ac.ir/ دانشگاه علوم پزشکی و خدمات بهداشتی و درمانی صدوقی یزد]&lt;br /&gt;
* [http://yazdchto.ir/ سازمان میراث فرهنگی، صنایع دستی و گردشگری استان یزد]&lt;br /&gt;
* [http://www.ghoolabad.com دانش نامه مردمی یزد]&lt;br /&gt;
* [http://yazd.ir شهرداری یزد]&lt;br /&gt;
* [http://yazd.com/ پایگاه یزد]&lt;br /&gt;
* [http://www.fallingrain.com/world/IR/31/Yazd.html مختصات]&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:یزد]]&lt;br /&gt;
[[رده:شهرستان یزد]]&lt;br /&gt;
[[رده:شهرهای استان یزد]]&lt;br /&gt;
[[رده:شهرهای ایران]]&lt;br /&gt;
[[رده:مراکز استان‌های ایران]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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		<title>ابراهیم اردوبادی</title>
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		<updated>2015-11-11T03:51:20Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;Goodosuser: هند&lt;/p&gt;
&lt;hr /&gt;
&lt;div&gt;'''ابراهیم اردوبادی''' شاعر پارسی گوی سدهٔ یازدهم قمری، سدهٔ هفدهم میلادی و از سادات [[آذربایجان]] و داماد ریاضی دان معروف آن دوران، [[محمدباقر یزدی]] بود. دیوان مستقلی از اردوبادی در دست نیست. اما در تذکره‌ها چند [[رباعی]] به نام وی با مضامین عرفانی وجود دارد.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== زندگی ==&lt;br /&gt;
ابراهیم اردوبادی در میانهٔ عمر حدود [[۱۰۴۰ قمری]]، [[۱۶۳۰ میلادی]] به [[هند|هندوستان]] رفت و به دربار [[شاه جهان]] راه یافت و عهده دار تربیت و تدریس فرزندان جعفرخان وزیر شاه جهان گردید. وی پس از چندی به مال و ثروت فراوان رسید اما پس از مدتی دل از تعلقات دنیایی برید و به صوفیگری روی آورد. اردوبادی به [[ایران]] بازگشت و در [[اصفهان]] مسکن گزید.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
== منابع ==&lt;br /&gt;
* [http://www.cgie.org.ir/shavad.asp?id=123&amp;amp;avaid=632| ابراهیم اردو بادی]، [[دایرة المعارف بزرگ اسلامی]]، مقاله ۶۳۲، بازدید در ۱۱ مهر ۱۳۹۱.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{افراد-خرد}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{ترتیب:اردوبادی، ابراهیم}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
[[رده:اهالی آذربایجان]]&lt;/div&gt;</summary>
		<author><name>Goodosuser</name></author>
		
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